भारत के साथ बढ़े तनाव पर कनाडा के मीडिया में क्या कहा जा रहा है?

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इमेज कैप्शन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं

कनाडा और भारत के बीच बढ़े तनाव का असर दोनों देशों के मीडिया में भी साफ़ दिख रहा है.

कनाडा के डिज़िटल, प्रिंट और टीवी मीडिया में पूरे विवाद को विस्तार से कवर किया गया है.

कनाडा के नेशनल पोस्ट ने एक टिप्पणी में भारत के साथ कूटनीतिक जंग ख़त्म करने की नसीहत दी है.

कनाडाई पत्रकार जॉन इविशन ने ये लेख लिखा है, जिसकी शुरुआत में ही उन्होंने कहा है कि कनाडा भारत के साथ 'कूटनीतिक जंग' में आ गया है.

उन्होंने ये भी कहा है कि ये वही भारत है, जिसने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान और जर्मनी के ख़िलाफ़ कनाडा का साथ दिया था, जो कॉमनवेल्थ का सहयोगी देश है और जो चीन जैसे निरंकुश देशों के ख़िलाफ़ कनाडा का साथ देता आया है.

इविशन ने लिखा है कि फिर भी दोनों देशों के रिश्ते बद से बदतर हालात में पहुंच गए हैं और दोनों मुल्क इन संबंधों को अच्छा बनाने की जल्दबाज़ी में भी नहीं हैं.

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क्या कह रहा है कनाडा का मीडिया?

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इविशन ने अपने लेख में सोमवार को दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोपों के दौर का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने ट्रूडो पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया है, जो पूरी तरह निराधार भी नहीं कहा जा सकता.

इसका कारण गिनाते हुए वह लिखते हैं, "ट्रूडो ने प्रवासी राजनीति को अपनी विदेश नीति पर प्रभाव डालने दिया है. उन्होंने कई कार्यक्रमों में 'सिख मूल्य ही कनाडाई मूल्य हैं' सरीखे बयान भी दिए हैं और कनाडा में रह रहे संदिग्ध ख़ालिस्तानी चरमपंथियों पर कार्रवाई करने में वह विफल रहे हैं."

उन्होंने लिखा है, ''भारत की जाँच एजेंसी ने कनाडा में रहने वाले वसूली, आतंकवाद, तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों के अभियुक्तों की पहचान बताकर उनके प्रत्यर्पण की मांग की, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई. इतना ही नहीं टोरंटो में बीते साल सड़कों पर ख़ालिस्तानी परेड में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की झांकी निकालकर इसका जश्न तक मनाया गया.''

इविशन ने ये भी कहा है कि भारत सरकार ने हरदीप सिंह निज्जर पर चरमपंथी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स इन मिशन के लिए टेरर ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप लगाया था लेकिन न तो उन्हें गिरफ़्तार किया गया और न ही किसी तरह के आरोप तय किए गए.

हरजीत सिंह सज्जन कनाडा की सरकार में अलग-अलग मंत्रालयों का ज़िम्मा संभाल चुके हैं

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टोरंटो स्टार ने एक लेख में कहा है कि लगभग छह सप्ताह पहले चीज़ें तेज़ी से करवट लेने लगी थीं.

इस लेख में सूत्रों के वाले से दावा किया गया है कि "आरसीएमपी ने कनाडा के कई शहरों में अलग-अलग जाँच के दौरान ये पाया कि भारतीय राजनयिक और कॉन्सुलर अधिकारी कनाडा की गतिविधियों की सूचना भारतीय खुफ़िया एजेंसियों तक पहुंचा रहे हैं. इसके बाद ये सूचना लॉरेंस बिश्नोई के आपराधिक गिरोह तक पहुंचाई गई."

'द ग्लोब एंड मेल' के एक ओपिनियन पीस में कनाडाई पत्रकार जॉन इबिट्सन लिखते हैं, "कनाडा की ओर से लगाए गंभीर आपराधिक कृत्यों के आरोपों पर भारत की प्रतिक्रिया ये दिखाता है कि भारत किस हद तक भ्रमित कर सकता है."

सोमवार को भारत ने कनाडा के एक 'डिप्लोमैटिक कम्युनिकेशन' को सिरे से ख़ारिज करते हुए बहुत ही कड़ा जवाब दिया था.

कनाडा ने भारत के साथ साझा किए एक डिप्लोमैटिक कम्युनिकेशन में कनाडा में भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और अन्य भारतीय राजनयिकों पर जून 2023 में खालिस्तान समर्थक एक्टिविस्ट हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में जुडे़ होने का आरोप लगाया था.

इसी का ज़िक्र करते हुए जॉन इबिट्सन लिखते हैं, "जब भी किसी एक लोकतांत्रिक देश को दूसरे लोकतांत्रिक देश की ओर से इस तरह के गंभीर आरोपों के बारे में बताया जाता है तो, आमतौर पर पूरा सहयोग देने का वादा किया जाता है."

"लेकिन इसकी बजाय भारत ने सोमवार को बयान जारी किया और कहा कि भारत सरकार इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करती है. यानी जब कनाडाई पुलिस ने भारत सरकार को सबूत दिखाए तो भारत ने बदले में और आरोप मढ़ दिए. भारत की प्रतिक्रिया हमेशा से नकारने की रही है.''

उन्होंने ये भी लिखा है कि जब अमेरिका ने एक सिख नेता की हत्या की साज़िश में भारतीय अधिकारी के शामिल होने के आरोप लगाए, तो भारत ने सम्मानजनक ढंग से जवाब दिया. ऐसा लगता है कि कनाडा इस मैदान में एक कमज़ोर बच्चे की तरह है.

क्या कह रहे हैं कनाडा के प्रमुख सिख नेता?

इसी साल जगमीत सिंह ने ट्रूडो सरकार से ये कहते हुए समर्थन वापस ले लिया था कि वे अपने वादे पूरे नहीं कर पाई

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जगमीत सिंह कनाडा के वैसे नेता हैं, जो कई मौक़ों पर भारत की आलोचना करते रहे हैं.

जगमीत सिंह ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर इस बारे में एक विस्तृत बयान जारी किया है और उन्होंने कहा है कि हम भारतीय राजनयिकों को निष्कासित करने के फ़ैसले का स्वागत करते हैं.

सिंह ने कनाडा की सरकार से मांग की है कि वो भारत पर राजनयिक प्रतिबंध लगाए और कनाडा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को बैन करे.

उन्होंने लिखा है, "आज जो भी बातें उजागर हुईं, उन्होंने ये और स्पष्ट कर दिया है कि मोदी सरकार हत्या, उगाही और कनाडा की धरती पर कनाडाई लोगों को नुकसान पहुंचाने जैसे संगठित अपराधों में संलिप्त है."

जगमीत सिंह ने लिखा है, "आरसीएमपी के कमिश्नर ने जो जानकारी आज जारी की हैं, उनसे एनडीपी बेहद चिंतित है. कनाडाई, ख़ासतौर पर कनाडा में रह रहे सिख समुदाय को डर, धमकियों, शोषण और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है. उनके साथ उगाही, चुनाव में दखलअंदाज़ी जैसे मामले सामने आ रहे हैं और ये सब कुछ कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों के हाथों में है."

जगमीत सिंह कनाडा की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के नेता हैं. इसी साल उनकी पार्टी ने ट्रूडो सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था.

भारतीय मूल के जगमीत सिंह की पार्टी ने बीते आम चुनावों में 24 सीटें जीती थीं और वो किंगमेकर की भूमिका में थे.

जगमीत सिंह ने जारी किया बड़ा बयान

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कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार में मंत्री हैं हरजीत सज्जन. वह कनाडा के रक्षा मंत्री भी रह चुके हैं.

हरजीत सज्जन ने भी ये कहा है कि "कनाडाई ज़मीन पर कनाडा के लोगों की सुरक्षा को ख़तरे में डालने जैसे गंभीर आरोपों की वजह से भारतीय राजनयिकों को निष्कासित कर दिया गया है. ये देखना अच्छा है कि हमारी क़ानूनी एजेंसियां ऐसे मुद्दों पर अपना काम करना जारी रखे हुए हैं, जो सिख समुदाय को बहुत बुरे तरीके से प्रभावित कर रहे हैं. हम कनाडा में रह रहे हैं, जहाँ क़ानून का राज है."

कनाडाई सांसद चंद्रा आर्य (दाएं)

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देश के हिंदू सांसद चंद्रा आर्य ने इस संबंध में बीते सप्ताह ही संसद में बयान भी दिया था. उन्होंने बीते कुछ सालों में हिंदू पत्रकारों पर हुए हमलों को भी गिनाया.

उन्होंने कहा, "मैं ख़ालिस्तानी चरमपंथ के बारे में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर हुए हमलों से बेहद चिंतित हूं. कुछ दिन पहले ऋषि नागर नाम के पत्रकार पर बहुत बुरी तरह हमला किया गया. मार्च 2023 में समीर कौशल को ख़ालिस्तान प्रदर्शन को कवर करने की वजह से बुरी तरह पीटा गया."

आर्य ने कहा कि फ़रवरी 2022 में खालिस्तान से जुड़ी हिंसा की आलोचना करने की वजह से दीपक पुंज पर उनके स्टूडियो में हमला किया गया. वहीं, एंटी-टेररिज़म इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट मोर्चा बेज़िरगान को ख़ालिस्तानी चरमपंथ के बारे में रिपोर्टिंग करने की वजह से जान से मारने की धमकी दी गई.

उन्होंने कहा कि वो क़ानूनी एजेंसियों से मांग करते हैं कि वे ख़ालिस्तानी चरमपंथ के मुद्दे को गंभीरता से ले. आर्य ने कहा, "देर होने से पहले ही इस मुद्दे पर सख़्ती से निपटने की ज़रूरत है."

पीएम ट्रूडो ने क्या दावे किए?

कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो

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जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि भारत सरकार ने यह सोचकर बुनियादी ग़लती की कि वो कनाडा की ज़मीन पर कनाडा के लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक गतिविधियों का समर्थन करने में शामिल हो सकता है.

जस्टिन ट्रूडो ने ये प्रेस कॉन्फ़्रेंस कनाडा के पुलिस रॉयल कनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के प्रमुख के दावों के बाद की.

आरसीएमपी के प्रमुख माइक डुहेम ने आरोप लगाया था कि भारत सरकार ने कनाडा में ‘बड़े पैमाने पर हिंसा’ में भूमिका निभाई है, इनमें हत्याएं भी शामिल हैं साथ ही ये सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर ख़तरा खड़ा करता है.

कनाडा के सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में बीते साल कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि इस हत्या में भारतीय एजेंटों के शामिल होने के सबूत हैं.

इन आरोपों को भारत ने ख़ारिज किया था. इसके बाद से दोनों देशों के संबंध ख़राब होते चले गए.

लेकिन अब कनाडा ने बड़े पैमाने पर आपराधिक अभियान का आरोप लगाया था.

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