पत्रकार की हत्या का वो क्या मामला था जिसमें उम्रक़ैद की सज़ा से बरी हुए गुरमीत राम रहीम

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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को साल 2002 में एक पत्रकार की हत्या के मामले में बरी कर दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, यह जानकारी राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने शनिवार को दी थी.

अदालत का यह फैसला डेरा प्रमुख को दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाए जाने के सात साल बाद आया है.

इस बारे में वकील जितेंद्र खुराना ने कहा, "अदालत ने उन्हें पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी कर दिया है."

गुरमीत राम रहीम को बरी किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, इस मामले से शुरू से पीड़ित पक्ष की तरफ से जुड़े वकील लेखराज धोत ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में मामले की पूरी ताक़त से पैरवी करेंगे.

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राम रहीम के वकील ने क्या कहा?

समाचार एजेंसी से बात करते हुए राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने कहा, "आज (शनिवार को) माननीय उच्च न्यायालय में रामचंद्र छत्रपति मामले का फैसला सुनाया जाना था. मुख्य न्यायाधीश की पीठ के सामने इस मामले की सुनवाई हुई और गुरमीत राम रहीम सिंह को इस मामले में बरी कर दिया गया है."

"जैसा कि हम शुरू से कहते आ रहे हैं कि गुरमीत राम रहीम का इस मामले से कोई संबंध नहीं है, आज माननीय उच्च न्यायालय ने भी इसे स्वीकार कर लिया और उन्हें बरी कर दिया."

उन्होंने कहा, "इस मामले में अन्य तीन दोषियों की सज़ा को बरक़रार रखा गया है."

रामचंद्र छत्रपति के बेटे और वकील ने क्या कहा?

रामचंद्र के बेटे अंशुल छत्रपति ने बीबीसी पंजाबी संवाददाता प्रभु दयाल से बात करते हुए अदालत के फैसले को निराशाजनक बताया.

उन्होंने कहा, "हम इस मामले को लेकर 24 वर्षों से अदालती लड़ाई लड़ रहे हैं. हम पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में हार चुके हैं, लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी है. हम इस फैसले को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे."

जब अंशुल छत्रपति से पूछा गया कि राम रहीम को किस आधार पर बरी किया गया, तो उन्होंने कहा कि उनके पास अभी तक फैसले की पूरी कॉपी नहीं है, पूरा आदेश पढ़ने के बाद ही पता चलेगा कि किस आधार पर फैसला पलटा गया.

इस केस से शुरू से जुड़े वकील लेखराज धोत ने कहा कि सीबीआई की लंबी जांच और मज़बूत तथ्य पेश करने के बाद राम रहीम को दोषी ठहराया गया था, लेकिन कोर्ट के फै़सले से पीड़ित पक्ष को निराशा हुई है.

उन्होंने कहा, "यह ध्यान देने वाली बात है कि हाई कोर्ट ने इस केस में शूटर्स और साज़िश रचने वाले कृष्ण लाल की सज़ा को बरकरार रखा है. इसका मतलब है कि जांच में इतने सबूत थे. फिर भी डेरा चीफ का बरी होना दुखद है."

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि जिस तरह सीबीआई ने पहले ट्रायल में सबूतों को जोड़कर केस को मज़बूती से पेश किया था, उसी तरह सीबीआई हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी.

हाई कोर्ट के फैसले के बाद अंशुल छत्रपति के वकील आरएस बैंस ने कहा, "राम रहीम रेप केस में अपनी सज़ा काट रहा है, बाक़ी केस में सज़ा अभी शुरू होनी थी. मर्डर केस (रणजीत सिंह मर्डर और रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस, दोनों में राम रहीम बरी हो चुका है) में उसने अभी तक सज़ा का एक भी दिन नहीं काटा है."

"दो रेप केस में कुल राम रहीम को 10-10 साल की सज़ा दी गई है. 20 साल में से 8 साल तो काट लिए हैं लेकिन उम्रकैद की सज़ा के तहत उसने एक भी दिन जेल में नहीं बिताया है. इस केस में इतने सबूत हैं कि यह मामला बरी होने वाला नहीं था."

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति केस क्या है?

  • 19 अक्तूबर 2002 को हरियाणा के सिरसा में 'पूरा सच' अख़बार के संपादक रामचंद्र छत्रपति को घर के बाहर बुलाकर गोली मार दी गई थी.
  • गोली लगने के बाद छत्रपति को अस्पताल में भर्ती कराया गया. 21 अक्तूबर 2002 को अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
  • इस घटना के विरोध में 25 अक्तूबर 2002 को सिरसा बंद रहा. मीडियाकर्मियों ने कई जगहों पर धरना और विरोध प्रदर्शन किया.
  • पुलिस जांच से नाखुश छत्रपति परिवार ने मुख्यमंत्री से मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी. परिवार ने आरोप लगाया था कि पुलिस मामले के मुख्य आरोपी और साज़िशकर्ता को बचा रही है.
  • जनवरी 2003 में, पत्रकार रामचंद्र के बेटे अंशुल छत्रपति ने छत्रपति मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की.
  • दिसंबर 2003 में, सीबीआई ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और रणजीत सिंह की हत्या की जांच शुरू की. रणजीत सिंह डेरा से जुड़े हुए थे, जिनकी 2002 में हत्या कर दी गई थी, और उनकी हत्या के लिए डेरा को भी ज़िम्मेदार ठहराया गया था.
  • नवंबर 2004 में, दूसरे पक्ष की बात सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने डेरा की याचिका खारिज कर दी और सीबीआई जांच जारी रखने का आदेश दिया.
  • सीबीआई ने दोनों मामलों (रणजीत और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति) की जांच फिर से शुरू कर दी और डेरा प्रमुख और कई अन्य लोगों को अभियुक्त बनाया. हज़ारों डेरा अनुयायी चंडीगढ़ में जांच और सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए जमा हुए.
  • सीबीआई की पंचकुला अदालत ने डेरा की साध्वियों द्वारा डेरा प्रमुख के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही ठहराते हुए 25 अगस्त, 2017 को डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराया.
  • 28 अगस्त 2017 को डेरा प्रमुख को साध्वी बलात्कार मामले में दस साल की जेल की सज़ा सुनाई गई. डेरा प्रमुख फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं.
  • 17 जनवरी 2019 को पंचकुला स्थित सीबीआई अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई. इस मामले में अन्य तीन अभियुक्तों को भी आजीवन कारावास की सज़ा दी गई.
  • हरियाणा की सोनारिया जेल में बंद राम रहीम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सज़ा सुनाई गई.
  • इस मामले के मुख्य गवाह खट्टा सिंह ने कहा था कि 'आजीवन कारावास की सज़ा स्वाभाविक मृत्यु तक है. सीबीआई के वकील ने कहा कि साध्वी के यौन शोषण के मामले में 20 साल की सज़ा पूरी होने के बाद यह आजीवन कारावास शुरू होगा.'

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.