हिज़्बुल्लाह को चकमा देकर लेबनान में कैसे पेजर धमाकों को दिया गया अंजाम, मोसाद के पूर्व एजेंटों ने बताया

    • Author, रफ़ी बर्ग
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

लेबनान के हथियारबंद शिया समूह हिज़्बुल्लाह के लड़ाके बीते दस सालों से वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन उन्हें ये जानकारी नहीं थी कि ये इसराइल के बनाए उपकरण हैं और एक दिन इनका इस्तेमाल उन्हीं के ख़िलाफ़ किया जाएगा.

उन्हें इस बात का भी अंदाज़ा नहीं था कि जिस वॉकी-टॉकी के ज़रिए वो एक-दूसरे से संपर्क कर रहे हैं, उसके साथ छेड़छाड़ की गई है. वो किसी भी क्षण विस्फोटक बन सकते हैं.

इस बात की जानकारी इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के दो पूर्व एजेंटों से मिली है.

इस साल सितंबर में चौंकाने वाले हमलों के तहत लेबनान में पेजर्स और वॉकी-टॉकी में सिलसिलेवार धमाके हुए. इन धमाकों में कई लोगों की जान गई और सैंकड़ों घायल हुए.

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मोसाद के दो पूर्व एजेंटों ने अमेरिका में बीबीसी के सहयोगी नेटवर्क सीबीएस को बताया कि कैसे हिज़्बुल्लाह को इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद ने धोखा दिया और उसे हज़ारों ऐसे वॉकी-टॉकी और पेजर्स बेचे जिनके साथ छेड़छाड़ की गई थी. हिज़्बुल्लाह को इसका अंदाज़ा तक नहीं हुआ कि ये वॉकी-टॉकी और पेजर्स इसराइल में बनाए गए हैं.

इसी साल 17 सितंबर को लेबनान में हज़ारों पेजर्स में सिलसिलेवार धमाके हुए थे. ये धमाके उन इलाक़ों में हुए थे जिन्हें हिज़्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है.

इन धमाकों में पेजर्स इस्तेमाल करने वाले कई लोगों की मौत हुई जबकि कई घायल हुए, साथ ही इसके कारण इलाक़े में डर और दहशत फैल गया.

इसके एक दिन बाद लेबनान में इसी तरह वॉकी-टॉकी में सिलसिलेवार धमाके हुए, जिसमें कई लोगों की जान गई और सैकड़ों घायल हुए.

लेबनान के अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में 42 लोग मारे गए और हजारों घायल हुए. दो महीने बाद इन धमाकों की ज़िम्मेदारी इसराइल ने ली.

लेबनान के अधिकारियों के अनुसार इसराइल की बिन्यामिन नेतन्याहू सरकार ने कहा कि उन्होंने हमले में केवल हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों को निशाना बनाया, लेकिन ऐसा नहीं है. क्योंकि इन हमलों में कई आम लोग भी मारे गए.

'फर्जी कंपनी बनाकर दिया धोखा'

इन दो पूर्व एजेंटों में से एक माइकल ने सीबीएस से कहा कि मोसाद ने वॉकी-टॉकी में लगने वाली बैटरियों के अंदर एक विस्फोटक उपकरण छिपा कर रखा था. वॉकी-टॉकी को अक्सर कमीज़ की ऊपर वाले पॉकेट के पास रखा जाता है.

उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह ने दस साल पहले "अच्छी क़ीमत" पर क़रीब 16 हज़ार वॉकी-टॉकी खरीदे थे. ये उन्होंने एक फर्जी कंपनी से खरीदे थे.

माइकल ने कहा, "हमारे पास ऐसी अविश्वसनीय क्षमता है कि हम कई तरह की विदेशी कंपनियां बना सकते हैं और आप कभी पता नहीं लगा पाएंगे कि ये असल में इसराइल में बनी कंपनियां हैं."

"सप्लाई चेन को अपने पक्ष में करने के लिए हम एक फर्जी कंपनी के साथ और फर्जी कंपनियां खड़ी करते हैं."

"हम एक फर्जी दुनिया बनाते हैं. हम एक वैश्विक प्रोडक्शन कंपनी हैं. हम पटकथा लिखते हैं, उसका निर्देशन करते हैं, उसके निर्माता हैं और ये पूरी दुनिया हमारे लिए हमारा मंच है."

सीबीएस का कहना है दो साल पहले इस अभियान का दायरा बढ़ाया गया और इसमें पेजर्स को भी शामिल किया गया, जिन्हें "बीपर्स" कहा जाता है.

मोसाद ने कहा कि उसे पता चला कि उस समय हिज़्बुल्लाह गोल्ड अपोलो नाम की एक ताइवानी कंपनी से पेजर खरीद रहा था.

इसके बाद उन्होंने इसी कंपनी के नाम पर यानी गोल्ड अपोलो के नाम से एक फर्जी कंपनी बनाई जो पेजर्स को असेंबल करने का काम करती थी. इसी प्रक्रिया के दौरान उनमें विस्फोटक डाला जाता था.

सीबीएस की रिपोर्ट के अनुसार मोसाद ने इन उपकरणों में केवल उतना ही विस्फोटक भरा जितना इसका इस्तेमाल करने वाले को नुक़सान पहुंचाने के लिए पर्याप्त था.

एक और पूर्व एजेंट गेब्रियल ने बताया, "यह सुनिश्चित करने के लिए इससे कम से कम नुक़सान हो, हमने हर चीज़ का कई बार परीक्षण किया."

पूर्व एजेंटों ने बताया कि मोसाद ने पेजर्स के लिए एक ख़ास रिंगटोन भी चुनी जो अर्जेंट सुनाई देती थी ताकि ये जिसके हाथ में हो वो इसपर आए संदेश को अर्जेंट मानकर तुरंत जांच करे.

गेब्रियल ने कहा कि मोसाद ने इन पेजर्स की खूबियों को दर्शाने वाले विज्ञापन और पर्चे बनाए और उन्हें ऑनलाइन शेयर किया, ताकि हिज़्बुल्लाह को फांसा जा सके.

वह कहते हैं, "अगर वो हमसे चीज़ें खरीदते तो उन्हें अंदाज़ा ही नहीं होता कि असल में वो मोसाद से सामान खरीद रहे हैं."

"हमने द ट्रूमैन शो जैसा कुछ बनाया था जिसमें पर्दे के पीछे पूरा नियंत्रण हमारे हाथ में था और किरदारों को अंदाज़ा नहीं था कि उनके साथ क्या हो रहा है."

द ट्रूमैन शो 1998 में बनी एक अमेरिकी फ़िल्म है जिसमें फ़िल्म के किरदार ट्रूमैन बरबैंक को लगता है कि वो आम ज़िंदगी जी रहा है, लेकिन उसे अंदाज़ा नहीं होता कि उसकी हर गतिविधि को असल में कंट्रोल किया जा रहा है

सीबीएस के अनुसार सितंबर 2024 तक हिज़्बुल्लाह ने ऐसे पांच हज़ार पेजर्स खरीद लिए थे, जिनके साथ छेड़छाड़ की गई थी.

इन दोनों एजेंटों का कहना था कि इन उपकरणों में धमाके तब किए गए जब मोसाद को लगा कि हिज़्बुल्लाह का व्यवहार संदिग्ध हो रहा है.

इस धमाकों से पूरे लेबनान में दहशत फैल गई क्योंकि ये धमाके सिलसिलेवार तरीके से सड़कों से लेकर सुपर मार्केट तक हर जगह होने लगे थे.

अस्पतालों में घायलों की संख्या अचानक बढ़ गई. अस्पताल पहुंचने वालों में कई ऐसे थे जिनके शरीर के अंग धमाके से क्षत-विक्षत हो गए थे.

गेब्रियल कहते हैं लेबनान में इस तरह की "मज़बूत अफ़वाह" थी कि उस वक्त हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह के सामने इन धमाकों में कई लोगों की मौत हुई है. बाद में इसराइल के एक अभियान में बेरुत में हसन नसरल्लाह की मौत हो गई थी.

धमाकों के बाद हमलों से बिखरा हिज़्बुल्लाह

लेबनान में वॉकी-टॉकी और पेजर्स में धमाके ऐसे वक्त हुए जब हिज़्बुल्लाह लेबनान के दक्षिणी सीमा से सटे इसराइल पर और इसराइल लेबनान के दक्षिणी हिस्से पर हमले कर रहा था.

बीते साल सात अक्तूबर को हमास ने दक्षिणी इसराइल के कई हिस्सों में भीषण हमले किए. इसके एक दिन बाद इसराइल की उत्तरी सीमा की तरफ हिज़्बुल्लाह ने इसराइल पर हमले करने शुरू कि थे.

इन हमलों के असर से हिज़्बुल्लाह अभी उबर ही रहा था कि इसराइल ने उसके ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए, जिसके बाद उसने ज़मीन के रास्ते भी लेबनान पर हमला बोल दिया.

दोनों के बीच इस साल 26 नवंबर को युद्धविराम हो गया.

लेबनान ने पेजर और वॉकी-टॉकी हमलों की कड़ी निंदा की, जबकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि इन हमलों ने उन्हें "डरा दिया" है.

उन्होंने कहा कि हमलों में जो तरीका अपनाया गया वो, "अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों का उल्लंघन" करता है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख एंटोनियो गुटेरेश ने इस हमले को युद्ध अपराध बताया.

उन्होंने कहा, "वॉकी-टॉकी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में विस्फोट करके लेबनान में नागरिकों को जानबूझकर और अंधाधुंध निशाना बनाए जाने के मामले से पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरे की घंटी बजनी चाहिए."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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