सावरकर पर राहुल गांधी के बयान को लेकर घमासान, क्या है मामला?

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वीर सावरकर पर दिए गए बयान पर राजनीति गरमा गई है.
एक ओर जहाँ बीजेपी नेता राहुल गांधी पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी रही शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे ने उनके बयान से किनारा कर लिया है.
इसके साथ ही सावरकर के पोते ने राहुल गांधी के ख़िलाफ़ मुंबई में शिकायत दर्ज कराई है.
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के वाशिम ज़िले में आयोजित एक रैली में वीर सावरकर को लेकर बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा था.
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मंगलवार को राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में रैली की.
बिरसा मुंडा जयंती के मौक़े पर राहुल गांधी आदिवासियों को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा कि एक ओर बिरसा मुंडा जैसी महान शख्सियत हैं, जो अंग्रेज़ों के सामने झुकी नहीं और दूसरी ओर सावरकर हैं, जो अंग्रेज़ों से माफ़ी मांग रहे थे.
राहुल गांधी ने कहा, ‘‘भगवान बिरसा मुंडा जी 24 साल की आयु में शहीद हो गए. अंग्रेज़ों ने उन्हें ज़मीन देने की कोशिश की, धन देने की कोशिश की, उन्हें ख़रीदने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने सब नकार दिया. उन्होंने कहा कि मुझे अपने लोगों को हक़ दिलवाना है. अब बीजेपी के चिन्ह को देखिए, आरएसएस के चिन्ह को देखिए, सावरकर जी. दो-तीन साल उन्हें अंडमान में बंद कर दिया तो उन्होंने चिट्ठी लिखनी शुरू कर दी कि हमें माफ़ कर दो, जो भी हमसे चाहते हो ले लो. बस मुझे जेल से निकाल दो.’’
राहुल गांधी ने कहा कि एक ओर जहाँ भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेज़ों का डटकर मुक़ाबला किया, उनके सामने झुके नहीं, वहीं दूसरी ओर सावरकार ने अंग्रेज़ों के सामने घुटने टेक दिए.

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महाराष्ट्र की सियासत गरमाई
राहुल गांधी के इस भाषण पर बीजेपी ने पलटवार किया.
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर राहुल गांधी ने जो टिप्पणी की है, उसका जवाब महाराष्ट्र की जनती उन्हें देगी.
फडणवीस ने कहा, ‘‘वीर सावरकर के बारे में राहुल गांधी के बेशर्म बयान और व्यवहार का जवाब महाराष्ट्र की जनता देगी. सावरकर देश के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो आज़ादी से पहले कारावास की सज़ा काट चुके हैं. आज़ादी के बाद भुखमरी की क़ैद झेली. उन्होंने जितने अत्याचार सहे, उतने अत्याचार किसी और ने नहीं सहे.’’
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राहुल गांधी की अगुआई में चल रही कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा जब महाराष्ट्र में पहुँची, तो शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे भी इसमें शामिल हुए.
देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी और आदित्य ठाकरे की इस मुलाक़ात पर भी सवाल उठाए,
उन्होंने कहा, ‘‘सावरकर के ख़िलाफ़ अगर किसी ने एक शब्द भी बोला, तो उसे वचन और कर्म से करारा जवाब मिला और अब राहुल गांधी सावरकर के बारे में ऐसी बात करते हैं. अब जब बालासाहेब ठाकरे स्वर्ग से देख रहे हैं कि आदित्य ठाकरे राहुल गांधी के साथ गले लगकर चल रहे हैं, तो वे क्या सोचेंगे?’’
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राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य के लोग हिंदुत्व विचारक के किसी भी अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे.
शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘महाराष्ट्र में श्रद्धेय स्वतंत्रता सेनानी का अपमान किया गया जबकि ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने इस मुद्दे पर नरम रुख़ अपनाया है.’’
महाराष्ट्र बीजेपी ने उद्धव ठाकरे पर सवाल उठाया है.
महाराष्ट्र बीजेपी ने एक ट्वीट किया, ‘‘उद्धव ठाकरे, हमारे डीएनए को हटाने के बजाय, वास्तव में आपमें यह परिवर्तन किस वजह से हुआ है? इसकी जाँच करें. उद्धव ठाकरे, आप राहुल गांधी से गले मिलकर आ गए.’’
इसके अलावा बीजेपी ने नेहरू को लेकर भी कई ट्वीट किए और नेहरू को ‘माफ़ीवीर’ बताया.
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उद्धव ठाकरे ने किया पलटवार

