बीजेपी की तीन राज्यों में जीत, क्या महिला वोटर 'नायिका' बनीं?

पीएम मोदी

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    • Author, सुशीला सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

हाल ही में पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए और बीजेपी ने तीन राज्यों में जीत दर्ज की.

इस जीत से बीजेपी काडर में काफ़ी उत्साह है.

इस सफलता से बीजेपी हिंदी पट्टी में ये संदेश देने में कामयाब रही है कि नरेंद्र मोदी का चेहरा ही पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत दिला सकता है.

बीजेपी ने राजस्थान में 199 में से 115, मध्य प्रदेश में 230 में से 163 और छत्तीसगढ़ में 90 में से 54 सीटों पर जीत हासिल की.

वहीं तेलंगाना में जहाँ पिछली बार पार्टी को एक सीट से संतोष करना पड़ा था, वहाँ इस बार वो आठ सीट जीतने में सफल रही.

बीजेपी इस जीत के बाद देश के 12 राज्यों में सत्ता में आ गई है, वहीं कांग्रेस हार के बाद तीन राज्यों में सिमट गई है.

इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को पार्टी के दिल्ली मुख्यालय से संबोधित किया.

मोदी

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उन्होंने बीजेपी की जीत को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बताया और कहा कि सबका साथ और सबका विकास की भावना की जीत हुई है.

अपने 46 मिनट के भाषण में उन्होंने कहा कि भारत के विकास के लिए, राज्यों के विकास की सोच की जीत हुई है.

नरेंद्र मोदी ने महिलाओं और युवाओं के समर्थन के लिए ख़ास तौर पर उनको धन्यवाद दिया.

नरेंद्र मोदी ने कहा, ''मैं अपनी माताओं, बहनों, बेटियों के सामने, मैं अपने युवा साथियों, मैं अपने किसान भाइयों के सामने उन्होंने जो निर्णय किया है और बढ़ चढ़कर समर्थन किया है उनके सामने नतमस्तक हूँ.''

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नरेंद्र मोदी ने कहा- चार जातियां सबसे बड़ी

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उनका कहना था इस चुनाव में देश को जातियों में बाँटने की बहुत कोशिश हुई लेकिन वे लगातार कहते आए हैं कि उनके लिए चार जातियाँ ही सबसे बड़ी हैं.

उनमें नारी शक्ति, युवा शक्ति, किसान शक्ति और ग़रीब परिवार हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि इन चार जातियों को ही सशक्त करने से ही देश सशक्त होगा.

उनका कहना था, ''आज बड़ी संख्या में हमारे ओबीसी, आदिवासी साथी इसी वर्ग से आते हैं और इन चुनावों में इन चारों जातियों ने बीजेपी की योजनाओं और रोडमैप को लेकर उत्साह दिखाया है और हर ग़रीब कह रहा है कि वो ख़ुद जीता है. वंचित और किसान ये कह रहा है कि वो ख़ुद जीता है.''

प्रधानमंत्री ने बताया कि इसी जीत में हर महिला अपनी जीत देख रही है और बेहतर भविष्य का सपना देखने वाला हर युवा अपनी जीत देख रहा है.

उन्होंने महिलाओं के बारे में कहा, ''मैं विशेष रूप से देश की नारी शक्ति का अभिवंदन करुँगा. रैलियों में मैं अक्सर कहता था कि इन चुनाव में नारी शक्ति ये ठान कर निकली है कि भाजपा का परचम लहराएगी और जब देश की नारी शक्ति किसी का सुरक्षा कवच बन जाए तो कैसी भी ताक़त हो, उसे नुक़सान नहीं पहुँचा सकती.''

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साथ ही उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश की महिलाओं में नया विश्वास जगाने की बात कही और कहा कि महिलाओं में ये भरोसा जगा है कि बीजेपी सरकार में उनकी सक्रिय भागीदारी को नई बुलंदी मिलने वाली है.

नरेंद्र मोदी ने कहा कि हर बहन, बेटी को ये साफ़-साफ़ लगता है कि बीजेपी ही नारी गरिमा, सम्मान और नारी सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है.

नारी शक्ति वंदन अधिनियम साल 2023 में दोनों सदनों में पारित हो चुका है.

लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण देने वाले इस अधिनियम को मोदी सरकार ने सितंबर में बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में पेश किया था.

विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. हालाँकि ये माना जा रहा है कि क़ानून वर्ष 2029 से पहले नहीं लागू हो पाएगा.

नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं ने बीजेपी की योजनाओं शौचालय, बिजली, बैंक में खाते और नल में जल जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने के लिए ईमानदारी से काम किया है और कैसे आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है.

नरेंद्र मोदी ने कहा, ''नारी शक्ति का विकास, बीजेपी के विकास मॉडल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी है और इसलिए महिलाओं ने इन चुनाव में बीजेपी की जीत की पूरी ज़िम्मेदारी अपने हाथ में उठा ली थी. मैं विनम्रता से हर बहन, बेटी से कहूँगा कि आपसे जो वादे किए गए हैं वो शत प्रतिशत पूरे किए जाएँगे. ये मोदी की गारंटी है और मोदी की गारंटी यानी गारंटी पूरा होने की गारंटी.''

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महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

महिला वोटर

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इमेज कैप्शन, राजस्थान में महिलाओं और पुरुषों का बराबर टर्नआउट था.

जानकारों का कहना है कि हाल के वर्षों में देखा जा रहा है कि चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और ये अनुमान लगाया जाता है कि बीजेपी सरकार महिलाओं से जुड़ी कई योजनाएँ लेकर आई है, जिसका फ़ायदा उन्हें इन चुनाव में भी मिला है.

वहीं सभी पार्टियाँ कमोबेश ये समझ चुकी है कि आगामी चुनाव में महिलाओं की भूमिका बढ़ेगी.

लेकिन तीन राज्यों में महिलाओं ने किन कारणों से बीजेपी को वोट दिया?

शिवराज सिंह चौहान

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मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश

सीएसडीएस के संजय कुमार का कहना है कि भारत के हर राज्य में महिलाओं का वोट 50 फ़ीसदी है. ऐसे में अगर किसी भी राज्य में ये तीन या पाँच प्रतिशत टिल्ट या बदल जाता है, तो वो निर्णायक हो जाता है.

वे कहते हैं, ''मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग के आँकड़ों के मुताबिक़ पुरुषों (78%) के मुक़ाबले महिलाओं (76%) का टर्नआउट दो प्रतिशत कम रहा है. इसका मतलब ये नहीं है कि महिलाओं के टर्नआउट ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया, लेकिन पिछले चुनावों की तुलना में महिलाओं टर्नआउट बढ़ता गया है.''

इंडियन एक्सप्रेस अखबार को शिवराज चौहान की टीम ने बताया कि इस साल की शुरुआत से लेकर 15 नवंबर तक उन्होंने 1000 कार्यक्रम किए.

चुनाव की तारीख़ों की घोषणा से पहले उन्होंने केवल महिलाओं की रैलियों को 53 ज़िलों में संबोधित किया.

शिवराज चौहान साल 2005 में राज्य के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद उनके नेतृत्व में 2008 और 2013 में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

2018 में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनी. लेकिन फिर सरकार गिर गई और शिवराज सिंह चौहान फिर मुख्यमंत्री बने.

वरिष्ठ पत्रकार संजय सक्सेना कहते हैं, ''सत्ता में आने के बाद से ही शिवराज चौहान ने महिलाओं से संबंधित योजनाएँ शुरू की, जैसे ग़रीबी रेखा से नीचे आने वाली महिलाओं के लिए लाडली लक्ष्मी, शादी में सामान या नकद की मदद देने वाली कन्यादान योजना और अब लाडली बहना योजना शुरू कीं."

ऐसी भी रिपोर्टें आईं कि बीजेपी ने कई महिलाओं को भी वालंटियर बनाया, जिनमें महिलाएँ लाडली बहन की लाभार्थी भी थी, जिसका बीजेपी को फ़ायदा हुआ.

संजय सक्सेना के अनुसार, ''इसमें पहले नकद 1000 रुपए दिए जाते थे, जो बढ़ाकर 1250 कर दिए गए. दरअसल महिलाओं में फ़्रीबी काम किया है, जिसमें आप इन योजनाओं को जोड़ सकते हैं.''

शिवराज सिंह चौहान

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इमेज कैप्शन, मध्यप्रदेश में लोग प्यार से शिवराज चौहान को मामा भी बुलाते हैं.

