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भारत में इसराइली पर्यटकों की पसंदीदा जगहों पर किस बात की बेचैनी?
- Author, सौरभ चौहान
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
हिमाचल प्रदेश के दो पर्यटन स्थलों में इन दिनों एक अजीब-सी ख़ामोशी छाई हुई है.
धर्मशाला के पास मौजूद 'मिनी इसराइल' कहे जाने वाले धर्मकोट और कुल्लू की पार्वती वैली में बसे कसोल में दशकों से इसराइली बैकपैकर्स की चहल-पहल रहती थी.
अब ये दोनों क़स्बे लगभग सुनसान पड़े हैं.
न केवल यहां ठहरे इसराइली पर्यटक घर की चिंता में डूबे हैं, बल्कि इस संघर्ष से स्थानीय पर्यटन कारोबार को भी भारी नुक़सान हो रहा है.
28 फ़रवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध का असर हिमाचल के इन दो क़स्बों पर साफ़ दिख रहा है.
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इसराइल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई सहित कई वरिष्ठ नेता मारे गए हैं. इसके जवाब में ईरान ने इसराइल, खाड़ी देशों और अमेरिकी ठिकानों पर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त समर्पण की मांग की है. दोनों पक्षों के हमलों और क्षेत्रीय तनाव के कारण कई उड़ानें रद्द हो गई हैं.
इसकी वजह से हज़ारों यात्री फंसे हुए हैं. इसका असर इसराइल से भारत आने-जाने वाली यात्राओं पर भी पड़ा है.
भारत के 'मिनी इसराइल' में क्या हैं हालात
हिमाचल में मनाली के पास कसोल क़स्बे में घुसते ही आपको तंबुओं की कतारें और उनके सामने खड़ी मोटरसाइकिलें दिखती हैं.
यहां के रेस्तरां में मेन्यू हिब्रू भाषा में मिलता है. आम दिनों में नमस्कार की जगह आपको 'शलोम' सुनाई पड़ता है और यूं ही घूमते-फिरते कई इसराइलियों से आपका सामना हो जाता है.
इसी वजह से इस इलाके़ को 'मिनी इसराइल' कहा जाता है. यहां शाम की हवा में तिब्बती झंडे और 'स्टार ऑफ़ डेविड' वाले इसराइली झंडे भी लहराते दिखते हैं.
आगे जाने पर आपको खबाद हाउस भी दिखाई देता है, जो यहूदियों का एक सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र है.
धर्मकोट और कसोल में ठहरे इसराइली पर्यटक, जो अपने देश में ज़रूरी सैन्य सेवा पूरी करने के बाद लंबे समय तक यहां रहते हैं, अब घर लौटने की कोशिश में लगे हैं.
बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने, एयर इंडिया की दिल्ली-तेल अवीव सीधी उड़ान बंद होने और दुबई जैसे ट्रांज़िट हब की अनिश्चितता से स्थिति और जटिल हो गई है.
धर्मकोट में ठहरी एक इसराइली पर्यटक माया ने अपनी चिंता जताते हुए कहा, "मेरी मां इसराइल में हैं और बताती हैं कि बार-बार बम अलर्ट आते हैं. लोगों को शेल्टर में भागना पड़ता है. यहां कई लोग जल्दी घर लौटना चाहते हैं, लेकिन उड़ानें सीमित हैं या रद्द हो रही हैं. महंगी टिकटें भी एक बड़ी समस्या बन गई हैं."
इसी तरह नोआम, जो दोस्तों के साथ एक महीने के लिए यहां आए थे, कहते हैं, "दो-तीन दिन में मैं भी लौट जाऊंगा. इसराइल में हालात तनावपूर्ण हैं. यहां रहकर ख़बरों से सही स्थिति समझ नहीं आती, जिससे चिंता और बढ़ जाती है."
एक अन्य पर्यटक शिरा, जो यहूदी त्योहार पूरीम मनाने और होली देखने आई थीं, बताती हैं, "स्थानीय लोग हमें बहुत हौसला दे रहे हैं, लेकिन घर की चिंता स्वाभाविक है. मेरे कुछ परिचित युद्ध के मोर्चे पर हैं."
एक अन्य इसराइली महिला पर्यटक, विला, करीब दस दिन से वापस जाने की कोशिश में लगी हुई हैं, लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है.
पर्यटन कारोबार पर असर और भी गहरा है. कसोल और आसपास के गांव, जैसे कलगा, पुलगा और तोश, में हर साल अनुमानित दस हज़ार इसराइली आते थे. ये स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार बनते थे. धर्मकोट में हिब्रू मेन्यू वाले कैफे, होमस्टे और ट्रेकिंग रूट्स उनकी मौजूदगी से ही जीवंत रहते थे.
मध्य पूर्व के हालात से चिंता
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक़, 2025 में धर्मशाला में करीब 30 हज़ार विदेशी पर्यटक आए थे. यह कोविड के बाद सबसे ज़्यादा संख्या थी. विभाग के अनुसार इनमें इसराइली पर्यटकों का हिस्सा कई जगहों पर 70 से 80 प्रतिशत तक बताया जाता है. लेकिन साल 2026 में यह संख्या काफी कम रहने की आशंका है.
फरवरी से जून के बीच आमतौर पर एडवांस बुकिंग शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार उत्साह नहीं दिख रहा है. पहले से आए कुछ पर्यटकों ने भी अपनी यात्रा छोटी कर ली है.
धर्मशाला होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी भांबा कहते हैं, "विदेशी पर्यटकों में इसराइली सबसे बड़ा हिस्सा हैं. सर्दियों में धार्मिक पर्यटक आते हैं, लेकिन गर्मियों में एडवेंचर पर्यटन ज़्यादा होता है. सीधी उड़ानें न होने से बुकिंग रद्द हो रही हैं. मॉनसून में आई आपदाओं के बाद हम अच्छे सीज़न की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब भू-राजनीतिक स्थिति बिगड़ने से अंतरराष्ट्रीय पर्यटक लंबी छुट्टियां नहीं लेना चाहेंगे."
मनाली की होटल व्यवसायी विषा चौहान बताती हैं कि न सिर्फ इसराइली, बल्कि दूसरे देशों के पर्यटक भी प्रभावित हुए हैं.
वह कहती हैं, "हमारे यहां 15 से 20 लोगों के दो बड़े इसराइली ग्रुप की बुकिंग युद्ध शुरू होते ही रद्द हो गई. ज्यादातर इसराइली अब यहां नहीं हैं. अगर युद्ध लंबा चला तो आने वाले पर्यटन सीज़न में बड़ा नुकसान होगा."
टूर ऑर्गनाइजर प्रेम सागर, जो धर्मकोट में होमस्टे भी चलाते हैं, कहते हैं, "यह पहली बार नहीं है. साल 2023-24 के ग़ज़ा युद्ध और 2025 के जून संघर्ष में भी इसी तरह नुक़सान हुआ था. अब मध्य पूर्व और यूरोप के पर्यटक सतर्क हैं. एयरपोर्ट पर फंसे यात्रियों की तस्वीरें देखकर लोग यात्रा टाल रहे हैं."
स्थानीय निवासी सुधा कपूर ने बीबीसी हिंदी को बताया कि उनका यहां एक छोटा सा मकान है और होमस्टे के लिए दो कमरे उपलब्ध हैं.
वह कहती हैं, "इस होमस्टे से हमारा घर चलता है, लेकिन इस बार अभी तक कोई बुकिंग नहीं आई है. यह इलाका इसराइली पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में है, इसलिए यहां का कारोबार काफी हद तक उन्हीं पर निर्भर है. लेकिन इस बार लग रहा है कि पर्यटन सीज़न अच्छा नहीं रहेगा. युद्ध से जो नुकसान वहां हो रहा है, उसके दूरगामी असर यहां भी देखने को मिल रहे हैं."
पर्यटन कारोबारी विवेक सूद के मुताबिक मौजूदा हालात चिंताजनक हैं. वह कहते हैं, "सामान्य समय में दिल्ली से तेल अवीव की इकोनॉमी क्लास का एकतरफा किराया 20 हज़ार से 50 हज़ार रुपये के बीच रहता है. लेकिन मार्च 2026 में युद्ध के कारण उड़ानें सस्पेंड होने, एयरस्पेस बंद होने और रूट बदलने से किराए में भारी उछाल आया है. अब एकतरफा किराया एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच गया है."
अन्य देशों के पर्यटकों पर भी असर
युद्ध का असर सिर्फ इसराइली पर्यटकों तक सीमित नहीं है. इसका प्रभाव यूरोप, अमेरिका और एशिया से आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ रहा है.
टूर गाइड विक्रम कपूर का कहना है कि धर्मशाला में दलाई लामा के दर्शन के लिए आने वाले कुछ पर्यटक भी अपनी यात्रा स्थगित कर रहे हैं.
हिमाचल की पर्यटन अर्थव्यवस्था राज्य की जीडीपी में क़रीब 7 से 8 प्रतिशत योगदान देती है. व्यस्त समर सीज़न, यानी मई से अगस्त, से पहले ही यह क्षेत्र इस संकट का सामना कर रहा है. अगर युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो स्थानीय होटल, कैफे, होमस्टे और छोटे कारोबारियों के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है और प्रदेश में चिंता का माहौल और गहरा सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.