शेख़ हसीना का बांग्लादेश लौटने का वादा, मोहम्मद यूनुस ने दिया जवाब

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भारत और बांग्लादेश के बीच उतार-चढ़ाव भरे रिश्तों के बीच एक सबसे अहम मुद्दा शेख़ हसीना को लेकर बना हुआ है. बीते साल पांच अगस्त को वो बांग्लादेश से भारत आ गई थीं और तब से वो यहीं हैं.
शेख़ हसीना भारत में रहकर लगातार बयान दे रही हैं जिसको लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार आपत्ति जता चुकी है. बांग्लादेश सरकार भारत से मांग कर चुकी है कि शेख़ हसीना को उन्हें सौंपा जाए.
हालांकि अब एक नए बयान के बाद दोनों देशों के बीच फिर से बयानबाज़ी होने के कयास लगाए जा रहे हैं.
शेख़ हसीना ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर एक तल्ख़ टिप्पणी की है, जिसको लेकर अंतरिम सरकार को भी बयान जारी करना पड़ा है.

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इस टिप्पणी में शेख़ हसीना ने मोहम्मद यूनुस को 'लुटेरा' और 'आतंकवादियों को छूट' और 'अराजकता' को बढ़ावा देने वाला बताया है.
शेख़ हसीना ने क्या कहा?

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बांग्लादेश में बीते साल जुलाई में आरक्षण के ख़िलाफ़ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शेख़ हसीना को सत्ता से हटाने के बाद ही ख़त्म हुआ जिसके बाद एक अंतरिम सरकार अस्तित्व में आई.
जुलाई में विरोध प्रदर्शनों के दौरान चार पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी. इन पुलिसकर्मियों के परिजनों से सोमवार को शेख़ हसीना ने डिजिटल कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए बात की.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, बातचीत के दौरान शेख़ हसीना ने कहा कि "मैं वापस लौटूंगी और हमारे पुलिसकर्मियों की मौत का बदला लूंगी."
16 साल तक बांग्लादेश की सत्ता में रहीं शेख़ हसीना ने मोहम्मद यूनुस पर आरोप लगाया कि "उन्होंने (मोहम्मद यूनुस) सभी जांच कमेटियों को ख़त्म कर दिया है और आतंकियों को लोगों की हत्या के लिए खुला छोड़ दिया है. वे बांग्लादेश को तबाह कर रहे हैं."
शेख़ हसीना ने दावा किया है कि जब उनकी सरकार गिरा दी गई, तो वो मौत से बाल-बाल बची थीं और ईश्वर उन्हें निश्चित रूप से कुछ अच्छा करने के लिए ज़िंदा रखना चाहता है.
उन्होंने कहा, "मैं वापस लौटूंगी और सभी के लिए इंसाफ़ सुनिश्चित करूंगी."
शेख़ हसीना ने सीधे मोहम्मद यूनुस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश में हुई 'हत्याएं मुझे सत्ता से बाहर करने की उनकी सोची-समझी साज़िश का हिस्सा थीं.'
शेख़ हसीना की इन टिप्पणियों के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस सेक्रेटरी शफ़ीक़ुल आलम ने बयान दिया है.
अंतरिम सरकार क्या बोली?