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सावरकर पर राहुल गांधी के बयान पर सियासी घमासान बढ़ा तो शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और राहुल गांधी के बयान से किनारा कर लिया.
उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘‘हम वीर सावरकर पर राहुल गांधी के बयान का समर्थन नहीं करते हैं. हमारे दिल में वीर सावरकर के लिए आदर और सम्मान है. उनके योगदान को कोई नहीं मिटा सकता है. मुझे तो हंसी आती है जब बीजेपी और संघ सावरकर की बात करते हैं, भारत को आज़ाद करवाने में इनका कोई योगदान नहीं था. उन्हें सावरकर के बारे में बोलने का कोई हक़ नहीं है.’’
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा- हम वीर सावरकर का सम्मान करते हैं, लेकिन साथ ही जब आप हमसे सवाल कर रहे हैं, तो बीजेपी को यह भी बताना चाहिए कि वे पीडीपी (जम्मू और कश्मीर में) के साथ सत्ता में क्यों थे. उन्होंने दावा किया कि पीडीपी कभी भी 'भारत माता की जय' नहीं कहेगी.
राहुल गांधी ने पेश की सावरकर की चिट्ठी
सावरकर पर दिए गए बयान पर राहुल गांधी कई लोगों के निशाने पर आ गए. गुरुवार को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मीडिया से बातचीत में उनसे इसे लेकर सवाल किए गए.
अपने जवाब में राहुल गांधी ने मीडिया के सामने सावरकर की लिखी चिट्ठी पेश की और कहा कि उन्होंने जो कुछ कहा है वो पुख्ता सबूत के साथ कहा है.
उद्धव ठाकरे की असहमति और बीजेपी की ओर से उठ रहे सवालों पर राहुल गांधी ने एक कागज़ दिखते हुए कहा, ‘‘ये मेरे लिए सबसे ज़रूरी डॉक्यूमेंट है. ये सावरकरजी की चिट्ठी है जो उन्होंने अंग्रेज़ों के लिए लिखी है. जिसकी आखिरी लाइन है- सर मैं आप का नौकर रहना चाहता हूं. वीडी सावरकार.’’
उन्होंने कहा, ‘‘ये मैंने नहीं लिखा. सावरकर जी ने लिखा है. आप इसको पढ़ लीजिए, देख लीजिए. अगर फडणवीस जी भी देखना चाहते हैं इसको वो भी देख लें. मैं तो इसमें बहुत स्पष्ट हूँ. सावरकर जी ने अंग्रेज़ों की मदद की थी.’’
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राहुल गांधी के बयान पर आरोप-प्रत्यारोप
राहुल गांधी के बयान से नाराज़ होकर वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने मुंबई के शिवाजी पार्क पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है.
एफ़आईआर में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक राष्ट्रपुरुष का अपमान किया है और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए.
रंजीत सावरकर ने इस बारे में एक ट्वीट भी किया.
उन्होंने लिखा, ‘‘स्वतंत्रता सेनानी सावरकर का अपमान करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की गई है, जिसमें उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की गई है.’’
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राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने नेहरू को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा.
उन्होंने एक ट्वीट किया, ‘‘जवाहर लाल नेहरू, जिनकी कांग्रेस पूजा करती है, को उनके पिता ने (सितंबर 1923 में) बचाया था, सिर्फ इसलिए कि वो दो सप्ताह भी नाभा जेल की कठिनाइयों को सहन नहीं कर सके. उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने उनकी रिहाई के लिए अंग्रेज़ों को माफ़ीनामा लिखा. नेहरू कायर थे. तो ख़ुद में झांको.’’
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तेलंगाना के मुलुग से कांग्रेस विधायक दानासारी अनसूया उर्फ सीथक्का ने एक ट्वीट में लिखा, ‘‘माफ़ीवीर सावरकर इतने बहादुर थे कि उन्होंने अंग्रेज़ों को एक चिट्ठी लिखी और कहा कि सर, मैं आपका नौकर रहना चाहता हूँ. वो मान गए और उन्हें 60 रुपए पेंशन भी दी. छात्र, महिलाएँ, बुजुर्ग, युवा, सरकारी टीचर, सब भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हो रहे हैं.’’

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बीजेपी किसान मोर्चा ने एक ट्वीट कर राहुल गांधी पर निशाना साधा.
ट्वीट में बीजेपी किसान मोर्चा ने कहा, ‘‘राहुल गांधी, आपको पता होना चाहिए कि वीर सावरकर ने चाय परोसने या अंग्रेजों के चरणों में बैठने के बजाय एकांतवास में वर्षों बिताने का फैसला किया और भारत के लोगों की आज़ादी के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया.’’
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उद्धव ठाकरे और उनकी ‘सावरकर रेखा’

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सावरकर पर राहुल गांधी के बयान से उद्धव ठाकरे के किनारा करने पर बहुत से कांग्रेस नेताओं को हैरानी नहीं होगी.
महाराष्ट्र में शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से सरकार बनाई थी.
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक ख़बर के मुताबिक, साल 2020 की शुरुआत में जब उद्धव ठाकरे ने सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाक़ात की थी तब उन्होंने शिवसेना की सावरकर को लेकर संवेदनशीलता जाहिर की थी और कांग्रेस के लिए एक लकीर तय की थी.
अख़बार की रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्धव ठाकरे ने उस बैठक में स्पष्ट रूप से इस बारे में कहा था कि अगर राहुल गांधी ने हिंदुत्व आइकन सावरकर पर बयानबाज़ी बंद नहीं की तो शिवसेना, कांग्रेस के साथ गठबंधन में रहने या न रहने पर विचार कर सकती है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उद्धव ठाकरे ने सोनिया गांधी से अपील की थी कि वो इस बारे में राहुल गांधी को समझाएं क्योंकि सार्वजनिक तौर पर अगर वो सावरकर के ख़िलाफ़ बोलेंगे तो जनता के बीच शिवसेना को इसका नुक़सान होगा.
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