You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कारों के दरवाज़ों पर छिपे हैंडल पर चीन ने लगाया बैन, क्या है वजह?
चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में दरवाज़े के छिपे हुए हैंडल पर प्रतिबंध लगा दिया है.
चीन इस विवादास्पद डिज़ाइन पर रोक लगाने वाला पहला देश बन गया है. इस तरह के हैंडल एलन मस्क की टेस्ला ने लोकप्रिय बनाए थे.
भारत में भी कुछ ब्रैंड की कारों पर इस तरह के हैंडल देखने को मिलते हैं.
चीन का ये फ़ैसला ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर में सुरक्षा निगरानी संस्थाओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों की गहन जांच शुरू की है.
इसकी वजह है चीन में शाओमी के दो इलेक्ट्रिक वाहनों में हुई घातक दुर्घटना. इन दोनों दुर्घटनाओं में इलेक्ट्रिक फ़ेलियर के कारण दरवाजे़ नहीं खुल पाए थे.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
ऐसी ही एक दुर्घटना का ज़िक्र चीन के सरकारी मीडिया में हुआ था. उसके अनुसार पिछले साल अक्तूबर में शाओमी एसयू-7 अल्ट्रा सिडान के चालक की मौत हो गई थी. चालक को बचाने के लिए राहगीरों ने कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की लेकिन दरवाज़ा खुला ही नहीं.
रॉयटर्स के मुताबिक़, शाओमी ने उस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. चीन की नई नीति के बारे में भी कंपनी की ओर से कोई बयान फ़िलहाल नहीं आया है.
दुनिया भर में असर पड़ने की संभावना
चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक़, नए नियमों के तहत कारों की बिक्री की अनुमति तभी दी जाएगी जब उनके दरवाज़ों के अंदर और बाहर, दोनों तरफ़ मैकेनिकल रिलीज़ सिस्टम मौजूद हो. ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले हैं.
चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नियमों के अनुसार, बूट को छोड़कर हर पैसेंजर दरवाजे़ के बाहरी हिस्से में छह से.मी. x दो से.मी. x ढाई से.मी. से कम माप का एक धंसा हुआ स्थान होना आवश्यक होगा ताकि हैंडल तक पहुंच आसान हो सके.
कार के अंदर कम से कम 1 से.मी. x 0.7 से.मी. आकार के संकेत होने चाहिए जो यह दर्शाते हों कि दरवाज़ा कैसे खोला जाए. जिन कारों को अधिकारियों ने पहले ही मंज़ूरी दे दी है और जो चीनी बाज़ार में प्रवेश करने के अंतिम चरण में हैं, उन्हें अपने डिज़ाइन को अपडेट करने के लिए दो साल का और समय मिलेगा.
छिपे हुए हैंडल चीन के न्यू एनर्जी व्हीकल्स (एनईवी) बाज़ार में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं. इसमें इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड कारें और ईंधन से चलने वाली कारें शामिल हैं.
सरकारी नियंत्रण वाले समाचार पत्र चाइना डेली के दिए आंकड़ों के मुताबिक़, चीन की टॉप 100 सबसे अधिक बिकने वाले एनईवी में से लगभग 60% में ऐसे हैंडल लगे हुए हैं.
नए नियम केवल चीनी बाज़ार में बेचे जाने वाले मॉडलों पर लागू होंगे. लेकिन वैश्विक कार उद्योग में चीन की बड़ी उपस्थिति का मतलब है कि इस क़दम का दुनिया भर में असर पड़ने की संभावना है.
अमेरिका में टेस्ला के दरवाज़ों के हैंडल की जांच पहले से ही की जा रही है. यूरोप में भी इसके बारे में नियम बनाए जाने की चर्चा है.
अमेरिका में भी जांच
नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रशासन (एनएचटीएसए) ने टेस्ला के इलेक्ट्रिक-संचालित डोर हैंडल पर केंद्रित एक जांच शुरू की.
एनएचटीएसए ने ये जांच उन रिपोर्टों के जवाब में शुरू की, जिनमें बताया गया था कि हैंडल अचानक काम करना बंद कर देते हैं, जिससे बच्चे कारों में फंस जाते हैं.
एनएचटीएसए ने कहा कि उसे टेस्ला की 2021 'मॉडल वाई' कारों में लगे हैंडलों के बारे में नौ शिकायतें मिली हैं. मॉडल वाई टेस्ला कंपनी का प्रमुख मॉडल है. मॉडल वाई के बारे में मिली शिकायत के चार मामलों में, कार मालिकों ने समस्या का समाधान करने के लिए खिड़की तोड़ने का सहारा लिया.
भारत में कुछ कंपनियां छिपे हुए डोर हैंडल वाली गाड़ियां बेच रही हैं. टाटा मोटर्स की कुछ कारों में ऐसे ही डोर हैंडल लगे हुए हैं.
दक्षिण कोरियाई कार निर्माता किआ भी भारत में अपनी कुछ कारों में फ्लश-फिटेड डोर हैंडल देती है. महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) की कुछ गाड़ियों में ऐसे ही छिपे हुए डोर हैंडल हैं.
एसएंडपी ग्लोबल मोबिलिटी में इंडिया और आसियान ऑटोमोटिव मार्केट के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता ने बिज़नेसटूडे को बताया, "दुनिया के सबसे बड़े कार निर्माता चीन ने इस मुद्दे को उठाया है. अगर वहां हालात फ्लश डोर हैंडल पर प्रतिबंध लगाने तक पहुँच गए हैं, तो इसका मतलब है कि उन्हें कोई व्यावहारिक समाधान नहीं मिला. अगर वे फ्लश हैंडल हटाने जैसा कड़ा कदम उठा रहे हैं, तो भारत को भी हिडन डोर हैंडल से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए."
वह कहते हैं, "इलेक्ट्रॉनिक तरीके़ से काम करने वाले हैंडल हादसों के समय काम न करें, ऐसा मुमकिन है. हाई-एंड कारों में ज़्यादा फीचर्स के कारण बैटरी पर लोड ज़्यादा होता है. इससे बैटरी खत्म होने का खतरा रहता है. ऐसी स्थिति में दुर्घटना के बाद राहत और बचाव में लगे लोग दरवाज़े नहीं खोल पाते. इलेक्ट्रिक वाहनों में यह जोखिम और भी ज़्यादा गंभीर है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.