भारत के इस फैसले से बढ़ी दुनिया में पाकिस्तानी बासमती की मांग

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- Author, तनवीर मलिक
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, इस्लामाबाद
पाकिस्तान में विदेशी व्यापार के आंकड़े जारी करने वाले पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक़ जनवरी 2024 में देश के चावल निर्यात में 200 फ़ीसद का इज़ाफ़ा दर्ज किया गया है.
निर्यात किए जाने वाले चावलों में एक महत्वपूर्ण प्रकार बासमती चावल का है. पाकिस्तान से बासमती चावल के निर्यात में जनवरी के महीने में 64 फ़ीसद से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई.
एक ओर पाकिस्तान से बासमती चावल के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है तो दूसरी ओर उसकी तुलना में भारत से बासमती चावल के निर्यात में कमी देखी गई है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़ आने वाले महीनों में भी भारत से बासमती चावल के निर्यात में कमी का अनुमान है. दूसरी ओर पाकिस्तान से इसके निर्यात में वृद्धि जारी रहेगी.
ध्यान रहे कि दुनिया भर में चावल भेजने के मामले में भारत सबसे बड़ा देश है, जबकि पाकिस्तान चावल निर्यात करने वाले दस बड़े देशों में शामिल है.
दुनिया के विभिन्न देश, बासमती चावल केवल भारत और पाकिस्तान से खरीदते हैं, क्योंकि चावल की यह विशेष और ख़ुशबूदार क़िस्म इन दो पड़ोसी देशों में ही पैदा होती है.
भारत और पाकिस्तान, बासमती चावल के निर्यात में एक दूसरे का मुक़ाबला करने के साथ जीआई (ज्योग्राफ़िकल इंडिकेशन) टैग के लिए भी एक दूसरे के ख़िलाफ़ केस लड़ रहे हैं. यह केस यूरोपीय यूनियन में चल रहा है.
पाकिस्तान से बासमती चावल का निर्यात कितना बढ़ा?

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पाकिस्तान से जनवरी के महीने में बासमती चावल के निर्यात में 64 फ़ीसद की वृद्धि हुई.
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक़ चालू वित्तीय वर्ष के पहले सात महीनों (जुलाई 2023 से जनवरी 2024) में कुल मिलाकर पाकिस्तान से बासमती चावल के निर्यात में 36 फ़ीसद तक की वृद्धि हुई है.
चावल निर्यात करने वालों के संगठन 'पाकिस्तान राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन' के चेयरमैन चेला राम केवलानी ने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान में चावल की क़रीब नब्बे लाख टन उपज होती है.
उनका कहना है कि इस उपज में से आधा यानी 45 लाख टन बासमती और बाकी दूसरे किस्म के चावल होते हैं. 45 लाख टन बासमती में से क़रीब 30 लाख टन बासमती चावल की खपत पाकिस्तान में ही है. बाक़ी क़रीब 15 लाख टन बासमती चावल को दूसरे देशों में भेज दिया जाता है.

केवलानी के मुताबिक़ पाकिस्तानी बासमती चावल अधिकतर अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के देशों में निर्यात किया जाता है.
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान ढाई अरब डॉलर का चावल निर्यात किया था, जबकि चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती सात महीनों में 2.2 अरब डॉलर का चावल निर्यात हो चुका है.
केवलानी का कहना है कि इस साल चावल निर्यात करने का पाकिस्तान का लक्ष्य तीन अरब डॉलर से अधिक का है.
भारत से चावल निर्यात कम क्यों हुआ?

