एयर इंडिया प्लेन क्रैश की जांच रिपोर्ट में जिस फ़्यूल कंट्रोल स्विच का ज़िक्र, वह क्या होता है?

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अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के विमान हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट आ चुकी है.
इस रिपोर्ट को भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने जारी किया है.
इस रिपोर्ट में प्लेन क्रैश की एक बड़ी वजह ये बताई है कि- विमान के दोनों फ़्यूल कंट्रोल स्विच, विमान के टेक ऑफ़ होते ही कट-ऑफ़ पोज़िशन में चले गए थे.
आइए ये जानते हैं कि विमान में फ़्यूल कंट्रोल स्विच क्या होते हैं, इनका क्या काम होता है?

फ़्यूल कंट्रोल स्विच कैसे काम करता है?
प्लेन के कॉकपिट में जो सेंट्रल कंसोल होता है, उसमें दो स्विच होते हैं, जिन्हें फ़्यूल कंट्रोल स्विच कहते हैं.
जब प्लेन ज़मीन पर होता है तो इनका काम इंजन को ऑन करना होता है, वहीं जब विमान लैंड हो जाता है तो यह स्विच इंजन को ऑफ भी करते हैं.
आमतौर पर जब विमान हवा में होता है तब इनका इस्तेमाल नहीं होता.
हालांकि इसमें कुछ अपवाद हैं, जैसे कि अगर इंजन फेल हो जाए या इंजन में आग लग जाए तो पायलट को इंजन तक ईंधन की सप्लाई को रोकना होता है, ताकि आगे कोई परेशानी ना हो. लेकिन ऐसा बहुत ही कम मौकों पर देखने को मिलता है.
अमेरिकी एविएशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट जॉन कॉक्स न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताते हैं, "फ़्यूल कट ऑफ स्विच के लिए अलग से पावर सिस्टम और वायरिंग होती है और फ़्यूल वॉल्व को इन स्विच से कंट्रोल किया जाता है. अगर इनके इस्तेमाल में कोई गलती हो जाए जो इसका असर तुरंत दिखाई देता है और इंजन की पावर बंद हो जाती है."
एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि पायलट गलती से इस फ्यूल स्विच को बंद कर के इंजन को फ़्यूल सप्लाई नहीं रोक सकते. इसे ऐसे डिज़ाइन ही नहीं किया गया कि कोई गलती से बंद कर दे. लेकिन अगर पायलट से बार-बार चालू और बंद करते हैं, तो इसका तुरंत असर होता है क्योंकि इसे बंद करने से इंजन को फ्यूल की सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाती है.
अमेरिकी विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ जॉन कॉक्स ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "इस फ़्यूल कंट्रोल स्विच के लिए अलग वायरिंग और इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई होती है. इस स्विच को नियंत्रित करने के लिए एक फ्यूल वॉल्व होता है.
बात अगर अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के विमान की करें, तो इस बोइंग 787 में दो फ़्यूल कंट्रोल स्विच थे. ये दोनों जीई इंजनों से जुड़े थे और थ्रस्ट लीवर के नीचे थे.
इस थ्रस्ट लीवर का इस्तेमाल पायलट बिजली सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए करते हैं और ये कॉकपिट में होता है.
ये स्विच स्प्रिंग लोडेड है ताकि ये अपनी जगह पर बना रहे. इसे चालू या बंद करने के लिए, पायलट को पहले स्विच को ऊपर की ओर घुमाना होगा और फिर इसे बंद या चालू किया जा सकता है.
रिपोर्ट में और क्या है?
एयर इंडिया प्लेन क्रैश की शुरुआती जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि "विमान ने दोपहर 1 बजकर 38 मिनट और 42 सेकेंड पर अधिकतम दर्ज की गई 180 नॉट्स की एयरस्पीड हासिल की और इसके तुरंत बाद, इंजन 1 और इंजन 2 के फ़्यूल कट-ऑफ़ स्विच एक-एक कर.. रन से कट-ऑफ़ पोज़िशन में चले गए, इनके बीच एक सेकेंड का अंतर था."
रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके बाद, "कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछते हुए सुना गया कि उसने कट-ऑफ़ क्यों किया. दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया."
लगभग 10 सेकेंड बाद इंजन 1 का फ़्यूल कट-ऑफ़ स्विच 'कट ऑफ़' से 'रन' में गया. फिर चार सेकंड बाद इंजन 2 का फ़्यूल कट-ऑफ़ स्विच भी 'कट ऑफ़' से 'रन' में चला गया."
इसका मतलब ये है कि पायलट ने दोबारा विमान को नियंत्रित करने की कोशिश की.
लगभग नौ सेकेंड बाद एक पायलट ने ज़मीन पर मौजूद एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल अधिकारियों को 'मेडे मेडे मेडे' का संदेश भेजा.
एयर ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारी ने जब इसके बारे में पूछा, तो उन्हें कोई जवाब नहीं मिला और थोड़ी ही देर में उन्होंने विमान को क्रैश होते देखा.
ध्यान देने वाली बात है कि ये इस विमान हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट है. इससे जुड़ी और जानकारियों का इंतज़ार अभी बाकी है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.














