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मध्य प्रदेश: कांग्रेस छोड़ बीजेपी में जाने के लिए मची भगदड़ से किसको फ़ायदा?
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भोपाल के ईदगाह हिल्स के इलाक़े में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के मौक़े पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
इसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जो नेता और कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहे हैं वो इस तरह से संगठन में घुल-मिल जायेंगे ‘जैसे दूध में शक्कर.’
मुख्यमंत्री के इस बयान के बीच पार्टी ने दावा किया है कि सिर्फ़ एक दिन में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की संख्या 1.26 लाख तक पहुँच गई है.
पार्टी का ये भी दावा है कि संगठन की सदस्यता ग्रहण करने वालों में 40 प्रतिशत के आसपास कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं.
इनमें प्रदेश कांग्रेस कमिटी के बड़े नेता शामिल हैं जिनमे मौजूदा विधायक से लेकर पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और मौजूदा महापौर के पद पर कार्यरत नेता शामिल हैं.
भारतीय जनता पार्टी ने इसके लिए एक अलग प्रकोष्ठ बनाया है जिसका नाम ‘न्यू ज्वाइनिंग टोली’ रखा गया है. 'टोली' का संयोजक प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को बनाया गया है.
कौन नेता हुए हैं शामिल
इस दल-बदल की बयार में छिन्दवाड़ा के कई कांग्रेस नेता शामिल हुए हैं, जिनमें कांग्रेस के एक मौजूदा विधायक कमलेश शाह और मौजूदा महापौर विक्रम अहाके ने भी भारतीय जनता पार्टी का दमन थाम लिया है.
इनके बाद पूर्व विधायक दीपक सक्सेना ने भी कांग्रेस छोड़ दी और नए संगठन में अपनी जगह बनाने की कोशिश में लग गए हैं.
दीपक सक्सेना पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेहद क़रीबी भी माने जाते रहे हैं.
वर्ष 2018 के विधानसभा के चुनावों के बाद कमलनाथ जब मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके थे तो उन्हें विधानसभा का चुनाव लड़ना था. तब छिन्दवाड़ा सीट पर दीपक सक्सेना विधायक हुआ करते थे.
उन्होंने अपनी सीट कमलनाथ के लिए ख़ाली कर दी थी. इस बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उनकी नज़दीकियां कमलनाथ से कैसी रही होंगी और उन पर कमलनाथ का कितना विश्वास रहा होगा.
लेकिन सबसे बड़ा झटका तो कांग्रेस को तब लगा जब 24 सालों तक राज्यसभा के सांसद रहे सुरेश पचौरी ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया.
पचौरी कांग्रेस के शासन काल में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं और मध्य प्रदेश कांग्रेस में उनका क़द बेहद ऊंचा माना जाता रहा है. यहाँ तक की उनकी सिफ़ारिश पर विधानसभा और लोकसभा के टिकट दिए जाते थे.
क्यों पार्टी छोड़ रहे हैं नेता
इतने बड़े पैमाने पर कांग्रेस के नेताओं के अचानक पार्टी छोड़ने का कोई साफ़ कारण दिखाई नहीं दे रहा है.
लेकिन संगठन में नेताओं के बीच ‘बढ़ रही निराशा’ इसका बड़ा कारण भी बताया जा रहा है.
हालांकि कांग्रेस छोड़कर जाने वाले बड़े नेताओं ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के खिलाफ कुछ नहीं कहा है.
पार्टी में मची भगदड़ पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पत्रकारों से कहा कि ‘कांग्रेस छोड़कर जो जा रहे हैं वो एक तरीक़े से अच्छा है, क्योंकि कचरा साफ़ हो रहा है.’
पटवारी की इस टिप्पणी पर शनिवार को सिंगरौली में आयोजित अपनी पार्टी के स्थापना दिवस के दौरान मध्य प्रदेश के मंत्री प्रहलाद पटेल ने पलटवार किया.
संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “मोदी सरकार ने कचरे के तीन डिब्बे बना रखे हैं. कहीं गीला कचरा, कहीं सूखा कचरा और कहीं ‘मेडिकल वेस्ट वाला’ कचरा.”
प्रदेश कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ नेता के.के मिश्रा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि जो कुछ भाजपा कर रही है वो एक तरह से ‘मनोवैज्ञानिक आतंकवाद’ है.
उनका आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी ‘बांह मरोड़ कर नेताओं को अपने संगठन में शामिल करने पर मजबूर कर रही है.’
वो कहते हैं, “किसी को ईडी तो किसी को आईटी का डर दिखाकर मजबूर किया जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी इसी तरह से काम करती है."
