कपूर ख़ानदान का वो चेहरा जो नहीं बना सितारा, अब 67 साल की उम्र में की ग्रेजुएशन

रणधीर कपूर और जैकी श्राफ़ के साथ आदित्य राज कपूर.

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    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

अभिनेता शम्मी कपूर और गीता बाली के बेटे आदित्य राज कपूर की डिग्री को लेकर काफ़ी चर्चा हो रही है.

दरअसल 67 साल की उम्र में आदित्य ने दर्शनशास्त्र में 59 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.

इस उम्र में पढ़ाई को लेकर जागी इच्छा के बार में आदित्य कपूर ने बताया, “16 साल की उम्र से ही आरके स्टूडियो में कमाना शुरू कर दिया था. पहले पढ़ने की इच्छा ही नहीं थी लेकिन अब जाकर ये इच्छा जागी.”

वे कहते हैं कि बेटी तुलसी ने फिर से पढ़ाई शुरू करने का हौसला दिया, “डिग्री ना होने के चलते बैंक से लोन नहीं मिला लेकिन आज डिग्री है मेरे पास, इस बात को मैं गर्व से कह सकता हूँ.”

उन्होंने ये सपना 'इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी' से पूरा किया.

वो कहते हैं कि अब उनका सपना है 70 साल की उम्र तक मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करें और पीएचडी भी करें.

आदित्य एक प्रोफ़ेशनल बाइकर भी हैं और इन दिनों सपरिवार गोवा में रह रहे हैं.

‘मेरी पीढ़ी ने कॉलेज देखा ही नहीं’

आदित्य एक रिटायर्ड बिजनेसमैन हैं, साथ ही वह प्रोफ़ेशनल बाइकर भी हैं

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इमेज कैप्शन, आदित्य राज कपूर प्रोफ़ेशनल बाइकर भी हैं.

पढ़ाई और डिग्री न होने के कारण आदित्य राज कपूर को अपने कामकाजी जीवन में काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

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जब उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री का काम छोड़ कर नए काम की तलाश शुरू की, तो हर बार सर्टिफ़िकेट और डिग्री की बात आती थी.

आदित्य कहते हैं, “नौकरी के लिए लोग सर्टिफ़िकेट मांगते और कहते कि तुम्हारे पास कुछ नहीं है तो क्या नौकरी दें तुम्हें. मुझे कोई बैंक लोन तक नहीं देता था .”

अपनी पढ़ाई को लेकर आदित्य कपूर ने बताया कि उनके दादा पृथ्वी राज कपूर कॉलेज गए, इसके बाद उनके पिता शम्मी कपूर ने भी कॉलेज में सेकंड ईयर तक पढ़ाई की, “लेकिन मेरी जेनरेशन का कोई कॉलेज गया ही नहीं क्योंकि सब अपने काम में व्यस्त हो गए.”

वो कहते हैं, “पहले स्टूडियो में बहुत काम हुआ करता था. पृथ्वी थिएटर में लोगों की कमी रहती थी, तब हम बेटे काम में हाथ बँटाते. ऐसा नहीं है कि किसी ने रोका था. हमने ख़ुद ही नहीं की पढ़ाई.”

“मेरे पूरे परिवार का ही माहौल एक्टिंग और निर्देशन का था. पिता अक्सर मुझसे बचपन में कहते थे कि एक ग़लत किताब पढ़ोगे तो 10 सही किताब पढ़ोगे. उन्हीं की वजह से मुझमें किताब पढ़ने की आदत लगी जिसके चलते मुझे कॉलेज की किताबें पढ़ने में अब मदद मिली.”

आदित्य बताते हैं कि उनकी माँ गीता बाली ने सिर्फ छठीं कक्षा तक की पढ़ाई की थी जबकि दूसरी माँ नीला देवी ग्रेजुएट थीं.

कहा जाता है कि गीता बाली को बहुत कम उम्र में अपने परिवार के लिए पैसे कमाने के लिए फ़िल्मों में काम करना पड़ा. आगे न पढ़ पाने का शायद ये भी एक कारण रहा हो.

कपूर खानदान से अपनाया अलग रास्ता

पिता शम्मी कपूर चाहते थे कि आदित्य राज कपूर सिनेमा मं अपनी पहचना बनाएं.

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इमेज कैप्शन, पिता शम्मी कपूर चाहते थे कि आदित्य राज कपूर सिनेमा में अपनी पहचान बनाएं.

आदित्य कपूर ने 19 साल तक आरके स्टूडियो में काम किया.

राज कपूर की फ़िल्म ‘सत्यम शिवम् सुंदरम’ में वो चीफ़ अस्सिस्टेंट रहे, उससे पहले फ़िल्म ‘धरम करम’ में भी अस्सिस्टेंट रहे.

वे बताते हैं, “सत्यम शिवम् सुंदरम के बाद मैं एक और फ़िल्म करने वाला था और बतौर हीरो लांच होने वाला था लेकिन तब तक मैंने अपने लिए कोई और रास्ता चुन लिया था.”

वो कहते हैं, “मेरे भोले बाबा जिन्हें मैं अपना गुरू मानता हूँ, उनका मार्ग दर्शन मिलता गया तब मेरे अंदर परिवर्तन आते रहे.”

“मेरे गुरू ने बताया था कि हर ढाई पीढ़ी के बाद कुछ बदलाव होना चाहिए. वही काम सब करें ये ज़रूरी नहीं. मैंने अपने लिए अलग रास्ता चुना और कपूर परिवार से एकदम अलग काम करने लगा.”

उनके पिता शम्मी कपूर ने जब देखा आदित्य कपूर ने फ़िल्म इंडस्ट्री को छोड़ने का फैसला किया है, तो उन्हें धक्का सा लगा.

आदित्य कहते हैं, “पिता को लगा कि ये क्या करेगा बिज़नेस, इसे तो ज़रा भी समझ नहीं है और एक्टिंग तो परिवार से जुड़ी चीज़ है. लेकिन जब उन्होंने काम धंधे में मेरी लगन देखी तो वो मान गए और फिर अपना आशीर्वाद दिया.”

आदित्य ने एक मैनजमेंट कंपनी बनाई और देश के कई अम्यूज़मेंट पार्क को डेवलप करने और उसके प्रबंधन करने का काम दशकों तक संभाला. उनकी कंपनी ही दिल्ली के प्रसिद्ध अप्पू घर को संचालित करती थी.

लेकिन एक समय आया जब उन्होंने कंपनी बंद करके रिटायरमेंट ले कर उन कामों को करने का मन बनाया जो अब तक छूट गया था.

एक्टिंग हो या क्रिकेट पढ़ाई ज़रूरी

जब सिनेमा को छोड़ने का निर्णय लिया तो शम्मी कपूर को झटका लगा.

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इमेज कैप्शन, जब सिनेमा को छोड़ने का निर्णय लिया तो शम्मी कपूर को झटका लगा.

क्या उन्होंने कभी अपने बाद की पीढ़ी के करिश्मा, करीना, रणबीर से पढ़ाई की अहमियत को लेकर बात की है, वो कहते हैं, "मुझे देख कर परिवार में कोई आगे पढ़े और पढ़ाई पूरी करे तो मैं तो यही चाहूँगा कि सब पढ़ें लिखे."

”जो मुझसे छोटे हैं वो पढ़ेंगे या नहीं वो उनके ऊपर है. लेकिन कम से कम ये तो देखेंगे कि ये आदमी 67 की उम्र में पढ़ रहा है. एक्टिंग के लिए पढ़ाई ज़रूरी नहीं ये सच है लेकिन अगर आपको एक्टिंग करनी है या क्रिकेटर बनना है तो भी पढ़ाई ज़रूरी है."

"एक्टिंग हो या क्रिकेट जो भी करना है करो लेकिन पहले पढ़ाई पूरी करो. पढ़ाई आपका मार्गदर्शन करेगी आपको और बेहतर बनाएगी. पढ़ाई आपके अंदर सामाजिकता लाती है.”

आदित्य कपूर कहते हैं कि रणधीर कपूर अभी फ़िलहाल मुंबई में रह रहे हैं. ऋषि कपूर, राजीव कपूर अब नहीं रहे. शशि कपूर के बेटे कुणाल और करण के साथ काफ़ी मिलना जुलना रहा है.

एक्टिंग और डायरेक्शन में भी आज़माया था हाथ

आदित्य राज कपूर ने सिनेमा तब छोड़ने का फैसला लिया जब उनको बतौर हीरो लॉन्च करना पक्का हो गया था.

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आदित्य कपूर ने एक्टिंग और डायरेक्शन में भी हाथ आज़माया था.

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद आदित्य ने अपने चाचा राज कपूर के साथ 1973 की रोमांटिक फ़िल्म ‘बॉबी’ में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर से करियर की शुरुआत की.

इसके बाद उन्होंने 1978 में आई 'सत्यम शिवम सुंदरम', 1985 में ‘गिरफ्तार’, 1991 में ‘साजन’, 1993 में ‘दिल तेरा आशिक’, 1996 में ‘पापी गुड़िया’ और 1999 में आई फ़िल्म ‘आरजू’ में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर भी काम किया था.

एक एक्टर के रूप में आदित्य कपूर की पहली फ़िल्म जगमोहन मूंदड़ा की ‘चेज’ थी. इसके अलावा उन्होंने 'दिल तेरा आशिक' में छोटा सा किरदार निभाया था.

इन फ़िल्मों में उन्होंने एक्टिंग तो की लेकिन कपूर परिवार में चलन के हिसाब से बतौर अभिनेता कभी लांच नहीं हुए.

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