वायु प्रदूषणः बीपी के भारी मुनाफ़े के पीछे का गंदा राज़

पत्रकार ओवेन पेनेल
इमेज कैप्शन, दक्षिणी इराक़ के रूमालिया में पत्रकार ओवेन पेनेल
    • Author, ओवेन पिनेल
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ अरबी

दुनियाभर के नेता सीओपी27 सम्मेलन में जहाँ बैठकर पर्यावरण से जुड़े वादे कर रहे हैं, वहाँ से बहुत दूर अली हुसैन जुलूद जैसे लोग रहते हैं.

हुसैन ल्यूकीमिया पीड़ित हैं जो इराक़ के एक ऑयल फ़ील्ड में रहते हैं, जिसका प्रबंधन ब्रिटिश पेट्रोलियम भी करती है. 

जब बीबीसी को पता चला कि बीपी इस ऑयल फ़ील्ड में हो रही फ्लेयरिंग (खुले में जलती हुई आग) के बारे में जानकारी नहीं दे रही है, तब हुसैनी ने बीबीसी की मदद उस प्रदूषित हवा का सच सामने लाने में की, जिसमें साँस लेने के लिए यहां की स्थानीय आबादी मजबूर है.

मैंने सबसे पहले साल 2019 में ट्विटर पर पोस्ट किए गए वीडियो देखे थे, जिनमें इराक़ के ऑयल फ़ील्ड में लोगों के घरों के ऊपर काले धुएं के बाद दिखाई दे रहे थे. 

तब मुझे पता चला था कि ये एक आम बात है जिसे फ्लेयरिंग कहते हैं. फ्लेयरिंग में उन ज़हरीली गैसों को खुले आसमान में जला दिया जाता है जो तेल की निकालने के दौरान निकलती हैं. 

सैटेलाइट से इकट्ठा किए गए डेटा से हमें पता चला कि दक्षिणी इराक़ के बसरा का रुमैला क्षेत्र फ्लेयरिंग से दुनिया में सर्वाधिक प्रभावित इलाक़ा है. 

गैस फ्लेयरिंग से ना सिर्फ़ पर्यावरण को दूषित करने वाली ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है बल्कि इससे बेन्ज़ीन भी निकलती है जिससे कैंसर और बचपन में ल्यूकीमिया होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 

रुमैला तेल क्षेत्र के पास पाँच अलग-अलग समुदायों में रहने वाले दर्जनों लोगों ने हमें एक जैसी ही कहानी सुनाई. उन्होंने बताया कि उनके सगे संबंधी या दोस्त कैंसर या ल्यूकीमिया से पीड़ित हैं. 

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इनमें से एक हैं अली, जो उस समय 18 साल के थे. उनके पिता ने अपने घर की हर चीज़ बेचकर तुर्की में उनका इलाज कराने की कोशिश की. 

अली ने बताया कि बसरा के कैंसर अस्पताल में उन जैसे बहुत से लोग हैं, जो तेल के मैदानों के पास ही रहते हैं.

कई हज़ार लोगों के क़स्बों रुमैला को स्थानीय लोगों ने ‘परछाई का शहर’ कहना शुरू कर दिया है क्योंकि ये बिलकुल अलग-थलग है और यहाँ सामान्य सुविधाएं भी नहीं हैं. 

अली और उनके दोस्त इसे ‘क़ब्रिस्तान’ कहते हैं. अली ने हमें बताया, “हम फ़ुटबॉल खेल रहे होते थे और फिर हमें भीतर घरों में भागना पड़ता था, क्योंकि धुएं के बादलों में हमारा दम घुटनें लगता था. आसमान से तेल टपकता था. जब मैंने बसरा के कैंसर अस्पताल के डॉक्टर को बताया कि मैं इस इलाक़े में रहता हूँ, तो उन्होंने कहा कि यही मेरी बीमारी की मुख्य वजह है.” 

हालाँकि यहाँ रह रहे समुदायों में कैंसर को लेकर कोई शोधपत्र प्रकाशित नहीं हुआ है. बाद में हमें पता चला कि इस विषय के बारे में जानकारियों को इराक़ी सरकार जान बूझकर दबा रही है. 

बसरा के स्वास्थ्य विभाग के एक लीक दस्तावेज़ से हमें पता चला कि बसरा में कैंसर की दर अधिकारिक रूप से जारी आंकड़ों से तीन गुणा अधिक है. 

ये दस्तावेज़ बीबीसी को दिए गए थे. रूमैला में रह रहे और वहाँ काम कर रहे लोगों ने हमें वीडियो भेजे जिनसे वहाँ आम लोगों के जीवन की झलक मिल रही थी.

लेकिन हम वहाँ जाकर स्वयं फ़िल्म कर पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. कम से कम पाँच मौकों पर हमारी अधिकारिक गुज़ारिश को ख़ारिज कर दिया गया. 

क़रीब 1800 वर्ग किलोमीटर इलाक़े में फैला ये ऑयल फ़ील्ड, जो कई छोटे देशों से भी बड़ा है, कई सुरक्षा चौकियों से घिरा है.

इन सुरक्षा चौकियों से आगे इराक़ी तेल पुलिस और तेल कंपनियों के लिए काम कर रहे निजी सुरक्षा बलों के जवान गश्त करते हैं. 

इन सबसे अलग यहाँ इराक़ी हथियारबंद मिलिशिया भी हैं जो दक्षिणी इराक़ की राजनीति में प्रभाव रखते हैं और अपने इलाक़े में चल रही तेल से जुड़ी गतिविधियों से मोटा मुनाफ़ा कमाते हैं. 

ऐसे में हमारे लिए रूमैला जाने का एक ही रास्ता था. अंडरकवर (छुप कर) जाना.जलवायु परिवर्तन के इन चौंकाने वाले नतीजों के बारे में क्या आप जानते हैं?

प्रभावित इलाक़ों में बीबीसी के प्रयोग

हम एक एक्सपेरिमेंट को फ़िल्म करना चाहते थे ताकि हम स्वयं प्रदूषण को मॉनिटर कर सकें. इस प्रयोग को हमने वैश्विक प्रदूषण विशेषज्ञों के साथ तैयार किया था.

हमने लंदन में बीबीसी की ब्रॉडकास्टिंग हाउस की छत पर जाने से पहले इसका अभ्यास किया. 

विशेषज्ञों ने हमें डिफ्यूज़न ट्यूब इस्तेमाल करने की सलाह दी थी. ये तांबे के छोटे सिलेंडर थे जिनके भीतर फ़िल्टर लगे थे. ये प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को सोख लेते हैं.

हमने इराक़ में इन प्रयोग को करने के लिए इस क्षेत्र के एकमात्र पर्यावरण विज्ञानी प्रोफ़ेसर शुक्री अल हसन की सहायता ली. 

हमने प्रभावित समुदायों में दो सप्ताह तक अलग-अलग जगहों पर ये प्रयोग किए. रूमैला समेत ये सभी जगहें तेल क्षेत्र के दस किलोमीटर के दायरे में थीं.

हमने यहाँ बच्चों के पेशाब के नमूने भी लिए ताकि ये जाँच की जा सके कि उनमें गैस फ्लेयरिंग से संबंधित ज़हरीले पदार्थों के कण मौजूद हैं या नहीं.

नमूने लेते डॉ. शुक्री
इमेज कैप्शन, इराक़ के बच्चों के पेशाब के टेस्ट के नतीजों का विश्लेषण करते डॉ. शुक्री

हमारे परीक्षण से पता चला कि जिन 52 बच्चों के सैंपल हमने लिए थे, उन सभी के पेशाब में मेटाबोलाइज़्ड नेफ़थलीन (जो एक संभावित कार्सिनोजेन है) की मौजूदगी का स्तर अधिक था.

हमने वायू प्रदूषण की जो निगरानी की थी उससे भी पता चला कि यहाँ की हवा में बेन्ज़ीन की मात्रा राष्ट्रीय सीमा से तीन गुणा अधिक थी.

जिन सभी जगहों पर हमने जाँच की, वहाँ इसकी मात्रा सुरक्षित स्तर से कहीं अधिक ज़्यादा थी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हवा में बेन्ज़ीन की मात्रा शून्य होनी चाहिए.

गैस फ्लेयरिंग क्या है?

गैस फ्लेयरिंग

इमेज स्रोत, Getty Images

  • कंपनियाँ जब ज़मीन से तेल निकालने के लिए खुदाई करती हैं, तब गैस भी निकलती है. इस प्राकृतिक गैस के खुले में जलने देने को गैस फ्लेयरिंग कहते हैं.
  • तेल कंपनियाँ कई बार सुरक्षा कारणों की वजह से भी गैस को जलने देती हैं, ताकि भूमिगत तेल भंडार में गैस के दबाव को कम किया जा सके और धमाके के ख़तरे को कम किया जा सके. 
  • अगर इस गैस को इकट्ठा करना और फिर बेचने के लिए परिवहन करना आर्थिक रूप से फ़ायदेमंद नहीं होता है तो कंपनियाँ पैसा बचाने के लिए भी इस गैस को जलाती हैं.
  • गैस फ्लेयरिंग से जलवायु परिवर्तन होता है. साल 2021 में इसकी वजह से वातावरण में 400 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ. ये ब्रिटेन के कुला सालाना उत्सर्जन से भी अधिक है.
  • इससे वातावरण में बेन्ज़ीन, नैपथेलीन और ब्लैक कार्बन जैसे रसायन भी घुलते हैं, जिससे आसपास के लोगों की सेहत को नुक़सान पहुँच सकता है.

बीबीसी की फ़िल्म के रिलीज़ होने के बाद इराक़ के तेल मंत्री इहसान अब्दुल जब्बार इस्माइल ने वादा किया है कि साल 2026 तक रुमैला ऑयल फ़ील्ड से गैस फ्लेयरिंग को समाप्त कर दिया जाएगा. 

लेकिन उन्होंन ये बयान अपने कार्यकाल के अंतिम दिन जारी किया और इससे पहले फ्लेयरिंग समाप्त करने के जो लक्ष्य घोषित किए गए थे वो पूरे नहीं किए गए हैं.

ये स्पष्ट नहीं है कि फ्लेयरिंग को समाप्त करने के लिए किसकी ज़िम्मेदारी तय होनी है. इस ऑयल फ़ील्ड की मालिक इराक़ी सरकार है लेकिन ब्रिटिश पेट्रोलियम अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ मिलकर इसका प्रबंधन करती है.

तत्कालीन तेल मंत्री अब्दुल जब्बार ने बीबीसी से कहा था कि फ्लेयरिंग समाप्त करना बीपी की ज़िम्मेदारी है. 

वहीं बीपी का कहना है कि ये ज़िम्मदारी ऑयल फ़ील्ड के ऑपरेटर की है. इस फ़ील्ड को रूमैला ऑपरेटिंग ऑर्गेनाइज़ेशन चलाती है जिसकी संस्थापक बीपी है और इसमें बीपी की 48 फ़ीसदी हिस्सेदारी है.

बीपी से जुड़े कई लोगों ने बीबीसी से संपर्क किया और ये बताना चाहा कि ज़मीन पर वास्तविक हालात कितने ख़राब हैं.

रॉबर्ट (बदला हुआ नाम) बीपी रूमैला के पूर्व कर्मचारी हैं. उन्होंने हमें बताया, “मुख्य ठेकेदार के रूप में बीपी की [इराक़ सरकार के प्रति] ये ज़िम्मेदारी थी कि वो रूमैला के संचालन और प्रबंधन में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू करे.”

वो आगे कहते हैं कि रूमैला में गैस फ्लेयरिंग ‘सिर्फ़ शुरूआत है’ उन “भयावह आचरणों की जिन्हें बीपी के किसी भी अन्य ऑपरेशन में स्वीकार नहीं किया जाएगा और ना ही ये उन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है जिन्हें लागू करने की ज़िम्मेदारी बीपी की है.”

उन्होंने बताया कि ऑयल फ़ील्ड में उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सिस्टम और बुनियादी ढांचे को बनाए रखने और अपग्रेड करने में विफलता प्रणालीगत समस्याओं का कारण बनी, जिसकी वजह से “बार-बार तेल का रिसाव हुआ, अनियोजित गैस लीक और फ्लेयरिंग हुई.”

ये दावा बीपी के अन्य कर्मचारियों ने भी किया है और बीबीसी ने रुमैला ऑयल फ़ील्ड में बड़े तेल रिसाव के वीडियो सबूत देखे हैं.

