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टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फ़ाइनल से पहले किस उधेड़बुन में कप्तान रोहित शर्मा
- Author, विमल कुमार, वरिष्ठ खेल पत्रकार
- पदनाम, बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल से, बीबीसी हिंदी के लिए
तो आखिरकार, 29 जून और टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल आ ही गया.
दुनिया की दो सबसे उम्दा टीमों ने करीब एक महीने की जद्दोज़हद के बाद लीग मैच, सुपर लीग में तगड़ा विरोध, अनिश्चित मौसम और चुनौतीपूर्ण पिचों पर कामयाबी हासिल करते हुए ट्रॉफी के लिए अपना दावा भरा है.
इससे पहले कभी भी 2007 से लेकर 2022 तक यानी कि पिछले 8 वर्ल्ड कप में फ़ाइनल मुक़ाबले तक दोनों टीमें बिना कोई मैच गंवाए नहीं पहुंची थीं.
एक और दिलचस्प तथ्य ये भी है कि भारतीय कप्तान रोहित शर्मा अब क्रिकेट इतिहास के पहले ऐसे खिलाड़ी बन जाएंगे, जिन्होंने पहले टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल और 9वें टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में भी शिरकत की है.
लेकिन, रोहित सिर्फ इस आंकड़े से संतुष्ट नहीं होंगे.
टीम के पांच पांडव
एक युवा खिलाड़ी के तौर पर रोहित ने साल 2007 में महेंद्र सिंह धोनी की टीम को पहली ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई थी.
तब रोहित ने देखा था कि कैसे धोनी ने बड़े नामों के बगैर भारतीय फैंस का सपना साकार किया था. 37 साल की उम्र में संभवतः अपना आखिरी वर्ल्ड कप खेलने वाले रोहित ने भारत के सबसे कामयाब कप्तान की पटकथा में अपना एक नया अध्याय जोड़ा है.
रोहित की टीम में भी विराट कोहली से लेकर जसप्रीत बुमराह और टी 20 फॉर्मेट के दिग्गज सूर्यकुमार यादव से लेकर कुलदीप यादव तक हैं.
इस टीम में अगर हार्दिक पांड्या जैसे शानदार तेज़ गेंदबाज़ी वाले ऑलराउंडर हैं. उनका साथ देने के लिए सदाबहार स्पिन ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा भी हैं. जडेजा शुरुआती दौर में कोहली और रोहित के साथ खेले और अब आखिरी दौर का क्रिकेट भी साथ-साथ खेल रहे हैं.
कोहली की ही तरह जडेजा भी कभी टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा नहीं रहे हैं. वह रोहित की तरह कभी वन-डे वर्ल्ड चैंपियन टीम का हिस्सा भी नहीं हो बन पाए हैं.
अगर किसी तरह से टीम इंडिया शनिवार को केंसिंग्टन ओवल में साउथ अफ्रीका को मात देकर ट्रॉफी जीतती है तो आधुनिक युग के भारतीय क्रिकेट के पांच पांडवों (कोहली-रोहित-जडेजा-बुमराह-पांड्या) के लिए अपनी विरासत को हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज कराने का ये शायद पहला और आखिरी मौका भी साबित हो.
कोहली के लिए अगर ये टूर्नामेंट उनकी साख के लिहाज से बिल्कुल मेल नहीं खाता है तो जडेजा के लिए भी कमोबेश ऐसे ही हालात हैं.
लेकिन, क्या किसी की ये मजाल है कि जो इन दोनों खिलाड़ियों के बारे में ये भविष्यवाणी कर दे कि फाइनल में भी ये बुझे-बुझे रहेंगे? कतई नहीं.
इन दोनों खिलाड़ियों के शानदार सफर पर गौर करें तो इनका सबसे बढ़िया खेल तभी आया है जब ये आलोचक के निशाने पर रहे हों और टीम इंडिया के लिए स्टेज बहुत बड़ा हो.
किस उधेड़बुन में है टीम इंडिया
प्लेइंग इलेवन के लिए टीम इंडिया के सामने कुछ उधेड़बुन वाली बात तो है ही. ये सच है कि ये टीम जीतने वाली टीम में कोई बदलाव कभी नहीं करना चाहती है.
ऑलराउंडर के तौर पर टीम में शामिल किए गए शिवम दुबे अब तक स्पिन-हिटर वाली साख पर खरे नहीं उतर पाए हैं.
ऐसे में ये संभावना बनती दिख रही है कि शायद संजू सैमसन को पहली बार किसी वर्ल्ड कप के मैच में खेलने का मौका मिले.
फर्क सिर्फ दाएं और बाएं हाथ का होगा, क्योंकि दुबे ने अब तक सिर्फ एक ओवर की गेंदबाज़ी की है. इस एक ओवर में उनकी धुलाई के बाद कप्तान का बचा-खुचा थोड़ा सा आत्मविश्वास भी उनकी गेंदबाज़ी से उठता हुआ सा दिखाई देता है.
