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ब्रिटेन पहुंचा बी-1 बॉम्बर, अमेरिका क्या ईरान के ख़िलाफ़ करने जा रहा है इस्तेमाल
- Author, मैट स्पिवी
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर किएर स्टार्मर के ब्रिटिश बेस से ईरान के मिसाइली अड्डों के ख़िलाफ़ "डिफ़ेंसिव" अमेरिकी कार्रवाई को मंज़ूरी दे दी है. इसके बाद 24 क्रूज़ मिसाइल ले जाने में सक्षम एक अमेरिकी बॉम्बर ब्रिटेन में उतरा है.
सर किएर ने शुरू में अमेरिका को ईरान के ख़िलाफ़ इसराइल के साथ उसके संयुक्त हमले में ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल करने की इजाज़त देने से मना कर दिया था, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अनबन हो गई थी.
यह एयरक्राफ्ट तब आया है जब अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को कहा कि ईरान पर हमले "बहुत ज़्यादा बढ़ने वाले हैं."
146 फ़ुट का बी-1 लांसर शुक्रवार शाम को ग्लूस्टरशर में आरएएफ़ फ़ेयरफ़ोर्ड पहुंचा.
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ट्रंप ने इस हफ़्ते की शुरुआत में ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि वह इस फ़ैसले से "ब्रिटेन से ख़ुश नहीं हैं", जिसकी वजह से पिछले सप्ताह के अंतिम दिनों में हमले करने के लिए अमेरिका के प्लेन "कई घंटे अतिरिक्त उड़े."
ग्लूस्टरशर में आरएएफ़ फ़ेयरफ़ोर्ड और हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया का इस्तेमाल करने की अमेरिका को इजाज़त देने के बाद, प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि सरकार "आसमान से शासन बदलने में यकीन नहीं करती."
1500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार
ग्लूस्टरशर और विल्टशर की सीमा पर मौजूद आरएएफ़ फ़ेयरफ़ोर्ड का इस्तेमाल अमेरिका पहले भी लंबी दूरी के भारी बमबारी मिशन करने के लिए करता रहा है.
बोइंग के मुताबिक़, बी-1 बॉम्बर का वज़न 86 टन है और यह अमेरिकी एयर फ़ोर्स का सबसे तेज़ बॉम्बर है, जिसकी रफ़्तार क़रीब 1500 किलोमीटर प्रति घंटे है.
"द बोन" नाम के इस अमेरिकी बॉम्बर में टारगेट को हिट करने में मदद के लिए एडवांस्ड रडार और जीपीएस सिस्टम हैं, और दुश्मनों से बचाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक जैमर, रडार वॉर्निंग और एक डिकॉय सिस्टम है.
मिलिट्री एनालिस्ट और ब्रिटिश सेना के पूर्व अधिकारी जस्टिन क्रम्प ने कहा कि बी-1 लांसर "दुनिया के सबसे अहम बॉम्बर्स में से एक है" और अगर ज़रूरत पड़ी तो यह बड़े बम को लोड कर तेज़ी से लंबी दूरी तक ले जा सकता है.
प्राइवेट इंटेलिजेंस फर्म सिबिलिन के सीईओ क्रम्प ने बीबीसी रेडियो 4 के टुडे प्रोग्राम में बताया कि "आरएएफ़ फ़ेयरफ़ोर्ड से शटलिंग ज़्यादा बेहतर है" और अमेरिका के लिए "सही लगता है" क्योंकि अमेरिका से ईरान आने-जाने में लंबा समय लगता है.
इसराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग शनिवार को आठवें दिन में पहुँच गई.
ट्रंप के इस दावे के बाद कि ईरान के साथ "बिना शर्त सरेंडर" के अलावा "कोई डील" नहीं होगी, रात भर तेहरान में धमाके हुए.
दूसरी तरफ, साइप्रस में आरएएफ़ के अक्रोटिरी बेस पर ड्रोन हमलों पर ब्रिटेन की प्रतिक्रिया की भी आलोचना हुई है.
(ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आवास) डाउनिंग स्ट्रीट ने इस बात को ख़ारिज़ कर दिया कि बेस पर हमले के बाद सरकार मध्य-पूर्व में ज़रूरी मिलिट्री एसेट्स देने में नाकाम रही.
सर किएर ने गुरुवार को रिपोर्टर्स से कहा कि एयरबेस पर सुरक्षा के उपाय हमेशा से मौजूद रहे हैं.
ब्रिटिश मिलिट्री बेस पर ड्रोन हमले से "कम से कम नुक़सान" हुआ और कोई हताहत नहीं हुआ.
एचएमएस ड्रैगन को किया जा रहा रवाना
ब्रिटिश वॉरशिप एएमएस ड्रैगन को साइप्रस भेजा जा रहा है, जिसमें एयर डिफेंस क्षमता है लेकिन यह अगले हफ़्ते तक सफ़र नहीं करेगा.
इससे पहले टाइप 45 डिस्ट्रॉयर को एक अलग मिशन के लिए चुना गया था. सर किएर स्टार्मर ने मंगलवार को पुष्टि करते हुए कहा कि एचएमएस ड्रैगन को भूमध्यसागर इलाक़े में तैनात किया जाएगा.
रॉयल नेवी के दो वाइल्डकैट हेलीकॉप्टर के वॉरशिप से पहले साइप्रस पहुंचने की उम्मीद है.
लेकिन बीबीसी ब्रेकफास्ट से बात करते हुए, कंज़र्वेटिव पार्टी के नेता केमी बैडेनोख ने कहा, "उन्हें इससे ज़्यादा करने की ज़रूरत है, उन्हें मिसाइल साइट्स को रोकने की ज़रूरत है, आपको सोर्स तक जाने की ज़रूरत है."
बैडेनोख ने सरकार से आरएएफ़ को ईरान की मिसाइल लॉन्च साइट्स पर हमला करने की इजाज़त देने की मांग तेज़ कर दी है.
इस लड़ाई में ईरान ने बहरीन, क़तर, यूएई और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों को निशाना बनाया है, इसलिए किएर स्टार्मर ने शुक्रवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की.
डाउनिंग स्ट्रीट की एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब के स्वाभाविक नेता को भरोसा दिलाया कि ज़रूरत पड़ने पर ब्रिटेन "सऊदी शासन की रक्षा में मदद करने के लिए तैयार है."
प्रवक्ता ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि "इस इलाक़े में और ब्रिटिश फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और एक डिस्ट्रॉयर भेजे जा रहे हैं."
मिडिल ईस्ट में लड़ाई की वजह से पिछले हफ़्ते हज़ारों फ़्लाइट्स कैंसिल हो गईं, जिससे कई ब्रिटिश लोग फंसे हुए हैं. हालाँकि कुछ फ़्लाइट्स फिर से शुरू हो गई हैं.
ब्रिटेन के नागरिकों को घर लाने के लिए दूसरी सरकारी चार्टर्ड फ़्लाइट शनिवार को गैटविक एयरपोर्ट पर लैंड हुई.
ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि फ़्लाइट शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट से निकली थी.
पहली फ़्लाइट, जो शुक्रवार सुबह स्टैनस्टेड एयरपोर्ट पर लैंड हुई थी, "तकनीकी दिक्कतों" की वजह से 24 घंटे लेट हो गई.
एयरलाइंस एतिहाद और एमिरेट्स ने कन्फ़र्म किया है कि वे अगले कुछ दिनों में अबू धाबी और दुबई से ब्रिटेन के लिए कुछ सेवाएं जारी रखेंगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.