विदेशों में लिंग परिवर्तन करवाने वालों को क्या मिलेगा नया पासपोर्ट?

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इमेज कैप्शन, ट्रांसजेंडर लोगों का समूह

भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि जो लोग विदेश जाकर सेक्स चेंज करवाते हैं उनके लिए नया पासपोर्ट जारी करने के लिए नई नीति बनानी चाहिए

विदेश मंत्रालय का कहना था कि जो लोग विदेश जाकर सेक्स चेंज की मेडिकल प्रक्रिया कराते हैं उनकी सर्जरी के बाद बॉयोमेट्रिक्स में बदलाव नहीं आता है लेकिन उनकी पहचान की जांच के लिए नई नीति विकसित करने के लिए उन्हें समय चाहिए.

विदेश मंत्रालय ने अदालत को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ़ इमिग्रेशन(बीओआई) की ओर से एक सुझाव आया है.

सुझाव में सेक्स चेंज के लिए की गई ऐसी मेडिकल सर्जरी में बॉयोमेट्रिक्स में बदलाव नहीं होता है इसलिए विदेश मंत्रालय को एक नीति तैयार करनी चाहिए.

इस नीति में इन लोगों को नया पासपोर्ट जारी करने से पहले उनकी पहचान की जांच का प्रावधान होना चाहिए.

क्या है मामला?

दरअसल इस संबंध में एक ट्रांसजेंडर महिला ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका डाली थी.

इस याचिका में उन्होंने अपने बदले हुए नाम, लिंग और फोटो के साथ पासपोर्ट दोबारा जारी करने की गुज़ारिश की थी.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दी गई अपनी जानकारी में जन्म से अपनी पहचान पुरुष बताई थी.

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बॉर एंड बेंच पर छपी जानकारी के अनुसार वे भारत में पढ़ाई करने के बाद रोज़गार के लिए अमेरिका चली गईं.

इसके बाद उन्होंने साल 2016 से 2022 के बीच लिंग परिवर्तन के लिए सर्जरी कराई.

बॉर एंड बेंच पर छपी जानकारी के मुताबिक क़ानूनी तौर पर अपना नाम और लिंग परिवर्तन के बाद अपनी नई पहचान को दस्तावेज़ों में शामिल करने के लिए इस ट्रांसजेंडर महिला ने अमेरिका में अदालत का दरवाज़ा खटखटाया.

बॉर एंड बेंच के अनुसार अमेरिका की अदालत ने उन्हें दस्तावेज़ों में ये बदलाव करने की इजाजत मिल गई.

इस ट्रांसजेंडर को अमेरिका में दस्तावेजों में अपना नाम और अपीयरेंस को लेकर नए दस्तावेज तो मिल गए लेकिन पासपोर्ट में उनकी पहचान पुरुष के तौर पर ही थी.

इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की वकील अरूंधति काटजू कहती हैं, ''इस ट्रांसजेंडर महिला को अपने नाम, जेंडर और अपीयरेंस(रुप) को लेकर पासपोर्ट बनाने में परेशानी आ रही थी. उन्होंने इसी साल 2023 में हाई कोर्ट में याचिका डाली थी.''

वे कहती हैं, ''कोर्ट ने इस मामले में संबंधित मंत्रालयों से पूछा कि अगर ट्रांसजेंडर व्यक्ति देश के बाहर जाकर सेक्स सर्जरी कराते हैं तो उनके नाम, जेंडर में बदलाव की वजह से पासपोर्ट बनाने में दिक्कत आती है. अदालत ने पूछा कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार क्या कर सकती है?''

वे बताती है कि इस संबंध में दिल्ली हाई कोर्ट ने विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय के साथ साथ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को भी पार्टी बनाया है.

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कोर्ट में क्या हुआ?

इस मामले पर सुनवाई के दौरान कहा गया कि ऐसे मेडिकल प्रक्रिया के बाद बॉयोमेट्रिक्स में बदलाव नहीं होता है. इसलिए विदेश मंत्रालय एक नीति बनाए क्योंकि उसके पास भारतीय नागरिकों के बॉयोमेट्रिक्स के रिकॉर्ड होते हैं और नया पासपोर्ट देने से पहले वो उनकी पहचान की जांच कर लें.

