सीरिया में अब आगे क्या-क्या हो सकता है, ये हैं तीन संभावनाएं

    • Author, लुईस बरूचो
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

असद परिवार के दशकों पुराने क्रूर शासन का अंत हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) समूह के नेतृत्व में विद्रोही गुटों ने कर दिया, लेकिन इसके साथ ही देश के भविष्य पर कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं.

एचटीएस के नेता अबू मोहम्मद अल जुलानी ने सीरिया को एकजुट करने का वादा किया है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि क्या वह ऐसा कर पाएंगे या नहीं.

सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र में विशेष दूत गेयर पैडरसन ने देश में सभी समूहों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है.

पैडरसन ने कहा, "मैंने एचटीएस और अन्य समूहों के वो बयान ज़रूर देखे हैं जिसमें कि आश्वासन दिया गया है, लेकिन मौजूदा क़ानून और व्यवस्था को लेकर मैं चिंतित हूँ."

तेजी से बदलती स्थिति को देखते हुए सीरिया पर कुछ भी भविष्यवाणी करना मुश्किल है.

हालांकि बीबीसी ने मामले में विशेषज्ञों से बात की है और इसमें मुख्य तीन संभावनाएं सामने आई.

1. एकजुट सीरिया

सबसे अच्छी स्थिति होगी कि एचटीएस सिविल सोसाइटी और राजनीतिक संस्थाओं के साथ अच्छे से सरकार चलाने के लिए राजी हो जाएं.

सीरिया वर्षों चले गृहयुद्ध के बाद 'राष्ट्रीय मेलमिलाप' का माहौल बनाने को बढ़ावा दे सकता. ऐसा हुआ तो बदला लेने और लूटपाट से बचा जा सकता है. अगर ऐसा नहीं होता है तो सीरिया भी अपने आपको पड़ोसी देशों की तरह एक नए संघर्ष में धकेल सकता है.

वैसे जुलानी ने एकजुटता की बात की है, लेकिन सीरिया में मौजूद विभिन्न समूहों के अपना-अपना एजेंडा है.

क्रिस्टोफर फिलिप्स ब्रिटेन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी में अंतरार्राष्ट्रीय संबंधों के प्रोफ़ेसर और मध्य पूर्व मामले के विशेषज्ञ हैं.

उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "वास्तव में, अभी हम जिस स्थिति में है उस पर कुछ कहना मुश्किल है."

दक्षिण सीरिया में कबायली मिलिशिया ने असद की सरकार को कभी नहीं माना और अब भी ये माना जा रहा है कि दमिश्क की नई सरकार को बातों को वो मानेंगे.

वहीं पूर्व में कथित इस्लामिक स्टेट समूह के बचे हुए लड़ाके भी ख़तरा बने हुए हैं. इसी कारण से अमेरिका ने वहां हवाई हमले किए.

साथ ही अमेरिकी समर्थित कुर्द समूहों का सीरिया के उत्तर-पूर्व के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण है.

इन गुटों ने वर्षों तक देश के उत्तरी हिस्से में तुर्की समर्थित विद्रोही गुटों के ख़िलाफ़ लड़ाई भी लड़ी है.

इसके अलावा सीरिया के बाहर 2011 के बाद से कई विपक्षी समूह और राजनीतिक दल बने हैं. अभी ये साफ नहीं है कि ये सीरिया वापस आएंगे या नहीं.

जोसेफ दाहेर स्विट्ज़रलैंड में स्थित लॉज़ेन यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर और 'सीरिया ऑफ्टर द अपराइजिंग्स' के लेखक हैं.

उन्होंने कहा, "सबसे अच्छी स्थिति स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, सत्ता में सभी की साझेदारी और विक्रेंद्रीकरण होगा."

हालांकि इस स्थिति को दाहेर सहित अन्य विशेषज्ञ मुश्किल मानते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि सभी का कहना है कि जुलानी ने जो पहले कहा और जो अभी कह रहे हैं वो एक दूसरे से मेल नहीं खाते.

जोसेफ दाहेर ने कहा, "पहले जुलानी ने कहा कि असद के सरकार के दौरान वाले प्रधानमंत्री अभी सरकार की बागडोर संभालेंगे, लेकिन फिर मोहम्मद अल-बशीर को अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त कर दिया."

हालांकि उन्हें लगता है कि एचटीएस को पूरे देश में अपने दम पर शासन चलाने में संघर्ष करना पड़ेगा.

वे कहते हैं, "पहले वो (एचटीएस) इदलिब में प्रशासन चला रहा था, लेकिन अब उसे अलेप्पो, हमा, होम्स और दमिश्क में प्रशासन चलाना है. ऐसे में मुझे लगता है कि इन क्षेत्र को चलाने के लिए 'पावर शेयरिंग' करनी होगी."

2. एचटीएस की तानाशाही और एकतरफा नियंत्रण

ऐसा डर है कि एचटीएस असद शासन की तरह ही अपने आपको मजबूत करने के लिए तानाशाही कर सकता है.

जुलानी ने पहले ही इदलिब में सत्ता का केंद्र स्थापित कर लिया है और ये उत्तर-पश्चिम सीरिया का सबसे बड़ा विद्रोही गुटों का गढ़ था. यहां 40 लाख लोगों रह रहे हैं और इसमें से कई लोग सीरिया के दूसरे प्रांतों से आए थे.

इदलिब में अपने शासन को एचटीएस ने नेशनल साल्वेशन गवर्नमेंट नाम दिया था और ये शासन शरिया क़ानून के तहत चलता है.

जुलानी ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि एटीएस सार्वजनिक सेवाओं को प्राथमिकता देकर एक स्थिर सरकार चला सकती है.

हालांकि आलोचकों ने कहा कि इदलिब में एचटीएस ने अपने विरोधी गुटों और विपक्षियों की आवाज को कुचला है. एचटीएस के नेतृत्व में 27 नवंबर को कार्रवाई शुरू होने से पहले इदलिब में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे.

दाहेर ने कहा, "एचटीएस ने अपनी शक्ति को मजबूत मुख्य रूप से दमन के माध्यम से किया. हालांकि इसमें इदलिब में सशस्त्र समूहों को शामिल करना और लोगों को सेवाएं प्रदान करना भी शामिल है."

वैसे एचटीएस ने कुछ सुधारों को भी लागू किया है. हालांकि आलाचकों का कहना है कि ये सुधार असहमति को दबाने का एक सिर्फ बहाना है.

एचटीएस इस बात पर जोर देता रहा है कि सीरिया की प्रगति और असद शासद को हटाने के लिए इदलिब में सत्ता मजबूत करना ज़रूरी था.

दाहेर ने कहा, "दमिश्क में शक्ति बढ़ाने के लिए और इसे चलाने के लिए अभी एचटीएस के पास पर्याप्त सैन्य बल और लोग नहीं है."

3. भीषण गृहयुद्ध

सबसे खराब स्थिति सीरिया में अराजकता है जैसे कि अन्य देशों में 'अरब स्प्रिंग' के बाद हुई थी.

लीबिया में मुअम्मर गद्दाफ़ी और इराक़ में सद्दाम हुसैन को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था किए हटा दिया गया था.

आलोचकों का कहना है कि इस ख़ालीपन के कारण लूटपाट और गृहयुद्ध छिड़ गया.

ऐसे में सीरिया में विभिन्न सशस्त्र समूह के बीच सत्ता पाने के लिए हिंसा हो सकती है. इससे केवल सीरिया ही नहीं बल्कि पूरा क्षेत्र अस्थिर हो सकता है.

बीबीसी अरबी के संवाददाता फेरस किलानी ने बताया कि अल-बशीर के प्रधानमंत्री होने के नाते पहले भाषण से ये साफ हुआ है कि नई सरकार किस दिशा में जा सकती है.

उन्होंने बताया, "नए प्रधानमंत्री जब भाषण दे रहे थे तो उनके पीछे दो झंडे लगे हुए थे. इसमें एक 'रिवोल्यूशनरी झंडा' और दूसरा तालिबान के झंडे से मिलता-जुलता झंडा था. इससे कई लोग चौंक गए. माना जाने लगा कि सीरिया में भी शासन शरियत क़ानून के मुताबिक चलेगा."

"इससे अल्पसंख्यकों के साथ-साथ नागरिक समाज संगठनों के भविष्य के बारे में नई चुनौतियाँ और नए सवाल पैदा हो गए."

आगे क्या?

दशकों तक असद ईरान और रूस के समर्थन पर निर्भर रहे. इस बीच, तुर्की, पश्चिमी देशों और खाड़ी देशों ने विभिन्न विद्रोही समूहों का समर्थन किया.

बीते कुछ दिनों में इसराइल ने सीरिया के सैन्य ठिकानों पर 100 से अधिक हवाई हमले किए हैं. ये हमले असद के देश छोड़कर जाने के बाद इसराइल ने किए हैं.

साथ ही इसराइल ने गोलान हाइट्स पर 'असैन्यीकृत बफर ज़ोन' में भी अपने सैनिक तैनात किए हैं.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने सीरियाई विद्रोही गुटों को चेतावनी दी है कि वे ईरान को देश में खुद को "फिर से स्थापित" नहीं होने दें.

इस कारण तुर्की और अन्य मध्य पूर्वी देश इसराइल पर असद की सरकार गिरने के बाद इसका फायदा उठाने का आरोप लगा रहे हैं.

फिलिप्स ने कहा कि इसराइल की कार्रवाई सरकार को कमजोर करके या कट्टरपंथियों को प्रोत्साहित करके सीरिया को अस्थिर कर सकती है.

फिलिप्स और दाहेर का मानना है कि सीरिया में आर्थिक सुधार के लिए उस पर से प्रतिबंध हटाने होंगे और साथ ही यहां वैश्विक शक्तियों को मानवीय सहायता पहुंचानी होगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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