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'कोच साहब, स्माइल आप पर अच्छी लगती है', धोनी से लेकर शोएब अख़्तर तक कैसे सब हुए गौतम गंभीर के मुरीद
'कोच साहब स्माइल आप पर अच्छी लगती है. गंभीरता और स्माइल का ये किलर कॉम्बिनेशन है. बहुत बढ़िया. लुत्फ़ उठाइए दोस्तों.'
पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट टीम के मेंस टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर ये बातें कहीं टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर के बारे में.
रविवार को भारत ने न्यूजीलैंड के सामने जीत के लिए 256 रन का लक्ष्य रखा था. लेकिन न्यूजीलैंड की टीम 19 ओवर में 159 रन बनाकर ऑलआउट हो गई. इस तरह भारत न्यूजीलैंड को 96 रन से मात देकर टी-20 वर्ल्ड कप को लगातार दूसरी बार जीतने वाली टीम भी बना.
भारतीय क्रिकेट में गंभीर और धोनी के रिश्ते को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है.
गंभीर कई बार धोनी की तारीफ़ भी कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने कुछ ऐसे कमेंट्स भी किए जिन्हें धोनी के लिए निगेटिव माना गया. खासकर टीम की उपलब्धियों का क्रेडिट किसे दिया जाए, इस मुद्दे पर.
गंभीर भारत की 2011 की वर्ल्ड कप विनिंग टीम का हिस्सा थे.
धोनी इस टीम के कप्तान थे और उन्होंने ही श्रीलंका के ख़िलाफ़ फ़ाइनल में विनिंग सिक्स लगाया था.
गंभीर ने उस फ़ाइनल मैच में 97 रन बनाए थे.
उन्होंने कई बार कहा है, "भारत में हीरो-कल्चर बहुत ज़्यादा है. किसी भी जीत का क्रेडिट सिर्फ़ एक खिलाड़ी को नहीं दिया जाना चाहिए."
गौतम गंभीर ने कई बार कहा कि, "2011 वर्ल्ड कप सिर्फ़ किसी एक खिलाड़ी की वजह से नहीं जीता गया था. ये पूरी टीम की जीत थी."
यह टिप्पणी अक्सर उस नैरेटिव के संदर्भ में देखी जाती है.
व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं टीम कल्चर पर ज़ोर
जीत के बाद गौतम गंभीर ने एक्स पर पोस्ट किया, "ये सिर्फ़ भगवान की योजना नहीं थी. ये 140 करोड़ लोगों का प्लान था. हर खिलाड़ी वर्ल्ड चैंपियन है."
गंभीर भारतीय टीम का कोच बनने के बाद भी अक्सर टीम कल्चर की बात करते रहे हैं.
पोस्ट मैच प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भी उन्होंने कहा, "भारतीय टीम के लिए मेरी सिंपल फिलॉसफ़ी रही है कि माइल स्टोन मायने नहीं रखते. ट्रॉफ़ी मायने रखती है. भारतीय टीम में हमने लंबे समय तक माइल स्टोन की बात की. निजी उपलब्धियों की बात की. मैं कोशिश करूंगा कि जब तक मैं हूं हम पर्सनल माइल स्टोन की बात ना करें."
टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की जीत को गंभीर की इसी सोच से जोड़ कर देखा जा रहा है.
विशेषज्ञ उन्हें क्रेडिट दे रहे हैं अपने प्लेयर्स में भरोसा जताने के लिए, टैलेंटेड खिलाड़ियों को नाकामियों के बावजूद बार-बार मौक़ा दिए जाने को लेकर और लगातार अपनी टीम स्ट्रैटजी में निरंतरता बनाए रखने के लिए.
'संजू सैमसन को लड़कर टीम में लाए'
उनकी जिन रणनीतियों की आलोचना होती थी अब उन्हें ही मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है.
गंभीर की आलोचना अक्सर इस बात के लिए होती थी कि वो ऑल-राउंडर और पार्ट टाइमर पर ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा करते हैं, लेफ़्ट हैंड-राइट हैंड कॉम्बिनेशन के लिए उनकी आलोचना हो रही थी.
लेकिन यही बात उनके लिए प्लस प्वाइंट साबित हुई.
हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल जैसे खिलाड़ियों ने अहम मौक़ों पर टीम के लिए योगदान दिया.
अभिषेक शर्मा, शिवम दुबे, ईशांत किशन, तिलक वर्मा, अक्षर पटेल जैसे लेफ़्ट हैंड बल्लेबाज़ों की टीम में भरमार है. इन खिलाड़ियों ने भी टूर्नामेंट में अच्छा योगदान दिया.
संजू सैमसन में जो भरोसा गंभीर ने दिखाया उसका रिजल्ट सबके सामने है.
पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख़्तर ने एक टीवी शो में भारतीय टीम की जीत के बाद कहा, "उनकी पॉलिसी जीत गई. उनका सिस्टम जीत गया. उनकी मेरिट जीत गई."
उन्होंने कहा, " नाकामी के बाद भी किसी बंदे को ड्रॉप नहीं किया. मेरिट के आधार पर रिस्क लिया. संजू सैमसन के तौर पर वो मिसाल आपके सामने हैं. अभिषेक बच्चा है. इमैच्योर है. बहुत क्रिकेट सीखना बाक़ी है. उसे भी ड्रॉप नहीं किया. "
वहीं सेमीफ़ाइनल में इंग्लैंड पर भारत की जीत के बाद शोएब अख़्तर ने कहा था, "संजू सैमसन को गौतम गंभीर लड़कर टीम में वापस लाए."