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एक तरफ पाकिस्तान से चावल के निर्यात में इज़ाफ़ा हुआ है मगर दूसरी ओर भारत से इसके निर्यात में कमी आई है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ भारत के चावल निर्यातक बासमती चावल के निर्यात में कमी की आशंका जता रहे हैं.
इंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की फ़रवरी की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत के चावल निर्यात में कमी आई है.
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के मुताबिक़ जनवरी 2024 के महीने में भारत से चावल के निर्यात में जनवरी 2023 की तुलना में 3.3 फ़ीसद की कमी आई है.
भारत में इस वित्तीय वर्ष के सात महीनों (जुलाई 2023 से जनवरी 2024) के दौरान चावल के निर्यात में कुल मिलाकर क़रीब आठ फ़ीसद की कमी दर्ज की गई.
इन सात महीनों में भारत से चावल का निर्यात आठ अरब नब्बे करोड़ डॉलर से घटकर आठ अरब बीस करोड़ डॉलर का हो गया है.
पाकिस्तान से बासमती चावल का निर्यात क्यों बढ़ा

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विशेषज्ञों के मुताबिक़ पाकिस्तान से बासमती चावल के निर्यात में इज़ाफ़े की बड़ी वजह भारत की ओर से अगस्त 2023 में बासमती चावल के निर्यात का न्यूनतम निर्यात मूल्य लागू करने का फ़ैसला था.
अगस्त 2023 में भारत सरकार ने बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य 1200 डॉलर प्रति टन तय किया था. इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक़ इस फ़ैसले का एक हद तक पाकिस्तानी निर्यातकों को फ़ायदा हुआ.
पाकिस्तान राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी तौफ़ीक़ अहमद ख़ान के मुताबिक़ भारत की ओर से बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य तय करने के पहले पाकिस्तान की एक्सपोर्ट प्राइस भारत से अधिक थी. उस समय भारत का बासमती चावल पाकिस्तान की तुलना में सस्ता था. इस कारण भारत को अधिक निर्यात ऑर्डर मिल रहे थे.
उन्होंने कहा कि अगस्त 2023 के उस फ़ैसले से पहले पाकिस्तान से बासमती चावल एक हज़ार डॉलर प्रति टन से अधिक पर निर्यात हो रहा था जबकि भारत से यह 800 से 900 डॉलर प्रति टन की दर से जा रहा था.
उन्होंने बताया कि भारत ने अगस्त 2023 में निर्यात मूल्य को बढ़ाकर 1250 डॉलर प्रति टन कर दिया और इस फ़ैसले का फ़ायदा पाकिस्तान को हुआ. इसके बाद पाकिस्तान को निर्यात के अधिक ऑर्डर आने शुरू हो गए.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान 1200 डॉलर प्रति टन से कम पर नहीं बेच सकता था, लेकिन पाकिस्तान ने एक हज़ार डॉलर प्रति टन में यह निर्यात शुरू कर दिया.
तौफ़ीक़ ने कहा कि हालांकि भारत ने बाद में इस निर्यात मूल्य को कम करके 950 डॉलर प्रति टन कर दिया लेकिन इस दौरान पाकिस्तानी निर्यातकों ने इस स्थिति का फ़ायदा उठाया.

पाकिस्तान के अनाज क्षेत्र के विशेषज्ञ शम्सुल इस्लाम ने बताया कि भारत ने उस समय जो फ़ैसला किया था वह अपने घरेलू बाज़ार में चावल की क़ीमत को कम रखने के लिए था ताकि चावल देश ही में रहे और आम लोगों को सस्ता मिले.
उनके मुताबिक़ दूसरी ओर इस स्थिति के कारण पाकिस्तान से बासमती चावल का निर्यात बढ़ा और वहां आम लोगों के लिए इसकी क़ीमत में थोड़ी वृद्धि हुई.
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक़ पिछले साल दिसंबर के महीने में पाकिस्तान में बासमती चावल की औसत क़ीमत 220 रुपए (भारत के 65 रुपये) प्रति किलो थी जो फ़रवरी के महीने के अंत में 225 रुपए प्रति किलो तक चली गई.
शम्सुल इस्लाम ने बताया कि हालांकि पाकिस्तानी बासमती चावल के निर्यात में वृद्धि हुई है, लेकिन अब ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के साथ बॉर्डर खुलने के बाद पाकिस्तानी चावल वहां जा रहा है जिसकी क़ीमत उन बाज़ारों में कम है.

