महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी ने 'महाविकास अघाड़ी' से अलग होने की बात क्यों कही?

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महाराष्ट्र में 'महायुति' सरकार के शपथ लेते ही विपक्षी गठबंधन 'महाविकास अघाड़ी में शामिल समाजवादी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) के बीच 'दरार' खुलकर सामने आ गई है.
समाजवादी पार्टी उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) की ओर से कथित तौर पर 'हिंदुत्व के मुद्दे' पर जोर देने से नाराज़ है और इस गठबंधन से निकलना चाहती है.
महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आज़मी ने कहा है कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने हिंदुत्व की ओर लौटने के संकेत दिए हैं. इसलिए समाजवादी पार्टी के लिए अब महाविकास अघाड़ी में रहना मुश्किल है. कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार ) चाहे जो करें लेकिन समाजवादी पार्टी 'महाविकास' अघाड़ी में नहीं रहेगी.
अबू आज़मी ने 'बीबीसी हिंदी' से कहा कि इस मामले में उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मैसेज भेज दिया है. उन्हें विश्वास है कि वो 'महाविकास अघाड़ी' से अलग होने के उनके फैसले से सहमत होंगे. जैसे ही उनकी मंजूरी मिलेगी वो अलग होने का औपचारिक एलान कर देंगे. महाराष्ट्र में अब समाजवादी पार्टी का 'महाविकास अघाड़ी' में रहना मुश्किल है.

समाजवादी पार्टी क्यों हुई नाराज़

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महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अबू असीम आज़मी ने बीबीसी हिंदी से कहा, "महाविकास अघाड़ी ने विधानसभा चुनाव में हमें सिर्फ दो सीटें दीं. इस मामले में समाजवादी पार्टी से बात करने की ज़रूरत नहीं समझी गई. सिर्फ अख़बार में एलान कर दो सीटें हमारे लिए छोड़ी गईं. हमने बर्दाश्त किया. अब महाविकास अघाड़ी में शामिल प्रमुख दल शिवसेना (उद्धव) के प्रमुख उद्धव ठाकरे का बयान आ रहा है कि हमारा हिंदुत्व का मुद्दा जागृत है, हम हिंदुत्व के मुद्दे पर काम करेंगे. ''
उन्होंने कहा, '' दो सीटें मिलने पर भी हमने बर्दाश्त किया. लेकिन अब जबकि ये बयान आ रहा है कि हिंदुत्व का मुद्दा चलेगा और बाबरी मस्जिद को तोड़ने वालों को बधाई दी जा रही है तो हमने अलग होने का फैसला किया है. आप जानते हैं समाजवादी पार्टी सेक्युलर पार्टी है. अब हिंदुत्व का समर्थन करने वालों के साथ हम कैसे रह सकते हैं.''
इससे पहले उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ''उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) ने एक अख़बार में विज्ञापन निकाल कर बाबरी मस्जिद को गिराने वालों को बधाई दी. उनकी पार्टी के एक नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बाबरी मस्जिद को गिराने पर अभिमान जताया. अगर महाविकास अघाड़ी में शामिल कोई ऐसी भाषा बोलता है तो बीजेपी और उनमें क्या अंतर है. मैं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी से बात कर रहा हूं. हमें अब 'महाविकास अघाड़ी' में क्यों रहना चाहिए.''
अबू आज़मी ने एक न्यूज़ चैनल के साथ बातचीत में कहा, "अब जब उद्धव जी की सीटें कम आ गई हैं तो कहते हैं कि वह हिंदुत्व के मुद्दे पर अटल हैं. कार्यकर्ता हिंदुत्व के मुद्दे पर काम करें. हमने सोचा कि क्या करना है. 6 दिसंबर को दुनिया ब्लैक डे मनाती है. उद्धव जी के पार्टी के नेता कहते हैं कि बाबरी गिराने वाले को हम बधाई देते हैं. यह कांग्रेस और शरद पवार को सोचना है कि रहना है या नहीं. हमारा काम हो ना हो, सत्ता मिले ना मिले, महाविकास अघाड़ी में नहीं रहना है."
अबू आज़मी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा,'' सांप्रदायिक विचारधारा के साथ समाजवादी पार्टी कभी नहीं रह सकती इस लिए हम खुदको 'महविकास अघाड़ी' से अलग करते है.''
''समाजवादी पार्टी को महाराष्ट्र में अकेले चलना गवारा है लेकिन महाविकास अघाड़ी में रहते हुए शिवसेना UBT की सांप्रदायिक विचारधारा का हिस्सा बनना हरगिज़ गवारा नहीं!''