अभिषेक शर्मा पूरे टूर्नामेंट में फ़्लॉप हो रहे थे. टूर्नामेंट का आगाज़ ही उन्होंने लगातार तीन शून्य बनाकर किया था लेकिन उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड का हवाला देकर गौतम गंभीर ने उन्हें लगातार टीम में बनाए रखा.
अभिषेक ने फ़ाइनल में सिर्फ़ 21 गेंदों पर 52 रन बनाए.
मैच के बाद पोस्ट मैच इंटरव्यू में अभिषेक शर्मा ने कहा भी, "कप्तान सूर्यकुमार यादव और कोच गौतम गंभीर ने तब भी मुझ पर भरोसा बनाए रखा जब ख़ुद पर मेरा विश्वास कमज़ोर पड़ने लगा था."
पोस्ट मैच प्रेस कॉन्फ़्रेंस में गौतम गंभीर ने कहा भी, "आप कोच या कप्तान उतने ही अच्छे हो जितने आपके प्लेयर. तो हमें प्लेयर्स ने ही जिताया."
पूर्व पाकिस्तानी कप्तान और विस्फोटक बल्लेबाज़ शाहिद अफ़रीदी ने कहा, "भारत पूरे टूर्नामेंट में ज़बरदस्त टीम कॉम्बिनेशन के साथ चले हैं. जीतना डिज़र्व करते थे. इंडिया की बेंच भी बहुत स्ट्रॉन्ग थी. किसी को भी खिला सकते थे. सैमसन को बड़े अरसे बाद ओपनर के तौर पर लेकर आए. उसने क्या कमाल कर दिया."
पाकिस्तान के ही मोहम्मद हफ़ीज़ ने एक शो में कहा, "क्रेडिट देना होगा माइंडसेट को. 2024 का टी-20 वर्ल्ड कप जीता, फिर चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीती, एशिया कप जीता, फिर वर्ल्ड कप जीत लिया. ये उनके सिस्टम की जीत है."
आलोचना भी हुई थी
लेकिन गौतम गंभीर का टीम इंडिया के हेड कोच के तौर पर सफ़र आसान नहीं रहा.
भारतीय टीम के कोच की बागडोर उन्हें भारत की 2024 की टी-20 वर्ल्ड कप जीत के बाद मिली.
उस विनिंग टीम के कोच थे राहुल द्रविड़. उन पर द्रविड़ की कोच के तौर पर बेहद कामयाब पारी के बाद उसी निरंतरता को जारी रखने का दबाव था.
रविवार को टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की जीत के बाद गौतम गंभीर ने राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण को भी जीत का क्रेडिट दिया.
उन्होंने कहा कि दोनों ने टीम की मौजूदा कामयाबी के लिए ग्राउंड वर्क तैयार किया.
वीवीएस लक्ष्मण बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) के सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (सीओई) के प्रमुख हैं.
गंभीर का कोच के तौर पर स्टार्ट बहुत सफल नहीं रहा.
गौतम गंभीर के कोच रहते साल 2024 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ होम टेस्ट सिरीज़ में भारत की बुरी हार हुई. न्यूज़ीलैंड ने व्हाइटवॉश करते हुए भारत को 3-0 से हरा दिया.
उसी साल ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी में भारत की 1-3 से हार हुई.
2024 में श्रीलंका से वनडे सिरीज़ भारत 2-0 से हारा और टी-20 वर्ल्ड कप शुरू होने से ठीक पहले भारत की न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में 1-2 से हार हुई.
2025 में भारत की दक्षिण अफ़्रीका से टेस्ट सिरीज़ में 2-0 से हार हुई.
हां, इस दौरान टी-20 मैचों में ज़रूर भारत का परफॉर्मेंस अच्छा रहा और कुछ बाइलेटरल सिरीज़ जीतने के साथ-साथ भारत ने एशिया कप भी जीता.
लेकिन गंभीर के इस औसत रिकॉर्ड के बाद टीम को हैंडल करने के उनके तरीक़े की आलोचना हुई.
पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने साल 2024 में कहा था कि गौतम गंभीर में टीम को पब्लिकली रिप्रजेंट करने वाला हुनर नहीं है और उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूर रहना चाहिए.
नवंबर 2025 में रवि शास्त्री ने दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में हार के बाद टीम मैनेजमेंट के कई फ़ैसलों की आलोचना की थी.
इंग्लैंड के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ स्टीव हार्मिन्सन ने इसी वर्ल्ड कप के दौरान टॉकस्पोर्ट क्रिकेट यूट्यूब चैनल पर कहा था कि गंभीर को पसंद करना थोड़ा मुश्किल है. उन्होंने कहा था कि उनका आक्रामक रवैया 2026 के बाद उनके हेड कोच बने रहने में आड़े आ सकता है.
लेकिन फ़िलहाल गंभीर कामयाब हैं. कामयाबी सब कुछ भुला देती है.
गंभीर ने पोस्ट मैच कॉन्फ़्रेंस में कहा भी, "हमें हारने का डर छोड़ना पड़ेगा. हमारी सबसे बड़ी पहचान बहादुरी रही है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.