वे कहते हैं कि चुनाव से क़रीब छह महीने पहले सरकार के ख़िलाफ़ एंटीइनकम्बेंसी थी. अगर लाडली योजना काम कर रही होती तो ऐसा क्यों होता? और यहीं कारण बना कि चुनाव की तारीख़ों की घोषणा के बाद केवल मोदी के चेहरे और मोदी गारंटी नाम से चुनाव प्रचार शुरू कर दिया.

वे कहते हैं कि उन आँकड़ों को नहीं भूलना चाहिए जो बताते हैं कि राज्य में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध बढ़े हैं.

आदिवासी इलाक़ों में बीजेपी को 26 सीट हासिल हुई है, जहाँ संघ की मदद से ये वहाँ चुनाव जीतने में सफल रही है.

वसुंधरा राजे

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इमेज कैप्शन, इस बार राजस्थान के चुनाव में वसुंधरा राजे हाशिए पर दिखाईं दीं.

राजस्थान

राजस्थान

राज्य में महिलाओं और पुरुषों का वोटर टर्नआउट बराबर यानी 74 प्रतिशत रहा. हालाँकि राज्य में बीजेपी का वोट शेयर बढ़ा है.

संजय कुमार कहते हैं कि हालाँकि राज्य में पार्टी ने वसुंधरा राजे को प्रोजेक्ट नहीं किया था, लेकिन पश्चिम बंगाल या तमिलनाडु का उदाहरण लें, तो यहाँ महिलाओं ने ममता बनर्जी या जयललिता के लिए भी वोट डाला था, तो महिलाओं के वोट बीजेपी को मिले है वहीं क़ानून व्यवस्था भी एक कारण बना.

इस बात को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन कहते हैं कि महिला सुरक्षा के मामले में अशोक गहलोत की सरकार शुरुआत से ही कठघरे में खड़ी दिखाई दी.

वे कहते हैं,''वहाँ कई योजनाएँ राज्य सरकार ने लागू की जैसे चिरंजीवी योजना, फ़्री मोबाइल योजना या मनरेगा योजना जिसका 50 फ़ीसदी फ़ायदा महिलाओं को मिला क्योंकि यहाँ से पुरुष कई अन्य राज्यों में काम के सिलसिले में बाहर चले जाते थे. लेकिन अशोक गहलोत की सरकार अपनी उपलब्धियों को लोगों तक नहीं पहुँचा पाई.''

बीजेपी ने महिला सुरक्षा का मुद्दा भुनाया

ये कारण बीजेपी के पाले में वोट डालने में कामयाब रहें.

भूपेश बघेल

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छत्तीसगढ़

संजय कुमार का कहना है कि छत्तीसगढ़ के दक्षिणी इलाक़े के आदिवासियों ने बीजेपी का सहयोग किया और ऐसा मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी हुआ.

उनका कहना है, ''प्रधानमंत्री, दौपदी मुर्मू का नाम लेना कभी नहीं भूलते और ये बताने में कसर नहीं छोड़ते कि पार्टी ने एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाया है. इस बात की भी चर्चा भी होती है कि वो किस पृष्ठभूमि से आती हैं. तो एक महिला की पहचान, आदिवासी महिला की पहचान इस सरकार ने बनाई है. ये संदेश भी जनता के बीच पैठ बनाता दिखता है.''

स्थानीय पत्रकार आलोक पुतुल बताते हैं कि विश्लेषकों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में हार की एक बड़ी वजह भूपेश बघेल का आत्मविश्वास और अपनी हक़ीक़त से बड़ी छवि पेश करना भी है.

वे बताते हैं कि भूपेश बघेल ये भाँप नहीं पाए कि ज़मीन पर लहर उनके ख़िलाफ़ है. वहीं बीजेपी ने अपनी नीति में किसान और धान को अहमियत दी.

उधर उन्होंने महिलाओं के लिए महतारी योजना, किसानों को धान की एकमुश्त दाम देने और पुराने दो साल का बोनस देने का वादा किया.

राज्य में 32 फ़ीसदी आदिवासी आबादी है और ये तीन हिस्सों में बँटी हुई है- आदिवासी, हिंदू आदिवासी और ईसाई आदिवाासी.

आलोक पुतुल कहते हैं कि भूपेश बघले के पाँच साल के कार्यकाल में इन तीनों के बीच संघर्ष बहुत तेज़ी बढ़ा और बीजेपी हिंदू वोटों का इन इलाकों में ध्रवीकरण करने में सफल रही.

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