वो छह मौक़े जब ट्रंप ने अपने दावों से भारत को असहज किया

ट्रंप और मोदी

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इमेज कैप्शन, इस साल फ़रवरी में ओवल ऑफ़िस में मोदी और ट्रंप की मुलाक़ात हुई थी. ये मुलाक़ात ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ़ लगाने की घोषणा के बाद हुई थी.

बीते कुछ वक़्त में कई बार ऐसे मौक़े आए जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों या उनके क़दमों ने भारत को असहज किया.

इसी सप्ताह ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल नहीं ख़रीदेगा.

इसके जवाब में गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी जानकारी के हिसाब से "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बुधवार को कोई बातचीत नहीं हुई."

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने कोई ऐसा दावा किया जिससे भारत असहज हुआ.

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इससे पहले भी कई मौक़ों पर ट्रंप इस तरह के बयान दे चुके हैं या फिर ऐसे क़दम उठा चुके हैं जब भारत को या तो उसे ख़ारिज करना पड़ा है या फिर भारत ने उसका जवाब नहीं दिया.

इस रिपोर्ट में जानते हैं कि कब-कब ऐसी स्थिति पैदा हुई.

1. भारत पर ख़ुद टैरिफ़ लगाया, ईयू से अपील की

अपने दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने से पहले ट्रंप ने अपनी चुनावी रैलियों में दावा किया था कि वो राष्ट्रपति बनेंगे तो एक ही दिन में रूस-यूक्रेन जंग रोक देंगे.

लेकिन उनके कार्यकाल को आठ महीने पूरे हो चुके हैं और वो अब तक इसमें सफल नहीं हो सके हैं. उन्होंने रूस पर अधिक दबाव डालने के लिए रूस के व्यापार सहयोगियों पर दबाव डालना शुरू किया.

इस साल जुलाई में भारत पर उन्होंने 25 फ़ीसदी के अलावा और 25 फ़ीसदी टैरिफ़ पेनल्टी के रूप में जोड़ दिया. उन्होंने भारत से कहा कि वो रूस से तेल ख़रीदना बंद करे.

इतना ही नहीं उन्होंने यूरोपीय संघ से भी अपील की कि वो रूस को रोकने के लिए भारत और चीन पर 100 फ़ीसदी तक टैरिफ़ लगाए. ये वो वक्त था जब यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर भारत की बातचीत चल रही थी.

डोनाल्ड ट्रंप

2. रूसी तेल पर पीएम मोदी के वादे का किया दावा

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इस सप्ताह ओवल ऑफ़िस में ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे मित्र हैं. हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं. मैं इस बात से ख़ुश नहीं था कि भारत तेल ख़रीद रहा है और उन्होंने आज मुझे आश्वासन दिया कि वो रूस से तेल नहीं ख़रीदेंगे."

ट्रंप दावा करते रहे हैं कि रूस जो तेल बेचता है, वो यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आय का अहम स्रोत है.

ट्रंप के दावे पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू किया.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप से डरे हुए हैं. वो ट्रंप को यह फ़ैसला लेने और घोषणा करने देते हैं कि भारत रूसी तेल ख़रीदना बंद कर देगा. वो बार-बार की गई अनदेखी के बावजूद ट्रंप को बधाई संदेश भेजते रहते हैं."

एक दिन बाद भारत ने ट्रंप के दावे का जवाब दिया और कहा कि बुधवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत बड़ी मात्रा में तेल और गैस का आयात करता है. ऊर्जा के लगातार बदलने वाले माहौल में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. ऊर्जा की क़ीमतों को स्थिर बनाए रखना और इसकी सप्लाई सुनिश्चित करना हमारे दो मक़सद रहे हैं."

3. भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम का दावा

शहबाज़ शरीफ़ और ट्रंप

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ युद्धविराम के लिए कई बार ट्रंप का धन्यवाद कर चुके हैं

पाकिस्तान के साथ चले भारत के चार दिन के सैन्य संघर्ष को लेकर ट्रंप ने कई बार ऐसे दावे किए जिनसे भारत असहज हुआ.

पहला दावा युद्धविराम कराने को लेकर था. 10 मई को शाम पांच बजे ट्रंप ने युद्धविराम की अचानक घोषणा कर दी.

भारतीयों को युद्धविराम की पहली जानकारी भारत या पाकिस्तान से नहीं बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के सोशल मीडिया हैंडल से मिली.

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा था, ''अमेरिका ने पूरी रात पाकिस्तान और भारत के बीच मध्यस्थता की और इसके बाद दोनों देश पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं.''

इसी तरह का बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की तरफ़ से भी आया. इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने युद्धविराम कराने के लिए ट्रंप का शुक्रिया कहा.

भारत की यह नीति रही है कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मसला है और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है.

