रूस के उस गुप्त हथियार को लेकर रहस्य बरक़रार जो यूक्रेन में गिरा

    • Author, अब्दुजलील अब्दुरासुलोव
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, कीएव

पूर्वी यूक्रेन की अग्रिम चौकियों के नज़दीक आसमान में भाप की दो सफ़ेद लकीरें दिखने के साथ ही ये साफ़ हो गया कि रूसी लड़ाकू विमान हमला करने वाले हैं.

लेकिन कोस्तियातिन्विका शहर के नज़दीक जो हुआ वो अभूतपूर्व था.

भाप की निचली लकीर दो हिस्सों में बंट गई और एक नई चीज़ दूसरी लकीर की तरफ़ तेज़ी से बढ़ी.

इसके बाद दोनों ने एक दूसरे को पार किया और फिर आसमान नारंगी रोशनी से नहा उठा.

कई लोग ये कयास लगा रहा थे कि रूसी सेना के दो लड़ाकू विमानों ने एक दूसरे को मार गिराया है. वहीं कुछ लोगों का ये मानना था कि किसी यूक्रेनी विमान ने रूसी विमान को मार गिराया है. जहां ये हादसा हुआ वो इस अग्रिम चौकी से सिर्फ 20 किलोमीटर दूर है.

यूक्रेनियों के बीच इसे लेकर बड़ा कौतूहल था. लेकिन जल्द ही उन्हें आसमान से गिरा मलबा दिखा.

उन्होंने देखा कि रूस का बिल्कुल नया हथियार यानी एस-70 ओखोत्निक लड़ाकू ड्रोन ध्वस्त हुआ पड़ा है.

चौंकाने वाला हथियार

ये कोई आम ड्रोन नहीं था. इसका नाम है ओखोत्निक (शिकारी). ये मानवरहित ड्रोन किसी फाइटर जेट की तरह ही बड़ा है लेकिन इसमें कॉकपिट नहीं था.

इसकी टोह लेना बेहद मुश्किल है. इसे बनाने वालों का कहना है कि इस तरह का कोई ड्रोन फिलहाल दुनिया में मौजूद नहीं है.

हो सकता है कि ये सच हो. लेकिन ये साफ़ है कि ये राह भटक गया था. लेकिन ऐसा लगता है कि वीडियो में दिख रही दूसरी लकीर रूसी एसयू-57 विमान से आ रही है.

ये साफ़ दिख रहा है कि वो इसे मार गिराने के लिए इसका पीछा कर रहा है.

हो सकता है कि रूसी विमान राह भटक चुके ड्रोन से संपर्क करने की कोशिश कर रहा हो.

लेकिन वे दोनों यूक्रेनी रक्षा क्षेत्र में उड़ रहे थे. माना जा रहा है कि ओखोत्निक कहीं दुश्मन के हाथ न पड़ जाए इसलिए इसे नष्ट करने का फैसला किया गया.

हालांकि ना तो रूस और ना ही यूक्रेन ने कोस्तियातिन्विका के नज़दीक आसमान में हुए इस हादसे को लेकर बयान दिया है.

लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि रूसी सैनिकों का इस ड्रोन पर नियंत्रण ख़त्म हो गया होगा. शायद ऐसा यूक्रेनी वॉरफेयर सिस्टम के जैमर की वजह से हुआ होगा.

क्या रूस ने ख़तरनाक एस-70 ड्रोन बना लिया है?

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही इस जंग में कई तरह के ड्रोन सामने आ चुके हैं लेकिन अभी एस-70 जैसा ड्रोन नहीं दिखा था.

इसका वज़न 20 टन होता हैऔर यह 6000 किलोमीटर तक मार करने के लिए जाना जाता है.

यह किसी तीर की तरह होता है और काफी हद तक अमेरिकी स्टेल्थ लड़ाकू ड्रोन एक्स-47बी की तरह दिखता है. अमेरिका ने इसे एक दशक पहले विकसित किया था.

