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नीतीश कुमार की आर्थिक सर्वे रिपोर्ट पेश करने के दौरान विवादित टिप्पणी, बीजेपी ने बताया संगति का असर
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार विधानसभा में जातिगत गणना के दौरान हुए आर्थिक सर्वेक्षण पर अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला पुरूष के शारीरिक संबंधों को लेकर विवादित टिप्पणी की.
उन्होंने ये टिप्पणी आर्थिक सर्वेक्षण में महिलाओं की बढ़ रही साक्षरता और प्रजनन दर के संदर्भ में की.
नीतीश कुमार ये बता रहे थे कि साक्षरता की दर बढ़ने से महिलाओं की प्रजनन दर कम हो रही है, लेकिन उन्होंने ये बताने के लिए जिन शब्दों को इस्तेमाल किया है, उसे सदन की गरिमा ही नहीं बल्कि किसी सावर्जनिक मंच के अनुरूप नहीं बताया जा रहा है.
यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से नीतीश कुमार के संबोधन को लेकर आलोचनाओं का दौर देखने को मिल रहा है.
बीजेपी से दो बार विधायक रश्मि वर्मा ने बीबीसी हिंदी से बताया कि ये बहुत बीभत्स था.
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री जब स्त्री पुरुष संबंधों के बारे में बोल रहे थे तो उनकी बॉडी लैंग्वेज देखिए. वो एक्शन कर रहे थे. मुझे याद नहीं कि विधानसभा जैसे सम्मानित फोरम में किसी ने ऐसा कभी कहा हो. मुख्यमंत्री पर बुरी संगति का असर है. मेरी मांग है कि उनके इस बयान को सदन की कार्रवाई से हटाया जाए. बाक़ी मैं विधानसभा में इस पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाऊंगी."
क्या है मामला?
दरअसल बिहार सरकार ने जातिगत गणना में आर्थिक समाजिक सर्वे भी कराया है.
इसकी रिपोर्ट मंगलवार को बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश हुई थी. सभी दलों ने इस पर बात रखी जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सदन में अपनी बात रख रहे थे. इस बीच महिलाओं की शिक्षा और प्रजनन का भी मुद्दा आया.
13 करोड़ की जनसंख्या वाले बिहार राज्य में आबादी एक प्रमुख मुद्दा रहा है. नीतीश सरकार ने साल 2005 में सत्ता संभालने के बाद इस पर काम करना भी शुरू किया.
नीतीश सरकार ने प्रजनन दर कम करने के लिए महिलाओं की शिक्षा पर ज़ोर दिया. इस आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, महिलाओं की साक्षरता दर 51.5 प्रतिशत से बढ़कर 73.91 प्रतिशत हो गई है.
नीतीश कुमार ने इसका जिक्र करते हुए सदन को बताया, "मैट्रिक पास करने वाली लड़कियां 24,81,000 से बढ़कर 55,90,000 हो गई. वहीं इंटरमीडिएट पास 12,55,000 से बढ़कर 42,11,000 और ग्रैजुएट या उससे ज्यादा पास छात्राओं की संख्या 4,35,000 से बढ़कर 34,61,000 हो गई है."
इसी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, "पहले प्रजनन दर 4.9 प्रतिशत था. लड़की जब पढ़ लेती है तो प्रजनन दर घटेगी. अब ये घटते घटते 2.9 प्रतिशत हो गया है जिसे हम और घटाकर 2 करना चाहते है. लड़कियों की पढ़ाई का फ़ायदा हो रहा है."
इसी बयान के दौरान उन्होने स्त्री पुरुष संबंध को लेकर टिप्पणी की.
प्रजनन दर घटी है, बाक़ी सारी बातें बेमानी: जेडीयू
बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने बीबीसी हिंदी से कहा, "नीतीश कुमार उम्र की ढलान पर है. उनके दिलो दिमाग़ में कई बार तारतम्य नहीं दिख रहा है. वो कई ऐसी बातें बोल जा रहे हैं जिनको समाज में बोलने से हम लोग हिचकेंगे लेकिन वो सदन में ऐसी बातें बोल रहे हैं. दुर्भाग्य है कि सदन में लोगों के पास भाषा की मर्यादा नहीं रही और लोग चापलूसी में ठहाके लगा रहे हैं. ये सब कुछ महिला विरोधी है."
वहीं, जेडीयू प्रवक्ता अंजुम आरा ने नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा, "जो प्रजनन दर घटी है उसकी वजह शिक्षा ही है बेटियों की. मुख्यमंत्री जी उसी एचीवमेंट की बात कर रहे थे. बाक़ी बातें बेमानी है. हमें अपनी उपलब्धियों पर फोकस करना चाहिए."
महिलाओं से माफ़ी मांगे मुख्यमंत्री
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार ने मानवीय संबंधों को लेकर विवादित टिप्पणी की हो.
बीते साल राजधानी पटना के मगध महिला छात्रावास का उदघाटन करते हुए समलैंगिकता पर निशाना साधा था.
उन्होनें छात्रावास के उद्घाटन भाषण में कहा था, "लड़का-लड़की की शादी होगी तभी बच्चा पैदा होगा. लड़का-लड़का शादी करेगा तो कोई पैदा होगा."
बिहार महिला समाज की कार्यकारी अध्यक्ष और पत्रकार निवेदिता झा कहती हैं, "ये बहुत ही अभद्र टिप्पणी है. जनसंख्या का मुद्दा बहुत ही गंभीर मुद्दा है लेकिन मुख्यमंत्री की ये टिप्पणी और उनकी बॉडी लैंग्वेज इसे अश्लील बना रही है. सदन में भी जिस तरह से ठहाके लगे, वो दिखाता है कि पितृसत्ता सदन के भीतर भी कितनी मजबूत है. हमारी मांग है कि उनके इस बयान को कार्रवाई से हटाया जाए, मुख्यमंत्री महिलाओं से माफ़ी मांगे और जो महिलाएं सदन में मौजूद हैं, वो इसका खुलकर विरोध करें."
65 प्रतिशत आरक्षण का सुझाव
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जातिगत सर्वे के आधार पर, राज्य में आरक्षण को बढ़ाने का सुझाव दिया है.
मंगलवार को बिहार विधानसभा में उन्होंने कहा कि पिछड़ा, अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया जाए.
नीतीश कुमार ने कहा, "जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति को ध्यान में लेकर निम्न निर्णय लिए जा सकते हैं. जाति आधारित गणना में वर्गवाद के आंकड़े मिले. उसमें पिछड़ा वर्ग का 47.12 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग का 26.01 प्रतिशत, अनुसूचित जाति का 19.65 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति का 1.68 प्रतिशत और सामान्य वर्ग का 12.55 प्रतिशत है"
उन्होंने कहा, "अपर कास्ट का कुल मिलाकर 52.52 और पिछड़ा वर्ग का 27.12 और अति पिछड़ा वर्ग का 36.01 और अनुसूचित जाति का 16 से बढ़कर 19.65 प्रतिशत हो गया है. इसलिए अनुसूचित जाति के लिए कोशिश करनी चाहिए. अनुसूचित जनजाति पहले एक से कम थी, वो अब 1.68 प्रतिशत हो गई है. इसके लिए आगे प्रयास करना होगा."
"अभी यह स्थिति है कि अनुसूचित जाति और जनजाति की जनसंख्या अनुपात में वृद्धि के कारण, अब जानते हैं ना, जब भी जो भी दिया गया है, 50 प्रतिशत का है. अनुसूचित जाति और जनजाति को सेंट प्रसेंट मिलता था. अभी तक बिहार में 16 और एक 17 था. अब संख्या बढ़ गई है अनुसूचित जाति 19.65 प्रतिशत हो गई है, तो अनुसूचित जाति को 20 प्रतिशत करना होगा. अनुसूचित जनजाति का 1.68 है तो उसे 2 प्रतिशत करना होगा. दोनों को 17 प्रतिशत की जगह पर 22 प्रतिशत देना होगा. सरकारी सेवाओं में उनको सेंट प्रसेंट तो देना ही होगा ना"
नीतीश कुमार ने कहा, "ये अनुसूचित जाति का 20 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति का 2 प्रतिशत हो जाएगा. पिछड़े वर्ग की महिलाओं को पूर्व से प्रावधानिक तीन प्रतिशत आरक्षण को, पिछड़े और अति पिछड़ों के आरक्षण में सम्माहित किया जा सकता है. तब उसकी कोई जरूरत नहीं है. अब तो हम 35 प्रतिशत दे दिए हैं. अब तीन प्रतिशत को छोड़ देना चाहिए, क्योंकि अब पूरे बिहार में महिलाओं को दे रहे हैं."
उन्होंने कहा, "50 प्रतिशत में 22 प्रतिशत(अनुसूचित जाति और जनजाति) आरक्षण हटेगा तो पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के लिए सिर्फ 28 प्रतिशत आरक्षण बचेगा. दोनों को मिलाकर इनकी संख्या 63 प्रतिशत हो गई है और कुल मिलाकर आप समझ लीजिए कि उनके पास सिर्फ 28 प्रतिशत आरक्षण बचा है. अपर कास्ट में आप जानते हैं कि केंद्र सरकार ने पिछड़ेपन को 10 प्रतिशत किया और हमने स्वीकार किया."
नीतीश कुमार ने कहा, "ऐसे में पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ना चाहिए ना भाई. यही हमारा कहना है. मेरा यह कहना है कि भाई जो 50 प्रतिशत है वो कम से कम 65 प्रतिशत कर दें. 10 प्रतिशत अपर कास्ट का पहले से है. 65 और 10 प्रतिशत मिलाकर कुल 75 प्रतिशत आरक्षण हो जाएगा और 25 प्रतिशत बचेगा. पहले 40 प्रतिशत सबको फ्री था, अब वो 25 हो जाएगा."
उन्होंने कहा, "पिछड़ा, अति पिछड़ा, एससी, एसटी के पास जो 50 प्रतिशत आरक्षण है, उसे हम लोग कम से कम 65 प्रतिशत कर दें, ये आप लोगों से परामर्श हैं. आप लोग भी सहमति दे रहे हैं, ये बड़ी खुशी की बात है."
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