वैभव गुप्ता बने इंडियन आइडल के विनर, कानपुर की गलियों से शुरू हुआ था सफ़र

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- Author, मधु पाल वोहरा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, मुंबई से
भारत में टेलीविज़न की दुनिया के चर्चित रियलिटी शो 'इंडियन आइडल 14' के विजेता की घोषणा कर दी गई है.
इस शो के विजेता बने हैं कानपुर के रहने वाले वैभव गुप्ता.
वैभव शुरू से ही एक मज़बूत कंटेस्टेंट के रूप में उभरकर सामने आए थे.
उन्होंने बाक़ी के कंटेस्टेंट्स को कांटे की टक्कर दी और फिर प्रतियोगिता में विनर का ख़िताब अपने नाम कर लिया है.
वैभव की इस कामयाबी से उनका परिवार बेहद ख़ुश है.
परिवार ही नहीं बल्कि कानपुर के साथ देश-विदेश से वैभव को बधाइयाँ मिल रही हैं.
वैभव गुप्ता अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने पिता को देते हैं जिन्होंने उनका साथ कभी नहीं छोड़ा.
पिता ने बढ़ाया था हौसला

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इंडियन आइडल पहले सीज़न से ही कई बेहतरीन सिंगर्स देता आ रहा है.
आज कई सिंगर्स अपना मुकाम बना चुके हैं. इसी उम्मीद के साथ वैभव ने भी अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत की थी कि एक दिन उन्हें भी इंडियन आइडल में मौक़ा मिलेगा.
वैभव कानपुर में अपने पिता की दुकान में उनका हाथ बँटाते रहे हैं.
सिंगिंग का उन्हें शौक बचपन से ही था. वैभव के मुताबिक़ जब भी वो सिंगिंग का ज़िक्र अपने आस-पड़ोस के लोगों से करते, तो उन्हें बदले में कई लोग ताने देते थे.
लोगों की बातों को नज़रअंदाज़ कर वो अपने सिंगिंग के सपने को पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत करते थे.
वैभव के पिता को उनके सिंगिंग हुनर के बारे में तब पता चला जब वो बाथरूम में गाना गाया करते थे.
वैभव की आवाज़ सुनकर उनके पिता को लगा कि उनका बेटा एक अच्छा सिंगर बन सकता है. इसके बाद से उनके पिता ने उन्हें हमेशा प्रेरणा दी.
वैभव की माँ उनके बचपन में ही गुज़र गईं थीं. तबसे उनके पिता ने ही उनका ख़्याल रखा.
उनके पिता ने दूसरी शादी की तो उनकी दूसरी माँ ने भी उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन देती रहीं.
गायकी का रियाज़

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वैभव एक साधारण परिवार से थे तो घर ख़र्च के लिए वो अक्सर दुकान में बैठा करते थे.
जब भी दुकान में ग्राहक नहीं रहते थे, तो वो अपनी गायकी का रियाज़ करते रहते थे.
अपने शहर कानपुर में वैभव रेडियो प्रोग्राम में हिस्सा लिया करते थे और कई रेडियो प्रोग्राम के विजेता भी रहे.
वे सिंगर सुखविंदर सिंह को सुनते थे. सुखविंदर के अलावा वैभव अक्सर लता मंगेशकर, अरिजीत सिंह, कुमार सानू को सुना करते थे और गायकी का रियाज़ करते थे.
सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल 14 में इस बार एक से एक धुरंधर गायकों ने हिस्सा लिया था और सभी ने शो के मंच पर अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा था.
लेकिन कानपुर के वैभव गुप्ता ने बाज़ी मार ली और ‘इंडियन आइडल 14’ की चमचमाती ट्रॉफ़ी अपने नाम कर ली.
बेहद ख़ास सफ़र

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बीबीसी हिंदी से बात करते हुए वैभव कहते हैं, "मेरा ये सफ़र बहुत ही कमाल का रहा. इंडियन आइडल की जर्नी लखनऊ से शुरू हुई थी क्योंकि मैंने अपना ऑडिशन वहाँ से दिया और फिर सेलेक्ट हुआ. मेरे पिता ने मेरे दिल की बात सुनी. मैं अपने घर, अपने शहर का नाम रोशन कर पाया."
उन्होंने कहा कि वे लोगों की धारणा तोड़ने में कामयाब रहे.
वैभव गुप्ता बताते हैं, "मेरा परिवार मेरी कामयाबी से ख़ुश है. बस मुझे इसी बात की ख़ुशी है क्योंकि मैंने बहुत मेहनत की. मेरे परिवार ने मेरे लिए बहुत कुछ सहा. ग्रैंड फ़िनाले में मेरा परिवार मौजूद था. उनकी आँखों में ख़ुशी के आँसू थे. वो रो रहे थे मेरे लिए. मेरी आँखों में भी आँसू थे."
दूसरे इंडियन आइडल विजेता के मुक़ाबले उन्हें विजेता होने से पहले ही ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण की फ़िल्म "फाइटर " में गाना गाने का मौक़ा मिला.
सिर्फ़ फ़िल्म में ही नही, बल्कि सोनी टीवी पर चल रहे धारावाहिक 'श्रीमत रामायण' में भी उन्हें गाने का मौक़ा मिला.
वैभव की गायकी को देख सुखविंदर सिंह और अभिनेता संजय दत्त उनकी तारीफ़ करते हुए बोले थे, " ये वैभव बहुत आगे जाएगा. इनकी आवाज़ दूसरों से अलग है, इनकी आवाज़ में जादू है."
शो के जज विशाल ददलानी, श्रेया घोषाल और कुमार सानू भी वैभव की आवाज़ के कायल रहे.
‘इंडियन आइडल’ के 14वें सीज़न का विजेता बनते ही वैभव गुप्ता को 25 लाख रुपये, एक गाड़ी और इंडियन आइडल की ट्रॉफ़ी मिले.
वैभव का स्वागत बहुत जल्द उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी करने वाले हैं.
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