आईपीएल: विराट कोहली का वो सपना जो पूरा नहीं हो पा रहा

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार
2016 की ही तरह एक बार फिर से औरेंज कैप विराट कोहली के ही नाम है.
लेकिन उस वक़्त विराट कोहली के बल्ले ने अकेले दम पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को फ़ाइनल तक की राह तय करवायी थी और ट्रॉफी जीतने से सिर्फ आठ रन दूर रह गए थे.
लेकिन, 2024 में ट्रॉफी जीतना तो दूर की बात है. कोहली और उनके साथी फ़ाइनल में भी नहीं पहुँच पाए.
पहले 8 मैचों में से एक मैच जीतने के बाद जिस टीम को सभी ने ख़त्म मान लिया था, उसके लिए अगले 6 मैच जीतकर प्ले-ऑफ की रेस में आना ही एक बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है.
लेकिन जो लोग कोहली को जानते हैं, उन्हें इस बात का अंदाज़ा होगा कि क्वॉलिफायर दो में नहीं पहुँचने की बात ने इस पूर्व कप्तान को काफ़ी मायूस किया होगा.

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उम्मीदों का टूटना
इसे महज़ संयोग कह लें या फिर एक अजीब सा संयोग कि कोहली की टीम आईपीएल में हर साल उम्मीदें तो बहुत जगाती हैं, लेकिन अंत में होता वही है-उम्मीदों का टूटना.
वहीं राजस्थान रॉयल्स के लिए देखा जाए, तो ये मैच उनके लिए मौजूदा आईपीएल में बेंगलुरु के मुक़ाबले बिल्कुल उल्टा सफ़र था.
पहले 9 मैचों में से एक मैच हारने वाली संजू सैमसन की टीम के लिए टॉप दो टीमों में पहुँचना औपचारिकता माना जा रहा था.
लेकिन, बस उसके बाद लगातार चार मैच हारना हो या फिर आख़िरी मैच का बारिश से धुलना, ऐसा लगा कि रॉयल्स के कैंपेन को ग्रहण लग चुका था.
लेकिन, अहम नॉकआउट वाले मुक़ाबले में राजस्थान ने ज़्यादातर मौक़ों पर दबाव बनाए रखा.
इसकी शुरुआत हुई न्यूज़ीलैंड के मास्टर स्विंग गेंदबाज़ ट्रेंट बोल्ट की सधी हुई गेंदबाज़ी स्पैल से.
पहले तीन ओवर में सिर्फ़ छह रन देकर विरोधी कप्तान डू प्लेसी का विकेट झटकने वाले बोल्ट को क़िस्मत का साथ मिला होता, तो 2-3 कामयाबी उन्हें और मिल जाती.

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अश्विन का अनुभव
अगर बोल्ट ने चार ओवर में 19 रन देकर एक विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया तो निर्णायक मुक़ाबले में आर अश्विन ने अपने अनुभव का कमाल दिखाया.
अश्विन ने चार ओवर की गेंदबाज़ी में ज़बरदस्त दबाव बनाते हुए कैमरुन ग्रीन और ग्लेन मैक्सवेल के क़ीमती विकेट झटके.
इस दौरान उन्होंने सिर्फ़ 19 रन ख़र्च किए और इसलिए उन्हें मैन ऑफ़ द मैच का पुरस्कार भी मिला.
मौजूदा आईपीएल में अब तक अश्विन एक गेंदबाज़ के तौर पर बहुत प्रभावशाली नहीं दिखे थे, लेकिन जिस अंदाज़ में उन्हें अपने खेल का स्तर बेहतर किया, उससे ये बात साफ़ हो गई कि क्यों टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा आने वाले टी20 वर्ल्ड कप में भी अश्विन की दावेदारी की बात कर रहे थे.
बोल्ट-अश्विन की सधी हुई और किफ़ायती गेंदबाज़ी के सामने चार ओवर में तेज़ गेंदबाज़ आवेश ख़ान का 44 रन देना थोड़ा कम असरदार दिखे.
लेकिन जिस तरह से उन्होंने रजत पाटीदार और दिनेश कार्तिक जैसे बल्लेबाज़ों को नाज़ुक समय में चलता किया, उससे बेंगलुरु के लिए के इस मैच में पहले बल्लेबाज़ी करते हुए कम से कम 20 रनों का नुक़सान हुआ.
इस बात को मैच हारने के बाद डू प्लेसी ने माना कि उनके बल्लेबाज़ों को वो आज़ादी नहीं मिली.