ट्रंप का दावा भारत को असहज करने वाला था.

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्रंप और रुबियो की घोषणा के बाद एक्स पर जो लिखा, उससे साफ़ दिखा कि घोषणा को लेकर दोनों देशों में बहुत समन्वय नहीं था या भारत अमेरिकी घोषणा की हर बात से बहुत सहमत नहीं था.

जयशंकर ने अपनी पोस्ट में कहीं भी अमेरिका का नाम नहीं लिया. उन्होंने लिखा, ''भारत-पाकिस्तान गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए एक सहमति पर पहुँचे हैं. आतंकवाद के ख़िलाफ़ भारत समझौता नहीं करेगा और यही रुख़ आगे भी रहेगा.''

4. बार-बार कहा, युद्धविराम कराया

डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट में और अपने बयानों में युद्धविराम कराने को लेकर दावा किया.

उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने का क्रेडिट लिया और दावा किया कि उन्होंने व्यापार को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर दोनों को युद्धविराम के लिए राज़ी किया.

उनके दावे को लेकर भारत में विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार को घेरने लगीं और पीएम मोदी से सवाल करने लगीं कि वो इसका जवाब दें.

केंद्र सरकार ने कई बार ट्रंप के इस दावे को ख़ारिज किया. बाद में जुलाई में पीएम मोदी ने संसद में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चल रही बहस के दौरान ट्रंप का नाम लिए बिना इन दावों को निराधार बताया.

पीएम मोदी ने संसद में कहा, "दुनिया के किसी भी नेता ने भारत को ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा है."

हालांकि ट्रंप का दावा करना जारी रहा. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कहा कि उन्होंने सात महीनों में सात जंगें रुकवाई हैं, इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए.

5. भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष में लड़ाकू विमान गिरने का दावा

मार्को रुबियो, एस जयशंकर

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के साथ युद्धविराम में अमेरिका की किसी तरह की भूमिका से भारत इनकार करता रहा है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जुलाई में दावा किया था कि मई में भारत-पाकिस्तान के बीच चले संघर्ष के दौरान "पांच लड़ाकू विमान मार गिराए गए थे."

हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस देश के कितने विमान गिराए गए.

इससे पहले पाकिस्तान भारत के 'पांच लड़ाकू विमान मार गिराने' का दावा कर चुका था, जिसे भारत ने ख़ारिज किया था.

मई में भारत के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा था, "मुझे लगता है कि जो ज़रूरी है वो ये नहीं कि जेट गिराए गए बल्कि ये कि वो क्यों गिराए गए."

हालांकि उन्होंने विमानों की संख्या के बारे में कोई जवाब नहीं दिया और छह विमानों को नुक़सान पहुंचने के पाकिस्तान के दावे को भी ख़ारिज किया.

वहीं 31 मई को भारत के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान से पाकिस्तान के दावे को "बिल्कुल ग़लत" बताया था.

6. व्हाइट हाउस में आसिम मुनीर से मुलाक़ात

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर व्हाइट हाउस में

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस में मेहमाननवाज़ी की गई थी

मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष के महज़ एक महीने बाद जून में पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ जनरल आसिम मुनीर पाँच दिन के अमेरिका दौरे पर गए.

इस दौरान व्हाइट हाउस में लंच पर ट्रंप ने उनसे मुलाक़ात की थी. जहां इसे इस्लामाबाद में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा गया भारत के लिए ये असहज करने वाला कदम था.

इससे पहले पीएम मोदी जी-7 सम्मेलन के लिए कनाडा के अल्बर्टा पहुँचने वाले थे, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप उनके आने से पहले ही वापस चले गए थे.

इस मुलाक़ात की मीडिया में काफी चर्चा हुई. दक्षिण एशिया की जियोपॉलिटिक्स पर गहरी नज़र रखने वाले माइकल कुगलमैन ने इसे लेकर लिखा, "अमेरिका के सीनियर अधिकारी अक्सर पाकिस्तानी सेना प्रमुख से मिलते रहते हैं, लेकिन व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से मेहमाननवाज़ी असामान्य बात है."

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर नज़र रखने वाले विश्लेषक डेरेक ग्रॉसमैन ने लिखा है, "अब समय आ गया है कि भारत आवाज़ उठाए. ट्रंप व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मिलने वाले हैं, वही जनरल मुनीर जिसे भारत आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड मानता है."

इसके बाद अक्तूबर में एक बार फिर ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाक़ात की.

इस दौरान उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर उनसे मिले तो उन्होंने 'सम्मानित' महसूस किया.

आसिम मुनीर की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान के बेहद अहम शख्स मुझसे मिले. उन्होंने लाखों जानें बचाने के लिए मेरी तारीफ़ की.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.