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने फिर से दोहराया है कि शेख़ हसीना को भारत से लाना उसकी प्राथमिकता है.
मंगलवार को शफ़ीक़ुल आलम ने मीडिया ब्रीफ़िंग में कहा कि ढाका हसीना के प्रत्यर्पण के लिए कोशिशें करता रहेगा ताकि उन पर क़ानूनी मामला चलाया जाए.
इसके अलावा शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग पर भी बांग्लादेश में संकट के बादल मंडरा रहे हैं. आलम ने कहा है कि ये बांग्लादेश के लोगों और राजनीतिक दलों को तय करना है कि देश के राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी को रहना चाहिए या नहीं.
इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जो कथित तौर पर हत्याओं, लोगों को ग़ायब किए जाने और दूसरे अपराधों में शामिल रहे हैं उन्हें ज़रूर क़ानून का सामना करना होगा.
ऐसा पहली बार नहीं है जब शेख़ हसीना को लेकर बांग्लादेश की ओर से ऐसा बयान आया हो. हाल ही में मस्कट में इंडियन ओशियन कॉन्फ़्रेंस से इतर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के सलाहकार तौहीद हुसैन ने अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू से बातचीत की थी.
इस दौरान उन्होंने कहा था कि उनके (हसीना) ख़िलाफ़ मामले हैं और भारत से उन्हें भेजने के लिए कहा गया है ताकि वो क़ानूनी मामलों का सामना करें जब भारत सरकार ये नहीं करती है तो उम्मीद करते हैं कि उन पर कुछ पाबंदियां रहेंगी ताकि वो भड़काऊ और झूठे बयान न दें जो लोगों की भावनाओं को भड़का देती हैं.
उन्होंने कहा, "बीते 15 सालों से वो सत्ता में थीं और उनकी कार्रवाइयों से लोग नाराज़ हैं, वो ये देखना चाहते हैं कि वो (हसीना) बांग्लादेश में हालात को अस्थिर न करें."
बांग्लादेश क्या आधिकारिक तौर पर शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण का निवेदन भारत से करेगा? इस पर तौहीद हुसैन ने कह कि 'हमारे बीच प्रत्यर्पण संधि है और हमने क़ानूनी मामलों का सामना करने के लिए कई अभियुक्तों को भारत को सौंपा है. मुझे लगता है कि भारत क़ानूनी कार्रवाई के लिए उन्हें बांग्लादेश को सौंपेगा.'
वहीं बांग्लादेश की अंतरिम सरकार लगातार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं.
बीते सप्ताह जारी की गई इस रिपोर्ट को लेकर प्रेस सेक्रेटरी शफ़ीक़ुल आलम ने दावा किया कि ये रिपोर्ट हसीना के कार्यकाल में मानवता के ख़िलाफ़ हुए अपराधों के बारे में बताती है.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट क्या कहती है?

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ओएचसीएचआर की रिपोर्ट का शीर्षक 'ह्यूमन राइट्स वॉयलेशन एंड एब्यूसेस रिलेटेड टू द प्रोटेस्ट्स ऑफ़ जुलाई एंड अगस्त 2024 इन बांग्लादेश' है.
रिपोर्ट बताती है कि 1 जुलाई से 15 अगस्त के बीच हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान तक़रीबन 1400 लोगों की मौत हुई थी. हसीना के सत्ता से हटने के बाद अवामी लीग के समर्थकों और हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमलों के मामले सामने आए थे.
इसमें बताया गया है कि हसीना की अवामी लीग सरकार ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी और इसके परिणामस्वरूप 'हिरासत में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी.'
इस अव्यवस्था के दौरान अफ़सरों समेत 44 पुलिसकर्मियों की जान गई. साथ ही अवामी लीग की सरकार के दौरान और उसके गिरने के बाद देश के 639 पुलिस स्टेशनों में से 450 पर भीड़ ने हमले किए थे या इन्हें तबाह कर दिया था.
ये रिपोर्ट ये भी बताती है कि 'शेख़ हसीना की सरकार गिरने के बाद से बदले की भावना से हिंसा में बढ़ोतरी हुई है.'
इस दौरान अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा के भी कई मामले सामने आए थे जिसको लेकर भारत ने बांग्लादेश से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की अपील की थी.
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के सवाल को लेकर बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने द हिंदू को जवाब दिया था. इसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का भी हवाला दिया था.
तौहीद हुसैन ने कहा था कि बांग्लादेश में रहने वाला अल्पसंख्यक समुदाय या हिंदुओं के अधिकार मुसलमान या बहुसंख्यक समुदाय जैसे ही हैं, दोनों समान अधिकारों वाले समान नागरिक हैं, और उन्हें सुरक्षा का भी समान अधिकार है.
उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से पाँच अगस्त (बीते साल जब शेख़ हसीना ने इस्तीफ़ा दिया) के बाद इस मुद्दे को लेकर भारतीय मीडिया में एक अजीबोगरीब उन्माद फैला जो कि अधिकतर झूठ पर आधारित था. संयुक्त राष्ट्र की जांच देखिए जो हाल ही में प्रकाशित हुई है जो कहती है (हिंसा में अंतरिम सरकार शामिल नहीं थी). वे हमारे निवेदन पर आए थे क्योंकि हम हालात की एक तटस्थ जांच चाहते थे."
शेख़ हसीना के हालिया बयान के बाद अब तक भारत की ओर से कोई बयान नहीं आया है. हालांकि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस पहले ही कह चुके हैं कि भारत शेख़ हसीना से चुप रहने के लिए कहे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित