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विधानसभा चुनाव से पहले महाविकास अघाड़ी में सीट बंटवारे पर बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों की मांग की थी. लेकिन उन्हें दो सीटें मिलीं.
इनमें से एक सीट मानखु़र्द शिवाजी नगर सीट अबू आज़मी ने जीती. उन्होंने वहां एनसीपी (अजित पवार) के नवाब मलिक को हराया था.
दूसरी सीट भिवंडी ईस्ट पर रईस कासम शेख़ जीते थे.
महाविकास अघाड़ी में शामिल सभी पार्टियों ने महाराष्ट्र में रविवार को हुए विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया था. लेकिन समाजवादी पार्टी के दोनों विधायक ने शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बने.
शपथ ग्रहण समारोह के बाद अबू आज़मी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा,'' महाविकास अघाड़ी में हम बिन बुलाए मेहमान थे. एक बार भी महाविकास अघाड़ी के को-ऑर्डिनेशन में हमें बुलाया नहीं गया. लेकिन हम चाहते थे कि जिस तरह लोकसभा चुनाव में सब एक साथ थे. को-ऑर्डिनेशन था. सब एक मंच पर जा रहे थे. उस तरह होना चाहिए लेकिन कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार) में टिकटों के बंटवारे को लेकर झगड़ा होता रहा. 'महाविकास अघाड़ी' को इसी वजह से हार मिली."
जबकि भिवंडी ईस्ट सीट से जीते रईस कासम शेख़ ने कहा, "उद्धव ठाकरे की पार्टी से आने वाले मिलिंद नार्वेकर ने एक ट्वीट पोस्ट किया और हमने केवल उन्हें जवाब दिया है. एमवीए का गठन दो प्रमुख सिद्धांतों पर किया गया था. संविधान की रक्षा करना और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कायम रखना. एमवीए के नाम पर सभी धर्मों के लोगों और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाले व्यक्तियों के समर्थन से शिवसेना को लोकसभा और विधानसभा में वोट मिले हैं.''
पहले से चल रहा मनमुटाव अब खुल कर आ गया सामने

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समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर पहले से महाविकास अघाड़ी में शामिल पार्टियों से नाराज़ चल रही थी.
पार्टी ने पहले अपने लिए नौ सीटों की मांग थी और फिर छह और आख़िर में चार सीटें मांगी थी.
लेकिन समाजवादी पार्टी को सिर्फ मानखु़र्द शिवाजी नगर और भिवंडी ईस्ट सीट ही मिली. उसी समय समाजवादी पार्टी के कुछ नेता महाविकास अघाड़ी से अलग होना चाहते थे.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मानख़ुर्द-शिवाजी नगर, भिवंडी ईस्ट, भिवंडी वेस्ट, मालेगांव सेंट्र और धुले सिटी सीट पर अपने उम्मीदवारों का एलान कर दिया था. लेकिन उस समय महाविकास अघाड़ी को ये रास नहीं आया. कांग्रेस के एक नेता ने उस समय हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा था, ''समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के उप चुनाव में उसे एक सीट तक नहीं दी. लेकिन यहां पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारने का एलान कर दिया है.''
जबकि समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना था कि विपक्षी एकता के लिए पार्टी चार सीटों पर भी मान जाती. लेकिन इसे सिर्फ दो सीटें दी जा रही हैं.
हालांकि महाविकास अघाड़ी में इस मामले को किसी तरह सुलझा लिया गया और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर सिर्फ अबू आज़मी और रईस कासम शेख़ ही चुनाव लड़े.
क्या 'हिंदुत्व' की ओर लौटना चाहती है शिवसेना (यूबीटी)

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हालिया विधानसभा चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को सिर्फ 20 सीटें मिलीं. इस हार के बाद शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हार की वजहों पर मंथन तेज हो गया है.
कहा जा रहा है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव को देखते हुए पार्टी नेता और कार्यकर्ता दोबारा हिंदुत्व के मुद्दे की ओर लौटने की मांग कर रहे हैं.
बीएमसी पर शिवसेना (यूबीटी) का कब्ज़ा है. बीएमसी देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका है और इसका बजट देश के कुछ छोटे राज्यों के बजट से बड़ा है. बीएमसी नहीं चाहती है कि ये उसके हाथ से निकले.
पार्टी नेता मिलिंद नार्वेकर के बाबरी मस्जिद को गिराने से जुड़े ट्वीट को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है.
महाराष्ट्र में कौन कितनी सीटों पर जीता

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी में शामिल पार्टियों को करारी हार का सामना करना पड़ा.
कांग्रेस ने राज्य की 288 सीटों में से 103 पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन वो सिर्फ 16 सीटें जीत पाई. शिवसेना (यूबीटी) 89 सीटों पर चुनाव लड़ी थी लेकिन सिर्फ उसे 20 सीटें मिलीं वहीं शरद पवार की एनसीपी 87 सीटें लेकर सिर्फ 10 सीटें जीत पाई.
दूसरी ओर महायुति गठबंधन में शामिल में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) ने 288 में से 230 सीटें जीतीं. बीजेपी 148 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और वो 132 सीटें जीतने में कामयाब रही. शिवसेना (शिंदे) 81 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी. उसे 57 सीटों पर जीत मिली वहीं एनसीपी (अजित पवार) ने 59 सीटों पर 41 सीटें हासिल की.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित















