भारत के रास्ते रूसी तेल आने पर यूरोपीय संघ बोला- इससे निपटने पर विचार कर रहे हैं

कच्चा तेल

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जी20 देशों की एक बैठक के लिए भारत आए यूरोपीय संघ के एक आला अधिकारी ने रूसी तेल के इस्तेमाल से बन रहे पेट्रोलियम उत्पादों के भारत के रास्ते यूरोपीय बाज़ारों तक पहुंचने को लेकर चिंता जताई है.

यूरोपीय कमिशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष और ट्रेड कमिश्नर वाल्दिस दोम्ब्रोविस्की ने कहा है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद रूस पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं ताकि वो यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध को लंबे वक्त तक न चला सके.

लेकिन रूसी तेल से बना सामान भारत के रास्ते से होकर यूरोपीय बाज़ारों में पहुंच रहा है और इस तरह उस पर लगी पाबंदियों का कोई असर नहीं पड़ रहा.

उन्होंने कहा कि यूरोपीय बाज़ारों में "बड़ी मात्रा" में रूसी तेल से बने पेट्रेलियम उत्पाद पहुंच रहे हैं और यूरोपीय संघ इससे निपटने के तरीकों पर विचार कर रहा है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार भारत और यूरोपीय संघ के अधिकारियों के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत में रूसी तेल के इस्तेमाल से बने उत्पादों के भारत के रास्ते यूरोपीय बाज़ारों तक पहुंचने के मुद्दे को भी उठाया गया.

हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि संघ के अधिकारियों का कहना है कि इससे भारत और यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर हो रही बातचीत पर नहीं पड़ेगा.

शनिवार को वाल्दिस दोम्ब्रोविस्की ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रूस अनाज और ऊर्जा सप्लाई में अपनी भूमिका का इस्तेमाल यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध जारी रखने के लिए "एक हथियार" की तरह कर रहा है.

वाल्दिस दोम्ब्रोविस्की

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भारत में रिफाइनिंग, यूरोप को निर्यात

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  • इसी साल अप्रैल में ब्लूमबर्ग में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की मदद से, रूसी तेल अब भी यूरोप पहुंच रहा है.
  • इसी साल मई में यूरोपीय संघ के विदेश नीति मामलों के प्रमुख जोसेप बुरेल ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि भारत बड़े पैमाने पर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है और उसे प्रोसेस कर आगे यूरोप को निर्यात कर रहा है. उन्होंने इसे पाबंदियों को पार करने जैसा बताया और कहा कि सदस्य देशों को इसे रोकने के लिए कदम उठाने की ज़रूरत है.
  • रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2022 में भारत का यूरोप को तेल उत्पादों का निर्यात 70 फीसदी तक बढ़ा है और ये ट्रेंड दिखाता है कि रूस पर लगी पाबंदियों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है.
  • मई में आयात रोकने को लेकर दिए बयान के बाद जोसेप बुरेल ने जून में कहा कि वो भारत सरकार की आलोचना नहीं कर रहे थे, बल्कि वो ये कहना चाहते थे कि यूरोपीय संघ की कंपनियां जिस तरह पाबंदियों को पार कर रही हैं उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता.
  • अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार शिप-ट्रैकिंग का डेटा रखने वाले केप्लर के आंकड़ों के अनुसार यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत यूरोप को औसतन 154,000 बैरल प्रतिदिन डीज़ल और जेट फ्यूल सप्लाई करता था. इस साल फरवरी में यूरोपीय संघ के रूस से तेल आयात करने पर पाबंदी लगाए जाने के बाद इसमें बढ़ातरी दर्ज की गई और निर्यात का ये आंकड़ा बढ़कर 200,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया.

