भारत से हो रही मुर्गों की तस्करी, नेपाल ने दी ये चेतावनी

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- Author, विनिता दाहाल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ नेपाली
नेपाल के पशु विभाग ने भारत से तस्करी करके लाए गए मुर्गों को लेकर चेतावनी जारी की है.
पशु सेवा विभाग ने हाल ही में एक बयान में कहा है कि उपभोक्ताओं को चिकन ख़रीदने या पकाने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि चिकन कितना साफ़ और स्वस्थ है.
बयान के मुताबिक़, तस्करी कर लाया गया अधिकांश चिकन सेहत के लिए नुकसानदेह है और खाने लायक नहीं है, और 'जूनोटिक' बीमारियों (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली) का कारण भी बन सकता है.
बीते हफ़्ते नेपाल के गृह मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम के दौरान पशु सेवा विभाग ने कहा कि भारत से तस्करी करके लाई गई मुर्गियां पिंजरे तक पहुंचते-पहुंचते मर सकती हैं और इन्हीं को काटकर और पैक कर लोगों के किचन तक पहुंचाया जाता है.
इस विभाग के एनिमल क्वारंटाइन डिवीज़न (पशु क्वारन्टीन महाशाखा) की उप महानिदेशक डॉ प्रेरणा सेढाँई भट्टाराई ने कहा है कि मरी हुई मुर्गियों को काटकर पैक किया जाता है जिसके बाद उन्हें काठमांडू और अन्य बड़े शहरों के बाजारों में पहुंचाया जाता है.
नेपाल को चिकन मांस के मामले में आत्मनिर्भर कहा जाता है लेकिन जबसे भारत में चिकन सस्ता हुआ है, नेपाल ने इसके आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है.
व्यापारियों का कहना है कि क़ीमतों में अंतर के चलते भारत से नेपाल में चिकन का अवैध कारोबार बढ़ जाता है.
व्यापारियों के अनुसार भारत की तुलना में नेपाल में प्रति किलोग्राम चिकन में 50 से 110 रुपये का अंतर है.
नेपाल में भारतीय चिकन 150 से 180 भारतीय रुपये प्रति किलो और 340 से 400 नेपाली रुपये में खरीदा-बेचा जा रहा है.
नेपाल हैचरी उद्योग संघ और नेपाल दाना संघ ने तस्करी रोके जाने की मांग की है और कहा है कि इससे करीब डेढ़ खरब रुपये का सालाना निवेश ख़तरे में है.

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नेपाल भारत सीमा पर तस्करी
वैसे तो नवलपुर, कपिलवस्तु, रुपन्देही सबसे ज़्यादा तस्करी वाले क्षेत्र हैं लेकिन मधेश प्रांत से सटी सीमा से चिकन की बड़े पैमाने पर तस्करी होती है.
डॉ सेढाँई कहती हैं, "आम तौर पर पूरब से लेकर सुदूर पश्चिम तक ये चिकन सीमा पार से प्रवेश करते हैं."
विभाग का कहना है कि यह पाया गया है कि आधी रात में भारत से मोटरसाइकिल या साइकिल पर मुर्गियों को ज़िंदा बांध दिया जाता है और बिना निरीक्षण के चिकन को नेपाल में अवैध रूप से लाया जाता है.
सेढाँई का कहना है कि इस तरह से लाई गईं लगभग 90 प्रतिशत मुर्गियां मोटरसाइकिल पर मर जाती हैं और बाकी पिंजरे तक पहुंचते पहुंचते.
उन्होंने कहा, “जब मैं उन पिंजरों को जांचने पहुंची, जहां तस्करी करके लाई गई मुर्गियां रखी गई थीं, तो सभी मुर्गियां मर चुकी थीं. ऐसा पाया गया है कि मृत मुर्गियों को काटकर या पूरी तरह पैक करके काठमांडू सहित बड़े शहरों में भेज दिया जाता है.''
हालांकि, पशु विभाग की आपत्ति के बाद गृह मंत्रालय ने मंगलवार को भारत से चिकन के अवैध आयात को रोकने के निर्देश दिए हैं.
मंत्रालय ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध और गैर-मानक पोल्ट्री फार्म, बूचड़खानों, हैचरी और कोल्ड स्टोर को हटाने और सीमा शुल्क और निरिक्षण में कड़ाई करने का निर्देश दिया है.