इस पर गृह मंत्रालय ने कहा है कि वे विदेश मंत्रालय के इस बयान से सहमत हैं.

इसमें आगे कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति सेक्स चेंज सर्जरी कराने के लिए विदेश जाता है और सर्जरी कराने के बाद उनके नाम, सेक्स(जेंडर) और रुप में बदलाव आता है और वो जानकारी पुराने पासपोर्ट से मेल नहीं खाती है तो ऐसा व्यक्ति दोबारा पासपोर्ट के लिए आवेदन दे सकता है.

अपने जेंडर, नाम और रुप में बदलाव को लेकर उन्हें जो पासपोर्ट दोबारा जारी किया जाएगा उसके लिए उन्हें पूरी प्रक्रिया से गुज़रना होगा और आवेदन इंडियन मिशन को देना होगा.

इसके बाद नया पासपोर्ट ऐसे व्यक्ति को जारी किया जा सकेगा.

ऐसे व्यक्ति को पूरे दस्तावेज़ देने होंगे और पुलिस रिपोर्ट की रसीद भी देनी होगी

काटजू

पासपोर्ट बनाने के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को आवेदन दिया जाता है.

मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म में आपका नाम, पता , जन्म की तारीख , जो काम करते हैं आदि का ब्यौरा देने के साथ-साथ इससे जुड़े दस्तावेज़ भी जमा कराए जाते हैं.

अगर नाम में बदलाव होता है तो इसे लेकर भी पूरी प्रक्रिया से गुजरना होता है और एफिडेविट बना कर पासपोर्ट ऑफ़िस में जमा कराना होता है.

कोर्ट में चल रहे इस ट्रांसजेंडर महिला के मामले में वकील अरुंधति काटजू कहती हैं, ''इस मामले में विदेश मंत्रालय ने उन्हें पासपोर्ट जारी कर दिया है और क़ानून इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट है कि ट्रांसजेंडर के ख़िलाफ़ भेदभाव नहीं होना चाहिए.''

सांकेतिक तस्वीर

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इमेज कैप्शन, ट्रांसजेंडर लोगों के साथ भेदभाव न हो उसे लेकर सरकार क़ानून भी लाई है.

ट्रांलजेंडर व्यक्तियों के अधिकार

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण विधेयक साल 2019 में संसद में पारित हुआ था.

इस विधेयक में ट्रांसजेंडर लोगों के लिए कई प्रावधान किए गए हैं.

प्रेस सूचना ब्यूरो या पीआईबी पर छपी जानकारी के मुताबिक किसी भी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ शैक्षणिक संस्थानों, रोज़गार, स्वास्थ्य सेवाओं आदि में भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए.

  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान को मान्यता दी जानी चाहिए.
  • उन्हें अपने लिंग की पहचान का अधिकार दिया जाना चाहिए.
  • वे जिस लिंग या जेंडर में रहकर अपनी पहचान बताना चाहते हैं उन्हें वो अधिकार दिया जाना चाहिए
  • माता-पिता और परिवार के नज़दीकी सदस्यों के साथ रहने का प्रावधान होना चाहिए.
  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए कल्याणाकारी योजनाओं में प्रावधान किया जाना चाहिए
  • ट्रांसजेंडर के अधिकारों की रक्षा के लिए काउंसलिंग, निगरानी आदि के लिए उठाए जा रहे कदमों के आकंलन के लिए नेशनल काउंसिल का प्रावधान किया जाना चाहिए.

हालांकि कोर्ट में चल रहे मामले में इस ट्रांसजेंडर महिला को नया पासपोर्ट मिल गया है लेकिन कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वो नई नीति लेकर आए ताकि ऐसा कोई भी व्यक्ति सेक्स चेंज सर्जरी कराता है वो नई पहचान के लिए साथ नया पासपोर्ट बनाने में कोई दिक्कत न आए.

इस मामले पर अगली सुनवाई 19 दिसंबर को होगी.

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