माना जाता है कि ओखोत्निक बम और रॉकेट ले जा सकता है और ज़मीन और हवा दोनों जगह अपने लक्ष्यों पर हमला कर सकता है. ये टोही विमान की तरह भी काम कर सकता है.

इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये रूस की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 के साथ तालमेल कर काम कर सकता है.

इसे विकसित करने का काम 2012 से ही चल रहा था. 2019 में इसने पहली बार उड़ान भरी थी.

लेकिन पिछले सप्ताह इस बात का कोई सुबूत नहीं मिला था कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे ढाई साल पुराने युद्ध में इसका इस्तेमाल हो रहा है.

ऐसी ख़बरें हैं कि इस साल की शुरुआत में इसे दक्षिणी रूस के अख्तुबिन्सक एयरफील्ड में देखा गया था. यूक्रेन पर रूस जिन जगहों से हमला करता है उनमें ये भी शामिल है.

इसलिए ये कहा जा रहा है कि कोस्तियातिन्विका में जो ड्रोन गिरा है वह युद्ध के इस माहौल में इस नए हथियार को टेस्ट करने की कोशिश का नतीजा था.

रूस की रणनीति के बारे में क्या बताता है ये नया हथियार

कहा जा रहा है कि रूस के लंबी रेंज वाले ग्लाइड बम डी-30 भी दुर्घटनास्थल के पास मिले हैं. ये सैटेलाइट नेविगेशन का इस्तेमाल करने की वजह से और ख़तरनाक हो जाते हैं.

अब सवाल उठता है ओखोत्निक एसयू-57 लड़ाकू विमान के साथ क्यों उड़ रहा था?

इसका जवाब देते हुए यूक्रेनी एविएशन एक्सपर्ट अनातोली खरापचिन्सिकी ने कहा कि इस लड़ाकू विमान ने ग्राउंड बेस से ड्रोन को कोई सिग्नल भेजा होगा ताकि उनके ऑपरेशन का दायरा बढ़ाया जा सके.

इस लड़ाकू ड्रोन का नाकाम होना निश्चित तौर पर रूस की सेना के लिए एक बड़ा झटका है.

इस साल इसका प्रोडक्शन शुरू होना था लेकिन अब ये साफ है कि ये मानवरहित ड्रोन अभी पूरी तरह तैयार नहीं है.

समझा जा रहा कि एस-70 के चार प्रोटोटाइप बने हैं और संभवत: यूक्रेन के आसमान में हादसे का शिकार विमान इन चारों में सबसे उन्नत रहा हो.

बहरहाल भले ही ये ध्वस्त हो गया हो लेकिन यूक्रेनी सेना इसमें से ओखोत्निक के बारे में कई अहम जानकारियां हासिल कर सकती हैं.

अनातोली खरापचिन्सिकी ने कहा, ''हमें इससे ये जानकारी मिल सकती है कि क्या अपने टारगेट का पता करने के लिए इसमें रडार सिस्टम लगा हुथा था. या फिर इसकी पहले से प्रोग्रामिंग की गई थी ताकि वो ये पता कर सके कि कहां वार करना है.''

ये रूसी ड्रोन जहां दुर्घटना का शिकार हुआ है वहां की तस्वीर देखकर उन्होंने कहा कि ये साफ है कि इसकी मारक क्षमता थोड़ी सीमित है.

चूंकि इसका इंजिन नॉजल गोल है इसलिए रडार इसका पता कर सकता है. यही बात विमान में लगे कई रिवेट्स पर भी लागू होती है जो ज्यादातर एल्यूमीनियम के बने होते हैं.

इसमें कोई शक नहीं है कि यूक्रेनी इंजीनियर विमान के मलबे को पूरी तरह खंगाल डालेंगे. फिर इससे हासिल जानकारियां यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगी देशों के साथ साझा की जाएगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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