इसराइल के हाइफ़ा को क्यों निशाना बना रहा है ईरान, इस शहर का भारत कनेक्शन भी है

ईरान और इसराइल के बीच हमलों का सिलसिला जारी है. इसराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए कई ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं.

जवाब में ईरान ने भी मिसाइल हमले किए, जिनमें कुछ मिसाइलें इसराइल के एंटी मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम को चकमा देकर रिहायशी इलाकों तक जा पहुंचीं.

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, शुक्रवार से अब तक इसराइल के हमलों में 224 लोगों की मौत हो चुकी है. दूसरी ओर इसराइल में मरने वालों की संख्या 24 हो चुकी है.

इसराइल का कहना है कि ईरान के हमलों में मारे गए लोगों में तेल अवीव, हाइफ़ा और अन्य शहरों के निवासी शामिल हैं.

ईरान के हमलों में इसराइल के दो बड़े शहरों तेल अवीव और हाइफ़ा को ख़ासतौर पर निशाना बनाया गया.

हाइफ़ा इसराइल का एक उत्तरी बंदरगाह शहर है, जहां एक बड़ा पोर्ट और ऑयल रिफ़ाइनरी स्थित है.

इससे पहले ईरान के सरकारी टीवी ने बताया था कि तेल अवीव, हाइफ़ा और अन्य इसराइली शहरों पर "दर्जनों ईरानी मिसाइलों और ड्रोन" से हमला किया गया है.

ऐसे में ये जानने की कोशिश करते हैं कि आख़िर इसराइली शहर हाइफ़ा को निशाना बनाने की वजहें क्या हैं और इस शहर का भारत से क्या ख़ास कनेक्शन है.

इसराइल के लिए हाइफ़ा क्यों है इतना ख़ास

इसराइल मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार हरेंद्र मिश्रा इस वक़्त यरूशलम में हैं.

बीबीसी संवाददाता अभय कुमार सिंह से बातचीत में वो इसराइल के लिए हाइफ़ा की अहमियत को कुछ ऐसे बताते हैं, "हाइफ़ा इसराइल का तीसरा सबसे बड़ा शहर है. और इसराइल के उत्तरी हिस्से में स्थित यह शहर सिर्फ़ जनसंख्या के लिहाज़ से नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है."

वो बताते हैं कि इस शहर में हाईटेक कंपनियों की मज़बूत मौजूदगी है, "माइक्रोसॉफ्ट हो, गूगल हो, इंटेल हो, सारी हाईटेक कंपनियों के दफ़्तर हाइफ़ा में भी हैं."

हाइफ़ा में इसराइल की सबसे बड़ी ऑयल रिफ़ाइनरी है, जिससे इस शहर की आर्थिक भूमिका और अहम हो जाती है.

हाइफ़ा में ऑयल रिफ़ाइनरी पर ईरानी हमले की पुष्टि

सोमवार को बीबीसी ने एक वीडियो की पुष्टि की, जिसमें इस ऑयल रिफ़ाइनरी से धुआं उठता दिखाई दे रहा है.

वीडियो में उस इलाके़ से धुएं का ग़ुबार उठते दिख रहा है, जहां इसराइल की ये सबसे बड़ी तेल रिफ़ाइनरी स्थित है. ये वीडियो ईरान के हमलों के बाद का है.

बीबीसी ने वीडियो के कई की-फ्रेम की रिवर्स इमेज सर्च की और एजेंसी की तस्वीरों से भी मिलान किया, जिससे ये पुष्टि हुई कि इस रिफ़ाइनरी पर हमला हुआ था.

इसके बाद बीबीसी ने वीडियो और एजेंसी की तस्वीरों में दिख रही अहम चीज़ों का मिलान गूगल अर्थ और इलाक़े की पुरानी फ़ुटेज से किया.

इसराइली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस रिफ़ाइनरी को संचालित करने वाले बाज़ान ग्रुप ने कहा है कि रात में ईरानी मिसाइलों ने इसको निशाना बनाया, जिससे पाइपलाइनों और ट्रांसमिशन लाइनों को नुक़सान पहुंचा.

बाज़ान ग्रुप ने ये भी बताया कि रिफ़ाइनरी में ऑयल रिफ़ाइनरी का काम जारी है, लेकिन साइट के कुछ अन्य हिस्सों को बंद कर दिया गया है.

ऑयल रिफ़ाइनरी के अलावा, हाइफ़ा में इसराइल के बंदरगाह भी हैं, इस वजह से भी ये शहर कई मायनों में महत्वपूर्ण हो जाता है.

