बीजेपी ने विधायक बने अपने 10 सांसदों से दिलवाया इस्तीफ़ा, इसके पीछे का खेल क्या है?- प्रेस रिव्यू

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव लड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जिन सांसदों को कहा था, उनमें से 10 सांसदों ने चुनाव जीतने के बाद अपनी संसदीय सीटों से इस्तीफ़ा दे दिया है और अपने-अपने राज्य लौट आए हैं. 

इस लिस्ट में कैबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रह्लाद सिंह पटेल भी शामिल है. 

द टेलीग्राफ अखबार ने इस ख़बर को अपने यहाँ मुख्य रूप से जगह दी है. अख़बार का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी का यह दांव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के लिए सत्ता पर पकड़ को और मज़बूत करने का काम करेगा.

साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी मज़बूत रही है.

यह वह वो समय था जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राजस्थान में वसुंधरा राजे, छत्तीसगढ़ में रमन सिंह और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के कुर्सी पर थे.

सोमवार यानी तीन दिसंबर को नतीजे घोषित हुए थे, लेकिन अब तक भाजपा तीन राज्यों में मुख्यमंत्री के नाम फाइनल नहीं कर पाई है. 

बीजेपी का 'गुजरात मॉडल'

अख़बार का कहना है तीनों राज्यों में नए नाम को तरजीह दी जा सकती है, जिससे नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पकड़ मज़बूत रहेगी. 

ख़बर में एक बीजेपी नेता के हवाले से कहा गया है कि तीनों राज्य में गुजरात मॉडल की तरह सत्ता चलाई जा सकती है, जिससे पार्टी के दो शीर्ष नेता राज्य में सरकार और पार्टी का काम आसानी से अपने हाथ में ले सकते हैं. 

तीन राज्यों में चुनाव जीतने वाले 10 सांसदों ने इस्तीफ़ा देने से पहले पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात की, जिसके बाद ख़ुद नड्डा सांसदों को आशीर्वाद के लिए पीएम मोदी के पास ले गए और उसके बाद ही सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को अपना इस्तीफा दिया. इस दौरान 10 सांसदों ने पीएम मोदी के साथ एक तस्वीर भी ली. 

अख़बार का कहना है कि नरेंद्र तोमर और प्रह्लाद पटेल अपने मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद निर्वाचित विधायकों के रूप में अपने कार्यभार का इंतज़ार करेंगे. 

ख़बर के मुताबिक़ ये दो चेहरे ऐसे चेहरे हैं, जो मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की जगह ले सकते हैं, हालांकि यह कोई नहीं जानता कि राज्य में मुख्यमंत्री कौन बन रहा है, यहां तक की शिवराज सिंह चौहान भी इंतज़ार ही कर रहे हैं. 

अख़बार के मुताबिक़ सांसदों का इस्तीफा लेने के बाद पार्टी उन्हें राज्य में बड़ी ज़िम्मेदारी दे सकती है और पुराने चेहरों को विदा कर सकती है. 

पार्टी नेताओं का कहना है कि सांसदों का अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पीएम मोदी के कैबिनेट में 2024 चुनाव से पहले फेरबदल की गुंजाइश भी बढ़ सकती है. 

भाजपा नेताओं को कहना है कि बुधवार को इस्तीफा देने वाले कुछ सांसदों को भाग्य खुल सकता है और वे ख़ुद को राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर उभरता हुआ देख सकते हैं, जबकि कुछ सांसदों को राज्य में मंत्री पद पर तो कुछ को महज विधायक रहकर ही संतोष करना पड़ सकता है. 

सीएम की रेस में शामिल नेता क्या कह रहे हैं?

मौजूदा शासन में पार्टी से किनारे कर दिए गए एक भाजपा नेता ने अख़बार को बताया कि इनमें से कई नेताओं को यह कहते हुए सुना गया है कि वे पार्टी के वफ़ादार सिपाही हैं और पार्टी उन्हें जो भूमिका सौंपेगी, वे उसमें काम करेंगे. 

