मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सीएम बनाने से पहले बीजेपी में क्या चल रहा है- प्रेस रिव्यू

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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक मुख्यमंत्रियों का नाम घोषित नहीं किया है.
हालांकि, ख़बरों के अनुसार, पार्टी ने इसके लिए क़वायद तेज़ कर दी है और मंगलवार तक स्पष्ट हो सकता है कि इन तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री कौन होंगे.
बीजेपी के पर्यवेक्षक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जाकर पार्टी के विधायकों से चर्चा करने वाले हैं कि उनकी नज़र में मुख्यमंत्री कौन होना चाहिए.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को राजस्थान, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को मध्य प्रदेश और जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा को छत्तीसगढ़ का पर्यवेक्षक बनाया गया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, छत्तीसगढ़ में रविवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी. मध्य प्रदेश में ऐसी बैठक सोमवार को, जबकि राजस्थान में मंगलवार को होगी.
लेकिन इस बीच बीजेपी ने अपने एक बड़े लक्ष्य के लिए काम करना जारी रखा है. वह है- अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव.
अख़बार ने बीजेपी नेताओं के हवाले से लिखा है कि इन बैठकों से पहले, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार को राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुने गए पार्टी के विधायकों को संबोधित किया.
नड्डा ने नवनिर्वाचित विधायकों को 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटने और 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' में हिस्सा लेने के लिए कहा.

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अख़बार के अनुसार, बीजेपी के ज़्यादातर विधायक छत्तीसगढ़ पहुंच गए हैं. शनिवार शाम को नड्डा ने इन विधायकों से बात की और उन्हें उनके 'कर्तव्यों, लक्ष्यों और 2024 के लोकसभा चुनावों के महत्व' के बारे में बताया.
छत्तीसगढ़ के एक नवनिर्वाचित विधायक ने कहा, “नड्डा जी ने अपने संबोधन में नए विधायकों को बताया कि पार्टी छत्तीसगढ़ के हर विधानसभा क्षेत्र में विकसित भारत संकल्प यात्रा करवाने की योजना बना रही है, जिसमें विधायक और नेता मोदी सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों का प्रचार प्रसार करेंगे.”
एक अन्य विधायक का कहना था कि इस बैठक का मक़सद बीजेपी को अगले साल होने जा रहे संसदीय चुनाव के लिए तैयार करना था. इसमें इस बात पर चर्चा नहीं हुई कि मुख्यमंत्री कौन होगा.
राजस्थान में भी नड्डा ने वही संदेश दोहराया, जो उन्होंने छत्तीसगढ़ में दिया. उन्होंने कहा कि चुने हुए विधायक हर घर तक प्रधानमंत्री का संदेश लेकर जाएं.
रमन सिंह 'दौड़ से लगभग बाहर'

एचटी लिखता है कि छत्तीसगढ़ में पार्टी ओबीसी या जनजातीय चेहरे में भी किसी को सीएम बना सकती है और 2003 से 2018 के बीच तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह लगभग रेस से बाहर हो चुके हैं.
इस राज्य में ओबीसी कुल आबादी के 45 फ़ीसदी हैं जबकि यहां जनजातीय आबादी 32 फ़ीसदी है.
छत्तीसगढ़ में ओबीसी नेता ओ.पी. चौधरी, पार्टी प्रदेशाध्यक्ष और ओबीसी नेता अरुण साव, विष्णु देव साई, राम विचार नेताम, लता उसेंडी और शुक्रवार को संसद की सदस्यता से इस्तीफ़ा देने वाले दो सांसद- रेणुका सिंह और गोमती साई सीएम पद की रेस में शामिल हैं.
वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को राजस्थान पहुंच सकते हैं. बीजेपी नेताओं का कहना है कि पहले से तय कार्यक्रमों के चलते वह जल्दी राजस्थान नहीं पहुंच पाएंगे.
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सी.पी. जोशी ने कहा कि विधायकों को रविवार शाम तक जयपुर पहुंचने के लिए कहा गया है.
राजस्थान में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पूर्व लोकसभा सदस्य बालकनाथ, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश माथुर और पूर्व संगठन सचिव प्रकाश शर्मा मुख्यमंत्री पद के दावेदार बताए जा रहे हैं.
मध्य प्रदेश में संशय बरक़रार

