स्तनपान के बारे में वो सात बातें जो आपको जाननी चाहिए

    • Author, एएफ़रम गेबरीब
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

संयुक्त राष्ट्र दुनिया के तमाम देशों से अपील कर रहा है कि वो दफ़्तरों में महिलाओं को अपने बच्चों को स्तनपान कराने को बढ़ावा दें.

कामकाजी महिलाओं की स्तनपान की दर बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र एक सालाना अभियान भी चला रहा है.

इस अभियान में कहा गया है कि जिन बच्चों को उनकी माताएं स्तनपान नहीं कराती हैं, उनकी एक साल का होने से पहले मौत की आशंका 14 गुना बढ़ जाती है.

संयुक्त राष्ट्र ये अपील कर रहा है कि मां बनने वाली महिलाओं को पेड मैटरनिटी लीव दी जाए, दफ़्तर में काम के दौरान स्तनपान कराने के लिए ब्रेक दिए जाएं.

इसके साथ-साथ दफ़्तरों में ऐसे कमरे उपलब्ध कराए जाएं, जहां माताएं अपने बच्चों को स्तनपान करा सकें या अपना दूध दे सकें.

स्तनपान को लेकर अभी भी बहुत से मिथक फैले हुए हैं, जिनकी वजह से महिलाएं अपने बच्चों को स्तनपान कराने से परहेज़ करती हैं.

हमने इन मिथकों और अवधारणाओं को दूर करने के लिए दो विशेषज्ञों से बात की है.

कैटरिओना वाएट, ब्रिटेन की लिवरपूल यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल फार्मेकोलॉजी और ग्लोबल हेल्थ की प्रोफ़ेसर हैं.

वो युगांडा के कंपाला में मकेरेरे यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ हेल्थ में रिसर्च फेलो भी हैं.

वहीं, एलेस्टेयर सुटक्लिफ, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में बच्चों का इलाज करने वाले विभाग के प्रोफ़ेसर हैं.

मिथक 1: क्या स्तनपान के दौरान निपल को चोट पहुंचना और उनमें सूजन आना एक सामान्य बात है?

प्रोफ़ेसर कैटरिओना वाएट: इस सवाल का जवाब देना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि स्तनपान की शुरुआत में थोड़ी बहुत परेशानी होना तो आम बात है, और शुरुआत में निपल में सूजन आ सकती है.

हालांकि, बच्चों को दूध पिलाने से माताओं को स्तन में ज़्यादा दर्द या सूजन आनी तो नहीं चाहिए. अगर ऐसा होता है, तो इसका मतलब है कि निपल में संक्रमण है. या फिर, बच्चा उन्हें ठीक से पकड़ नहीं रहा है.

कुछ असहजता तो सामान्य बात है. और, पहली बार मां बनने वालों के लिए तो स्तनपान कराने की आदत पड़ने में थोड़ा वक़्त लगता ही है.

लेकिन, अगर इससे बहुत दर्द और तकलीफ़ होती हो, तो फिर डॉक्टर, नर्स या दाई से बात करनी चाहिए.

मिथक 2: अगर कोई तुरंत स्तनपान नहीं कराता, तो फिर वो बाद में अपने बच्चों को दूध नहीं पिला पाता

प्रोफ़ेसर एलेस्टेयर सुटक्लिफ: कोई भी बात जो मां को अपने बच्चे को स्तनपान कराने के लिए प्रेरित करे, वो कई मायनों में इंसान की सेहत के लिए अच्छी है.

इंसान के बर्ताव पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाना या समय की कोई सख़्त शर्त रखना, विज्ञान पर आधारित नहीं है.

लेकिन, बच्चे के पैदा होने के तुरंत बाद उसे स्तन से दूध पिलाने के कई फ़ायदे होते हैं. इसका सबसे बड़ा लाभ तो बच्चे को तुरंत पोषण देना होता है.

दूसरा, इससे गर्भाशय के सिकुड़ने की प्रक्रिया भी शुरू होती है, जिससे बच्चे पैदा होने के बाद गर्भाशय से होने वाला खून का रिसाव रोकने में भी मदद मिलती है.

इसके साथ साथ, बच्चे की पैदाइश के पहले कुछ दिनों के दौरान, मां का शरीर, ख़ास तरह के प्रोटीन से लैस तत्व कोलोस्ट्रम पैदा करती है. ये बहुत अच्छा तत्व होता है, जो स्तनपान के सफ़र का आग़ाज़ करता है.