हरेंद्र मिश्रा का कहना है, "हाइफ़ा का पोर्ट बहुत अहम है. बहुत सारा कार्गो वहीं से आता-जाता है. और अगर ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो इसराइल का बाहरी दुनिया से संपर्क पहले इसी शहर से बना था."

हाइफ़ा में एक पोर्ट का अधिग्रहण साल 2023 में अदाणी ग्रुप ने भी किया था, इस पोर्ट की 70 फ़ीसदी हिस्सेदारी अदाणी ग्रुप के पास है, वहीं 30 फ़ीसदी इसराइल के गैडोट ग्रुप के पास है.

शहर की डेमोग्राफ़ी को समझाते हुए हरेंद्र मिश्रा कहते हैं कि क़रीब चार लाख की आबादी वाला ये शहर एक तरह से को-एग्ज़िस्टेंस का मॉडल भी माना जाता है.

"यहां अच्छी-ख़ासी अरब आबादी भी है, जिनमें मुस्लिम और ईसाई दोनों हैं. बहाई समुदाय के लिए भी यहां धार्मिक स्थल है. जैसे दिल्ली में लोटस टेंपल है, वैसे ही यहाँ बहाई गार्डन है."

हाइफ़ा में बहाई वर्ल्ड सेंटर भी है, जो यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट है.

तेल अवीव और हाइफ़ा ही निशाने पर क्यों

क्या ये संभव है कि ईरान, हाइफ़ा की इस तरह की अहमियत को ध्यान में रखते हुए उसे निशाना बना रहा है, इस पर हरेंद्र मिश्रा कहते हैं, "मेरा मानना है कि ईरान उन्हीं शहरों को निशाना बना रहा है जिनकी रणनीतिक और आर्थिक अहमियत सबसे ज़्यादा है. यरूशलम को अब तक इसलिए नहीं छुआ गया है क्योंकि वो कई धर्म के लिहाज़ से पवित्र स्थल है."

वो कहते हैं कि ईरान की मिसाइलें ज़्यादातर रिहायशी इलाकों पर गिरी हैं. "इसराइली सेना का कहना है कि अब तक ज़्यादातर मिसाइलें इंटरसेप्ट हो गईं, लेकिन 10-12 मिसाइलें रिहायशी इलाकों में गिरीं, जिससे भारी नुक़सान हुआ है."

वो यह भी बताते हैं कि हाइफ़ा और तेल अवीव जैसे शहरों की घनी आबादी है और वो इसराइली अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं.

"यरूशलम की आबादी घनी है, लेकिन वहां इस्लामिक धार्मिक स्थल हैं, इस वजह से शायद ईरान ने अब तक उसे टारगेट नहीं किया."

भारत का हाइफ़ा से 'कनेक्शन'

भारत और हाइफ़ा के रिश्ते की बात करें तो इसकी जड़ें साल 1918 की एक ऐतिहासिक कहानी से जुड़ी हैं.

पहले विश्व युद्ध के दौरान भारत की घुड़सवार टुकड़ियों ने ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से लड़ते हुए हाइफ़ा शहर को तुर्की, जर्मनी और ऑस्ट्रिया-हंगरी की संयुक्त सेना के क़ब्ज़े से मुक्त कराया था.

हरेंद्र मिश्रा बताते हैं कि इस इतिहास को इसराइल में भी पूरी मान्यता मिली है. "हाइफ़ा के स्कूलों में यह इतिहास पढ़ाया जाता है. बच्चों से पूछेंगे कि 'हीरो ऑफ हाइफ़ा' कौन है तो वो मेजर दलपत सिंह का नाम लेंगे."

इस लड़ाई में जोधपुर लांसर्स के कमांडर मेजर दलपत सिंह शेखावत मारे गए थे और उन्हें बाद में मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया गया. ब्रिटिश हुकूमत की ओर से लड़ते हुए इस लड़ाई में 44 भारतीय सैनिक मारे गए थे, इसे इतिहास में कैवलरी यानी घुड़सवार सेना की आख़िरी बड़ी लड़ाई के मिसाल के तौर पर भी देखा जाता है.

हरेंद्र बताते हैं, "भारतीय दूतावास और हाइफ़ा नगरपालिका हर साल मिलकर हाइफ़ा दिवस मनाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब यहाँ आए थे, तो उन्होंने भी वहाँ जाकर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी थी."

बता दें कि राजधानी दिल्ली में स्थित तीन मूर्ति चौक का नाम बदलकर तीन मूर्ति हाइफ़ा चौक कर दिया गया था. भारत में साल 2018 में हुए इस समारोह में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी शिरकत की थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित