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इथियोपिया में फटा ज्वालामुखी और असर भारत में, जानिए क्या-क्या होगा प्रभावित
इथियोपिया के अफ़ार क्षेत्र में स्थित हायली गुब्बी ज्वालामुखी रविवार की सुबह फट गया था.
स्थानीय मीडिया के अनुसार, इससे आसपास के गाँवों पर धूल की परत जम गई.
स्मिथसोनियन संस्थान के ग्लोबल वोल्कैनिज़्म प्रोग्राम के अनुसार, पिछले 12,000 वर्षों में हायली गुब्बी ज्वालामुखी के विस्फोट का यह पहला मामला है.
सैटेलाइट तस्वीरों में राख का बादल लाल सागर के ऊपर तैरता हुआ दिखाई दिया.
स्थानीय मीडिया ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि कोई हताहत नहीं हुआ है, लेकिन चेतावनी दी है कि राख स्थानीय पशुपालकों की आजीविका को प्रभावित कर सकती है.
पूर्वोत्तर इथियोपिया में यह ज्वालामुखी लगभग 12 हज़ार वर्षों में पहली बार फटा है. इससे घना धुआँ 14 किलोमीटर ऊँचाई तक आकाश में उठता दिखाई दिया.
टूलूज़ वॉल्केनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर के अनुसार, ज्वालामुखी से निकला गुबार यमन, ओमान, भारत और उत्तरी पाकिस्तान तक बहकर पहुँचा.
हताहतों या विस्थापितों की संख्या के बारे में तुरंत कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.
भारत में असर
इंडिया मेट स्काई वेदर ने सोमवार की शाम एक्स पर लिखा था, ''राख का बादल उत्तर भारत की ओर बढ़ सकता है. हायली गुब्बी ज्वालामुखी क्षेत्र से गुजरात तक एक बड़ा राख का बादल दिखाई दे रहा है. ज्वालामुखी का विस्फोट तो थम गया है लेकिन यह राख का बादल वायुमंडल में उठ चुका है. यह 100-120 किमी/घंटा की रफ़्तार से उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है.''
''यह बादल आकाश में 15,000-25,000 फुट से लेकर 45,000 फुट तक ऊँचाई में फैला हुआ है और इसमें मुख्य रूप से ज्वालामुखी की राख, सल्फ़र डाइऑक्साइड और कुछ छोटे कांच/चट्टान के कण शामिल हैं. इससे आकाश में सामान्य से अधिक अंधेरा दिख सकता है और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है. इससे उड़ानों में देरी और यात्रा लंबी हो सकती है.''
इंडिया मेट स्काई वेदर ने लिखा था, ''यह राख का बादल रात 10 बजे तक गुजरात (पश्चिमी हिस्सा) में प्रवेश करने वाला है और राजस्थान, उत्तर-पश्चिम महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की ओर बढ़ेगा. बाद में यह हिमालय और अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है. आकाश सामान्य से अधिक धुंधला दिखेगा. इससे दिल्ली की हवा और ख़राब हो सकती है.''
अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपनी वेबसाइट पर एक रिपोर्ट में लिखा है, ''राख के बादल के लाल सागर पार कर मध्य पूर्व और मध्य एशिया की ओर बढ़ने के बाद, एयरलाइंस ने दोपहर के बाद से ही उड़ानें रद्द करना शुरू कर दी थीं. इंडिगो को छह उड़ानें रद्द करनी पड़ीं.''
''इनमें से एक उड़ान मुंबई से थी जबकि अन्य रद्द की गई उड़ानें दक्षिण भारत से आ रही थीं. मुंबई हवाई अड्डे के एक अधिकारी ने कहा कि उड़ानें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से फिर से मार्ग निर्धारित कर रही हैं. पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भारतीय एयरलाइंस के लिए बंद है इसलिए भारतीय एयरलाइंस पर इसका असर पड़ने की संभावना है.''
एयर इंडिया ने भी यात्रियों की सुरक्षा पर ज़ोर देते हुए एक बयान जारी किया है. बयान में कहा गया है, "इथियोपिया में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में राख के बादल देखे गए हैं. हम स्थिति पर बारीकी से नज़र बनाए हुए हैं और अपने परिचालन क्रू के संपर्क में हैं. इस समय एयर इंडिया की उड़ानों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है."
एयर इंडिया ने कहा, "सभी ज़रूरी क़दम उठाएँगे ताकि हमारे यात्रियों, क्रू और विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. यही हमारी शीर्ष प्राथमिकता बनी हुई है. हमारे नेटवर्क में कार्यरत ग्राउंड टीमें यात्रियों का समर्थन जारी रखेंगी और उन्हें उनकी उड़ानों के बारे में लगातार जानकारी देती रहेंगी."
उड़ानों पर असर
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एविएशन नियामक डीजीसीए ने सोमवार को एयरलाइंस और हवाई अड्डों को एक निर्देश जारी किया है ताकि इथियोपिया में ज्वालामुखी फटने के संभावित मुश्किलों से निपटा जा सके.
पीटीआई के अनुसार, अकाशा एयर, इंडिगो और केएलएम जैसी एयरलाइंस ने सोमवार को राख के बादलों के कारण कुछ उड़ानों को रद्द किया.
भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक एम मोहपात्र ने हिन्दुस्तान टाइम्स से सोमवार को कहा था, ''अगले कुछ घंटों में इसका असर गुजरात और दिल्ली-एनसीआर के अन्य हिस्सों में दिखने लगेगा. यह पहले ही गुजरात के नज़दीक पहुँच चुका है और हम अगले कुछ घंटों में इसके प्रभाव को दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के इलाक़ों में देखेंगे. इसका मुख्य प्रभाव उड़ानों पर पड़ेगा.''
मोहपात्रा ने कहा, "सतह के पास इसका कोई ख़ास असर नहीं दिखेगा. आकाश में यह धुंधला और बादल जैसा दिखाई देगा और इसका असर कुछ घंटों के लिए रहेगा क्योंकि यह धीरे-धीरे पूर्व की ओर बढ़ रहा है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.