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विराट कोहली नहीं खेलेंगे इंग्लैंड के ख़िलाफ़ शुरू के दो टेस्ट, भारतीय टीम पर क्या होगा असर
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार
विराट कोहली 25 जनवरी से इंग्लैंड के साथ शुरू होने जा रही पांच मैचों की टेस्ट सिरीज़ के शुरुआती दो मैचों में नहीं खेलेंगे.
बीसीसीआई के अनुसार, विराट ने निजी कारणों के चलते इन मैचों से नाम वापस ले लिया है.
टेस्ट क्रिकेट को लेकर कोहली की निष्ठा को लेकर किसी को तनिक भर भी संदेह नहीं होना चाहिए.
अभी हाल ही में साउथ अफ्रीका के दौरे पर मैं भारतीय टीम के हर अभ्यास सत्र पर रिपोर्टिंग कर रहा था, लेकिन पहले टेस्ट से ठीक पहले कोहली नदारद दिखे.
अलग-अलग सूत्रों से जब पता चला कि कोहली अफ़्रीका में मौजूद नहीं हैं और इसकी वजह निजी है, तो इस मुद्दे पर और जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश भी नहीं की.
मुझे बार बार-बार ये ज़रूर लग रहा था कि आख़िर चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्या रहाणे जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के बग़ैर दौरे पर आई टीम अचानक कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ी के टेस्ट सीरीज़ में नहीं होने पर कैसे ख़ुद को संभालेगी?
लेकिन, टीम मैनेजमेंट को ये पता था कि कोहली न सिर्फ़ टेस्ट सिरीज़ खेलेंगे बल्कि ये भी यक़ीन था कि वो रन भी बनाएंगे.
ऐसा हुआ भी. सेंचुरियन टेस्ट से ठीक पहले कोहली ने सिर्फ एक दिन का अभ्यास किया बल्कि अगले दिन मैच के दौरान वो के.एल. राहुल के साथ टीम इंडिया के बेस्ट बल्लेबाज़ दिखे.
कोच और कैप्टन के 'भरोसेमंद'
दरअसल, कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा ने पिछले दो साल में कोहली को ड्रेसिंग रूम और उसके बाहर जिस तरह का सम्मान और स्पेस दिया है, उसकी मिसाल भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर की दी जा सकती है.
तेंदुलकर को भी ऐसा ही सम्मान सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ की कप्तानी के दौर में मिला करता था.
हालांकि, तेंदुलकर के मुकाबले कोहली के लिए कप्तानी छोड़ने के बाद फिर से एक सामान्य खिलाड़ी के तौर पर नई शुरुआत करना आसान नहीं था.
तेंदुलकर के लिए ये सबकुछ सहज इसलिए हुआ था क्योंकि उन्होंने कप्तानी ख़ुद से हमेशा के लिए छोड़ी थी ताकि वो बल्लेबाज़ के तौर पर संपूर्णता हासिल कर सके.
जबकि कोहली को मुश्किल हालात में दबाव के चलते कप्तानी छोड़नी पड़ी थी. उसके बाद अगले एक साल तक उनके लिए एकदम से सहज होना आसान नहीं था.
लेकिन, भारतीय टीम के हर दौरे पर देखा कि किस तरह से द्रविड़-रोहित की जोड़ी ने कोहली को फिर से टीम का किंग होने का एहसास दिलाया गया.
आलम ये है कि आज कोहली फिर से अपने खोए हुए पराक्रम के दौर को हासिल कर चुके हैं.
कौन लेगा विराट की जगह?
अगर मौजूदा वक्त में टेस्ट क्रिकेट की अहमियत को सबसे ज़्यादा तवज्जो किसी एक खिलाड़ी ने दी है तो वो निस्संदेह विराट कोहली हैं.
भारतीय क्रिकेट में चुनिंदा मौक़ों पर ही कोहली ने लाल गेंद की क्रिकेट से ब्रेक लिया है.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहले दो टेस्ट मैचों में 113 मैचों का अनुभव रखने वाले, डॉन ब्रैडमैन जितने शतक (29) और क़रीब 9000 रन बनाने वाले खिलाड़ी का न होना विरोधी खेमे के लिए बड़ी राहत थी.
