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सीरिया के भविष्य के बारे में जॉर्डन में बैठकर ये मुल्क क्या तय कर रहे हैं?
सीरिया में बशर अल-असद की सरकार के पतन के बाद वहां हालात सामान्य बनाने के लिए दुनिया के कई अहम और ताक़तवर देश अपनी-अपनी कोशिशों में लगे हुए हैं.
इस सिलसिले में अमेरिका ने पहली बार स्वीकार किया है कि वह सीरिया के विद्रोही गुटों के साथ संपर्क में है. जबकि चीन ने भी सीरिया के मुद्दे पर पहली बार खुलकर बयान दिया है.
एक तरफ़ जॉर्डन ने शनिवार को सीरिया के मुद्दे पर बातचीत की मेज़बानी शुरू की है. इसमें बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद के हालात पर चर्चा करने के लिए कई देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया है.
वहीं चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 13 दिसंबर को बीजिंग में अपने मिस्र के समकक्ष बद्र अब्देलती के साथ सीरिया और मध्य पूर्व के हालात पर साझा बयान दिया है.
ताज़ा हालात
सीरिया में 8 दिसंबर को विद्रोहियों ने बशर अल-असद के 24 साल लंबे शासन को समाप्त कर दिया और राष्ट्रपति असद को रूस भागने पर मजबूर कर दिया.
सीरिया में यह तख्तापलट 13 साल के गृह युद्ध के बाद हुआ, जो असद सरकार के दौर में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के बाद शुरू हुआ था.
इस लड़ाई में पाँच लाख से ज़्यादा लोग मारे गए, लाखों लोग विस्थापित हुए हैं. इस मुद्दे पर दुनिया के बड़े देश और उनके समर्थक उलझ गए थे.
सीरिया के सबसे प्रमुख एचटीएस विद्रोहियों ने मोहम्मद अल-बशीर को देश का अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया है. अब दुनिया की नज़र इस बात पर है कि असद परिवार के आधी सदी के शासन के अंत के बाद सीरिया की राजनीतिक तस्वीर क्या आकार लेती है.
जॉर्डन के शिखर सम्मेलन में सीरिया के सामने आने वाली मुश्किल चुनौतियों के समाधान के लिए तुर्की, अमेरिका, यूरोपीय संघ और अरब देशों सहित प्रमुख क्षेत्रीय और अन्य देशों के 13 प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे.
इस बातचीत के एजेंडे में सीरिया पर अरब मंत्री स्तरीय समूह की बैठक शामिल है, जिसमें जॉर्डन, सऊदी अरब, इराक़, लेबनान, मिस्र और अरब लीग के महासचिव शामिल हैं.
इसके बाद तुर्की, अमेरिका और फ्रांस के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ ब्रिटेन, जर्मनी और यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक बड़ी बैठक की जाएगी.
अमेरिका के क्या कहा
जॉर्डन में अमेरिका ने पुष्टि की है कि वह सीरिया के विद्रोही गुटों के साथ 'सीधे संपर्क' में है.
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि अमेरिका ने एचटीएस विद्रोहियों के साथ 'सीधा संपर्क' बनाए हुए है, जो बशर अल-असद शासन को उखाड़ फेंकने के बाद सीरिया पर नियंत्रण कर रहे हैं.
ब्लिंकन ने कहा है कि ख़ासतौर पर लंबे समय से लापता अमेरिकी पत्रकार ऑस्टिन टाइस के मामले में अमेरिका एचटीएस के साथ सीधे संपर्क में है.
अमेरिका ने पहली बार हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) के साथ सीधे संपर्क की बात स्वीकार की है, जिसे अमेरिका अभी भी एक चरमपंथी संगठन मानता है.
ब्लिंकन सीरिया के भविष्य पर चर्चा करने के लिए कई अरब देशों, तुर्की और यूरोप के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने के बाद जॉर्डन में बोल रहे थे.
इस दौरान आधिकारिक तौर पर सीरिया में शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया का समर्थन करने पर सहमति जताई गई.
जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी ने कहा कि क्षेत्रीय शक्तियां नहीं चाहतीं कि सीरिया "अराजकता की ओर बढ़े."
उन्होंने संयुक्त बयान में सबको एकसाथ लेकर चलने वाली सीरियाई सरकार की अपील की, जो अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करे और वहां "आतंकवादी समूहों" को ठिकाना न बनाने दे.
हाल के कुछ सप्ताह की उथल-पुथल से भरी घटनाओं के बाद सीरिया के अंदर और बाहर दोनों जगह इस बात पर चर्चा हो रही है कि सभी सीरियाई लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली नई सरकार की स्थापना करना बेहद अहम है.
'एक और लीबिया नहीं चाहिए'
जॉर्डन में हुई बैठक में इराक़ी विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने मध्य पूर्व और उसके बाहर के देशों में सीरिया के भविष्य पर चिंता व्यक्त की.
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देश एक अन्य लीबिया नहीं देखना चाहते हैं. उन्होंने लीबिया के कर्नल गद्दाफी को सत्ता से हटाए जाने के बाद बनी अराजकता का ज़िक्र किया.
वहीं बैठक में तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने कहा कि मौजूदा सीरियाई संस्थाओं को बचाया और बेहतर किया जाना चाहिए.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ फिदान ने कहा, "आतंकवाद को कभी भी संक्रमण काल का लाभ उठाने की अनुमति न दें. हमें मिलकर प्रयास करना होगा और पुरानी ग़लतियों से सीखना होगा."
सबसे शक्तिशाली विद्रोही गुट एचटीएस ने संकेत दिया है कि वह सीरिया में एक समावेशी सरकार चाहता है. लेकिन गुट के हिंसक जिहादी इतिहास ने कुछ लोगों को संदेह में डाल दिया है कि क्या यह ऐसे वादों पर खरा उतरेगा.
जॉर्डन में हुई बातचीत में सीरिया का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ. इस बैठक में शामिल हुए आठ अरब देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सीरिया एक रहे और वहां वर्गों के आधार पर विभाजन न हो.
इसके अलावा इस बैठक में ईरान और रूस भी मौजूद नहीं थे, जिन्होंने असद को वित्तीय सहायता दी थी, जिसकी वजह से वो इतने लम्बे समय तक सत्ता में बने रहे.
सीरिया के मसले पर लम्बे समय से संघर्ष कर रही सभी बाहरी ताक़तों की परछाई भी इस देश के भविष्य पर भारी पड़ रही है.
अगर सीरियाई लोगों को पिछले सप्ताह मिली आज़ादी के स्वाद को बरकरार रखने की कोई उम्मीद है तो इसके लिए सीरिया में उभरती राजनीतिक ताक़तों को न केवल देश के अंदर बल्कि बाहर भी एकजुटता की ज़रूरत होगी.
चीन की कोशिश
चीन ने मध्य पूर्व में 'अराजकता' से निपटने के लिए तत्काल युद्ध विराम की अपील की है.
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 13 दिसंबर को बीजिंग में अपने मिस्र के समकक्ष बद्र अब्देलती के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में सीरिया और मध्य पूर्व के हालात पर बात की है.
उन्होंने कहा कि चीन सीरिया की घरेलू राजनीतिक प्रक्रिया का समर्थन करता है जो "सीरिया के नेतृत्व वाली और सीरिया के स्वामित्व वाली" होनी चाहिए. सीरिया में एक राष्ट्रीय पुनर्निर्माण योजना होनी चाहिए जो "सबके साथ बातचीत के माध्यम से लोगों की इच्छा पूरी करे."
बशर अल-असद की सरकार के पतन के बाद यह उनकी पहली महत्वपूर्ण टिप्पणी थी जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से देश की क्षेत्रीय अखंडता को बचाए रखने की अपील की है.
वांग यी ने कहा है कि चीन सीरिया के हालात को लेकर "अत्यधिक चिंतित" है, एक ऐसा देश जिसके साथ चीन लंबे समय से "मित्रता और सहयोग" की नीति पर काम कर रहा है.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 को लागू करने की अपील की, जिसे देश में शांति प्रक्रिया के लिए रोडमैप के रूप में साल 2015 में अपनाया गया था.
इसमें कहा गया था कि "सीरियाई लोग सीरिया के भविष्य का फैसला करेंगे."
वांग यी ने यह चेतावनी भी दी कि देश को चरमपंथी ताकतों और "किसी भी प्रकार के आतंकवाद" का "दृढ़ता से विरोध" करना चाहिए.
क्षेत्र के हालात के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि इसराइल-ग़ज़ा युद्ध की शुरुआत के बाद से मध्य पूर्व में लगातार संकट के कारण उथल-पुथल मची हुई है और मौजूदा अराजकता को देखते हुए पहली प्राथमिकता तत्काल युद्ध विराम और मानवीय संकट को कम करना है.
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने उनके हवाले से कहा, "मानवीय मुद्दों का अब और राजनीतिकरण नहीं किया जा सकता और आम लोगों के जीवन को सौदेबाज़ी के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता."
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका ख़ास ज़ोर देते हुए वांग यी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने की ज़िम्मेदारी लेने और इसके कुछ सदस्यों, यानी अमेरिका से "हालात को बिगड़ने" से रोकने की अपील की है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.