बीपी के दो अन्य पूर्व कर्मचारियों ने बीबीसी को बताया है कि इस साइट पर प्रदूषण की पर्याप्त निगरानी नहीं है, इसकी वजह से उन्हें अपनी सुरक्षा की भी चिंता होती थी.

बीपी के एक प्रवक्ता ने कहा, “रूमैला पर परिचालन सुरक्षा से जुड़े जो दावे आपने किए हैं हम उनका सख़्ती से खंडन करते हैं. बीपी ने जबसे इराक़ में अपने अन्य सहयोगियों के साथ काम शुरू किया है, बड़े सुधार किए गए हैं. कई सालों के संघर्ष और ज़रूरत से कम निवेश के बाद, यहाँ और भी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है और हम रूमैला में आगे सुधार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और हम इसे तुरंत कर रहे हैं.”

जहाँ तक अली का सवाल है, उनका ल्यूकीमिया कम हो रहा है और लेकिन उनकी प्रतिरोधक क्षमता अब भी कमज़ोर है.

उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी और अब वो खेल में हिस्सा नहीं ले सकते हैं. पहले वो क्षेत्रीय फ़ुटबॉल प्रतियोगिताओं में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व कर चुके थे.

हमने जिन कैंसर पीड़ित बच्चों से मुलाक़ात की थी उनमें से कई की मौत हो चुकी है. इनमें तेरह साल की फ़ातिमा और मुस्तफ़ा भी थे, जो ऑयल फ़ील्ड के पास ही रहा करते थे.

रूमैला के पास रहने वाले पाँच साल के बेनिन की भी मौत हो गई है. बेनिन के बड़े भाई की पहले ही इस बीमारी से मौत हो गई थी.

मुस्तफ़ा, फ़ातिमा और बेनिन की कैंसर से मौत हो गई है
इमेज कैप्शन, (बायें से दायें) मुस्तफ़ा, फ़ातिमा और बेनिन की कैंसर से मौत हो गई है

अली ने अपनी छूट गई शिक्षा के लिए हर्ज़ाना लेने के लिए बीपी से कई बार संपर्क किया है. 

अली बताते हैं कि बीबीसी की रिपोर्ट के प्रसारण के बाद रूमैला की संचालक कंपनी का एक कर्मचारी उनके पास आया था. अली ने फिर से उनसे हर्जाना मांगा है.

उन्होंने बताया “मैंने उससे कहा कि देखो बीपी के प्रदूषण की वजह से मैं कितना बीमार हो गया हूँ और पूछा कि क्या बीपी मेरी सेहत को हुए नुक़सान के लिए मुझे हर्जाना देगी. लेकिन मुझे उनकी तरफ़ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है.”

बीपी का कहना है कि रूमैला के कर्मचारी और किसी व्यक्ति के बीच हुई निजी बातचीत पर टिप्पणी करना उचित नहीं है.

लेकिन बीपी ने ये भी कहा है कि बीबीसी के संपर्क करने के तुरंत बाद “बीपी ने रूमैला में अपने भागीदारों के साथ मिलकर काम करना शुरू किया है और उठाए गए मुद्दों को देख रही है, और जहां ज़रूरत हो, वहां कैसे समाधान किया जाए. इसमें स्थानीय समुदाय की मदद करने और उनकी चिंताओं को समझने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है. ये काम अभी चल रहा है.”

हमारी जाँच के शुरू होने से पहले बीपी ने हमें बताया था कि, “मानक अभ्यास के अनुरूप” वो फ्लेयरिंग के बारे में वहीं की जानकारी देती है जहाँ वह स्वंय संचालक है- “(रुमैला का) फ्लेयरिंग और संचालन डेटा इसलिए हमारी रिपोर्ट में शामिल नहीं है.”

बीबीसी ने जिन भीतरी लोगों से बात की है उनका कहना है कि रूमैला ऑयल फ़ील्ड में फ्लेयरिंग कम करने के लिए 30 से 50 लाख डॉलर ख़र्च होंगे. 

बीपी ने बीते सप्ताह अपनी तिमाही की कमाई की घोषणा की है, जो 8 अरब डॉलर है. ये रकम उसका बहुत छोटा सा हिस्सा है.

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