आईवीएफ़ के बाद सामान्य गर्भधारण, क्या कहते हैं आंकड़े

रवि प्रकाश

बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय टेलीविजन की जानी-मानी अभिनेत्री देबिना बनर्जी अपनी दूसरी बेटी दिविशा को ‘मिरेकल बेबी’ कहती हैं.

देबिना बनर्जी ने अपने कई इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें अपने दूसरे गर्भधारण पर यकीन ही नहीं हो पा रहा था. दिविशा का जन्म उनके लिए चमत्कार जैसा है.

दरअसल, अप्रैल 2022 में उनकी पहली बेटी लियाना का जन्म आईवीएफ़ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक से हुआ था.

कुछ ही दिनों बाद वे दूसरी बार गर्भवती हो गईं. यह गर्भधारण बिल्कुल सामान्य (नॉर्मल प्रेग्नेंसी) था.

उन्होंने अपनी पहली बेटी के जन्म के महज सात महीने बाद अपनी दूसरी बेटी को जन्म दिया था. वह प्री मैच्योर डिलिवरी थी.

अब वे अपने पति गुरमीत चौधरी और दोनों बेटियों के साथ खुशहाल ज़िंदगी जी रही हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी दूसरी बेटी दिविशा का वाराणसी में मुंडन कराया है.

संभव है सामान्य प्रेग्नेंसी

नोएडा में रहने वाले और एक साफ्टवेयर कंपनी में काम करने वाले एक दंपति ने दस साल के वैवाहिक जीवन के बाद आईवीएफ़ तकनीक की मदद ली. पहले बच्चे के दो साल बाद वे दूसरी बार माता-पिता बन गए हैं. दूसरी बार नॉर्मल प्रेग्नेंसी थी.

दूसरी बार मां बनने की ख़ुशी ज़ाहिर करती हुई मिताली (बदला हुआ नाम) ने बताया, “हमें तो लगा था कि आईवीएफ़ के बाद आईवीएफ़ ही कराना होगा लेकिन डॉक्टरों ने भरोसा दिया था कि सामान्य प्रेग्नेंसी संभव है और यह हमारे साथ हुआ है.”

सरोगेसी और आईवीएफ़ तकनीक से इलाज करने वाले चिकित्सकों का भी मानना है कि आईवीफ़ से गर्भधारण के बाद नॉर्मल प्रेग्नेंसी के उदाहरण लगातार बढ़ रहे हैं.

रांची की डाक्टर रूपाश्री पुरुषोत्तम कहती हैं कि यह ज़रुरी नहीं कि आईवीएफ़ से पहले गर्भधारण के बाद हर बार इसी पद्धति का इस्तेमाल करना पड़े. हमारे यहां कई महिलाओं की दूसरी प्रेग्नेंसी बिल्कुल नॉर्मल हुई है और उनके दोनों बच्चे स्वस्थ हैं.

डाक्टर रूपाश्री पुरुषोत्तम ने बीबीसी से कहा, “आईवीएफ़ से गर्भधारण के बाद नॉर्मल प्रेग्नेंसी के मामले कई बार हमारी जानकारी में आते हैं और यह सामान्य बात है. दरअसल, अधिक उम्र में शादी या कुछ मामलों में मेडिकल कारणों से महिलाओं में इनफर्टिलिटी आ जाती है."

"तब वे आईवीएफ़ से गर्भधारण के लिए हमारे पास आती हैं. लेकिन, पहले बच्चे के जन्म के बाद उनका तनाव (स्ट्रेस लेवल) खत्म हो चुका होता है. वे खुश रहती हैं. पति-पत्नी के संबंध और मधुर हो जाते हैं तब उनकी नॉर्मल प्रेग्नेंसी के चांसेज बढ़ जाते हैं.”

उन्होंने कहा, “अधिक उम्र की अनफर्टाइल महिलाओं को आमतौर पर थायरायड, बल्ड प्रेशर, डायबिटीज़, स्ट्रेस जैसी शिकायतें भी रहती हैं. इस कारण आईवीएफ़ से पहले गर्भधारण के बाद उन्हें कई दफा दूसरे बच्चे के लिए भी आईवीएफ़ का सहारा लेना पड़ता है. "

"इसलिए आईवीएफ़ के बाद नॉर्मल डिलिवरी की दर थोड़ी कम है. लेकिन, अगर वे स्वस्थ हैं तो उनके दूसरे गर्भधारण के नॉर्मल होने की उम्मीदें ज्यादा बढ़ जाती हैं.”

क्यों होता है ऐसा

भारत में सरोगेसी की जानी-मानी डाक्टर नयना पटेल भी डाक्टर रूपाश्री की बातों से इत्तेफ़ाक़ रखती हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि आईवीएफ़ के बाद सामान्य गर्भधारण के सैकड़ों उदाहरण हैं.

लेकिन इसके लिए उस दंपती का खुश और तनावमुक्त रहना ज़रूरी है.

