भारत के साथ रिश्तों में गिरावट के बीच चीन से गहराती बांग्लादेश की दोस्ती

चीन और बांग्लादेश

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार चीन के दौरे पर हैं

चीन ने बांग्लादेश को दिए कर्ज़ को चुकाने की अवधि 20 साल से बढ़ाकर 30 साल करने पर सहमति दे दी है.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन 20 से 24 जनवरी के बीच चीन के दौरे पर हैं. उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाक़ात के दौरान कर्ज़ को लेकर बात की.

साथ ही दोनों देशों ने चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) योजना के लिए भी प्रतिबद्धता जताई.

बांग्लादेश में बीते साल राजनीतिक उथल-पुथल के बाद बनी अंतरिम सरकार की चीन से नज़दीकियों के संकेत मिलते रहे हैं.

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कर्ज़ चुकाने के लिए बांग्लादेश को मोहलत

बीते साल शेख़ हसीना की सरकार गिरने के बाद नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस को बनाया गया बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का प्रमुख

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इस साल चीन और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों को पचास साल पूरे होने जा रहे हैं.

चीन के दौरे पर जाने से पहले विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा था कि बांग्लादेश के चीन के साथ आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते अहम हैं.

बांग्लादेशी अख़बार ढाका ट्रिब्यून की ख़बर के अनुसार, कर्ज़ चुकाने में बांग्लादेश के अच्छे रिकॉर्ड को देखते हुए चीन ने कर्ज़ चुकाने के लिया दिया गया समय बढ़ाने पर 'सैद्धांतिक मंज़ूरी' दी है.

अख़बार के मुताबिक तौहीद हुसैन ने चीनी विदेश मंत्री के साथ बैठक के दौरान तीन बातें रखी थीं.

उन्होंने चीन से कर्ज़ पर ब्याज 2-3 फ़ीसदी से घटाकर एक फ़ीसद करने, कमिटमेंट फ़ी को माफ़ करने और कर्ज़ चुकाने की अवधि भी 20 साल से बढ़ाकर 30 साल करने का निवेदन किया था.

बैठक के दौरान वांग यी ने कहा कि चीन की नेबरहुड डिप्लोमेसी में बांग्लादेश का महत्वपूर्ण स्थान है.

इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान बांग्लादेश और चीन ने 'व्यापक रणनीतिक सहकारी साझेदारी' के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी ज़ाहिर की.

पिछले साल 5 अगस्त को व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद उस वक्त की बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं. उसके बाद बनी अंतरिम सरकार मोहम्मद यूनुस चला रहे हैं.

जब से यूनुस और सलाहकारों की उनकी टीम सत्ता में आई है बांग्लादेश और भारत के रिश्ते तनावपूर्ण होते गए हैं.

इसके उलट बांग्लादेश पाकिस्तान और चीन के साथ अपने संबंधों को लगातार सुधारने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है.

चीन से करीबी

बीते साल सरकार गिरने से कुछ दिन पहले ही शेख़ हसीना ने चीन का दौरा किया था और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की थी

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बांग्लादेश में राजनीतिक संकट के बीच ही चीन ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी थी.

उस दौरान शेख़ हसीना की सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाने वाले छात्र नेताओं और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से चीनी नुमाइंदे बैठकें कर रहे थे.

तौहीद हुसैन ने भी बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार बनने के बाद पहला दौरा चीन का किया है.

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इसका ज़िक्र भी किया.

चाइना डेली की ख़बर के अनुसार वांग यी ने कहा, "ये सच है कि हुसैन ने पद संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चीन को चुना. ये दिखाता है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार चीन के साथ संबंधों को कितना महत्व देती है."

वांग यी ने कहा, "चीन ने हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ कूटनीति में बांग्लादेश को प्राथमिकता दी है सभी बांग्लादेशी लोगों के प्रति वह अच्छे पड़ोसी वाली नीति पर चलता है."

बांग्लादेशी अख़बारद डेली स्टारके मुताबिक, तौहीद ने बांग्लादेश की आज़ादी, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा में मदद के लिए चीन का शुक्रिया अदा किया.

'भारत का नुकसान चीन का फ़ायदा'

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ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट में ये कहा है कि बांग्लादेश चीन के साथ करीबी आर्थिक रिश्ते बनाने पर ज़ोर दे रहा है, जबकि दूसरी ओर भारत से उसके संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है.

अर्थशास्त्री और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के लिए अंतरराष्ट्रीय मामलों पर विशेष दूत लुत्फ़ी सिद्दीक़ी ने ब्लूमबर्ग टीवी के साथ एक इंटरव्यू में कहा, "हम चीन और बांग्लादेश के बीच संबंधों को और बढ़ते देखेंगे."

उन्होंने कहा जो देश ऐतिहासिक तौर पर भारत का करीबी रहा है वो अब पूर्व एशियाई देशों के प्रति उत्साहित नज़र आ रहा है.

सिद्दीकी ने कहा, "हमारे कई देशों से घनिष्ठ संबंध होंगे. बहुपक्षीय होना आज के दौर में ज़रूरी है."

उन्होंने उम्मीद जताई कि "बांग्लादेश में चीन से और अधिक निवेश होगा."

सिद्दीक़ी ने ये टिप्पणी ऐसे वक्त की है जब भारत और बांग्लादेश के बीच कई मुद्दों पर असहमति देखी जा रही है. दोनों देशों के बीच शेख़ हसीना के कार्यकाल जैसी गर्मजोशी नहीं दिख रही.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार चाहती है कि भारत शेख़ हसीना को वापस देश भेजे. वहीं, भारत ने बांग्लादेश के सामने हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है.

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बीते महीने बांग्लादेश का दौरा भी किया, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव में कमी नहीं देखी गई.

दोनों देशों के बीच ताज़ा विवाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ज़ीरो लाइन के पास कंटीले तारों की बाड़ लगाने के मुद्दे पर पैदा हुआ है.

रक्षा विशेषज्ञ डेरेक जे. ग्रॉसमैन ने चीन की ओर बांग्लादेश को दी गई ताज़ा रियायतों को भारत से जोड़ा है.

उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, "भारत का नुक़सान चीन का फ़ायदा है."

बांग्लादेश पर चीन का कर्ज़ और भारत

शेख़ हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कई जगह प्रदर्शन हुए

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बांग्लादेश में बीते साल अंतरिम सरकार के गठन के बाद तौहीद हुसैन का चीन दौरा देश की विदेश नीति में बदलाव की झलक दिखाता है.

इससे पहले बांग्लादेश के हर विदेश मंत्री का पहला दौरा भारत के लिए होता था.

बांग्लादेश में आई अस्थिरता के कारण भारत के निर्यात में गिरावट आई है. भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के डेटा के अनुसार, बीते साल अगस्त महीने में अगस्त 2023 की तुलना में बांग्लादेश को भारत का निर्यात 28 फ़ीसदी गिरा था.

लेकिन चीन के साथ बांग्लादेश की नज़दीकियां शेख़ हसीना के कार्यकाल में ही बढ़नी शुरू हो गई थी.

द बिज़नेस स्टैंडर्ड बांग्लादेश ने एक रिपोर्ट में ढाका यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को पढ़ाने वाली प्रोफ़ेसर डॉक्टर लैलुफ़र यास्मीन के हवाले से लिखा था, "चीन बांग्लादेश का नया दोस्त नहीं है. बल्कि चीन साल 2006 से बांग्लादेश का बड़ा व्यापारिक साझीदार रहा है."

रक्षित शेट्टी बेंगलुरू के तक्षशीला इंस्टीट्यूशन में रिसर्च एनालिस्ट हैं.

उन्होंने बीते साल सितंबर में अमेरिकी थिंक टैंक के ऑनलाइन पॉलिसी प्लेटफॉर्म साउथ एशियन वॉइसेज़ के लिए एक लेख लिखा था.

उसमें उन्होंने कहा था कि भारत को बांग्लादेश के नए राजनीतिक परिदृश्य में चीन की तेज़ी से बढ़ती गतिविधियों की बराबरी करनी होगी.

रक्षित शेट्टी के मुताबिक,चीन ने साल 2016 से 2022 यानी शेख़ हसीना के पीएम रहते हुए ही बांग्लादेश में बड़ा निवेश किया है. चीनी कंपनियों ने बांग्लादेश में 26 अरब डॉलर का निवेश किया है. बांग्लादेश में चीन के निवेश वाली करीब 700 कंपनियों ने 550,000 नौकरियां पैदा की हैं.

बांग्लादेश चीन से सालाना 21 अरब डॉलर से अधिक का सामान आयात करता है. साथ ही वह चीनी हथियारों का भी सबसे बड़ा खरीदार है.

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के अनुसार बांग्लादेश ने साल 2010 से 2020 के बीच विदेशों से जो भी सैन्य साजोसामान आयात किया, उसका 73 फ़ीसदी हिस्सा चीन से आया था.

बांग्लादेश पर चीन का 6 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज़ भी है.

ढाका के एक अख़बार द डेली स्टार में बांग्लादेश में चीन के राजदूत आयो वेन ने बीते एक अक्तूबर को लिखा कि अंतरिम सरकार के दौरान चीनी कंपनियों ने 8.5 करोड़ डॉलर का निवेश किया है.

चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के लिए भी बांग्लादेश अहम है. बीते 10 सालों से अधिक समय में चीन ने बीआरआई के तहत परियोजनाओं के लिए करीब 4.45 अरब डॉलर बांग्लादेश में लगाए हैं.

भारत-बांग्लादेश सीमा पर गश्त करते बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स के जवान

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भारत और बांग्लादेश का कारोबार

बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है और भारत एशिया में बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, बांग्लादेश ने साल 2023-24 के बीच भारत को 1.97 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था. वहीं इस वित्त वर्ष में दोनों के बीच 14.01 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार हुआ.

भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग तेज़ी से बढ़ा है. बीते साल विदेश मंत्रालय ने बताया था कि बांग्लादेश भारत से 1160 मेगावॉट बिजली खरीदता है.

हालांकि, बीते साल रॉयटर्स ने बताया था कि ऊर्जा कंपनियां पीटीसी इंडिया और एसईआईएल एनर्जी इंडिया ने बांग्लादेश को दी बिजली का बकाया चुकाने के संबंध में बांग्लादेश पावर डेवलेपमेंट बोर्ड को चिट्ठी भी लिखी थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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