मिथक 3: अगर आप बच्चे को दूध पिला रही हैं, तो कोई दवा नहीं ले सकती हैं

प्रोफ़ेसर कैटरिओना वाएट: आम तौर पर दुनिया भर में हर मां बनने वाली महिला का पहला सवाल यही होता है. वो पूछती है कि क्या कोई भी दवा लेना मेरे बच्चे के लिए महफ़ूज़ रहेगा?

हक़ीक़त ये है कि मां अगर कोई दवा लेती है, तो उनमें से बहुत सी ऐसी हैं, जो स्तनपान के ज़रिए थोड़ी तादाद में बच्चे तक भी पहुंचती हैं. अगर डॉक्टर ने कहा है कि आपको दवा लेने की ज़रूरत है, तो आप डॉक्टर से सवाल पूछ सकती हैं.

लेकिन, आम तौर पर ऐसी दवाएं बच्चों के लिए नुक़सानदेह नहीं होती हैं. बच्चे को सबसे ज़्यादा ज़रूरत एक स्वस्थ मां की होती है. संक्रमण, डिप्रेशन या दर्द की ज़्यादातर दवाएं लेना, बच्चों के लिए सुरक्षित होता है.

जो दवाएं स्तनपान के दौरान नहीं ली जानी चाहिए, उनकी तादाद बहुत कम है. इनमें से ज़्यादातर वो दवाएं हैं, जो कुछ ख़ास गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर के इलाज के लिए दी जाती हैं.

कुछ और दवाएं भी हैं, जिनको स्तनपान के दौरान लेने से पहले, उनके नफ़ा-नुक़सान के बारे में समझ लेना चाहिए.

कोई महिला जिसको स्तनपान के दौरान, कोई दवा खाने के लिए कहा गया है, उसको दवा लिखने वाले डॉक्टर से सवाल करने का पूरा हक़ हासिल होना चाहिए.

स्तनपान के दौरान जिन दवाओं को लेकर सावधान होना चाहिए, वो बिना डॉक्टर के प्रेसक्रिप्शन के मिलने वाली हैं. जैसे कि सर्दी जुकाम की वो दवाएं जिनसे जकड़न दूर की जाती है.

इन दवाओं से मां के दूध उतरने में कमी आ सकती है.

और, उन हर्बल दवाओं से तो आपको हमेशा सावधान रहना चाहिए, जिनके बारे में पता ही नहीं होता कि वो क्या हैं, उनमें कौन से तत्व मिले हुए हैं. कई हर्बल दवाएं तो पूरे रिसर्च के बग़ैर तैयार की जाती हैं.

मिथक 4: स्तनपान कराने से पहले आपको केवल सादा खाना खाना चाहिए और मसालेदार खाने से बचना चाहिए

प्रोफ़ेसर कैटरिओना वाएट: ऐसा कुछ भी नहीं है, जो आप बच्चे को दूध पिलाने से पहले नहीं खा सकती हैं. हालांकि, आप जो खाना खाते हैं, उसका असर आपके दूध पर भी पड़ता है.

कई मामलों में हो सकता है कि माताओं को एक पैटर्न देखने को मिले. मैंने अपने एक बच्चे को स्तनपान कराने के दौरान देखा था कि मैं जब भी खट्टे जूस जैसे कि संतरे का रस पिया करती थी, तो मेरा बच्चा बहुत खीझने लगता था.

कई बार आप देख सकते हैं कि आपके किसी ख़ास तरह का खाना खाने के बाद अपना बच्चा अजीब तरह का व्यवहार करता है. शायद इसका ताल्लुक़ आपके खान-पान से हो. लेकिन, ऐसा कोई खाना नहीं है जिसे स्तनपान के दौरान खाने से बचना चाहिए. या फिर, वो आपके बच्चे के लिए नुक़सानदेह हो सकता है.

मिथक 5: अगर आप स्तनपान कराना चाहती हैं, तो आप कभी भी ऊपर का दूध नहीं पिला सकती हैं

प्रोफ़ेसर कैटरिओना वाएट: ये कोई सिद्धांत नहीं है कि इसका पालन करना ज़रूरी है. लेकिन, स्तन में दूध आम तौर पर मांग और आपूर्ति के हिसाब से बनता है. किसी भी महिला का शरीर बहुत असाधारण ख़ूबियों वाला होता है, जिससे उनको अपने बच्चे की ज़रूरत भर का पर्याप्त दूध होता है.