मध्य प्रदेश की नरसिंहपुर सीट से निर्वाचित राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने बुधवार को इसी तरह की बात कही. 

उन्होंने कहा, “अपनी पार्टी को धन्यवाद देता हूँ. पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा जी से मुलाक़ात के बाद मैंने पीएम मोदी जी का आशीर्वाद लिया और फिर लोकसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफ़ा दे दिया. कुछ समय में मैं मंत्री पद से भी इस्तीफ़ा दे दूंगा.”

राजस्थान के राजसमंद से सांसद दिया कुमारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्होंने संगठन के आदेश पर इस्तीफा दिया है. 

उन्होंने लिखा, “विद्याधर नगर से विधायक चुने जाने के बाद आज नियमानुसार संसद की सदस्यता से इस्तीफ़ा माननीय अध्यक्ष श्री ओम बिड़ला जी को सौंपा. देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में राजसमंद की जनता की सेवा करना मेरा सौभाग्य रहा. मुझे विश्वास है कि राजसमंद की जनता का स्नेह और आशीर्वाद आगे भी अनवरत जारी रहेगा.”

अख़बार के मुताबिक़ उन्हें राजस्थान में मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे देखा जा रहा है. 

भाजपा ने हाल के राज्य चुनावों में लड़ने के लिए कुल 21 सांसदों को मैदान में उतारा था, जिसमें से 12 सांसदों ने जीत दर्ज की लेकिन 9 हार गए. 

दिल्ली में जब 10 सांसद इस्तीफा देने पहुंचे तो उनमें राजस्थान के अलवर से बाबा बालकनाथ और छत्तीसगढ़ के सरगुजा से रेणुका सिंह नहीं थे. ये नेता गुरुवार, 7 दिसंबर को संसद पद से अपना इस्तीफा दे सकते हैं. 

'मोदी की गारंटी'

अख़बार का कहना है कि तीन राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, ‘मोदी की गांरटी’ के नारे पर जनादेश मांगा था और शायद यही वजह है कि भाजपा, इन तीन राज्यों में पुराने चेहरों को हटाकर गुजरात मॉडल लागू करना चाहती है. 

पिछले साल गुजरात चुनाव से पहले मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उनके मंत्रियों को एक झटके में बाहर कर दिया गया था और उनकी जगह बिना किसी विरोध के दूसरे नेताओं को लाया गया था, जिसके बाद चुनावों में बीजेपी ने राज्य में लगातार छठी बार रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी.

इस जीत का श्रेय राज्य में इस बदलाव को दिया गया. हालांकि पीएम मोदी दूसरे राज्यों में इस तरह का मॉडल लागू करने में कामयाब नहीं हो पाए हैं. 

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह और राजस्थान में वसुंधरा राजे जैसे पुराने नेताओं ने मज़बूती से अपनी पकड़ बनाए रखी और अपनी जगह किसी को आने नहीं दिया. 

इस साल की शुरुआत में कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा और हिमाचल प्रदेश में प्रेम सिंह धूमल को हटाकर जब बीजेपी ने राज्य में पीएम मोदी के नाम पर वोट मांगा तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा. 

पार्टी नेताओं का कहना है कि तीन राज्यों में मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फ़ैसला तो पीएम मोदी के नेतृत्व में दिल्ली ही करेगा.

देखने वाली बात यह होगी कि क्या अटल-आडवाणी युग की आख़िरी तिकड़ी, शिवराज-वसुंधरा-रमन सिंह कुर्सी हासिल कर पाएंगे या नहीं?

वसुंधरा को दिल्ली से बुलावा

राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए बीजेपी की पसंद को लेकर चल रहे सस्पेंस के बीच बुधवार देर रात वसुंधरा राजे दिल्ली पहुंची हैं.

इस खबर को हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने यहाँ जगह दी है. अखबार का कहना है कि एक तरफ़ तेलंगाना में कांग्रेस के रेवंत रेड्डी गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, वहीं भाजपा ने अभी तक राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए मुख्यमंत्रियों की घोषणा नहीं की है.

ख़बर के मुताबिक़ भाजपा गुरुवार, सात दिसंबर को दिल्ली में एक अहम बैठक करने वाली है, जिसमें नामों पर मुहर लग सकती है.

अख़बार ने ख़बरों का हवाला देते हुए लिखा है कि भाजपा नए मुख्यमंत्री चेहरो को चुनना चाहती है.

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और सीएम पद की प्रबल दावेदारों में से एक वसुंधरा राजे, बुधवार रात जब दिल्ली पहुंचीं, तो उन्होंने बैठक या मुख्यमंत्री को लेकर किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया है.

एयरपोर्ट के बाहर वसुंधरा राजे ने कहा, “मैं अपनी बहू से मिलने दिल्ली आई हूं.”

राजस्थान में नतीजे घोषित होने के बाद से भाजपा के बीस से ज्यादा विधायक वसुंधरा राजे के घर मुलाकात करने पहुंच गए थे.

विधायकों का कहना था कि यह कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं है लेकिन वे चाहते हैं कि वसुंधरा राजे राज्य की मुख्यमंत्री बने.

नरम पड़े नीतीश कुमार, ममता बनर्जी

हाल के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर कटाक्ष करने और विपक्षी गठबंधन इंडिया के नेतृत्व के लिए अपने-अपने दावे करने के एक दिन बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, नरमी के संकेत देती हुईं नजर आ रही हैं.

इस खबर को इंडिया एक्सप्रेस अखबार ने अपने यहां जगह दी है.

बुधवार, 6 दिसंबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी गठबंधन इंडिया की बैठक बुलाई थी, लेकिन दोनों नेताओं ने बैठक में शामिल न होने की घोषणा की जिसके बाद खड़गे को यह बैठक स्थगित करनी पड़ी.

बुधवार को दोनों नेताओं ने कहा कि गठबंधन की अगली बैठक में शामिल होंगे.

विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद नीतीश कुमार ने कांग्रेस पर सहयोगियों को साथ न लेकर चलने का आरोप लगाया था, वहीं ममता बनर्जी ने कहा था कि कांग्रेस की हार, लोगों की हार की बजाय पार्टी की हार है और कांग्रेस इस हार से सबक

बिहार के मुख्यमंत्री ने बुधवार को पटना में कहा कि पिछले कुछ दिन से उनके बारे में कई बातें कही गई हैं, लेकिन मैं साफ कर दूं कि मेरी तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी जिसकी वजह से मैंने बैठक में हिस्सा न लेने की बात कही थी और अब मैं ठीक हूं, अगली बैठक में हिस्सा लूंगा.

उन्होंने कहा कि अगली बैठक में वे गठबंधन के नेताओं से सीट शेयरिंग पर तेजी से काम करने के लिए कहेंगे क्योंकि लोकसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है.

नीतीश कुमार ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुई कांग्रेस की हार को भी तवज्जो नहीं दी, बल्कि उन्होंने कहा कि पार्टी ने बहुत बुरा प्रदर्शन नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस को अच्छे वोट मिले हैं और चुनावों में जीत-हार होती रहती है.

वहीं ममता बनर्जी ने कहा कि सोमवार को राहुल गांधी ने उन्हें फोन किया था और उन्होंने राहुल गांधी को बताया कि किसी ने भी उन्हें गठबंधन की बैठक को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 6 दिसंबर को बुलाई थी.

उत्तर बंगाल के दौरे पर जाने से पहले ममता बनर्जी ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कभी-कभी मुख्यमंत्री व्यस्त रहते हैं और बैठक से कम से कम 7 या 10 दिन पहले बताना चाहिए लेकिन वे अगली बैठक में जल्द मिलेंगी.

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