You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
जय शाह: 35 साल की उम्र में क्रिकेट की दुनिया के सबसे ताक़तवर शख़्स
- Author, आनंद वासु
- पदनाम, क्रिकेट विश्लेषक, बीबीसी हिंदी के लिए
जय शाह इंटरनेशन क्रिकेट काउंसिल यानी आईसीसी के नए चेयरमैन बनने वाले हैं.
महज 35 साल की उम्र में इस पद तक पहुंचने वाले वो सबसे युवा क्रिकेट प्रशासक हैं.
हालाँकि लोगों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है कि उनसे पहले कौन सबसे कम उम्र का क्रिकेट प्रशासक इस पद पर आसीन रहा है.
दिलचस्प ये भी है कि ये पहला मौक़ा है, जब 57 साल से कम उम्र का कोई शख़्स आईसीसी का अध्यक्ष या चेयरमैन बन रहा है.
आईसीसी के पहले अध्यक्ष कॉलिन काउड्रे 1989 में जब अध्यक्ष बने थे, तब उनकी उम्र 57 साल थी.
उनके बाद 11 लोग आईसीसी के अध्यक्ष बन चुके हैं.
साल 2014 में जब एन श्रीनिवासन आईसीसी प्रमुख चुने गए, तबसे इसे आईसीसी चेयरमैन कहा जाने लगा. उनके बाद से तीन अन्य लोग चेयरमैन नियुक्त हो चुके हैं और जय शाह चौथे चेयरमैन होंगे.
जय शाह इस पद तक पहुँचने वाले पाँचवें भारतीय हैं. उनसे पहले जगमोहन डालमिया, शरद पवार, एन श्रीनिवासन और शशांक मनोहर आईसीसी के अध्यक्ष रह चुके हैं.
जय शाह अपनी नई ज़िम्मेदारी इसी साल 1 दिसंबर से संभालेंगे.
जय शाह के आईसीसी अध्यक्ष बनने की घोषणा होने के बाद सोशल मीडिया पर कई मीम्स देखने को मिले हैं.
इनमें क्रिकेट संस्था में शीर्ष तक उनके पहुँचने को उनके पिता और भारत के गृह मंत्री अमित शाह से जोड़कर देखा जा रहा है.
दुनिया की क्रिकेट पर भारत का दबदबा
वैसे जय शाह के आईसीसी अध्यक्ष के पद तक पहुँचने की वजह विश्व क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट बोर्ड का दबदबा है.
जय शाह भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव थे. भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पास वह सब कुछ है, जिसकी मौजूदा दौर में धाक है.
भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पास दर्शकों का सबसे बड़ा समूह और कॉरपोरेट घरानों का साथ है.
इतना ही नहीं, भारत की क्रिकेट टीम भी लगातार जीत हासिल कर रही है.
इन सबके बीच इंडियन प्रीमियर लीग जैसा कामयाब टूर्नामेंट भी है. यह सब दुनिया के किसी अन्य क्रिकेट बोर्ड के पास नहीं है.
क्रिकेट प्रशासक के तौर पर जय शाह का करियर ग्राफ़ भी शानदार रहा है.
उन्होंने साल 2009 में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अधीन ज़िला क्रिकेट प्रशासक के तौर पर शुरुआत की थी.
साल 2013 में वो गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के संयुक्त सचिव बने और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा है.
साल 2019 में जब वे बतौर सचिव बीसीसीआई में आए तो उनके पास बहुत ज़्यादा अनुभव नहीं था, लेकिन अब तक उनके काम करने की शैली ऐसी रही है कि वे दूसरों से सलाह मशविरा करते हैं.
जब उनके सामने आईसीसी से संबंधित या फिर बीसीसीआई से जुड़ी मुश्किल समस्याएं आईं, तो उन्होंने पूर्व क्रिकेट प्रशासकों से सलाह मशविरा किया है.
यहाँ तक कि उन्होंने विरोधी कैंप के माने जाने वाले एन श्रीनिवासन तक से सलाह ली है.
वहीं क्रिकेट से जुड़े मामलों के लिए वे काफ़ी हद तक भारत के पूर्व क्रिकेटर पार्थिव पटेल पर भरोसा करते हैं.
