रोहित शर्मा क्यों मानते हैं शुभमन गिल हैं ‘सीखने वाले खिलाड़ी’

    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल संवाददाता, धर्मशाला से

कुछ महीने पहले साउथ अफ्रीका दौरे की बात है जहां पर राजधानी प्रिटोरिया में कप्तान रोहित शर्मा एक कैफे में शुभमन गिल के साथ कॉफी पी रहे थे.

ये आईपीएल के मिनी ऑक्शन के ठीक अगले दिन की बात है और रोहित अपने चिर-परिचित अंदाज़ में गुजरात टाइटंस के नए कप्तान गिल के साथ लीडरशीप को लेकर कुछ अहम सलाह दे रहे हैं.

ये सारी बातें ये लेखक बगल में खड़े होकर मुस्कराते हुए देख रहे हैं.

रोहित बड़े भाई की तरह गिल को समझाते हुए कहते हैं कि "भाई इंडिया की कप्तानी करनी है तो बल्ले से शानदार खेल दिखाने के साथ-साथ अभी से आईपीएल में भी कप्तानी पर तुझे काफी मेहनत करनी पड़ेगी और तुझे इसमें बहुत मज़ा आयेगा क्योंकि तू सीखने वाला खिलाड़ी है."

इस घटना का ज़िक्र धर्मशाला टेस्ट के दौरान इसलिए करना ज़रूरी हो रहा है क्योंकि शुभमन गिल के तीसरे टेस्ट शतक से अगर कोई एक खिलाड़ी सबसे ज़्यादा खुश होगा तो वो हैं कप्तान रोहित शर्मा.

रोहित और गिल में समानता

दरअसल, कई मायनों में रोहित को गिल में शायद अपने शुरुआती दिनों वाले बेहद प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ की झलक देखने को मिलती है.

इत्तेफाक से 24वां टेस्ट खेल रहे गिल ने अब तक तीन टेस्ट शतक बनाये हैं और रोहित ने भी अपने पहले 24 टेस्ट में 3 ही शतक बनाये थे.

कहने का मतलब ये है कि रोहित की ही तरह गिल को भी टेस्ट क्रिकेट के शुरुआती दौर की चुनौतियों से निपटने में वक्त लगा है.

अगर गिल ने कुछ साल पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मशहूर गाबा टेस्ट में लाजवाब 91 रनों की पारी खेलकर एक शानदार भविष्य की उम्मीद जगायी थी तो रोहित ने पहले दो टेस्ट में दो शतक ठोक डाले थे.

अगर रोहित मिडिल ऑर्डर छोड़कर बाद में ओपनर बने और उनके खेल में स्थिरता आयी तो गिल ने ओपनर की भूमिका छोड़कर अब मिडिल ऑर्डर का रुख किया है जिससे उनके खेल में भी निरंतरता आ रही है.

कोहली का स्थान भरने की चुनौती

इसे महज़ इत्तेफाक ही कहा जा सकता है इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मौजूदा सीरीज़ में इन दोनों बल्लेबाज़ों ने यशस्वी जायसवाल के बाद सबसे ज़्यादा रन जुटाते हुए 400 का आंकड़ा पार किया है.

विराट कोहली जैसे दिगग्ज की ग़ैर-मौजूदगी में अगर रोहित को एक अनुभवी बल्लेबाज़ के तौर पर ज़्यादा ज़िम्मेदारी उठाने की चुनौती थी तो गिल पर भी इस बात का दबाव था कि कम से कम वो एक टेस्ट सीरीज़ में अपना दबदबा ऐसा बनाये जिससे कि ऐसा लगे कि वाकई में इस खिलाड़ी में कोहली के शानदार मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ वाली विरासत को आगे ले जाने वाले सच्चे उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा सकता है.

शुक्रवार को जब ये दोनों बल्लेबाज़ बल्लेबाज़ी करने उतरे तो दोनों का अंदाज़ जुदा था और गिल ख़ासतौर पर इतने आक्रामक दिख रहे थे कि ऐसा लगा कि वो अपने कप्तान से पहले शतक पूरा कर लेंगे.

ऐसा हुआ नहीं लेकिन इस सीरीज़ में इन दोनों बल्लेबाज़ ने अपना अपना दूसरा शतक पूरा किया और टीम इंडिया को दूसरे दिन का खेल ख़त्म होने पर बेहद मज़बूत स्थिति में भी पहुंचा दिया.

रोहित ने इस दौरान कई शानदार रिकॉर्ड भी बनाये. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने अब 12 शतक बना लिये हैं जो उनके समकालीन मुरली विजय (61 मैचों में) और अंजिक्या रहाणे (85 मैचों में) के बराबर हैं.

इतना ही नहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के हर फॉर्मेट को मिला दें तो ओपनर के तौर पर उनके 43 शतक हैं जो क्रिस गेल से ज़्यादा और सिर्फ तेंदुलकर (45) और डेविड वार्नर (49) से पीछे हैं.

अगर भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज़्यादा शतक लगाने वाली सूची की बात करें तो कप्तान रोहित शर्मा ने अपने कोच राहुल द्रविड़ के 48 शतकों की बराबरी भी कर ली है और अब उनसे आगे सिर्फ कोहली (80) और तेंदुलकर के 100 शतक हैं.

भरोसा जताने का वक़्त

अगर नैट प्रैक्टिस के दौरान या फिर टीम होटल में या फिर किसी भी अनौपचारिक माहौल में कप्तान रोहित शर्मा को आप गिल के साथ देखेंगे तो ऐसा महसूस करेंगे कि पंजाब के इस खिलाड़ी को रोहित काफी ज़्यादा रेट करते हैं.

वर्ल्ड कप से ठीक पहले इस लेखक ने जब रोहित शर्मा का इंटरव्यू किया था तो उनसे एक सवाल पूछा था कि अगर आपके सामने एक शब्द प्रतिभा आये तो कौन सा चेहरा आपको सबसे पहले ज़ेहन में आता है तो रोहित ने बिना पलक झपके कहा- गिल.

एक वक्त था जब पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह दोनी ने कोहली और रोहित जैसे प्रतिशाली खिलाड़ियों को शुरुआती संघर्ष के बावजूद उनपर भरोसा बनाये रखा था और उन्हें ज़बरदस्त तरीके से मार्ग-दर्शन भी दिया था.

शायद रोहित ने ये बात धोनी से सीखी हो और उन्हें इस बात का एहसास है कि कैसे भारतीय क्रिकेट के भविष्य की बेहतरी के लिए उन्हें गिल और जायसवाल जैसे खिलाड़ियों को अलग तरीके से गाइड करना होगा.

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ में जीत का जश्न मनाने के साथ-साथ रोहित को इस बात की खुशी भी होगी कि जायसवाल और गिल ने वो परिपक्वता दिखायी है.

इसके चलते टेस्ट क्रिकेट में नई पीढ़ी के बल्लेबाज़ों पर भी वैसा ही भरोसा दिखाया जा सकता है जैसा कि एक दौर में धोनी ने रोहित-कोहली पर दिखाया था.

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