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यशस्वी का बल्ला
छूट तो इस पिच पर किसी भी बल्लेबाज़ को नहीं मिली, क्योंकि मैच में एक भी अर्धशतक तक नहीं लगा.
एक बल्लेबाज़ जिसके लिए अर्धशतक लगाना एकदम औपचारिकता लग रहा था वो 5 रन दूर रहते हुए एक ऐसे शॉट को खेलन का प्रयास किया, जिसके बाद वो वो ख़ुद को कोसते-कोसते ही पवेलियन लौटे.
युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल ने इस आईपीएल ने पूरे सीज़न तो दबदबा नहीं बनाया है लेकिन जब-जब वो अच्छी पारी खेलें हैं, उनकी टीम को जीत मिली है.
30 गेंदों पर 45 रन बनाने वाले जायसवाल के बल्ले से भले ही मैच में एक भी छक्का नहीं लगा हो लेकिन नियमित अंतराल पर लगने वाले 8 चौकों ने हमेशा रन रेट को काबू में ही रखा.
एक और युवा खिलाड़ी रियान पराग ने 26 गेंदों पर 36 रन बनाए तो शिमरन हेटमायर 14 गेंदों पर ताबड़तोड़ 26 रन.
उनके कैरेबियाई साथी रॉवमैन पावेल ने 8 गेंदों पर 16 रन बनाकर आरसीबी के लिए किसी भी तरह के चमत्कारिक कमबैक की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
ये अलग बात है कि मोहम्मद सिराज ने आख़िरी लम्हों में अपनी गेंदों से भरपूर ज़ोर लगाया था.

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कोहली का क़द
सिराज ने 18वें ओवर में पराग और हेटमायर के विकेट को लेकर थोड़ा सी उम्मीद रॉयल्स के मन में जगा ज़रूर दी थी.
एक तरह से देखा जाय, तो दोनों टीमों के बल्लेबाज़ों को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पिच से थोड़ी शिकायत रही होगी.
निश्चित तौर पर टॉस जीतकर जो लाभ रॉयल्स को मिला, उसका असर मैच के नतीजे पर निश्चित तौर पर रहा.
कहीं ना कहीं बेंगलुरु को इस बात का मलाल ज़रूर रहा होगा कि कोहली इस मैच में तीन चौके और एक छक्के के बावजूद 24 गेंदों पर 33 रन ही बना पाए.
बात जब भी बेंगलुरु की कामयाबी या फिर नाकामी की होगी, तो स्वाभाविक तौर पर सबसे बड़े किरदार के तौर पर कोहली का ही नाम ज़ेहन में आता है.
कोहली भले ही आधिकारिक तौर पर इस टीम के कप्तान नहीं हों लेकिन लीडर के तौर पर उनकी हस्ती ड्रेसिंग रूम में डू प्लेसी से ज़्यादा ही होगी, कम नहीं.
भारतीय क्रिकेट प्रेमी शायद इस बात से तसल्ली ले सकते हैं कि ना तो कोहली और ना ही रोहित शर्मा को आईपीएल में इस साल कामयाबी मिली और ये दोनों खिलाड़ी अब अमेरिका के लिए दो दिन बाद रवाना होंगे.
हो सकता है एक हफ्फ़्ते का अतिरिक्त समय इन दोनों दिग्गजों को इस बात के लिए और भी प्रेरित करे कि अब कैरेबियाई ज़मीन पर टी20 वर्ल्ड कप नहीं जीते, तो क्रिकेट के फटाफट फ़ॉर्मेट में एक साथ एक ट्रॉफी जीतने का ये आख़िरी मौक़ा हो.
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