अनंतनाग में सेना का चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान में अभी क्या चल रहा है?- प्रेस रिव्यू

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कश्मीर में भारतीय सेना के दो अफसरों और एक डीएसपी की चरमपंथियों के साथ मुठभेड़ में मौत के बाद दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में हथियारबंद चरमपंथियों की तलाश पूरे ज़ोर-शोर से जारी है.
गुरुवार को सेना और चरमपंथियों के बीच रह-रह कर गोलीबारी होती रही.
इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है,''बुधवार को घने जंगलों में तलाशी अभियान के दौरान इसराइली हेरोन यूएवी, क्वॉडकॉप्टर और खोजी कुत्तों को लगाया गया. तलाशी अभियान गुरुवार को तड़के तक जारी रहा. अभियान में कमांडो और अतिरिक्त सैन्य बल लगाया गया.''
सूत्रों के मुताबिक़ तलाशी अभियान को और सघन बनाने के लिए राष्ट्रीय राइफल्स को भी सतर्क कर दिया गया था.
सेना ने अपने बयान में अपने दो अफसरों की मौत की पुष्टि कर दी है. उसने कहा है कि मुठभेड़ के दौरान दो जवान घायल भी हुए हैं.
'इंडियन एक्सप्रेस' ने इस मुठभेड़ के बारे में छपी अपनी ख़बर में लिखा है, ''जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि लश्कर-ए-तैयबा के दो चरमपंथियों को घेर लिया गया है. उनमें एक स्थानीय चरमपंथी की पहचान उजैर ख़ान के तौर पर हुई है.''
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ट्विटर पर लिखा है, ''कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष धोंचक और डीएसपी हुमायूं भट्ट की अदम्य वीरता को सलाम. इन्होंने इस ऑपरेशन के दौरान सामने से मुक़ाबला करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी. हमारी सेना उजैर ख़ान सहित लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को घेरने में अपने अटूट संकल्प के साथ जुटी हुई है.''
हालांकि इसके बाद इस ऑपरेशन के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा गया है. ज्यादा अंधेरा होने के बाद सेना का ऑपरेशन कुछ दिनों तक रोक दिया गया.
जब सेना का घेरा और कड़ा किया गया था तो चरमपंथियों के भागने के संभावित रास्तों पर फ्लैश लाइट लगा दिए गए थे. सेना के जवान नाइट-विजन डिवाइस से लैस कर दिए गए थे.
अख़बार ने लिखा है कि सेना के सूत्रों ने इस मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के शामिल होने के संकेत दिए हैं.
एक अधिकारी ने कहा, ''ये लश्कर-ए-तैयबा के चरमपंथी ही होंगे. क्योंकि वे अच्छी तरह प्रशिक्षित होते हैं. उनकी ओर से रुक-रुक कर गई गोलीबारी से जाहिर है कि ये प्रशिक्षित चरमपंथियों का ही काम है. वही इस तरह की गोलीबारी करके सेना के लोगों को रोक सकते हैं.''
इस मुठभेड़ में 19वीं राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल मनप्रीत सिंह और मेजर आशीष धोंचक की मौत हो गई थी.
गुरुवार को उनके शवों को एयरलिफ्ट कर श्रीनगर ले जाया गया. वहाँ डीएसपी हुमायूं मुज़ामिल भट्ट घायल हो गए थे. उन्हें सेना ने खोज कर श्रीनगर पहुंचाने की कोशिश की लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई थी.
बिलकिस बानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो रेप मामले में कहा है कि कुछ अभियुक्तों को दूसरों की तुलना में ज्यादा विशेषाधिकार मिल जाते हैं. वे इतने विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं जेल से भी बाहर निकल जाते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो के रेप और उनके परिवार के 14 लोगों की हत्या के मामले में दोषियों को रिहा करने के खिलाफ की गई अपील की सुनवाई दौरान ने ये टिप्पणी की.
टाइम्स ऑफ इंडिया सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की ख़बर देते हुए लिखा है कि इस मामले में दोषियों को गुजरात सरकार की ओर दी गई माफी का विरोध किया था.
गुजरात सरकार की ओर से कहा गया था कि ये लोग 15 साल की सजा भुगत चुके हैं इसलिए रिहा किए जा सकते हैं.
अभियुक्तों में एक के लिए दलील देते हुए वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि इस मामले में कानून अपना काम कर चुका है क्योंकि दोषियों ने 15 साल की सजा काट ली है.
दरअसल, लूथरा अगस्त में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले की याद दिला रहे थे, जिसमें उसने कहा था कि अभियुक्तों को समय पूर्व रिहा करने के मामले में सिर्फ़ इस बात से प्रभावित नहीं होना चाहिए कि उनका अपराध कितना गंभीर है.
