पश्चिम बंगाल: संदेशखाली से चर्चा में आईं रेखा पात्रा को बीजेपी ने क्यों बनाया उम्मीदवार?

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- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
वो आंचल से चेहरा छुपाने के बावजूद पश्चिम बंगाल के उत्तर 24-परगना जिले में बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाके में स्थित संदेशखाली में कथित रूप से तृणमूल कांग्रेस नेताओं के यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं का चेहरा बन गई थीं.
अब चेहरे से आंचल हटा कर वह संसद में संदेशखाली ही नहीं बल्कि पूरे बंगाल की पीड़िताओं का चेहरा बनना चाहती हैं. यहां संदेशखाली की बहू रेखा पात्रा की बात हो रही है.
भाजपा ने उन्हें बशीरहाट संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. संदेशखाली विधानसभा सीट इसी के तहत है.
संदेशखाली की घटना में यौन उत्पीड़न की जिस शिकायत के आधार पर तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता और इस मामले के मुख्य अभियुक्त शाहजहां शेख का दाहिना हाथ रहे शिव प्रसाद ऊर्फ शिबू हाजरा को गिरफ्तार किया गया था. ये शिकायत रेखा पात्रा ने ही दर्ज कराई थी.
आंदोलन के दौरान चेहरे पर आंचल रखकर पत्रकारों से बातचीत के दौरान रेखा ने दावा किया था कि वह भी तृणमूल कांग्रेस नेताओं के यौन उत्पीड़न का शिकार हो चुकी हैं.
पीएम मोदी का फोन कॉल

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बीते महीने संदेशखाली की महिलाएं जब तृणमूल कांग्रेस नेताओं के कथित अत्याचारों और यौन उत्पीड़न के खिलाफ सड़कों पर उतरी थीं, तब रेखा उस भीड़ में पहली कतार में खड़ी थीं.
वह जल्दी ही इस आंदोलन का चेहरा बन गई थीं.
प्रधानमंत्री मोदी ने बशीरहाट सीट से भाजपा उम्मीदवार और संदेशखाली की महिला रेखा पात्रा से मंगलवार को फोन पर बात की, उनसे चुनावी तैयारियों के बारे में पूछा और शक्तिस्वरूपा कह कर संबोधित किया.
इतना ही नहीं संदेशखाली की घटना के बारे में भी जानकारी ली.
प्रधानमंत्री का ये फ़ोन रेखा पात्रा की उम्मीदवारी के एलान के 48 घंटे के भीतर ही आया.
दरअसल, भाजपा संदेशखाली के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी चार-चार रैलियों में यह मुद्दा उठा चुके थे.
लेकिन वहीं की किसी महिला को बशीरहाट टिकट से टिकट मिलेगा, इसकी भनक पार्टी के ज्यादातर नेताओं को भी नहीं थी.
रेखा पात्रा का नाम उम्मीदवारी की दौड़ में कैसे शामिल हुआ?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संदेशखाली से करीब 80 किमी दूर उत्तर 24-परगना जिले के ही बारासात में बीते छह मार्च को अपनी रैली में संदेशखाली की कुछ पीड़िताओं से मुलाकात की थी.
हालांकि देर से मौके पर पहुंचने के कारण रेखा की प्रधानमंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी थी.
पार्टी के सूत्रों का कहना है कि आंदोलन में रेखा की भूमिका के बारे में सुनकर प्रधानमंत्री ने उसी दिन उनको उम्मीदवार बनाने का फैसला कर लिया था.
आंदोलन के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने चेहरा छिपा कर सड़क पर उतरने वाली महिलाओं को बाहरी करार दिया था. लेकिन अब भाजपा का टिकट मिलने के बाद रेखा रातों-रात अपने चेहरे के साथ सुर्ख़ियों में हैं.
वह कहती हैं, "मुझ जैसी एक सामान्य ग्रामीण महिला को टिकट देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आभारी हूं. मैं हमेशा अत्याचार की शिकार महिलाओं के साथ खड़ी रहूंगी."
लेकिन आखिर रेखा का नाम उम्मीदवारी की दौड़ में कैसे शामिल हुआ?
भाजपा के एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं, "संदेशखाली आंदोलन के दौरान ही इस मुद्दे को भुनाने के लिए पार्टी किसी स्थानीय महिला को उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही थी. उसी समय कुछ स्थानीय लोगों की ओर से यह नाम सामने आया. उसके आधार पर विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ही रेखा को टिकट देने की सिफ़ारिश की थी. केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी सिफ़ारिशों पर मुहर लगा दी."
रेखा के ख़िलाफ लगे रातोंरात पोस्टर

