You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
जनरल नरवणे की किताब पब्लिश होने से पहले सेना के पास क्यों गई?- प्रेस रिव्यू
भारतीय सेना पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने एक संस्मरण लिखा है, जिसकी समीक्षा सेना कर रही है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार, इस संस्मरण में पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल के पास रेचिन ला में चीनी सेना के टैंकों की आवाजाही को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ 31 अगस्त 2020 को हुई चर्चा के बारे में बताया गया है.
चीन और भारत के बीच सीमा पर तनाव के बारे में और अधिक जानकारी के साथ जनरल नरवणे का संस्मरण ऐसे वक़्त आया है, जब इस तनाव को कम करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर दोनों पक्षों में बातचीत अभी जारी है.
दोनों के बीच सहमति के बाद आख़िरी बार सीमा पर डिसइन्गेजमेन्ट बीते साल गोगरा-हॉट स्प्रिंग इलाक़े में हुआ था. मौजूदा वक़्त में डेपसांग और डेमचोक इलाक़े के पास के पट्रोलिंग पॉइन्ट्स तक भारतीय सेना की पहुँच नहीं बन पाई है और यहाँ चीनी सैनिकों की मौजूदगी बताई जा रही है.
अख़बार लिखता है कि किताब छापने वाले प्रकाशक पेन्गुइन रैन्डम हाउस ने इसकी सॉफ्ट कॉपी या फिर इसके अंश सार्वजनिक नहीं करने की गुज़ारिश की है. जनरल नरवणे की किताब इसी महीने बाज़ार में आ सकती है.
इसी सील 18 दिसंबर को समाचार एजेंसी पीटीआई ने जनरल नरवणे के संस्मरण 'फ़ोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी' के कुछ अंश छापे थे.
कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में 'कुछ स्तर तक' रक्षा मंत्रालय भी शामिल है.
जनरल नरवणे की किताब में किन बातों का ज़िक्र?
जनरल नरवणे ने अपने संस्मरण में 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुए तनाव के अलावा गलवान घाटी में दोनों तरफ़ से सैनिकों के बीच हुई झड़प और सेना में भर्ती को लेकर आई अग्निपथ स्कीम के बारे में लिखा है.
अख़बार लिखता है कि उसने ये जानने के लिए जनरल नरवणे से संपर्क करने की कोशिश की कि क्या प्रकाशक को किताब की पांडुलिपी देने से पहले इस पर आधिकारिक क्लीयरेंस लिया गया था.
हालांकि अख़बार के सवाल पर जनरल नरवणे ने कहा कि उन्होंने, "महीनों पहले प्रकाशक को किताब की पांडुलिपी दे दी थी. किताब के प्रकाशन में देरी का कारण प्रकाशक बता सकता है." प्रकाशक से इस बारे में अख़बार की बात नहीं हो पाई है.
बीते महीने पीटीआई ने संस्मरण के जो अंश छापे थे, उसमें कहा गया था कि 31 अगस्त 2020 को जब चीनी सेना अपने टैंक लेकर रेचिन ला की तरफ़ बढ़ रही थी तब उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क किया था. उस रात रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुलक्षा सलाहकार और चीफ़ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ़ के बीच फोन कॉल्स के दौर चले थे.
जनरल नरवणे ने लिखा है कि रक्षा मंत्री से बात करने के बाद उनके मन में हज़ारों ख्याल आ रहे थे.
उन्होंने रक्षा मंत्री को स्थिति की गंभीरता बताई थी. रक्षा मंत्री ने उनसे कहा था कि रात को 10 बजकर 30 मिनट पर उन्हें वापस फोन करेंगे.
जनरल नरवणे ने अपनी किताब में लिखा है, "उन्होंने मुझे बताया कि प्रधानमंत्री से बात की है और ये पूरी तरह सैन्य फ़ैसला है. उन्होंने कहा जो उचित समझो वो करो."
"मेरे हाथ में जैसे जलती कहाड़ी रख दी गई हो. पूरी ज़िम्मेदारी अब मेरे ऊपर थी. मैंने गहरी सांस ली और कुछ वक़्त चुपचाप बैठ गया. उस वक़्त मुझे अगर कुछ सुनाई दे रही थी तो वो थी घड़ी की टिक-टिक."