उन्होंने कहा, "लोग मजबूरी में ख़ुद को बचाने के लिए उसमें शामिल होने पर मजबूर हो रहे हैं. आज की तारीख़ में भाजपा सबसे बड़ी वॉशिंग मशीन बन गई है.”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का क्या है कहना
चर्चा के दौरान वो कहते हैं कि जो बड़े नाम कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो रहे हैं उन्हें कांग्रेस पार्टी ने काफ़ी कुछ दिया है.
के.के मिश्रा ने सुरेश पचौरी का उदाहरण देते हुए कहा, "पचौरी जी को 24 वर्षों तक कांग्रेस राज्य सभा में मनोनीत करती रही. वो केंद्रीय मंत्री भी रहे. एक चुनाव नहीं लड़ा और इतना कुछ उन्हें मिल गया."
उनका कहना था कि सुरेश पचौरी पर दो साल पहले आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला लंबित है.
उसी तरह से दीपक सक्सेना भी सात बार के विधायक रह चुके हैं और कांग्रेस ने उन्हें तीन बार प्रदेश में मंत्री बनाया था.
वहीँ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि ‘भाजपा कुछ भी कह सकती है’ कि 1.26 लाख नए कार्यकर्ता एक दिन में उसने प्रदेश में बनाए हैं.
वो कहते हैं, "सिर्फ़ 1.26 लाख ही क्यों? 50 लाख भी कह सकते हैं."
उनका कहना था, "अभी तक सिर्फ़ 350 लोग ही भाजपा में शामिल हुए हैं. सभी जुआरी, सटोरिए और माफिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जा रहे हैं. ऐसे लोग भाजपा को ही मुबारक हों."
"ये वो लोग हैं जो न कांग्रेस का भला कर पाए और अब ना वो भाजपा का ही कुछ भला करने की स्थिति में हैं."
वैसे जीतू पटवारी कुछ भी कहें लेकिन कांग्रेस छोड़कर जाने वालों में 13 पूर्व विधायक और तीन पूर्व सांसद शामिल हैं.
इनमें सुरेश पचौरी के अलावा धार के पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला, पिपरिया के पूर्व विधायक विशाल पटेल और चौरई (छिंदवाड़ा) से पूर्व विधायक गंभीर सिंह जैसे नेता शामिल हैं.
इससे किसे होगा फ़ायदा?
वरिष्ठ पत्रकार और भोपाल से प्रकाशित दैनिक सांध्य प्रकाश के संपादक संजय सक्सेना मानते हैं कि ये जो कुछ हो रहा है उसका ना तो कांग्रेस और ना ही बीजेपी को फायदा होगा.
बीबीसी से वो कहते हैं कि ये भारतीय जनता पार्टी का एक तरह का 'प्रचार युद्ध' ही है.
उनका कहना था, "अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भारतीय जनता पार्टी में कांग्रेस से शामिल हुए नेताओं की मिसाल ले लीजिए. जो 22 विधायक उनके साथ गए थे उनमें 13 को मंत्री बनाया गया."
सक्सेना कहते हैं, "आज देख लीजिए. अब मोहन यादव के मंत्रिमंडल में सिंधिया के खेमे के सिर्फ़ तीन मंत्री हैं- गोविन्द राजपूत, तुलसी सिलावट और प्रद्युमन सिंह तोमर. ये तो विधायकों की बात है. जो नेता गए उनको भाजपा के संगठन में क्या मिला? इसकी कम ही जानकारी अब उपलब्ध है."
वैसे सक्सेना को लगता है कि इसका 'कुछ नुकसान' भाजपा से ज़्यादा उसके पुराने कार्यकर्ताओं को होगा जो 'इस भीड़ में खो जाएंगे.'
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी कहते हैं कि पांच साल पहले भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों की संख्या 11 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 18 करोड़ पहुँच गयी है.
इसलिए वो कहते हैं कि भाजपा विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बन गया है.
वे कहते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भारतीय जनता पार्टी में आने वाले नेताओं को काफ़ी सम्मान मिला है.
वो अपना उदाहरण देते हुए कहते हैं कि वो भी उस दौरान भाजपा में शामिल हुए थे और आज वो पार्टी के प्रवक्ता बनाए गए हैं.
उनका कहना है, "इतना सम्मान शायद कांग्रेस में रहते हुए नहीं मिल पाता मुझे. वैसे 18 करोड़ सदस्य पार्टी के मूल कार्यकर्ता हैं और सबकी ज़िम्मेदारी निर्धारित है."
वो कहते हैं कि उनके नए संगठन में एक बूथ स्तर का कार्यकर्ता मुख्यमंत्री तक की कुर्सी पर पहुँच सकता है. जो कांग्रेस में रहते हुए संभव नहीं हो सकता.
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