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में बासमती चावल खाया जाता है लेकिन वहां ग़ैर बासमती चावल के निर्यात में इज़ाफ़ा देखा गया है.
तौफ़ीक़ अहमद ख़ान के मुताबिक़ भारत के फ़ैसले के अलावा पाकिस्तानी रुपये के मूल्य ने भी बासमती चावल के निर्यात में मदद की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी बासमती चावल के अंतरराष्ट्रीय ख़रीदारों को पाकिस्तान की करेंसी के बारे में पता है.
''जब पाकिस्तान निर्यातक यह चावल 1000 से 1050 डॉलर प्रति टन पर दे रहे थे तो उस समय डॉलर की क़ीमत पाकिस्तान में 250 रुपए थी. जब नए सौदे हुए तो डॉलर की क़ीमत 285 रुपये हो गई.''
''पाकिस्तानी निर्यातकों ने बाहर यह चावल 980 से 990 डॉलर पर देना शुरू किया. इसका मतलब है कि ख़रीदार को 10-20 डॉलर प्रति टन फ़ायदा मिला लेकिन चावल निर्यातकों को कोई नुक़सान नहीं हुआ. इसकी वजह यह रही कि उन्हें रुपए में जो रिटर्न मिला वह अधिक था. दूसरी ओर अधिक निर्यात करने की वजह से उन्हें फ़ायदा हुआ.''
क्या पाकिस्तानी और भारतीय बासमती की क्वालिटी में अंतर है?

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उपमहाद्वीप में बासमती चावल की उपज का इतिहास क़रीब दो सौ वर्ष पुराना है. इसकी पैदावार उपमहाद्वीप के ख़ास क्षेत्रों में ही होती है.
यहां पैदा होने वाले बासमती चावल का अलग ज़ायक़ा और ख़ुशबू है. इसकी उपज का ऐतिहासिक क्षेत्र चिनाब और सतलुज नदियों के बीच का हिस्सा है.
पाकिस्तान में सियालकोट, नारवाल, शेख़ूपुरा, गुजरात गुजरांवाला, मंडी बहाउद्दीन और हाफ़िज़ाबाद के ज़िले बासमती चावल की पैदावार के लिए जाने जाते हैं.
दूसरी ओर भारत में पूर्वी पंजाब, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर के इलाक़ों में ऐतिहासिक तौर पर इसकी खेती की जाती रही है.
हालांकि आजकल बासमती चावल की खेती परंपरागत क्षेत्रों से बाहर भी की जा रही है.
चेला राम केवलानी ने बताया कि पाकिस्तान में बासमती चावल के परंपरागत क्षेत्रों के अलावा अब इसकी खेती सिंध के ऊपरी इलाक़े में भी की जाती है.
तौफ़ीक़ अहमद ख़ान ने बताया कि भारत में भी इसकी खेती परंपरागत क्षेत्रों के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी की जा रही है.
चेला राम ने पाकिस्तानी बासमती चावल की कामयाबी की वजह इसकी क्वालिटी और पैकेजिंग बताई. उनके मुताबिक़ पाकिस्तान के बासमती चावल की क्वालिटी भारत के बासमती के मुक़ाबले बेहतर है. उनके मुताबिक़ इसकी वजह पाकिस्तान में कीटनाशकों का कम छिड़काव है.
उन्होंने कहा कि यूरोप में इस बात पर बहुत ज़ोर दिया जाता है कि फ़सलों पर किन दवाओं का और किस तरह छिड़काव किया जाता है.
उन्होंने बताया कि इसी तरह पाकिस्तान में बासमती की एक नई वैरायटी 1121 को भी अंतरराष्ट्रीय मार्केट में बहुत पसंद किया गया है. इसने पाकिस्तान से बासमती चावल के निर्यात में मदद की है.
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