भारत को आख़िरी बार भारत में खेली गई टेस्ट सिरीज़ में पराजित करने वाली टीम इंग्लैंड की ही थी.
इस बार अगर इस टीम ने फिर से भारत को हराने का सपना देखा है तो शायद उसके लिए भारतीय ड्रेसिंग रूम में कोहली का पहले दो मैचों में न होना टॉनिक का काम कर सकता है.
बहरहाल, अब अहम सवाल यही है कि अगर कोहली हैदराबाद और विशाखापत्तनम टेस्ट में नहीं खेलेंगे तो उनके जैसे खिलाड़ी का विकल्प कौन हो सकता है?
क्या चयनकर्ता सौ से ज़्यादा टेस्ट खेल चुके पुजारा के पास फिर से वापस लौटेंगे, जो हर लिहाज से शॉर्ट-टर्म में बेहतरीन विकल्प हैं?
बीस हज़ार से ज़्यादा फर्स्ट क्लास रन बनाने वाले पुजारा भारतीय पिचों के धुरंधर बल्लेबाज़ रहें हैं और शायद वो काफ़ी हद तक तक कोहली के अनुभव की कमी पूरी कर सकते हैं.
लेकिन, आलोचकों का तर्क हो सकता है कि अगर इस सिरीज़ में रजत पाटीदार या फिर सरफराज़ ख़ान को मौक़े नहीं दिए गए तो फिर उन्हें कब आज़माया जाएगा?
ख़ासकर सरफ़राज़ को, जो लगातार घरेलू क्रिकेट से लेकर ए टीम के दौरों पर तूफ़ानी फ़ॉर्म दिखा रहे हैं.
साउथ अफ्रीका दौरे पर अभिमन्यु ईश्वरन को ये कहकर जगह दी गई कि वो नियमित तौर पर ए टीम के साथ थे और सरफ़राज के लिए सीधे अफ्रीकी ज़मीन पर शुरुआत कराना शायद किसी युवा के लिए सही क़दम नहीं होता.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 'साख' का सवाल
बहरहाल, उम्मीद यही की जानी चाहिए कि कोहली राजकोट टेस्ट से फिर से टीम इंडिया के साथ जुड़ जाएंगे.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहली 19 पारियों में सिर्फ़ एक शतक बनाने वाले कोहली ने 2016 के विशाखापत्तनम टेस्ट के बाद से इंग्लैंड के ख़िलाफ़ जमकर रन बनाए. लेकिन, इत्तफाक से फिर से इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पिछली 19 पारियों में कोहली अपनी साख के हिसाब से नहीं खेले हैं.
इस दौरान कोहली के बल्ले से एक भी शतक नहीं निकला. ऐसे में मौजूदा सीरीज़ कोहली के टेस्ट करियर के लिहाज़ से काफ़ी अहम मानी जा रही थी.
ख़ासकर ये देखते हुए कि कोच ब्रैंडन मैक्कलम की अगुवाई वाली इंग्लैंड की टीम लगातार एक आक्रामक ब्रैंड वाले रवैये के साथ क्रिकेट खेल रही है, जिसे बैज़बॉल कहा जाता है.
इसमें टीम का बल्लेबाज़ी पक्ष ज़्यादा आक्रामकता के साथ खेलता है.
कोहली भले ही बैज़बॉल वाली आक्रामकता से बल्लेबाज़ी नहीं करते हों, लेकिन उनका लड़ाकू रवैया और दबदबा हमेशा से ही न सिर्फ़ इंग्लैंड बल्कि दुनिया की किसी भी टीम को मैदान में उतरने से पहले ही ख़ौफ़ में डाल देता है.
ऐसा इस सिरीज़ के पहले दो मैचों में नहीं होगा, लेकिन, कौन जाने कि इन दो टेस्ट में जिसे भी मौक़ा मिले, वो साबित कर दे कि सफ़ेद गेंद की तरह लाल गेंद की क्रिकेट में भी भारत के पास प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ों की कमी नहीं है.
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