You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
इंडिया गठबंधन की वे चुनौतियां, जिनसे बीजेपी को मिलती है राहत
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता को कड़ी टक्कर देने के मक़सद से गठित हुए विपक्षी गठबंधन ‘इडिया’ की गुरुवार को मुंबई में बैठक शुरू होगी और यह शुक्रवार तक चलेगी.
पटना और बेंगलुरु के बाद ये इस गठबंधन की यह तीसरी बैठक है.
बैठक से पहले एनसीपी नेता शरद पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेस में बताया है कि इस बैठक में 28 राजनीतिक दलों के 63 नेता शामिल होंगे. बेंगलुरु में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में 26 दल शामिल होंगे.
दो नए दल कौन से हैं, इस बारे में अभी जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी अभी किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं.
बैठक के एजेंडे के बारे में अभी स्पष्ट नहीं किया गया है. हालांकि ये कयास लगाये जा रहे हैं कि इस बैठक में गठबंधन के संयोजक के नाम की घोषणा कर दी जाएगी और गठबंधन का एक लोगो भी जारी किया जाएगा.
इस गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती सीटों का बँटवारा होगी. इस बैठक में सीटों के बँटवारे पर चर्चा होगी या नहीं इसे लेकर कई तरह के कयास लगाये जा रहे हैं. हालांकि बैठक से पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि चुनाव आ रहे हैं, अगर उम्मीदवार तय करने हैं तो हमें इस पर भी बैठकर चर्चा करनी होगी.''
गठबंधन का समन्वयक कौन होगा?
पत्रकारों से बातचीत में एक सवाल के जवाब पर लालू प्रसाद यादव ने कहा, ''इस बैठक में गठबंधन के संयोजक के विकल्प पर चर्चा होगी.”
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री कहते हैं, “मुंबई में आज से हो रही बैठक में इंडिया गठबंधन का फ्रेमवर्क तैयार होगा. ये तय किया जाएगा कि उसका समन्वयक (कंवीनर) कौन होगा, कितनी समितियां बनेंगी, लोगो क्या होगा, इन चीज़ों को तय किया जाएगा. जहाँ तक सीट शेयरिंग का सवाल है, इस तरह की चर्चा मुझे नहीं लगता अभी इस बैठक में होगी.”
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने बीबीसी से कहा, “हमारा ये मानना है कि 2024 के चुनाव की लड़ाई, वो राजनीति से आगे बढ़कर देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है. मुंबई बैठक में इस लड़ाई का फ्रेमवर्क तैयार होगा. मुझे नहीं लगता सीटों का बँटवारा अभी मुद्दा है.”
पत्रकार हेमंत अत्री कहते हैं, “जहाँ तक हमें पता चला है, इस बैठक में सीटों के बँटवारे पर चर्चा नहीं होगी बल्कि सिर्फ़ एक ही एजेंडा है कि विपक्ष को मिलकर लड़ना है. इसके अलावा जो छोटे-छोटे मुद्दे हैं, जैसे आम आदमी पार्टी गठबंधन में शामिल है और दिल्ली और पंजाब में जिस तरह की बयानबाज़ी होती है, या महाराष्ट्र में शरद पवार को लेकर मतभेद उभर कर आ रहे हैं, उन पर चर्चा होगी. जहाँ तक हमारा आकलन है, सीटों के बँटवारे पर ना इस बैठक में चर्चा होगी और ना ही अगली एक-दो बैठकों में होगी.’
सीटों का बँटवारा असली चुनौती
एनसीपी नेता शरद पवार इंडिया गठबंधन में तो शामिल हैं लेकिन बीजेपी के साथ गए अपने भतीजे अजित पवार से अपने संबंधों को लेकर उन्होंने अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की है. अजित पवार बीजेपी और शिवसेना (एनकाथ शिंदे ग्रुप) की सरकार में उपमुख्यमत्री हैं.
सीटों का बँटवारा इंडिया गठबंधन का सबसे जटिल मुद्दा है. आम आदमी पार्टी भी इस गठबंधन में शामिल है जो दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस की राजनीतिक विरोधी है. ऐसे में गठबंधन में सीटों का बँटवारा एक जटिल मुद्दा हो सकता है.
बुधवार को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए शरद पवार ने कहा था, "हमने अभी सीट शेयरिंग पर चर्चा नहीं की है. ऐसा संभव है की सीटों के बँटवारों पर क्या क़दम उठाए जाने हैं, उन पर चर्चा हो. कुछ लोगों को ऐसा करने की ज़िम्मेदारी दी जाएगी."
हेमंत अत्री कहते हैं, “आज भारत की जो राजनीतिक तस्वीर है, वो राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगना में विधानसभा चुनावों के बाद बदल जाएगी. इन राज्यों में चुनावों के बाद राजनीतिक परिस्थितियां क्या होंगी उनका बहुत असर पड़ेगा. अभी सीटों के बँटवारे पर अगर बात हो भी और कल अगर आम आदमी पार्टी जैसे दल छिटक जाएं तो इसका असर पड़ेगा. जहाँ तक हमारा आकलन है, सीटों के बँटवारे पर ठोस चर्चा नवंबर-दिसंबर को आसपास हो सकती है. अभी सिर्फ़ गठबंधन की पॉलिसी, प्रोग्राम और फ्रेमवर्क पर चर्चा होगी. ये तय किया जाएगा कि गठबंधन के प्रवक्ता कौन होंगे, गठबंधन कैसे काम करेगा.”