लेकिन, सवाल ये है कि क्या रोहित अपने पूर्व कप्तान धोनी की ही तरह एक बोल्ड फैसला ले पाएंगे. वह फैसला जब वीरेंद्र सहवाग की जगह यूसुफ पठान को 2007 के फाइनल में सीधे खेलते हुए देखा गया था?
कोहली को लेकर सस्पेंस
दूसरा अहम सवाल ये है कि क्या टीम मैनेजमेंट विराट कोहली को वापस तीन नंबर पर उतारने के फैसले को अपनी निजी प्रतिष्ठा का मुद्दा तो नहीं बनाएगी?
ये सच है कि टूर्नामेंट के शुरुआत में ही कप्तान ने ये कह दिया था कि ओपनिंग जोड़ी को छोड़कर, कोई भी बल्लेबाज़ कहीं भी खेलने के लिए तैयार है.
तो क्या आखिरी मैच में और वो भी सबसे निर्णायक मैच में कप्तान-कोच कोहली को उनके सबसे स्वाभाविक पोजीशन पर बल्लेबाज़ी करने के लिए उतारेंगे?
अगर कोहली वाकई में नंबर तीन पर आते हैं, जहां पर उनका रिकॉर्ड असाधारण है तो रोहित के जोड़ीदार यशस्वी जायसवाल ना होकर ऋषभ पंत हो सकते हैं.
पंत को पहले पांचवें नंबर के लिए तैयार किया गया था लेकिन अब तक उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाज़ी की है और ऐसे में उनके लिए बाएं हाथ के बल्लेबाज़ होने के चलते एक पोज़ीशन ऊपर खेलना शायद एक मैच के लिए इतनी बड़ी बात ना हो.
क्या गेंदबाज़ी में बदलाव करेगा भारत?
क्या साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज़ी की स्पिन गेंदबाज़ी के सामने तुलनात्मक तौर पर कमज़ोरी देखते हुए लेग स्पिनर युज़वेंद्र चहल को भी मैनेजमेंट खिलाने के बारे में सोच सकता है?
ये ललचाने वाला विकल्प तो प्रतीत होता है लेकिन यह बिल्ली के गले में घंटी बांधने जैसी बात है. क्या जडेजा को ड्रॉप करने के बारे में भी सोच सकते हैं?
अगर नहीं तो फिर क्या आप सिर्फ दो तेज़ गेंदबाज़ यानी कि बुमराह और पांड्या के साथ जाएंगे. क्या टूर्नामेंट के सबसे कामयाब भारतीय तेज़ गेंदबाज़ और बाएं हाथ से इस आक्रमण को अलग तरह की विविधता देने वाले अर्शदीप सिंह को हटाने के बारे में सोचने का दुस्साहस किया जा सकता है? शायद नहीं.
मौसम और पिच एक बार फिर से इस मैच के नतीजे पर अहम भूमिका निभा सकते हैं.
बारबाडोस में पिच स्पिनर्स के लिए शायद गयाना जैसी स्लो एंड शार्प टर्न ना दिखाई दे. यहां त्रिनिदाद की तरह असमान उछाल वाली पिच भी नहीं होगी.
फाइनल के लिए उम्मीद की जा रही है कि ये बेहतर बल्लेबाज़ी विकेट हो. अगर ये पिच एंटीगा की तरह बल्लेबाज़ों के लिए मददगार रही तो हो सकता है आपको आईपीएल जैसा रोमांच देखने को मिले, जहां चौके-छक्के की बरसात हो.
जय शाह की भविष्यवाणी
चलते-चलते आखिर में एक बात जिसकी चर्चा हर कोई दबी ज़ुबान में कर रहा है. क्या टीम इंडिया बड़े टूर्नामेंट में खिताबी जीत के करीब आकर नाकाम होने वाले पिछले एक दशक के सिलसिले को तोड़ पाएगी?
साउथ अफ्रीका जिन्हें क्रिकेट का स्थायी चोकर्स का अनचाहा टैग मिल चुका है, क्या वो सारे ज़ख्मों को भुलाते हुए इतिहास रच पाएगी? ये कहना बेहद मुश्किल है.
लेकिन, इसे महज़ इत्तेफाक ही कहा जा सकता है कि कुछ महीने पहले बीसीसीआई सचिव जय शाह ने भविष्यवाणी की थी.
जय शाह ने कहा था कि 29 जून को रोहित शर्मा और उनके साथी वर्ल्ड कप जीतेंगे और वो अपनी टीम की हौसला अफ़जाई के लिए वीवीआईपी बॉक्स में बैठे नज़र आएंगे.