You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ब्रिक्स क्या है, जिसमें शामिल होना चाहते हैं कई देश
दक्षिण अफ़्रीका के केपटाउन में में ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक चल रही है.
ऐसा माना जाता है कि ब्रिक्स के ज़रिए रूस और चीन पश्चिम देशों के दबदबे को चुनौती देना चाहते हैं.
इस गुट में भारत भी शामिल है लेकिन भारत की नीति सभी गुटों के साथ या फिर किसी गुट में नहीं शामिल रहने की नीति रही है.
इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता दक्षिण अफ़्रीका के पास है और वहीं इसका शिखर सम्मेलन होना है.
क्या है ब्रिक्स?
ब्रिक्स दुनिया की पाँच सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है.
ब्रिक्स अंग्रेज़ी के अक्षर B R I C S से बना वो शब्द है, जिसमें हर अक्षर एक देश का प्रतिनिधित्व करता है.
ये देश हैं ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका.
ये वो देश हैं जिनके बारे में कुछ जानकारों का मानना है कि साल 2050 तक वे विनिर्माण उद्योग, सेवाओं और कच्चे माल के प्रमुख सप्लायर यानी आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे.
उनका मानना है कि चीन और भारत विनिर्माण उद्योग और सेवाओं के मामले में पूरी दुनिया के प्रमुख सप्लायर हो जाएंगे जबकि रूस और ब्राज़ील कच्चे माल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे.
ब्रिक्स को यह नाम किसने दिया?
एक ब्रिटिश अर्थशास्त्री जिम ओ'निल ने दुनिया के सबसे ताक़तवर निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स में काम करने के दौरान यह शब्द गढ़ा था. तब यह शब्द BRIC था.
जब 2010 में दक्षिण अफ़्रीका को भी इस समूह से जोड़ा गया तो यह BRICKS हो गया.
ओ'निल ने इस शब्दावली का प्रयोग सबसे पहले वर्ष 2001 में अपने शोधपत्र में किया था.
ब्रिक्स की पहली बैठक कब हुई?
पहली बार 2006 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में जी-8 समूह के शिखर सम्मेलन के साथ ही ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन यानी ब्रिक के नेताओं ने पहली बार मुलाक़ात की थी.
सितंबर 2006 में जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इन देशों के विदेश मंत्रियों की औपचारिक बैठक हुई तो इस समूह को ब्रिक का नाम दिया गया.
वहीं ब्रिक देशों की पहली शिखर स्तर की आधिकारिक बैठक 16 जून 2009 को रूस के येकाटेरिंगबर्ग में हुई.
इसके बाद 2010 में ब्रिक का शिखर सम्मेलन ब्राज़ील की राजधानी ब्रासिलिया में हुई. इसी वर्ष इससे दक्षिण अफ़्रीका के जुड़ने के साथ यह ब्रिक से ब्रिक्स बन गया.
दक्षिण अफ़्रीका अप्रैल 2011 में चीन के सान्या में आयोजित इस समूह के तीसरे शिखर सम्मेलन में पहली बार शामिल हुआ.
क्या नए देश भी शामिल किए जाएंगे?
ब्रिक्स का मुख्यालय चीन के शंघाई में है. ब्रिक्स के सम्मेलन हर साल आयोजित होते हैं और इसमें सभी पांच सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं.
जब इस समूह में चार देश थे तो हर पांचवे साल एक सदस्य देश इसका सम्मेलन आयोजित करता था वहीं अब ऐसा हर छठे साल होता है. यानी हर छठे साल भारत के पास इस बैठक की मेजबानी होती है.
ब्रिक्स शिखर सम्मलेन की अध्यक्षता हर साल एक-एक कर ब्रिक्स के सदस्य देशों के सर्वोच्च नेता करते हैं.
इस साल इस बैठक की मेजबानी दक्षिण अफ़्रीका कर रहा है.
ब्रिक्स देशों की जनसंख्या दुनिया की आबादी का लगभग 40% है और इसका वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सा लगभग 30% है.
ब्रिक्स देश आर्थिक मुद्दों पर एक साथ काम करना चाहते हैं लेकिन इनमें से कुछ के बीच भारी राजनीतिक विवाद भी है. इन विवादों में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सबसे अहम है.
इसका सदस्य बनने के लिए कोई औपचारिक तरीक़ा नहीं है. सदस्य देश आपसी सहमति से ये फ़ैसला लेते हैं.
2020 तक नए सदस्यों को इस समूह से जोड़ने के प्रस्ताव पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था लेकिन इसके बाद इस समूह को विस्तार देने पर चर्चा आरंभ हुई.
फिलहाल अल्जीरिया, अर्जेंटीना, बहरीन, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इस समूह से जुड़ने के लिए अपने आवेदन दिए हैं.
वहीं अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, बेलारूस, कज़ाक़स्तान, मैक्सिको, निकारागुआ, नाइजीरिया, पाकिस्तान, सेनेगल, सूडान, सीरिया, थाइलैंड, ट्यूनीशिया, तुर्की, उरुग्वे, वेनेजुएला और ज़िम्बाब्वे ने भी इसकी सदस्यता में अपनी रुचि दिखाई है.
ये भी पढ़ें
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)