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तेल के टैंकर

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'व्यापार में एक नया ट्रेंड दिख रहा है'

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वाल्दिस दोम्ब्रोविस्की ने कहा, "हम ये जानते हैं कि चीन और भारत जैसे कुछ देशों ने रूस पर लगी पाबंदी को मानने से इनकार किया है. और हम ये भी जानते हैं कि रूस अपने सामान के लिए यूरोपीय बाज़ार खो चुका है और अब वो सक्रिय रूप से अपने लिए वैकल्पिक बाज़ारों की तलाश कर रहा है."

भारत के रूस से सस्ती दर पर कच्चा तेल खरीदने को लेकर उन्होंने कहा कि "हम व्यापार में एक नया ट्रेंड देख रहे हैं, ये नए मुद्दे हैं और हम इसके असर के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं."

उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त में यूरोपीय संघ के देश भारत से रिफ़ाइन्ड तेल के उत्पादों का अधिक मात्रा में आयात कर रहे हैं.

उन्होंने इनके उत्पादन में रूसी तेल के होने को लेकर चिंता जताई और कहा, "अगर ये उत्पाद रूसी तेल से बनाए जा रहे हैं तो ये उस पाबंदी को पार करने जैसा है जो रूस पर लगाई गई है. पश्चिम के गणतांत्रिक मुल्कों ने युद्ध में रूस की क्षमता को कम करने के उद्देश्य से उसपर पादंबियां लगाई थीं. ये बेहद गंभीर मुद्दा है."

दोम्ब्रोविस्की का कहना था कि रूस के लिए उसके राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत तेल और तेल उत्पाद थे इसलिए युद्ध के बाद उसपर जो पाबंदियां लगाई गईं उनमें इन समानों को भी केंद्र में रखा गया.

उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त की भू-राजनीतिक स्थिति ऐसी बेहद संवेदनशील है, मुल्कों में विरोधाभास है और ऐसे में भरोसा और विश्वसनीयता का मूल्य काफी बढ़ गया है.

उन्होंने कहा, "रूस ऊर्जा सप्लाई की अपनी क्षमता और अनाज का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रहा है. लेकिन सामान या राजनीतिक व्यापार जैसा कुछ नहीं होता. व्यापार के मसले, भू-राजनीति, दोस्ती सभी आपस में जुड़े हुए हैं."

"इस लिहाज़ से भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी बेहद अहम है. ये एक बड़ी चुनौती है और भारत और यूरोपीय संघ को इसके लिए मिलकर काम करना होगा."

वीडियो कैप्शन, यूक्रेन किस मोर्चे पर रूस के सामने साबित हो रहा है बेबस

अनाज समझौता और रूस

रूस ने बीते साल फरवरी में यूक्रेन पर हमला किया था. इसके विरोध में पश्चिमी मुल्कों ने रूस पर कई आर्थिक और व्यापार संबंधी पाबंदियां लगाईं. जी-7 मुल्कों ने रूस से होने वाले तेल के निर्यात पर भी प्राइस कैप लगाया.

हालांकि इस दौरान भारत को रूस से सस्ते में तेल मिल रहा था इस कारण उसके तेल आयात में बढ़ोतरी देखने को मिली.

युद्ध के कारण पैदा हुए अनाज संकट से निपटने के लिए रूस और यूक्रेन के बीच संयुक्त राष्ट्र और तुर्की की मध्यस्थता से 22 जुलाई 2022 को अनाज समझौता हुआ. इसे नवंबर 2022, मार्च 2023 और मई 2023 में तीन बार रीन्यू किया गया लेकिन फिर 17 जुलाई 2023 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने समझौते से पीछे हटने का फ़ैसला किया और अनाज समझौता ख़त्म हो गया.

पश्चिमी मुल्कों का आरोप है कि रूस ने अनाज समझौते से तो अपने हाथ पीछे खींच ही लिए हैं, वो यूक्रेन से बंदरगाहों से निकल कर अनाज के विश्व बाज़ार तक पहुंचने को भी बाधित कर रहा है.

वहीं रूस का कहना था कि पश्चिमी देशों ने उस पर कड़ी पाबंदियां लगाकर ‘खुलेआम हमला किया है’ और अपने व्यावसायिक हितों को मानवीय उद्देश्यों से ऊपर रखा है.

वो चाहता है कि उसके कृषि बैंक रोसेलखोजबैंक को स्विफ्ट (दुनियाभर में बैंकों के बीच लेनदेन को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था) में फिर से शामिल कर लिया जाए.

व्लादिमीर पुतिन, अर्दोआन

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इमेज कैप्शन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन

क्या कहते हैं आंकड़े?

रूस का निर्यात

रूस की बात करें तो साल 2021 तक उसके निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा तेल और तेल उत्पादों, प्राकृतिक गैस और कोयले का था. और इन चीज़ों के सबसे बड़े खरीदार चीन, जर्मनी, अमेरिका, बेलारूस और कोरिया थे.

बीबीसी न्यूज़नाइट के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता अमीर नादेर कहते हैं ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि यूके ने हाल के महीनों में भारत की रिफाइनरियों से ऐसे जेट फ्यूल का आयात बढ़ा दिया है, जिसके उत्पादन में रूस के कच्चे तेल का इस्तेमाल होता है.

ग्लोबल विटनेस नाम के एक कैंपेन ग्रूप के अनुसार आयात-निर्यात का ये रास्ता क़ानूनी ज़रूर है लेकिन इसके साथ कई नैतिक सवाल जुड़े हैं.

अनाज डील

भारत-रूस व्यापार

साल 2021 के आयात-निर्यात के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि भारत कच्चे तेल का सबसे अधिक आयात इराक़, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से किया. वहीं तेल उत्पादों के निर्यात के मामले में उसका सबसे अधिक निर्यात दक्षिण अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को हो रहा था.

वहीं 2022 के आंकड़ों के अनुसार रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात बढ़ने लगा, हालांकि अभी भी भारत संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कुवैत से अधिक तेल खरीद रहा था. इस साल निर्यात के मामले में वो रिफाइन्ड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और टोगो को बेच रहा था.

साल 2023 की शुरूआत तकके आंकड़ों की मानें तो स्थिति बदलने लगी थी और रूस से कच्चा तेल खरीदने में चीन के बाद भारत सबसे आगे हो गया. वहीं तेल उत्पादों का इसका निर्यात नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इटली जैसे देशों को बढ़ने लगा.

पुतिन और मोदी

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भविष्य की राह

हाल के वक्त में भारत के साथ यूरोपीय संघ का व्यापार बढ़ रहा है. यूरोपीय संघ भारत का दूसरा बड़ा व्यापार सहयोगी है. बीते साल दोनों के बीच 120 अरब यूरो का व्यापार हुआ जिसमें भारतीय निर्यात की हिस्सेदारी 10.8 फीसदी थी. वहीं बाकी मुल्कों के साथ यूरोपीय संघ के व्यापार की तुलना में भारत की हिस्सेदारी दो फीसदी है.

दोम्ब्रोविस्की का कहना है कि वो मानते हैं कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार में अभी और भी संभावना है और यूरोपीय संघ भारत के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने में इच्छुक है.

भारत और यूरोपीय संघ के बीच फिलहाल तीन समझौतों के लेकर चर्चा चल रही है-

1- मुक्त व्यापार समझौता

2- निवेश की सुरक्षा के लिए समझौता

3- जियोग्राफिकल इंडीकेशन्स समझौता

दोनों ने बीते साल आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमिकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जानकारी साझा करने और तकनीकी साझेदारी के लिए भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और तकनीक काउंसिल बनाने की घोषणा की थी.

भारत के साथ यूरोपीय संघ का इस तरह का ये दूसरा काउंसिल है. इससे पहले जून 2021 में संघ ने अमेरिका के साथ इस तरह की तकनीकी साझेदारी की थी.

वीडियो कैप्शन, तेल की ज़रूरत पर क्या हम रोक लगा सकते हैं? - दुनिया जहान
वीडियो कैप्शन, COVER STORY: यूक्रेन के युद्धबंदियों का हुआ टॉर्चर

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