गलवान घाटी में सैनिकों के बीच हुई झड़प का ज़िक्र करते हुए जनरल नरवणे अपनी किताब में लिखते हैं कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 16 जून को जल्दी नहीं भूल पाएंगे क्योंकि दो दशक में पहली बार चीनी सैनिक "गंभीर रूप से हताहत" हुए थे.
जनरल नरवणे अपनी किताब में अग्निपथ स्कीम को लागू करने और इस बारे में हुई चर्चा के बारे में भी बात करते हैं.
अख़बार लिखता है कि सेना में काम करने वाले अधिकारी या फिर सिविल सेवा में लगे अधिकारियों को अपनी किताब छपवाने के लिए कुछ नियम मानने होते हैं, लेकिन रिटायर्ड अधिकारियों के लिए मामला थोड़ा अलग है.
आर्मी के नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति किसी राजनीतिक सवाल या सेवा से जुड़े किसी विषय के बारे में जानकारी प्रत्यक्ष या परोक्ष तरीके से मीडिया को नहीं देगा.
ऐसा करने की सूरत में (चाहे वो क़िताब छपवानी हो, लेख लिखता हौ या फिर चिट्ठी लिखनी हो) उसे केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी.
अख़बाल लिखा है कि जून 2021 में पर्सनल और ट्रेनिंग विभाग ने नियमों में कुछ बदलाव किए थे, जिसके बाद रिटारयर्ड सरकारी अधिकारियों जिन्होंने ख़ुफ़िया विभाग या सुरक्षा से जुड़े विभाग में काम किया है, उनके रिटायर होने के बाद भी वो बिना सरकारी अनुमति के कोई चीज़ पब्लिश नहीं कर सकते.
एक सूत्र के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि तीनों डिफेन्स सेवाओं को इन नियमों में शामिल नहीं किया गया है लेकिन उनसे उम्मीद की जाती है कि वो नियमों का पालन करें. ऐसा इसलिए क्योंकि आला अधिकारी को ख़ुफ़िया और गोपनीय मामलों की जानकारी होती है.
अख़बार पूर्वी आर्मी प्रमुख जनरल वीपी मलिक की क़िताब 'कारगिल: फ्रॉम सरप्राइज़ टू विक्ट्री' और रिटायर्ड जनरल वीके सिंह की क़िताब 'करेज एंड कन्विक्शन: ऐन ऑटोबायोग्राफ़ी' का ज़िक्र करते हुए लिखता है कि पहले भी सेना के रिटारयर्ड अधिकारी सेना से जुड़े मुद्दों पर लिखते रहे हैं.
सीट शेयरिंग पर कांग्रेस करेगी चर्चा
गुरुवार को कांग्रेस ने कहा है कि आगामी चुनावों को देखते हुए इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा उसकी "सबसे बड़ी प्रथामिकता" है.
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है कि पांच सदस्यीय नेशनल अलायंस पैनल की अध्यक्षता कर रहे कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने कहा है कि ये चर्चा हर राज्य से अलग-अलग और अलग-अलग इलाक़े में सहयोगी पार्टी की स्थिति को देखते हुए होगी.
इन पैनल में उनके अलावा राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल, वरिष्ठ नेता मोहन प्रकाश और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद शामिल हैं.
जानकार कहते हैं कि अलग-अलग राज्यों में सहयोगी पार्टियों के साथ सहमति तक पहुंचने में मुश्किल आ सकती है, ऐसे में जल्द इसकी शुरुआत करना कांग्रेस के हित में होगा. जैसे पंजाब में उसका गठबंधन आम आदमी पार्टी से है वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से, सीटों के मामले में ये दोनों पार्टियां अड़ सकती हैं.
वहीं हाल में संपन्न हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के साथ विवादों में फंसी समाजवादी पार्टी के साथ भी सहमति नहीं बन सकते की आशंका है. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया था.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इंडिया गठबंधन के कुछ सहयोगी दल, जैसे टीएमसी, जनता दल यूनाइटेड, आम आदमी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) सीट शेयरिंग में देरी से परेशान हो रहे हैं.
टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता कह चुके हैं कि सीट शेयरिंग को लेकर सहमति न बनने तक वो गठबंधन की किसी भी रैली में शामिल नहीं होगी. टीएमसी ने पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से कहा था कि साफ तौर पर 179 दिनों में, गठबंधन ने अपने नाम के अलावा कुछ भी हासिल नहीं किया है.
तृणमूल से नहीं बन पा रही बात
इसी मुद्दे से जुड़ी एक रिपोर्ट में द इंडियन एक्सप्रेस ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने चुनावों को देखते हुए कांग्रेस को दो सीटों की पेशकश की है जिससे कांग्रेस नाराज़ है.
अख़बार के अनुसार, गुरुवार को कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी को लेकर कहा, "ममता बनर्जी ने खुद कहा था कि उन्हें हमारे साथ गठबंधन करना है. जो दो सीटें वो हमें पेश कर रहे हैं, वो पहले ही हमारे पास हैं. क्या वो हम पर दया कर रही हैं. कांग्रेस पार्टी उनकी दया पर नहीं टिकी है."
बीते लोकसभा चुनावों में यहां की दो सीटों से कांग्रेस जीती थी, बरहामपुर से अधीर रंजन चौधरी और दक्षिण मालदा से हाशिम खान चौधरी.
अख़बार लिखता है कांग्रेस यहां पर छह सीटों पर उम्मीदवार खड़े करना चाहती है लेकिन इस पर अब तक सहमति नहीं बनी है.
फंड की कमी से जूझ रहीं कांग्रेस
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस इस समय चंदे की कमी से जूझ रही है और पार्टी के पास पर्याप्त फंड नहीं है. इस कारण उसे चुनाव की तैयारियों में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
ये खबर छापी है अख़बार जनसत्ता ने. अख़बार लिखता है कि गुरुवार को कांग्रेस की एक अहम बैठक हुई जिसमें राहुल गांधी ने नेताओं से कहा कि वो पार्टी को चंदा दें.
जनसत्ता में मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से छापा है कि पार्टी के ही कुछ बड़े नेताओं ने चंदा नहीं दिया था जिस कारण राहुल गांधी नाराज़ हो गए थे.
अख़बार लिखता है कि बैठक के दौरान राहुल ने मज़ाकिया अंदाज में दिग्विजय सिंह ये भी पूछ लिया कि आपने कमलनाथ से पैसे लिए या नहीं.
अख़बार लिखता है कि इस समय कांग्रेस को चंदे की ज़रूरत इसलिए पड़ रही है क्योंकि पार्टी का मानना है कि मौजूदा वरक्त में कॉरपोरेट जगत के अधिकतर खिलाड़ी बीजेपी को समर्थन दे रहे हैं और उन्हें पैसा दे रहे हैं.
2024 में राज्य सभा के 68 सांसद होंगे रिटायर
वहीं टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2024 में 68 राज्यसभा सांसद रिटायर्ड होंगे, जिनमें से 60 सांसद बीजेपी के होंगे.
अपनी रिपोर्ट में अख़बार लिखता है कि बीजेपी के जो नेता इस लिस्ट में हैं उनमें नौ केंद्रीय मंत्री भी हैं जो इस साल अपना कार्यकाल पूरा करेंगे.
अख़बार लिखता है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह समेत 57 नेता इस साल अप्रैल में अपना कार्यकाल पूरा करेंगे. वहीं जुलाई में चार मनोनीत सदस्य रिटायर्ड होंगे.
इससे उत्तर प्रदेश में राज्य सभा की 10 सीटों को भरने की ज़रूरत होगी, वहीं महाराष्ट्र और बिहार छह-छह, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल पांच-पांच, कर्नाटक और गुजरात में चार-चार, ओडिशा, तेलंगाना, केरल और आंध्र प्रदेश में तीन-तीन, झारखंड और राजस्थान में दो-दो, और उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में एक-एक सीटें भरने की ज़रूरत होगी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)