मुंबई में बैठक का सबसे बड़ा निर्णय गठबंधन के संयोजक का नाम तय करना हो सकता है. लेकिन ये सवाल भी है कि क्या गठबंधन का चेहरा ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी होगा.
वैचारिक विरोधाभास
हालांकि इंडिया गठबंधन का संयोजक किसी एक व्यक्ति को बनाना आसान भी नहीं है. कई नेता इस पद के लिए कतार में हैं. कई पार्टियों में इस बात को लेकर मतभेद भी हो सकता है कि किसी एक पार्टी से संयोजक चुनने से उसे गठबंधन में बढ़त मिल सकती है. अभी जो संकेत मिले हैं, उनसे पता चलता है कि गठबंधन की मुंबई में होने जा रही बैठक में गठबंधन का एक फ्रेमवर्क तैयार करने और इसे स्वरूप देने पर अधिक चर्चा होगी.
हेमंत अत्री कहते हैं, “इस बैठक में इंडिया गठबंधन के संयोजक का चेहरा सामने आ सकता है और अभी ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इसके संयोजक हो सकते हैं. नीतिश कुमार ने स्वयं मना कर दिया है. लेकिन गठबधन की ड्राइविंग सीट पर नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव हो सकते हैं.”
इमरान प्रतापगढ़ी कहते हैं, “संयोजक एक अलग चेहरा होगा और इस इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करता एक अलग चेहरा होगा. हमें लगता है कि राहुल गांधी ही लीड कर रहे हैं और राहुल गांधी ही लीड करेंगे.”
मुंबई में बुधवार को प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री के चेहरे के सवाल पर उद्धव ठाकरे ने कहा, "अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसके लिए हमारे पास कई विकल्प हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या बीजेपी के पास कोई विकल्प है. हम सभी मौजूदा प्रधानमंत्री का कामकाज तो देख ही चुके हैं."
इंडिया गठबंधन में अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियां साथ आई हैं. इनमें से कई पार्टियां राज्यों में एक दूसरे की प्रतिद्वंद्वी भी हैं.
क्या सुलझ जाएंगे आपसी मतभेद?
बैठक से पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, हमारी अलग-अलग विचारधाराएं हैं लेकिन हमारा उद्देश्य एक ही है, विकास तो अंग्रेज़ भी कर रहे थे, लेकिन उससे भी ज़्यादा हम आज़ादी चाहते थे. हम लोकतंत्र को बचाने के लिए एक साथ आए हैं.”
ये सवाल भी उठ रहा है कि गठबंधन की एकजुटता बनाये रखने के लिए अगर राजनीतिक त्याग करने की स्थिति आई तो क्या होगा?
इमरान प्रतापगढ़ी कहते हैं, “राहुल गांधी शुरुआत से ये बात कहते रहे हैं, लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए जो भी क़ुर्बानी और त्याग करना होगा, वो इस देश के संविधान में आस्था रखने वाली हर पार्टी और व्यक्ति को करना होगा. कांग्रेस चाहती है कि गठबंधन मज़बूत हो. गठबंधन धर्म निभाने की ज़िम्मेदारी बाक़ी पार्टियों की भी है.”
सीटों का बँटवारा एक जटिल विषय है और ऐसा लग रहा है कि फ़िलहाल गठबंधन उसे आगे के लिए टाल रहा है.
हेमंत अत्री कहते हैं, “अभी के राजनीतिक समय में कोई भी गठबंधन सुविधा का गठबंधन होता है. जिस पार्टी को जहाँ सुविधा लगती है और अपने राजनीतिक हित नज़र आते हैं, वो वहाँ होती है. उदाहरण के तौर पर दिल्ली शराब घोटाले में जब मनीष सिसौदिया गिरफ़्तार हुए तब बहुत चर्चा थी कि केसीआर की बेटी कविता और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर भी ईडी का शिकंजा कस सकता है, लेकिन ऐसे संकेत मिले की केसीआर ने पर्दे के पीछे से बीजेपी से नज़दीकियां बढ़ा लीं और वहां ईडी शांत हो गई और इधर जैसे ही केजरीवाल इंडिया गठबंधन में शामिल हुए, शराब घोटाले की कार्रवाई धीमी पड़ गई.''
''ये कहना ग़लत नहीं होगा कि राजनीतिक परिस्थितियां और हित बहुत हद तक गठबंधन का रूप तय करेंगे.”
गुरुवार को मुंबई के ग्रैंड हयात होटल में विपक्षी नेताओं की अनौपचारिक बैठक के बाद उद्धव ठाकरे सभी को डिनर देंगे. बहुत संभव है कि इस दौरान कुछ जटिल मुद्दों पर अनौपचारिक चर्चा ज़रूर हो.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)