विजय रूपाणी: म्यांमार में जन्म से लेकर दो बार गुजरात के मुख्यमंत्री बनने तक का सफ़र

विजय रूपाणी

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इमेज कैप्शन, गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी का गुरुवार को विमान हादसे में निधन हो गया
    • Author, गोपाल कटेशिया
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का एक विमान गुरुवार को अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे में विमान में सवार 241 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से एक गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी हैं.

विजय रूपाणी 68 साल के थे. उनके परिवार के करीबी सूत्रों ने बताया कि वह अपनी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे.

विजय रूपाणी को ऐसे समय में मुख्यमंत्री पद संभालने के लिए कहा गया जब गुजरात में काफी उथल-पुथल चल रही थी.

नरेंद्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद साल 2014 में आनंदीबेन पटेल गुजरात की मुख्यमंत्री बनी थीं. लेकिन अगस्त 2016 में उनके इस्तीफा देने के बाद राज्य की सत्ता विजय रूपाणी के हाथों में आ गई.

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2016 में बने गुजरात के मुख्यमंत्री

साल 2015 में स्थानीय निकाय चुनावों में सफलता के बाद कांग्रेस ने पाटीदार आंदोलन के लिए स्पष्ट समर्थन के माहौल में दिसंबर साल 2017 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी.

रूपाणी को राज्य सरकार का नेतृत्व ऐसे समय सौंपा गया था जब विधानसभा चुनाव में डेढ़ साल से भी कम समय बचा था और पाटीदार आंदोलन के धीमा पड़ने का कोई संकेत नहीं दिख रहा था.

बीजेपी के एक शीर्ष नेता ने कहा, "गुजरात और राष्ट्रीय स्तर के बीजेपी नेताओं के कहने के बावजूद आनंदीबेन पटेल किसी भी हालत में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार नहीं थीं. अंत में बात यहां तक ​​पहुंच गई कि आनंदीबेन से कहा गया कि या तो साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की गारंटी दें या फिर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें."

"आनंदीबेन बीजेपी की जीत की गारंटी देने की स्थिति में नहीं थीं, इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया."

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इमेज कैप्शन, आनंदीबेन के इस्तीफ़े के बाद विजय रूपाणी साल 2016 गुजरात के सीएम बने
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पाटीदार आंदोलन के साये में हुए विधानसभा चुनाव को बीजेपी ने विजय रूपाणी के नेतृत्व में लड़ा था और मोदी समेत कई नेताओं ने जोरदार प्रचार किया था.

उस वक्त विधानसभा में नेता विपक्ष रहे परेश धनानी ने साल 2017 में कहा था कि कांग्रेस के लिए गुजरात में सत्ता में आने का यह सबसे अच्छा मौका था और अगर कांग्रेस इसे चूक गई तो कोई नहीं कह सकता कि ऐसा मौका फिर कब आएगा.

साल 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के नेतृत्व में बीजेपी गुजरात में सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रही. लेकिन बीजेपी 182 में से 99 सीटें ही जीत सकी.

साल 1995 के बाद से बीजेपी की जीती गई सीटों की यह सबसे कम संख्या थी.

इस चुनाव में कांग्रेस को 77 सीटें मिलीं और अन्य दलों सहित विपक्ष की सीटें केवल 81 तक ही पहुंच सकीं, जो बहुमत से बहुत दूर थीं.

चुनावों में मामूली अंतर से मिली जीत के बाद बीजेपी ने विजय रूपाणी को दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाया. रूपाणी ने दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी को मजबूत करने की कोशिश की और ओबीसी के दिग्गज कुंवरजी बावलिया और जवाहर चावड़ा जैसे कांग्रेस नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया.

मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय रूपाणी जनसभाओं में कहा करते थे कि वह टी-20 मैच खेलने आए हैं और आधी पिच पर खेलेंगे.

मुख्यमंत्री के रूप में विजय रूपाणी

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इमेज कैप्शन, गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी का कार्यकाल कई वजहों से चर्चा में रहा

मुख्यमंत्री के रूप में रूपाणी ने अपने कार्यकाल के दौरान साल 2016 में भूमि सुधार लागू किए थे.

उनके कार्यकाल में मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट 'सोनी योजना' का अधिकांश काम पूरा हुआ और सौराष्ट्र की पानी की समस्या कुछ हद तक हल हो गई.

इसके अलावा राजकोट में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना की गई.

उनके कार्यकाल के दौरान राजकोट के बाहरी इलाके में स्थित हीरासर गांव में एक नए हवाई अड्डे, जिसे अब राजकोट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नाम से जाना जाता है, पर काम शुरू हुआ और इसका अधिकांश काम पूरा हो गया.

इसके अलावा राजकोट और अहमदाबाद के बीच राजमार्ग को सिक्स लेन बनाने का काम भी शुरू हुआ.

साल 2017 में उन्होंने बड़े स्तर पर सुरेन्द्रनगर और राजकोट के बीच पाइपलाइन बिछाई, जिससे नर्मदा का पानी राजकोट के आजी बांध तक पहुंचा, जिससे राजकोट की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो गया.

उन्होंने निजी स्कूलों में छात्रों से ली जाने वाली फीस तय करने के लिए कानून बनाया और इस तरह एक नई पहल की.

राजकोट के वरिष्ठ पत्रकार कौशिक मेहता कहते हैं, "अगर सौराष्ट्र के साथ न्याय हुआ है तो केशुभाई के बाद विजय रूपाणी का नाम भी उस सूची में होना चाहिए. उन्होंने सौराष्ट्र को तरजीह देने की आलोचना के बावजूद ये सभी परियोजनाएं पूरी कीं."

विजय रूपाणी के कार्यकाल को लेकर विवाद

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इमेज कैप्शन, सीएम के तौर पर विजय रूपाणी का कार्यकाल विवादों में भी रहा

मुख्यमंत्री के तौर विजय रूपाणी के कार्यकाल में कई विवाद हुए और आरोप भी लगाए गए.

फरवरी 2022 में तत्कालीन विपक्ष के नेता सुखराम राठवा और कांग्रेस के दो और विधायक शैलेश परमार और सी.जे.चावड़ा ने गांधीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाए, "राजकोट की सीमा के पास सहारा इंडिया की 111 एकड़ ज़मीन का सरकार ने ज़ोन बदलकर उसे हाउसिंग ज़ोन से औद्योगिक ज़ोन में कर दिया और उसमें 500 करोड़ का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था.'

उनका कहना था कि जब इस ज़ोन में बदलाव हुआ तब शहरी विकास मंत्रालय का ज़िम्मा विजय रूपाणी के पास था.

इन आरोपों को नकारते हुए रूपाणी ने गांधीनगर की एक कोर्ट में राठवा, उनके ऑफिस के क्लर्क, परमार और चावड़ा पर मानहानि का फौजदारी केस किया था. उसके बाद चावड़ा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे.

आख़िर में राठवा, चावड़ा और परमार ने बिना शर्त के माफी मांगी थी और रूपाणी ने अक्तूबर 2024 में ये केस वापिस ले लिया था.

इसी तरह फरवरी 2022 में राजकोट के दो कारोबारी भाइयों और राजकोट दक्षिण विधानसभा सीट के तत्कालीन विधायक गोविंद पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाए थे, "ठगों के पास से सात करोड़ निकलवाने के लिए राजकोट शहर क्राइम ब्रान्च के अधिकारियों ने उनके पैसे में से अपने 'साहब के हिस्से' के तौर पर 75 लाख रुपए लिए थे."

इस आरोप के बाद क्राइम ब्रान्च के ज़्यादातर अधिकारियों और तत्कालीन राजकोट शहर के पुलिस कमिश्नर मनोज अग्रवाल का ट्रान्सफर कर दिया गया और जांच के आदेश दिए गए थे.

विजय रूपाणी पर कोरोना काल में मिसमैनेजमेन्ट के आरोप लगे थे. तब उन पर ये आरोप भी लगे कि राजकोट की एक प्राइवेट कंपनी द्वारा बनाए गए 'धमण' नाम के वेन्टिलेटर मरीज़ों के इलाज में कारगर नहीं थे, लेकिन सरकार ने इसका बचाव किया था.

कोविड-19 के इलाज के लिए राज्य में रेमडिसिविर इंजेक्शन के संबंध में अप्रैल 2021 में गुजरात बीजेपी प्रमुख सीआर पाटिल ने "सूरत भाजपा के ऑफिस से इस तरह के पांच हज़ार इंजेक्शन का बिना कोई पैसा लिए" हर रोज़ वितरण करने का ऐलान किया था.

भाजपा प्रमुख के इस एलान के बाद रूपाणी सरकार की कड़ी निंदा हुई थी. बीजेपी के पासे से इंजेक्शन कहां से आए, ऐसे सवाल के जवाब में रूपाणी ने कहा कि "ये सवाल आपको सीआर पाटिल से पूछना चाहिए."

इसके अलावा जुलाई 2022 में सीबीआई ने भ्रष्टाचार के आरोप में आईएएस के. राजेश को गिरफ्तार किया था.

के.राजेश पर आरोप थे "सुरेन्द्रनगर कलेक्टर के तौर पर हथियार के लाइसेंस के आवेदनों को मंज़ूर करने में, सरकारी ज़मीनों पर खेती करने के लिए अतिक्रमण को नियमित करने और घुमंतू और विमुक्त जाति के परिवारों के रिहायशी मकानों के लिए प्लॉट वितरण" में भ्रष्टाचार हुआ.

'मैं मुख्यमंत्री तब भी था जब मैं मुख्यमंत्री नहीं था'

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इमेज कैप्शन, विजय रूपाणी 2006 में राज्यसभा सांसद चुने गए थे

दो बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद 11 सितंबर 2021 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उनकी जगह पाटीदार समुदाय से आने वाले भूपेंद्र पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया.

साल 2022 में दिए एक इंटरव्यू में रूपाणी ने कहा कि 10 सितंबर की रात को बीजेपी के एक राष्ट्रीय नेता ने उनसे कहा कि उन्हें इस्तीफा देना होगा और पार्टी के आदेश का सम्मान करते हुए उन्होंने अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया.

इस्तीफा देने के एक सप्ताह बाद राजकोट के प्रमुख स्वामी सभागार में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए रूपाणी ने कहा, "मैं सीएम नहीं था, तब भी सीएम था, सीएम था तब भी सीएम था और आज भी सीएम हूं. सीएम का मतलब है, आम आदमी, आपके बीच का कार्यकर्ता और उस कार्यकर्ता या पार्टी को जो करना है, वो करना ही है."

जब रूपाणी इस सभा को संबोधित कर रहे थे तो वहां मौजूद कई बीजेपी कार्यकर्ताओं की आंखें नम हो गईं.

कौशिक मेहता ने मुख्यमंत्री पद से रूपाणी के इस्तीफे को बीजेपी द्वारा 'अवांछित निष्कासन' बताया.

कौशिक मेहता कहते हैं, "विजय रूपाणी बहुत मेहनती राजनेता थे. वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से एबीवीपी में शामिल हुए और फिर बीजेपी में शामिल हो गए. सौराष्ट्र में बीजेपी को मज़बूत करने में केशुभाई पटेल के बाद अगर किसी दूसरे नेता का नाम आता है तो वह विजय रूपाणी हैं. वह सालों तक कड़ी मेहनत करते रहे."

मेहता आगे कहते हैं, "वे 2014 में ही सरकार में मंत्री बन पाए थे. हां, उन्हें अप्रत्याशित रूप से मुख्यमंत्री पद मिला था. लेकिन, मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे लगातार मेहनत करते रहे. इसलिए, जिस तरह से बीजेपी ने उन्हें बाहर किया, वह अशोभनीय था."

"यह सही है कि उन्होंने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के साथ अपनी सीट बदली और राजनीतिक कारणों से उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. लेकिन सरकारों पर ऐसे आरोप लगते रहते हैं. बीजेपी को उन्हें सम्मान के साथ जाने देना चाहिए था."

राजनीतिक सफर

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इमेज कैप्शन, बीजेपी में विजय रूपाणी का सफर एबीवीपी से शुरू हुआ

विजय रूपाणी का जन्म साल1956 में म्यांमार की राजधानी रंगून (अब यंगून) में हुआ था.

उनके पिता रसिकलाल रूपाणी वहां अनाज व्यापारी थे.

विजयभाई सात भाइयों में सबसे छोटे थे. विजयभाई के जन्म के कुछ महीने बाद म्यांमार में अस्थिरता के कारण रूपाणी परिवार राजकोट चला गया और रसिकलाल ने बॉल-बेयरिंग का बिजनेस शुरू किया.

विजय रूपाणी साल 1973 में एबीवीपी में शामिल हुए और साल 1996 में राजकोट के मेयर चुने गए. साल 2006 में वे राज्यसभा के सदस्य चुने गए. इसके बाद उन्हें गुजरात बीजेपी का महासचिव नियुक्त किया गया.

साल 2012 में उन्हें गुजरात नगर निगम वित्त बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. साल 2014 में जूनागढ़ नगर निगम चुनाव के प्रभारी नियुक्त होने के बाद उन्होंने बीजेपी को उस चुनाव में जीत दिलाई.

उस समय जूनागढ़ नगर निगम गुजरात का एकमात्र नगर निगम था जहां बीजेपी सत्ता में नहीं थी.

उसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव में विजय रूपाणी ने सौराष्ट्र-कच्छ की सभी आठों लोकसभा सीटों पर बीजेपी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपना राजनीतिक कद बढ़ाया.

साल 2014 में राजकोट पश्चिम से विधायक वजुभाई वाला को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर उन्होंने सीट से इस्तीफा दे दिया था.

उसके बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने विजय रूपाणी को टिकट दिया और उनकी जीत के बाद आनंदीबेन पटेल सरकार में रूपाणी को जल आपूर्ति मंत्री बनाया गया. उसके बाद वे कुछ ही समय में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री बन गए.

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक साल बाद बीजेपी ने उन्हें पंजाब भाजपा का प्रभारी नियुक्त किया. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने रूपाणी को दिल्ली की तीन सीटों का प्रभार दिया था.

मेहता कहते हैं, "लेकिन, मुझे लगता है कि वह मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने को पचा नहीं पाए. उन्हें यकीन नहीं हुआ कि पार्टी के लिए इतनी मेहनत करने वाले और इतना त्याग करने वाले को इस तरह हटाया जा सकता है."

व्यक्तिगत जीवन

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इमेज कैप्शन, विजय रूपाणी को पतंग उड़ाने का शौक था

रूपाणी एक स्टॉकब्रोकर थे और उन्होंने सौराष्ट्र-कच्छ स्टॉक एक्सचेंज के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया.

उनकी पत्नी अंजलि रूपाणी भी बीजेपी महिला मोर्चा की नेता हैं. उनके बेटे ऋषभ और बेटी राधिका विदेश में बस गए हैं.

अपने दूसरे बेटे पूजित की असामयिक मृत्यु के बाद उन्होंने उनकी स्मृति में पूजित रूपाणी मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना की और इसके माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का काम किया.

उन्हें पतंग उड़ाने का शौक था और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे हर मकर संक्रांति पर राजकोट आते थे और अपने परिवार और दोस्तों के साथ अपने घर की छत से पतंग उड़ाते थे.

मेहता कहते हैं, "एक राजनेता के तौर पर उनमें असाधारण विनम्रता थी. वह सभी से मिलते थे और सबकी बातें सुनते थे. वह एक ऐसे नेता थे जो बहुत ही विनम्र थे और लोगों के बीच रहते थे."

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