जम्मू-कश्मीर: माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में मुस्लिम छात्रों के एडमिशन पर विवाद

श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज
इमेज कैप्शन, श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 1999 में जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल के एक अधिनियम के तहत एक आवासीय और तकनीकी यूनिवर्सिटी के रूप में की गई थी
    • Author, माजिद जहाँगीर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर का श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज आजकल चर्चा में है. दरअसल, इस साल 42 मुस्लिम छात्रों के एडमिशन को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है.

इस साल मुस्लिम समुदाय के 42 छात्रों ने एमबीबीएस की परीक्षा पास की है जबकि ग़ैर मुस्लिम छात्रों में सिर्फ़ आठ ही पास हुए हैं.

ये परीक्षा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट के तहत होती है. इसके बाद मेरिट लिस्ट के आधार पर जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ़ प्रोफ़ेशनल एंट्रेंस एग्ज़ामिनेशन सीटें अलॉट करता है.

लिस्ट जारी होने के बाद कई हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई कि माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में मुसलमानों को दाखिला नहीं मिलना चाहिए.

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इन संगठनों ने बीते दिनों विरोध प्रदर्शन कर मांग की कि ये लिस्ट उन्हें स्वीकार नहीं है.

जम्मू-कश्मीर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) यूनिट ने भी चुने गए छात्रों के दाखिले पर कड़ी आपत्ति जताई है.

जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ़्रेंस और अन्य दलों ने हिंदू संगठनों की आपत्ति की निंदा की है.

इस यूनिवर्सिटी में मेडिकल (एमबीबीएस) की पढ़ाई इसी साल से शुरू हुई है. मेडिकल कॉलेज की इजाज़त नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) ने दी है.

इजाज़त के लिए यूनवर्सिटी ने कमिशन को एक पत्र लिखा था. कमिशन ने साल 2025-26 के लिए मेडिकल कॉलेज में 50 सीटें आबंटित कीं.

कैसे शुरू हुआ विवाद?

बजरंग दल का विरोध प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, कॉलेज में मुसलमान छात्रों के एडमिशन के ख़िलाफ़ बजरंग दल का विरोध प्रदर्शन

ताज़ा विवाद बीते दिनों तब शुरू हुआ, जब जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ़ प्रोफ़ेशनल एंट्रेंस एग्ज़ामिनेशन ने एमबीबीएस की लिस्ट जारी की.

मेडिकल कॉलेज को आबंटित की गईं 50 सीटों में से 42 सीटों पर मुस्लिम छात्र प्रवेश परीक्षा में सफल हुए.

अभी तक इन 42 छात्रों में से 36 ने कॉलेज में दाखिला लिया है.

विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी और बजरंग दल ने कॉलेज में मुसलमान छात्रों के एडमिशन पर आपत्ति जताई और विरोध प्रदर्शन किए.

वीएचपी के अलावा दूसरे हिन्दू संगठन भी कॉलेज में मुस्लिम छात्रों के दाख़िले को रद्द करने की मांग करने लगे.

इसके बाद जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने भी खुलकर कॉलेज में इतनी तादाद में मुस्लिम छात्रों के एडमिशन पर आपत्ति जताई और बताया कि कॉलेज में केवल उन छात्रों को दाख़िला मिलना चाहिए, जो श्री माता वैष्णो देवी पर विश्वास रखते हैं.

बीजेपी और हिंदू संगठनों का क्या कहना है?

बीजेपी नेता सुनील शर्मा
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समाप्त

बीते शनिवार को बीजेपी नेता सुनील शर्मा के नेतृत्व में कई नेता उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मिले और उन्हें इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा.

सुनील शर्मा को बीबीसी ने कई बार फ़ोन किया लेकिन उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं मिला.

उपराज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद सुनील शर्मा ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "सीनियर विधायकों का हमारा शिष्टमंडल उपराज्यपाल से मिला. हम केवल एक ही बिंदु पर उनसे बात करके आए हैं."

सुनील शर्मा ने कहा, "माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में जो इस साल मेडिकल कॉलेज खुला है, इसमें अधिकांश बच्चे एक विशेष समुदाय से आते हैं. यहाँ पूरे देश के लोग चढ़ावा देते हैं. उनका एक ही लक्ष्य होता है कि सनातन धर्म का विस्तार हो और भारतीय संस्कृति का विस्तार हो."

"यहाँ पर अन्य वर्गों से, अन्य धर्मों और अन्य समुदाय से लोग आएं. मुझे नहीं लगता कि ये श्राइन बोर्ड और उन चंदा देने वालों के लिए अच्छा रहेगा. हमने उपराज्यपाल से निवेदन किया कि यहाँ पर वही बच्चे आएं और उन्हीं बच्चों को यहाँ एडमिशन मिलना चाहिए, जो माता वैष्णो देवी पर श्रद्धा और आस्था रखते हैं."

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को ज्ञापन सौंपते बीजेपी नेता
इमेज कैप्शन, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को ज्ञापन सौंपते बीजेपी नेता

जम्मू-कश्मीर बीजेपी के प्रवक्ता सुनील सेठी ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "50 में से जिन 42 छात्रों का मेडिकल कॉलेज की लिस्ट में नाम आया है, वो उस धर्म से आते हैं, जिनकी आस्था वैष्णो देवी में नहीं है. ये एक चिंता का विषय है. आस्था का प्रश्न है. बीजेपी का इस संबंध में ये भी कहना है कि ये लड़ाई लीगल राइट्स और आस्था के बीच की लड़ाई है."

उन्होंने ये भी दावा किया कि बीजेपी इस मामले का ऐसा निवारण करेगी कि किसी को नुक़सान न पहुँचे. उन्होंने कहा कि जिन मुस्लिम बच्चों को एडमिशन मिला है, उनकी भी चिंता की जाएगी ताकि उनके अधिकार भी सुरक्षित किए जा सकें.

दूसरी ओर विश्व हिन्दू परिषद के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने फ़ोन पर बताया कि दूसरे धर्म के लोगों के यूनिवर्सिटी में आने से धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुँचती है.

उन्होंने कहा, "ये कॉलेज माता वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र में ही स्थित है और माता वैष्णो देवी में जो भक्त आते हैं, उनके दान से ही इसे बनाया गया है और उसके दान से ही वो चलने वाला है. एक तो दान दाताओं की भावना रहती है कि वहाँ पर क्या हो? ऐसी अपेक्षा की जाती है कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड या विद्यालय में हिंदू रीति रिवाज का पालन हो."

राष्ट्रीय बजरंग दल के नेता राकेश बजरंगी ने इस मामले पर बीबीसी हिन्दी को बताया, "हमारा विरोध माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के ख़िलाफ़ है न कि किसी ख़ास समुदाय के लिए या बच्चों के लिए.''

''हमारा ये कहना है कि जो भी पैसा श्राइन बोर्ड ख़र्च करता है, वो पैसा सिर्फ़ हिन्दू समाज की बेहतरी के लिए ख़र्च किया जाए और माता वैष्णो देवी कॉलेज में 100 प्रतिशत आरक्षण केवल हमारे बच्चों को दिया जाए. यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक दर्जा मिले. जिस वक़्त मेडिकल कॉलेज खोला गया, उस वक़्त श्राइन बोर्ड को होम वर्क करना चाहिए था कि यहाँ किनको एडमिशन देना है."

सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य पार्टियों की प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि जिन बच्चों ने परीक्षा पास की है, उनको धर्म के आधार पर दाख़िला देने से इनकार नहीं किया सकता

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने बीते सोमवार को कहा कि जब माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी का बिल पास किया गया, तो उस बिल में कहाँ लिखा गया था कि एक धर्म के छात्रों को उस यूनिवर्सिटी से बाहर रखा जाएगा.

उमर अब्दुल्लाह ने पूछा कि ये इसमें कहाँ लिखा है कि धर्म देखकर एडमिशन नहीं दिया जाएगा.

मंगलवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने जम्मू में मीडिया के साथ बातचीत में बताया कि माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में मुसलमान छात्रों को एडमिशन से अलग रखना उन उसूलों के ख़िलाफ़ है, जिन उसूलों पर कॉलेज बना है.

उन्होंने कहा कि जिन बच्चों ने नीट की परीक्षा पास की है, उनको धर्म के आधार पर दाख़िला देने से इनकार नहीं किया सकता.

पीपुल्स कांग्रेस के चेयरमैन और विधायक सज्जाद गनी लोन ने बीजेपी और हिंदू संगठनों की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मेडिकल साइंस को धार्मिक रंग देना एक ख़तरनाक क़दम है.

जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ़ बुख़ारी ने एक बयान में बीजेपी की इस मांग को अव्यवहारिक बताया है.

उन्होंने कहा, "हमारे यहाँ मुसलमानों के भी इदारे (संस्थान) हैं, अगर कल इस तरह की मांग इस्लामिक यूनिवर्सिटी और बाबा ग़ुलाम शाह बादशाह यूनिवर्सिटी के एडमिशन पर की जाए, तो फिर क्या होगा?"

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का क्या कहना है?

कॉलेज प्रशासन ने बताया है कि उन्होंने छात्रों को मेरिट के आधार पर दाख़िला दिया है
(अगर कार्ड में कोई बदलाव करना हो- https://www.canva.com/design/DAGwDWEzQvc/tg60edwht2wa5vxYqIjdCA/edit?ui=eyJEIjp7IlQiOnsiQSI6IlBCOUQyY3YzUEs0cnkwYzgifX19)

कॉलेज प्रशासन ने बताया है कि उन्होंने छात्रों को मेरिट के आधार पर दाख़िला दिया है.

कॉलेज के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर यशपाल शर्मा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को फ़ोन पर बताया, "जो कुछ भी राजनीतिक दल कह रहे हैं, वो उनका अपना स्टैंड है. हमें तो अपने नियमों के तहत ही चलना है. हमें तो बच्चों को हिंदू-मुस्लिम होकर पढ़ाना नहीं है."

"जिन बच्चों का दाख़िला हुआ है, वो इत्मीनान से पढ़ रहे हैं. अगर सरकार इस पर कोई फ़ैसला करती है, तो हम उस फ़ैसले पर अमल करेंगे. एडमिशन के हर नियम का सख़्ती से पालन किया गया है. पूरे भारत में एडमिशन के जो नियम होते हैं, यहाँ भी ऐसा ही किया गया."

"यहाँ हमारा हॉस्पिटल भी चलता है और हर किस्म के लोग यहाँ आते हैं और माता की कृपा से ठीक होकर जाते हैं. अपना इलाज करवाते हैं. ये बैच हमारा पहला बैच है, जिसके लिए हमने नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) से अपने कॉलेज के लिए 50 छात्रों की इजाज़त ली है. सितंबर के महीने में हमें इजाज़त का पत्र मिला. हमारे यहाँ किसी तरह का कोई आरक्षण नहीं है."

कॉलेज के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि पहले कभी भी ऐसा कोई विवाद यहाँ सामने नहीं आया है. ऐसा पहली बार हुआ है, जब मुस्लिम छात्रों के दाख़िले पर विवाद खड़ा हो गया है.

यहाँ बीते वर्षों में बड़ी संख्या में छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं.

क्या कहते हैं शिक्षाविद?

जम्मू के परेड कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल हेमला अग्रवाल का कहना है कि जब एक बार बच्चों का एडमिशन हो गया है, तो अब ये उनके साथ अन्याय है.

वह बताती हैं, "सभी नियमों को फ़ॉलो किया गया है. मुझे लगता है कि इस मसले को इतना ज़्यादा उछालना नहीं चाहिए. श्राइन बोर्ड तो वहाँ है, लेकिन फिर पहले ही माइनॉरिटी दर्जा लेना चाहिए था, जैसा दूसरे विश्वविद्यालयों में होता है. जब बच्चों ने नीट की परीक्षा पास की, तो इस मेडिकल कॉलेज में उन छात्रों को भेजा गया और कॉलेज को तो उस आदेश को स्वीकार करना ही था. नियमों को फ़ॉलो करना था, तो उनको फ़ॉलो किया गया है."

कश्मीर के शिक्षाविद ग़ुलाम नबी राथर बताते हैं कि जिस तरह की मांग कुछ लोग कर रहे हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए.

उनका कहना था कि जिस अल्पसंख्यक दर्जे की इस समय बात हो रही है, उसको तो पहले ही हासिल कर लेना चाहिए था.

राथर ये भी बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर के कई कॉलेज और विश्वविद्यालयों में ग़ैर-मुस्लिम छात्र पढ़ते हैं, तो क्या हम उनको ये कहें कि आप यहाँ न आएँ क्योंकि यहाँ मुसलमान रहते और पढ़ते हैं.

उनका कहना था कि ये कोई अच्छी बात नहीं कि शिक्षा के मैदान में धर्म को लाया जा रहा है.

कब बनी माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी?

श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी
इमेज कैप्शन, श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी जम्मू क्षेत्र के दक्षिणी रजौरी ज़िले के कटरा में स्थित है

श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 1999 में जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल के एक अधिनियम के तहत एक आवासीय और तकनीकी यूनिवर्सिटी के रूप में की गई थी, जिसको विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी ने मंज़ूरी दी थी.

श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी जम्मू क्षेत्र के दक्षिणी रजौरी ज़िले के कटरा में स्थित है.

जम्मू शहर से क़रीब 40 किलोमीटर की दूरी पर श्री माता वैष्णो देवी का मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर है, जहाँ हर साल क़रीब एक करोड़ श्रद्धालु पूरे भारत से यहाँ हैं और दान भी देते हैं.

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं और माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के चेयरमैन भी.

अभी तक उनकी तरफ़ से बीजेपी और दूसरे हिंदू संगठनों की तरफ़ से की जाने वाली मांग पर कोई बयान सामने नहीं आया है.

कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी का बोर्ड है, जो माता वैष्णो देवी मंदिर की देखरेख करता है.

इस यूनिवर्सिटी को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से फ़ंडिंग मिलती है.

इस बोर्ड का गठन जम्मू और कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन एक्ट के तहत अगस्त 1986 में हुआ था और ये एक ऑटोनॉमस बोर्ड है.

यूनिवर्सिटी को जम्मू-कश्मीर सरकार से भी फ़ंड मिलता है.

जम्मू-कश्मीर के 20 ज़िलों में से 11 ज़िलों में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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