जब, बच्चा निपल का चूसता है, तो इससे मां के शरीर से ऐसे हारमोन निकलते हैं, जो बच्चे की ज़रूरत भर का दूध पैदा करते हैं. इसीलिए, अगर आप बहुत छोटे बच्चे को दूध पिलाती हैं, एक बड़े से बच्चे को स्तनपान कराती हैं, या फिर आपके जुड़वां बच्चे हैं, तो भी आपके शरीर से पर्याप्त मात्रा में दूध पैदा होगा.

अगर आप बच्चों को बाहर का दूध पिलाना शुरू करती हैं, तो आपके शरीर को मिलने वाले हारमोन के संकेतों में बाधा पड़ती है. आपके शरीर को इस बात का इशारा नहीं मिल पाता कि आपके बच्चे को और ज़्यादा दूध की ज़रूरत है.

अगर आपके पर्याप्त दूध नहीं उतर रहा है, और आप बच्चे को फॉर्मूला दूध पिलाना शुरू कर देती हैं, तो फौरी तौर पर आपको भले ही राहत मिल जाए. पर, आगे चलकर इससे समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

वहीं दूसरी तरफ़, अगर आप रात में ठीक से सो नहीं सकी हैं. थकी हुई हैं या बीमार हैं, तो आपके पार्टनर बच्चे को कभी-कभार बाहर का थोड़ा सा दूध दे सकते हैं. लेकिन, इसका ये मतलब क़तई नहीं है कि उसके बाद आप बच्चे को अपना दूध नहीं पिला सकती हैं.

मिथक 6: बीमार हों तो बच्चे को स्तनपान नहीं कराना चाहिए

प्रोफ़ेसर एलेस्टेयर सुटक्लिफ: नहीं. ये एक मिथक है. सिर्फ़ एक परिस्थिति में कोई मां अपने बच्चे को दूध नहीं पिला सकती, और वो तब जब वो एटआईवी या हिपेटाइटिस से संक्रमित हो. ये वारयस दूध के ज़रिए बच्चे तक पहुंच सकते हैं. हम पहले ऐसा होते देख चुके हैं.

ज़्यादातर बीमारियों के दौरान बच्चों को मां का दूध पिलाने में कोई दिक़्क़त नहीं, क्योंकि बीमारी के दौरान मां के शरीर से एंटीबॉडी निकलती हैं, जो उनके नवजात बच्चों की भी हिफ़ाज़त करती हैं. मां की बीमारी बच्चों को भी हो जाए ऐसा बमुश्किल ही कभी होता है.

मिथक 7: अगर आप बच्चे को एक साल से ज़्यादा दूध पिलाती हैं, तो फिर स्तनपान की आदत छुड़ा पाना मुश्किल हो जाता है

प्रोफ़ेसर कैटरिओना वाएट: विश्व स्वास्थ्य संगठन का सुझाव है कि बच्चे के पैदा होने के छह महीने बाद तक उसको केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए.

इसके बाद उसे दूसरे पोषक तत्व देने शुरू करने चाहिए. लेकिन, इस दौरान मां को चाहिए कि वो जब तक चाहे, अपने बच्चे को स्तनपान भी कराती रहे. स्तनपान को कब रोक देना चाहिए, इसका कोई वक़्त जानकार नहीं सुझाते हैं.

ब्रिटेन जैसे ज़्यादा आमदनी वाले देशों में ज़्यादातर बच्चों को एक से दो साल के बीच में, मां का दूध पिलाने की आदत छुड़ा दी जाती है. जबकि, दूसरे कम आमदनी वाले देशों जैसे कि युगांडा में माएं अपने बच्चों को तीन तीन साल तक अपना दूध पिलाती रहती हैं.

एक वैश्विक समस्या ये है कि बहुत से देशों में पर्याप्त मात्रा में मैटरनिटी लीव नहीं दी जाती, जिससे माताएं अपने बच्चों को WHO के सुझाव के मुताबिक़, सिर्फ़ स्तनपान करा सकें.

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