जय शाह के सामने कितनी चुनौतियां
अभी से यह यह कहना अजीब लग सकता है, लेकिन आईसीसी के चेयरमैन बनने के बाद वे भारतीय क्रिकेट के सबसे शक्तिशाली पद पर अपनी वापसी कर सकते हैं.
आईसीसी चेयरमैन के तीन साल के कार्यकाल के बाद, उनके सामने दूसरे कार्यकाल के लिए दावेदारी पेश करने का मौक़ा होगा या फिर वे भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर वापसी कर सकते हैं.
मौजूदा समय में सभी व्यावहारिक मक़सद के लिए भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष की भूमिका आईसीसी के चेयरमैन से कहीं ज़्यादा प्रभावी मानी जा सकती है.
बहरहाल, बतौर आईसीसी चेयरमैन जय शाह के सामने चुनौतियाँ कम नहीं है. आईसीसी क्रिकेट को दुनिया के अन्य देशों में तेज़ी से फैलाना चाहती है. इसके लिए आईसीसी ने आक्रामक रणनीति बनाई है.
इसी दिशा में पिछले वर्ल्ड टी-20 क्रिकेट मुक़ाबलों का आयोजन अमेरिका में किया गया. यह एक महंगा आयोजन था लेकिन इसे कामयाबी भी मिली.
इसके अलावा ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करने का मामला भी है.
यह तय है कि साल 2028 के ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल किया जा रहा है. हालांकि इससे पहले ही जय शाह का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा.
लेकिन उनके नेतृत्व में ही ओलंपिक खेलों में क्रिकेट के आयोजन को अंतिम रूप दिया जाना है.
ओलंपिक में किस फ़ॉर्मेट का क्रिकेट शामिल होगा, टीमों को चुनने का तरीक़ा क्या होगा , कितनी टीमें भाग लेंगी जैसे अन्य सवालों के जवाब जय शाह को तलाशने होंगे.
आईसीसी टूर्नामेंट के आधिकारिक प्रसारक स्टार टीवी के साथ प्रसारण अधिकार के लेकर जुड़ा मुद्दा भी जय शाह के सामने होगा.
स्टार टीवी ने पहले से आईसीसी से क़रीब 100 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 830 करोड़ रुपए की रियायत देने की मांग की है, स्टार टीवी का दावा है कि इन आयोजनों से उन्हें बहुत आमदनी नहीं हो रही है.
नई सोच और नए प्रयोग पर भरोसा
आईसीसी की ओर से जारी किए गए एक बयान में जय शाह ने कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के चेयरमैन के रूप में नामांकन से अभिभूत हैं.
उन्होंने क्रिकेट को दुनिया भर में फैलाने के लिए आईसीसी की टीम और सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्धा भी जताई है.
जय शाह ने कहा, "हम एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं, जहाँ कई प्रारूपों के क्रिकेट के एक साथ बनाए रखने के लिए संतुलन स्थापित करना, उन्नत तकनीकों को अपनाने को बढ़ावा देना और हमारे प्रमुख आयोजनों को नए वैश्विक बाज़ारों में पेश करना महत्वपूर्ण है."
जय शाह का कहना है कि उनका लक्ष्य क्रिकेट को पहले से कहीं अधिक समावेशी और लोकप्रिय बनाना है.
उन्होंने इसी बयान में ओलंपिक खेलों में क्रिकेट के मुद्दे पर कहा है कि अब तक सीखे गए मूल्यवान सीख के मुताबिक़ तो काम करेंगे ही, साथ में, दुनिया भर में क्रिकेट के प्रति प्यार को बढ़ाने के लिए नई सोच और नए प्रयोगों को भी अपनाना होगा.
जय शाह ने कहा, "लॉस एंजेलेस ओलंपिक, 2028 में हमारी भागीदारी क्रिकेट के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है और मुझे पूरा भरोसा है कि यह खेल को अभूतपूर्व तरीक़े से आगे बढ़ाएगा."
आईसीसी के मौजूदा चेयरमैन न्यूजीलैंड के ग्रेग बार्कले ने हाल ही में चेतावनी दी है कि आईसीसी अपने मौजूदा स्वरूप में ‘उद्देश्य के लिए उपयुक्त’ नहीं हो सकता है.
यह एक बड़ी और गंभीर स्वीकारोक्ति है, जय शाह इस समस्या को दूर करने के लिए क्या करते हैं, इस पर भी सबकी नज़र होगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)