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हालांकि रेखा के नाम का एलान होते ही संदेशखाली के कई इलाको में उनके ख़िलाफ़ रातोंरात पोस्टर लग गए हैं. इन पोस्टरों में लिखा है, "हम भाजपा उम्मीदवार के तौर पर रेखा को नहीं चाहते."
एक अन्य पोस्टर में लिखा है कि संदेशखाली के आंदोलनकारी लोग रेखा पात्रा को नहीं चाहते.
भाजपा इसके लिए तृणमूल कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहरा रही है. पार्टी की बशीरहाट ज़िला समिति के अध्यक्ष तापस घोष कहते हैं, "रेखा के नाम पर कहीं कोई असंतोष नहीं है. तृणमूल कांग्रेस ओछी राजनीति के तहत यह सब करा रही है."
लेकिन संदेशखाली के तृणमूल कांग्रेस विधायक सुकुमार महतो कहते हैं, "संदेशखाली में सड़कों पर उतरने वाली रेखा को टिकट मिलने की वजह से पार्टी के पुराने कार्यकर्ता नाराज हैं और रेखा के ख़िलाफ़ पोस्टर लगा रहे हैं."
हालांकि गांव की कुछ महिलाएं रेखा को टिकट मिलने से खुश हैं. एक महिला कहती है, "गांव की कोई महिला अब तक संसद तक नहीं पहुंची है. रेखा की उम्मीदवारी से महिलाएं खुश हैं. कम से कम हमारी आवाज़ तो दिल्ली तक पहुंचेगी."
बशीरहाट में रेखा के भरोसे चुनाव जीतने की तैयारी

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बशीरहाट में पार्टी का संगठन बहुत मजबूत नहीं है. लेकिन पार्टी के प्रदेश नेताओं को भरोसा है कि रेखा के चेहरे के कारण चुनावी लड़ाई की राह आसान होगी.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार कहते हैं कि उम्मीदवारों की सूची से ही साबित होता है कि तृणमूल कांग्रेस शाहजहां जैसे लोगों की पार्टी है और भाजपा पीड़ितों के साथ खड़ी रहने वाली पार्टी.
तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव के संचालन के लिए संदेशखाली विधानसभा के दो ब्लॉकों में दो अलग-अलग चुनाव समितियों का गठन किया है.
संदेशखाली के तृणमूल विधायक सुकुमार महतो को इन दोनों समितियों की कमान सौंपी गई है.
महतो कहते हैं कि हम बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं और व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है. उनका दावा है कि पार्टी यहां बेहतर प्रदर्शन करेगी.
लेकिन भाजपा के स्थानीय नेता विकास सिंह कहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस चाहे जितना भी जोर लगा ले संदेशखाली के लोग उसे कभी माफ नहीं करेंगे.
तृणमूल ने बदला उम्मीदवार

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राजनीतिक विशेलेषकों का कहना है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने चुनावी गणित के तहत ही रेखा को टिकट देने का फैसला किया है. वह रेखा को चेहरा बना कर पूरे राज्य में महिलाओं की स्थिति को अपना मुद्दा बनाना चाहती है. संदेशखाली मुद्दे पर पार्टी के आक्रामक रुख से पहले ही यह बात साफ हो गई थी.
एक विश्लेषक प्रोफेसर (रिटायर्ड) समीरन पाल कहते हैं, "लोकसभा चुनाव पर रेखा की उम्मीदवारी के असर के बारे में फिलहाल कुछ कहना जल्दबाजी होगी. लेकिन उसकी उम्मीदवारी का असर जिले की कुछ इलाकों पर जरूर पड़ सकता है. भाजपा रेखा के बहाने बंगाल में महिलाओं की स्थिति को अपने चुनाव अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में है."
संदेशखाली के आंदोलन और स्थानीय लोगों की नाराजगी को ध्यान में रखते हुए ही तृणमूल कांग्रेस ने इस बार बशीरहाट सीट से पिछली बार जीती बांग्ला अभिनेत्री नुसरत जहां की जगह पूर्व सांसद और ज़री के कारोबारी हाजी नुरुल इस्लाम को मैदान में उतारा है.
इस्लाम वर्ष 2009 में इस सीट से जीत चुके हैं. उसके बाद वर्ष 2016 और 2021 में उन्होंने लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीता है. दूसरी ओर, कांग्रेस और वाममोर्चा के समर्थन से इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ़) के मोहम्मद शहीदुल इस्लाम मौल्ला मैदान में हैं.
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