जूडिशल रिकॉर्ड के आधार पर सिर्फ़ ट्रायल कोर्ट और पुलिस के बयान को अभियुक्तों को माफ़ी देने का आधार नहीं बनता.
सुप्रीम कोर्ट बिलकिस बानो मामले में गुजरात सरकार की ओर से दोषियों को रिहा किए जाने के ख़िलाफ़ की गई अपील पर सुनवाई कर रह था. सीपीएम लीडर सुभाषिणी अली, स्वतंत्र पत्रकार रेवती लाल,
लखनऊ यूनिवर्सिटी की पूर्व वाइस चासंलर रूपरेखा वर्मा और टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने इस मामले में रिहाई के फैसले को रद्द करने की अपील की थी.
सरकार को महंगाई का डर, स्टॉक सीमा घटाई
सरकार ने गेहूं की कीमतों में तेजी आने के बीच गुरुवार को गेहूं व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़ी रिटेल चेन विक्रेताओं पर स्टॉक सीमा को 3,000 टन से घटाकर 2,000 टन कर दिया है.
बिज़नेस स्टैंडर्ड के मुताबिक़ यह क़दम तत्काल प्रभाव से लागू होगा. उधर, सरकारी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि गेहूं पर आयात शुल्क हटाने की कोई योजना नहीं है.
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा, ''क़ीमतों में हालिया वृद्धि को ध्यान में रखते हुए हमने स्टॉक सीमा की समीक्षा की है और आज से व्यापारियों, थोक विक्रेताओं और बड़ी खुदरा श्रृंखला के विक्रेताओं के लिए स्टॉक सीमा को घटाकर 2,000 टन कर दिया गया है''.
तीन महीने पहले 12 जून को सरकार ने इन गेहूं कारोबारियों पर मार्च, 2024 तक 3,000 टन की स्टॉक रखने की सीमा लगाई थी.
चोपड़ा ने कहा था, ''स्टॉक सीमा को घटाकर 2,000 टन कर दिया गया है क्योंकि सरकार ने पाया कि पिछले एक महीने में एनसीडीईएक्स पर गेहूं की क़ीमतों में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह बढकर 2,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. सरकार आगामी त्योहारी मौसम में महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए जरूरत पड़ने पर गेहूं का अधिक स्टॉक जारी करेगी.''
उन्होंने कहा, ''देश में गेहूं, चावल और चीन की पर्याप्त उपलब्धता है लेकिन कुछ तत्व अफवाहों की मदद से फायदा उठाना चाहते हैं। चोपड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ‘कुछ कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.''
देश में गेहूं के दाम सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं. हालांकि चीनी के दाम गुरुवार को छह साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए.
चोपड़ा ने कहा कि देश में चीनी का 85 लाख टन का पर्याप्त भंडार है और यह साढ़े तीन महीनों की जरूरतों को पूरा कर सकता है.
एनसीपी के नाम और चुनाव चिह्न पर चाचा-भतीजे में रस्साकशी

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर शरद पवार और भतीजे अजित पवार में रस्साकशी चल रही है.
हाल ही में, चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के लिए नोटिस का जवाब देने की मोहलत बढ़ाई थी.
इस बीच, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पत्रकारों से कहा कि हर किसी को अपना पक्ष रखने का अधिकार है.
अमर उजाला के मुताबिक़ पांच जुलाई को निर्वाचन आयोग को 40 सांसदों, विधायकों और एमएलसी के हलफनामों के साथ-साथ कुछ एनसीपी सदस्यों का एक प्रस्ताव भी मिला था, जिसमें उन्होंने अजित पवार को एनसीपी प्रमुख के रूप में चुना था. इस संबंध में पत्र 30 जून को लिखा गया था.
इससे दो दिन पहले अजित पवार ने एनसीपी को दो फाड़ कर दिया था और आठ मंत्रियों के साथ शपथ ग्रहण की थी. अजित ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी.
एनसीपी पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम के दावे पर भारत चुनाव आयोग की सुनवाई पर अजित पवार ने कहा कि हर किसी को अपना पक्ष रखने का अधिकार है, हम भी चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखेंगे.
दोनों शरद पवार गुट और अजित पवार खेमे ने पार्टी के नाम और निशान के दावे पर चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब देने के लिए चार सप्ताह की मोहलत मांगी थी.
इस पर बाद में 14 अगस्त को, चुनाव आयोग ने एनसीपी के विरोधी गुटों को पार्टी के नाम और निशान से संबंधित नोटिस का जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है.
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