डाक्टर नयना पटेल ने कहा, “अगर किसी महिला में आईवीएफ़ के बाद भी अंडे की गुणवत्ता ठीक है. उनका अंडाशय (ओवरी) सामान्य है और उनके पति का स्पर्म काउंट भी नॉर्मल है, तो वैसी महिलाएं दूसरी बार सामान्य तरीके से गर्भवती हो जाती हैं."

"क्योंकि, पहले बच्चे के प्रसव के बाद उनका तनाव (स्ट्रेस लेवल) ख़त्म या कम हो चुका होता है. उनकी सेक्सुअल लाइफ अच्छी होती है. इन परिस्थितियों में उनकी नॉर्मल प्रेग्नेंसी बिल्कुल नॉर्मल है.”

क्या कहती है रिसर्च

आईवीएफ़ के बाद नॉर्मल प्रेग्नेंसी के मामलों पर की गई एक रिसर्च के बाद दावा किया गया है कि हर पांच में से एक अर्थात 20 प्रतिशत महिलाएं आईवीएफ़ से पहले गर्भधारण के बाद दूसरी बार नॉर्मल तरीके से गर्भवती हो जाती हैं.

इनमें से अधिकतर महिलाएं पहले गर्भधारण के तीन साल के भीतर दूसरी बार गर्भवती हुईं और बच्चों को जन्म दिया.

यह रिसर्च पेपर पिछले महीने (21 जून) ‘ह्यूमन रिप्रोडक्शन’ नामक शोध पत्रिका (जर्नल) में प्रकाशित हुआ है.

इसमें इंग्लैंड की 22 वैसी महिलाओं के साक्षात्कार भी शामिल किए गए हैं, जिन्होंने आईवीएफ़ से पहले गर्भधारण के बाद दूसरी बार सामान्य तरीके से गर्भवती होने में सफलता हासिल की.

अब पूरी दुनिया में ये आंकड़े चर्चा में बने हुए हैं.

यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ लंदन के इजीए इंस्टीट्यूट फॉर वीमेन हेल्थ की डाक्टर एनेट थ्वाइट्स के नेतृत्व में चार डाक्टर्स की टीम ने साल 1980 से 2021 के बीच दुनिया भर की 5000 से अधिक महिलाओं पर किए गए 11 शोधों के आंकड़ों के अध्ययन के बाद यह दावा किया है.

इस टीम में डाक्टर एनेट थ्वाइट्स के साथ डाक्टर जेनिफर हाल, डाक्टर ज्यूडिफ स्टेपहेंसन और डाक्टर गैरेलडाइन बैरेट भी शामिल थीं.

इस रिपोर्ट से सहमति जताते हुए दिल्ली में 'फेमिनेस्ट' नाम से आईवीएफ़ क्लीनिक चलाने वाली डॉक्टर सौजन्या अग्रवाल कहती हैं कि मोटे तौर पर 20 प्रतिशत महिलाएं आईवीएफ़ के बाद सामान्य तरीक़े से गर्भवती हो सकती हैं.

उन्होंने कहा, “दरअसल आईवीएफ़ की स्थिति तब ही आती है जब या तो महिलाओं के ट्यूब में ब्लॉक हो या फिर पति का स्पर्म काउंट सही नहीं है. या फिर दोनों में थोड़ी-थोड़ी समस्याएं हैं. तब आईवीएफ़ करते हैं. इस गर्भावस्था के दौरान छोटी मोटी समस्याएं दूर हो जाती हैं.”

हालांकि सौजन्या अग्रवाल ये भी मानती हैं कि आईवीएफ़ कराने वाली अधिकांश महिलाएं ये जानना चाहती हैं कि क्या अगली बार भी आईवीएफ़ ही कराना होगा.

उन्होंने कहा, “लोग पूछते हैं. कई बार पूछते हैं. इसका जवाब अलग अलग केस में अलग-अलग होता है और वहां तक पहुंचने से पहले हम लोग कई टेस्ट करते हैं. सभी टेस्ट सामान्य होने की सूरत में दूसरी बार नॉर्मल प्रेगेन्सी के चांसेज़ होते ही हैं.”

सभी टेस्ट सामान्य होने के बाद भी आईवीएफ़ की नौबत क्यों आती है, इसका जवाब देते हुए सौजन्या कहती हैं, “सच ये है कि सब कुछ नॉर्मल होने के बाद भी कुछ महिलाएं कंसीव नहीं कर पाती हैं, इसको मेडिकल शब्दावली में हमलोग अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी बोलते हैं. ऐसे मामले भी होते हैं और इन मामलों में भी दूसरी बार नॉर्मल प्रेगनेंसी के चांसेज होते हैं.”

कब शुरू हुआ आईवीएफ़

साल 1978 में आईवीएफ़ तकनीक पहली बार अमल में लायी गई थी. एक आंकड़े के मुताबिक पूरी दुनिया में अबतक एक करोड़ से अधिक बच्चों का जन्म इस तकनीक से कराया जा चुका है.

आईवीएफ़ से पहले गर्भधारण के बाद नॉर्मल प्रेग्नेंसी को लेकर पहले भी शोध होते रहे हैं. नई स्टडी में ऐसे शोधों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है.

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