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महुआ मोइत्रा ने बताया एथिक्स कमेटी ने उनसे क्या पूछा - प्रेस रिव्यू
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि लोकसभा की एथिक्स कमेटी के सामने पेश होने के दौरान उनसे व्यक्तिगत सवाल पूछे गए.
उन्होंने कहा है कि इस वजह से उन्होंने और विपक्षी सदस्यों ने इसका बहिष्कार किया. उन्होंने कहा कि जब उनसे एक सीमा से बाहर जाकर निजी सवाल पूछे जाने लगे तो वो कमेटी की सुनवाई से बाहर आ गईं.
‘द हिंदू’ के एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने कहा है कि एथिक्स कमेटी के अध्यक्ष विनोद सोनकर ‘अनुचित’ लाइन पर सवाल पूछ रहे थे.
महुआ मोइत्रा को इस आरोप के बाद एथिक्स कमेटी में पूछताछ के लिए बुलाया गया था कि उन्होंने पैसे लेकर संसद में सवाल पूछे हैं.
उनके ख़िलाफ़ ये आरोप बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लगाए थे.
‘द हिंदू’ को दिए इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने बताया कि एथिक्स कमेटी की सुनवाई के दौरान क्या हुआ और उसने किस तरह के सवाल पूछे गए.
महुआ ने कहा, ''सोनकर ने पूछा कि आप फलां को डियर फ्रेंड बताती हैं. आप बता सकती हैं वे कितने डियर हैं. उनकी पत्नी का नाम का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि क्या उनकी पत्नी को ये पता है. उन्होंने कहा कि आप हां और ना में जवाब दे सकती हैं.''
महुआ मोइत्रा ने कहा, ''इसके बाद मुझसे पूछा गया कि देर रात आप किससे बात करती हैं और कितनी बार करती हैं. क्या आप 24 घंटों के दौरान हुई बातचीत का लॉग दे सकती हैं. अगर आप चाहती हैं तो इसका जवाब ना में भी दे सकती हैं. मैंने कहा, इसका मतलब ये कि अगर आप मुझसे ये पूछें कि आप वेश्या हैं तो मैं हां या ना में जवाब दे सकती हूं?''
महुआ मोइत्रा ने कहा, ''इसके बाद सोनकर ने मुझसे पिछले पांच साल में मेरी यात्राओं का ब्यौरा मांगा. उन्होंने मुझसे ये भी पूछा कि इस दौरान मैं किन होटलों में ठहरी और किसके साथ.''
इस सवाल पर एथिक्स कमेटी में शामिल विपक्ष के पांचों सदस्य उठ कर बाहर आ गए.
'अदानी पर मैंने सिर्फ नौ सवाल पूछे थे'
महुआ मोइत्रा ने इंटरव्यू में कहा, ''दोपहर 12 बजे उन्होंने (एथिक्स कमेटी) मुझे बुलाया. एथिक्स कमेटी की पहले से लिखी स्क्रिप्ट के साथ आए थे और मुझे अपना बयान दर्ज कराने नहीं दे रहे थे. मुझे तब बोलने दिया गया जब कमेटी में शामिल विपक्षी सांसदों ने इस पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि चूंकि शिकायतकर्ता ने अपना बयान दर्ज करा दिया है इसलिए महुआ मोइत्रा को भी बयान दर्ज कराने दिया जाए.''
महुआ ने कहा, ''लेकिन कमेटी के चेयरमैन ने किसी को बोलने नहीं दिया. वो सवालों का पुलिंदा लेकर आए थे और इसमें से सवाल पढ़ रहे थे. अब कमेटी की जांच के दायरे में दो चीज़ें हैं. एक लोकसभा का लॉगइन और दूसरी, मेरे ओर से कथित तौर पर गिफ्ट लिया जाना.''
‘द हिंदू’ ने उनसे पूछा कि एक उद्योगपति के पास आपकी संसद का लॉगइन पासवर्ड क्यों होना चाहिए.
इस पर उन्होंने कहा, ''वो मेरे दोस्त हैं. मैंने उनसे एक सेक्रेट्री मुहैया कराने को कहा था.''
मैं उन्हें अपना सवाल भेजती थी और वो इसे टाइप कर देते थे. मैंने संसद में 61 सवाल पूछे जबकि प्रति सांसद सवालों की संख्या 191 है.
''अदानी पर मैंने सिर्फ नौ सवाल पूछे थे. मैं अदानी का पर्दाफाश अपने सोशल मीडिया पोस्ट, भाषणों और वीडियो से करती आई हूं.और संसद के सवालों से आपको क्या गुप्त जानकारी मिल जाती है. ये जानकारियां आरटीआई के ज़रिये आसानी से मिल जाती है.''
भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति बनाने की तैयारी शुरू की
भारत ने वर्षों के विचार-विमर्श के बाद आख़िरकार अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति बनाने का काम शुरू कर दिया है.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय ( एनएससीएस) कई केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से सलाह-मशविरा कर समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति तैयार करने जा रहा है. इसके बाद कैबिनेट इसे अंतिम मंजूरी देगी.
अख़बार ने लिखा है कि ये पहली बार है जब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति लाई जाएगी.
अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का प्रकाशन कर चुके हैं और इसमें समय-समय पर अपडेट किया जाता है.
इसका मक़सद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों को एक जगह लाना और रणनीति अपनाने का तरीका तय करना है.
अख़बार लिखता है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान कई मंत्रालयों ने इनपुट मुहैया कराए हैं.
इन मंत्रालयों और विभागों ने वो दस्तावेज़ भी मुहैया कराया है, जिसके आधार पर ये पता चलता है कि देश की सुरक्षा के सामने क्या चुनौतियां और खतरे हैं.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने लिखा कि एक सप्ताह पहले पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने कहा था कि भारत को एक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की जरूरत है.
इस बीच, देश की सुरक्षा को लेकर एक अंतरिम श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए.
राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति तैयार होने के बाद इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा. इस प्रक्रिया से जुड़े एक अधिकारी ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि इसे समय-समय पर अपडेट किया जाएगा.
सऊदी अरब की नज़र आईपीएल पर
फुटबॉल और गोल्फ के बाद सऊदी अरब ने अब भारत की क्रिकेट लीग इंडियन प्रीमियर लीग में हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है.
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सलाहकारों ने भारत सरकार के अधिकारियों को आईपीओ को 30 अरब डॉलर की होल्डिंग में तब्दील करने की सलाह दी है.
इस मामले के जानकारों का कहना है कि सऊदी अरब इसमें अच्छी-खासी हिस्सेदारी खरीदना चाहता है.
अख़बार लिखता है कि इस मामले के जानकारों के मुताबिक़ पिछली बार जब सऊदी प्रिंस भारत आए थे तो उनसे इस बारे में बातचीत हुई थी.
सूत्रों के मुताबिक़ इस बातचीत में सऊदी क्राउन प्रिंस ने आईपीएल में पांच अरब डॉलर निवेश करने की पेशकश की थी. वो इंग्लिश प्रीमियर लीग और चैंपियन्स लीग की तरह आईपीएल का दूसरे देशों में विस्तार करना चाहते हैं.
अख़बार ने समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग के हवाले से लिखा है कि सऊदी इस सौदे को लेकर काफी उत्साहित है और इस पर ज़ोर दे रहा है लेकिन केंद्र और बीसीसीआई की ओर से इस पर 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद ही फैसला लेने की संभावना है.
नीतीश के तेवर से कांग्रेस घबराई, खड़गे ने सीधे फोन पर की बात
हाल ही में बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम में विपक्षी गठबंधन और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था.
अब ऐसा लग रहा है कि नीतीश के बागी तेवरों से कांग्रेस घबरा गई है.
दरअसल ख़बर आई है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार से बीती रात टेलीफोन पर बात की है.
‘अमर उजाला’ के मुताबिक़ दोनों नेताओं के बीच विपक्षी गठबंधन को लेकर बातचीत हुई.
अख़बार ने लिखा है मल्लिकार्जुन खड़गे ने नीतीश कुमार को विश्वास दिलाया है कि विधानसभा चुनावों के बाद विपक्षी गठबंधन पर बात होगी.
बता दें कि बीते गुरुवार को नीतीश कुमार ने पटना में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि वह विपक्षी गठबंधन की अगली बैठक आयोजित कराने में कोई रुचि नहीं ले रही है.
यही वजह है कि खड़गे द्वारा नीतीश कुमार से टेलीफोन पर बातचीत को नीतीश की नाराजगी दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
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