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क्या होता है पकड़े गए चिकन का?
भारत से पोल्ट्री के अवैध आयात को नियंत्रित करने के लिए विभाग के अधीन क्वारंटीन चेक पोस्ट और पुलिस प्रशासन लंबे समय से प्रयास कर रहा है.
अधिकारियों और व्यवसायियों का कहना है कि चेकपोस्ट को बाइपास करके पहुंचने वाले चिकन की एक बड़ी मात्रा बाज़ार में सप्लाई की जाती है.
हालांकि, तस्करी में पकड़े गए चिकन को क्वारंटाइन विभाग पुलिस की मदद से नष्ट कर देता है.
पशु सेवा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 35,500 ब्रॉयलर मुर्गियां, 71,500 चूजे, लगभग 4,000 किलोग्राम चिकन मांस और लगभग 150,000 अंडे पुलिस की मदद से नष्ट कर दिए गए.
विशेषज्ञों का कहना है कि तस्करी के मांस में ताजे मांस के समान गुणवत्ता नहीं होती है और यह स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है.
सेढाँई भट्टाराई के मुताबिक, "इनके बीमारी लाने की आशंका है. बर्ड फ्लू इन्हीं आयातित मुर्गियों से नेपाल में प्रवेश कर गया."
उनके मुताबिक, मरी हुई मुर्गियों का मांस स्वास्थ्यवर्द्धक नहीं होता है.

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फ़्रेश चिकन की क्या है पहचान?
सेढाँई भट्टाराई कहती हैं, “पहले से मरे चिकन का मांस देखकर ही पहचाना जा सकता है. छाती नीली या काली दिखाई देती है. मांस और त्वचा लाल होते हैं. ताज़े चिकन के मांस की त्वचा सफेद होती है.''
चिकन की जांच के लिए नेपाल में आठ क्वारंटीन कार्यालय और 28 क्वारंटीन चेक पोस्ट स्थापित की गई हैं.
लेकिन कहा जा रहा है कि मैनपावर की कमी के कारण ये सभी चालू नहीं हैं.
पर्सा के निगरानी अधिकारी निर्मल बुढाथोकी ने कहा है कि पर्सा में विभिन्न चौकियों पर तस्करी के जीवित मुर्गों और चूजों और मृत मुर्गों के मांस को ज़ब्त कर लिया जाता है.
बुढाथोकी कहते हैं, ''यह गतिविधि पर्सा से बड़े पैमाने पर होती है, खासकर ग्रामीण इलाकों में. हालांकि खुली सीमाएं होने के कारण रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन चुनौती भी है."
बताया जाता है कि पर्सा के निचुता, मझरिया, रंगपुर, मनावा, डकईला आदि जगहों पर भारतीय चिकन बेचा जा रहा है.
पटेरवा सुगौली ग्रामीण नगर पालिका में 12 सालों से मुर्गी फार्म संचालित कर रहे रामजी यादव ने कहा है कि तस्करी के कारण मुर्गी फार्म ही बंद हो गया है.

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पोल्ट्री उद्योग में लगे किसानों को नुकसान
मुर्गी फार्म संचालक रामजी यादव कहते हैं, “गांव में ऐसा लगता है कि भारतीय चिकन की बिक्री हो रही है. मेरे जैसे कई पोल्ट्री किसान संकट में हैं. हर साल लाखों की लागत पर घाटा होता है. कुछ पोल्ट्री किसानों ने तो अपने फार्म भी बंद कर दिए हैं."
रामजी यादव कहते हैं कि सुबह-सुबह या दोपहर में जब सीमा पर आवाजाही कम होती है तो भारत से नेपाल मुर्गियां लाने का दृश्य आसानी से देखा जा सकता है.
तीन साल पहले चिकन तस्करी के कारण भारी नुकसान झेलने वाले पोल्ट्री फार्म मालिकों ने सीमा पर निगरानी रखकर इसे रोकने की कोशिश की थी.
नेपाल अंडा उत्पादक संघ के अध्यक्ष शिवराम केसी कहते हैं कि ऐसा लगता है जैसे तस्करी पर नियंत्रण कोई प्राथमिकता ही नहीं है.
नेपाल लेयर्स पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद पोखरेल का कहना है कि 'पशु सेवा के तहत क्वारंटीन स्टाफ़ और सुरक्षा एजेंसियों की मजबूत पहल होनी चाहिए और सख़्त कानून बनाना होगा और उन्हें अधिकार सौंपना होगा.'
व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में जो कानून लागू किया जा रहा है वह बहुत पुराना है और इसमें निर्धारित सज़ा और ज़ुर्माना बहुत कम है और इसमें संशोधन की ज़रूरत है.
पशु सेवा अधिनियम के अनुसार, चेकप्वाइंट को बाइपास करके ऐसे जानवरों, पशु उत्पादों की तस्करी की जाती है जिनमें संक्रामक रोग पाए जाते हैं तो 25,000 रुपये तक के ज़ुर्माने का प्रावधान है.
इसी तरह सरकार द्वारा प्रतिबंधित पशुओं, पशु उत्पादों और पशु उत्पादों का आयात करने वालों पर 10,000 रुपये तक के ज़ुर्माने का प्रावधान है.
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