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एचटी के अनुसार, बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के लिए नरेंद्र सिंह तोमर के नाम पर राज़ी हो गए हैं.
हालांकि, कहा जा रहा है कि वरिष्ठ नेता और नौ बार के विधायक गोपाल भार्गव को तोमर के नाम पर आपत्ति है.
मध्य प्रदेश में एक और संभावित नाम केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल का भी है.
अख़बार लिखता है कि बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि 'ऐसा लगता है कि वरिष्ठ नेताओं को भी नहीं पता कि मुख्यमंत्री कौन होगा.'
बहुत से बीजेपी नेताओं का मानना है कि अभी भी पार्टी शिवराज सिंह चौहान पर भरोसा जता सकती है क्योंकि जल्दी ही लोकसभा चुनाव भी होने वाले हैं.
एक वरिष्ठ बीजेपी नेता के हवाले से ख़बर में लिखा गया है, "शिवराज से बेहतर राज्य की ब्यूरोक्रेसी को कोई नहीं समझता. अगर लोकसभा चुनाव के दौरान वह सीएम नहीं होंगे तो बिना वजह कई दिक्कतें आ जाएंगी."
अयोध्या में आसमान पर पहुंचे ज़मीन के दाम

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द हिंदू की ख़बर के अनुसार, जैसे-जैसे अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के क़रीब पहुंच रहा है, वैसे-वैसे सदर इलाक़े और 15 किलोमीटर क दायरे में ज़मीन के दामों में तेज़ी से उछाल आया है.
अयोध्या के स्टांप एंड रजिट्रेशन डिपार्टमेंट में असिस्टेंट कमिश्नर योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि नवंबर महीने में उत्तर प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में राजस्व में बढ़ोतरी के मामले में अयोध्या सबसे ऊपर रहा. यहां के राजस्व में 109.19 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
उन्होंने कहा, “राजस्व का ज़्यादा हिस्सा ज़िले में ज़मीन के पंजीकरण से आया है, ख़ासकर सदर इलाक़े में”
राम मंदिर में 22 सितंबर को भगवान राम की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जानी है.
ख़बर के अनुसार, शहर के एक डेवेलपर ने बताया, “ मंदिर के तीन किलोमीटर के दायरे के बाहर ज़मीन के रेट 3000 से 15 हज़ार रुपये वर्ग फ़ुट है. लेकिन इसके अंदर यहां एक बिस्वा (1360 वर्ग फ़ुट) ज़मीन बहुत महंगी है. अगर आपको यहां कोई ज़मीन मिलती है तो उसकी क़ीमत 25 हज़ार वर्ग फ़ुट तक हो सकती है.”
हमास पर सरकार के जवाब में 'तकनीकी ग़लती'

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विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा है कि उन्होंने लोकसभा में हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर दिए गए जवाब को मंज़ूरी नहीं दी है.
इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया कि इस जवाब को लेकर एक तकनीकी ग़लती हुई है. मंत्रालय का कहना है कि यह जवाब राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन द्वारा दिया गया था.
कांग्रेस सांसद के. सुधाकरन ने पूछा था कि क्या सरकार के पास हमास को भारत में आतंकवादी संगठन घोषित करने का प्रस्ताव है.
इस पर विदेश मंत्रालय की ओर से जवाब दिया गया था, 'किसी संगठन को आतंकवादी घोषित करना गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आता है. किसी भी संगठन को आतंकवादी घोषित करना संबंधित सरकारी विभागों की तरफ से की गई कार्रवाई और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार माना जाता है.'
एक्स (पहले ट्विटर) पर दो दस्तावेज़ शेयर किए जा रहे थे. एक में हमास को लेकर सवाल था और दूसरे में मीनाक्षी लेखी के नाम से दिया गया जवाब.
इस पर केंद्रीय मंत्री लेखी ने जवाब देते हुए लिखा, "आपको गलत जानकारी मिली है. मैंने इस सवाल या जवाब को लेकर किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं." लेखी ने कहा कि जांच के बाद मामला स्पष्ट हो जाएगा.
ख़बर के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया कि इस जवाब को लेकर एक तकनीकी ग़लती हुई है. मंत्रालय का कहना है कि हमास पर पूछे गए सवाल का जवाब राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने दिया था.
खट्टर का सुझाव- बोर्ड पर लिखा जाए भ्रष्टाचारी का नाम

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि विभाग के सबसे भ्रष्ट कर्मचारी का नाम एक बोर्ड पर लिखकर दफ़्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाना चाहिए.
जनसत्ता की ख़बर के अनुसार, हरियाणा के सीएम ने कहा कि इससे दूसरों के मन में बात बैठेगी कि भ्रष्टाचार करने पर उनका नाम भी इसी तरह बोर्ड पर आ जाएगा.
वह शनिवार को पंचकूला में हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस कार्यक्रम में बोल रहे थे.
खट्टर ने कहा कि भ्रष्टाचार का सबसे ज़्यादा असर ग़रीब पर पड़ता है, जबकि भ्रष्टाचारी ग़रीबों का हक़ मारकर ख़ुद को समाज में प्रतिष्ठित दिखाने का काम करते हैं.
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