सौरव गांगुली को जब मिली इमरान ख़ान की सलाह, मुशर्रफ़ की फ़ोन कॉल और सलीम मलिक की धमकी

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- Author, रशीद शकूर
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, कराची से
- पढ़ने का समय: 11 मिनट
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 का विश्व कप जीतने वाली टीम के कप्तान इमरान ख़ान इस समय जेल में हैं, जहां से उनकी आँखों की रोशनी बुरी तरह प्रभावित होने की ख़बरें आई हैं.
इन ख़बरों ने कई लोगों को परेशान किया है और क्रिकेट जगत में भी इसे लेकर चिंता जताई जा रही है.
उनके बेहतर इलाज के लिए जो आवाज़ें उठी हैं, उनमें क्रिकेट की दुनिया के वे 14 कप्तान भी शामिल हैं, जिनमें से ज़्यादातर इमरान ख़ान के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं.
इसका श्रेय ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान ग्रेग चैपल को जाता है, जिन्होंने इमरान ख़ान की सेहत पर चिंता जताते हुए उनके बेहतर इलाज की अपील शुरू की और इसमें अन्य पूर्व कप्तानों को भी शामिल किया, जिनमें भारत के सुनील गावस्कर और कपिल देव भी शामिल हैं.
सुनील गावस्कर और कपिल देव, इमरान ख़ान के साथ खेल चुके हैं और इन दोनों का इमरान ख़ान के साथ गहरा लगाव रहा है. भारत के एक अन्य पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का भी इमरान ख़ान के साथ लगाव रहा है.
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हालाँकि गांगुली कभी क्रिकेट के मैदान पर इमरान ख़ान के सामने नहीं आए, लेकिन उनके दिल में इमरान ख़ान के लिए हमेशा सम्मान रहा है.
यही वजह है कि उन्होंने भी इमरान ख़ान के लिए चिंता ज़ाहिर की.
सोशल मीडिया पर सौरव गांगुली का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह कह रहे हैं कि उन्हें उम्मीद है कि जेल में इमरान ख़ान का बेहतर इलाज होगा.
गांगुली ने कहा, "वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे हैं और बतौर कप्तान उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम को दुनिया के नक्शे पर एक अहम मुकाम तक पहुँचाया है."
इमरान ख़ान से मिलने की इच्छा

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सौरव गांगुली ने अपनी किताब "ए सेंचुरी इज़ नॉट एनफ़" में इमरान ख़ान से मुलाक़ात और उनकी उस क़ीमती सलाह का विस्तार से ज़िक्र किया है जिसने उनके करियर को बदलकर रख दिया.
गांगुली इस किताब में लिखते हैं, "मैंने इमरान ख़ान को ईडन गार्डन्स में गेंदबाज़ी करते देखा था. मैं टीवी पर उनके मैच बहुत ध्यान से देखता था और एक युवा के तौर पर मुझे उनके बारे में जो कुछ भी पढ़ने को मिलता, मैं वह पढ़ता था. लेकिन यह साल 1997 की बात है जब लंदन में भारतीय उच्चायुक्त की पार्टी में मुझे आख़िरकार लीजेंडरी इमरान ख़ान से मिलने का मौक़ा मिला. मैं उस मौक़े पर बहुत ज़्यादा उत्साहित था."
यह उन दिनों की बात है जब सौरव गांगुली को टोरंटो सिरीज़ से बाहर (ड्रॉप) कर दिया गया था, जिसका उन्हें बहुत दुख था और फिर गयाना टेस्ट मैच ज़ख्मों पर नमक छिड़कने जैसा था.
वेस्टइंडीज़ में उन्होंने बारबाडोस के अलावा बाकी सभी मैचों में अच्छा स्कोर किया था, लेकिन आख़िरी टेस्ट में एक अतिरिक्त गेंदबाज़ खिलाने के लिए उन्हें बाहर कर दिया गया था, जबकि उनका मानना था कि वह बल्लेबाज़ी के साथ-साथ गेंदबाज़ी में भी काम आ सकते थे.
गांगुली कहते हैं कि उन्हें टीम से बाहर होने के इस फ़ैसले को पचाने में मुश्किल हो रही थी, शायद इसलिए क्योंकि वह नए और अनुभवहीन क्रिकेटर थे. लेकिन फिर इमरान ख़ान के साथ हुई मुलाक़ात और उनकी बातचीत ने उनकी सोच बदल दी.
गांगुली लिखते हैं, "इमरान ख़ान का अंदाज़ बहुत ही सच्चा और दोस्ताना था. उन्होंने मुझसे कहा कि 'मैंने आपकी बैटिंग देखी है, आप अच्छा खेलते हैं.' उनकी इस गर्मजोशी ने मेरे भीतर की झिझक को खोल दिया. मैं उन्हें ध्यान से सुनने लगा. उन्होंने जो कुछ कहा, वह मैं कभी नहीं भूल सकता."

गांगुली के मुताबिक़, इमरान ख़ान के शब्द थे, "आपको सिर्फ़ ऊँची उड़ान भरनी चाहिए. जब आप आसमान में ऊंचा उड़ें और काले बादल देखें, तो उनसे निपटने का एकमात्र तरीका यही है कि आप और भी ऊँचा उड़ें."
"मुझे भी टीम से बाहर रहना पड़ा है, इसलिए मैं जानता हूं कि कैसा महसूस होता है. आपको बस इतनी ऊँची उड़ान भरनी है कि आपका मुक़ाबला करने वाला पीछे रह जाए. यही आपकी समस्या का समाधान है."
सौरव गांगुली का कहना है कि इमरान ख़ान के शब्द सरल थे और उनका अर्थ भी सरल था, लेकिन उन्होंने ये विचार इतने यक़ीन के साथ कहे थे कि इससे वो बहुत प्रभावित हुए और इन शब्दों ने उनमें एक नई जान फूंक दी.
कुछ महीनों बाद ही खेली गई सिरीज़ में वह अपने देश के लोगों के हीरो बन गए, जिसमें उन्होंने 222 रन बनाने के अलावा 15 विकेट भी हासिल किए थे.
यहां यह बताना भी ज़रूरी है कि 4-1 से जीती गई यह सिरीज़ किसी और के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि इमरान ख़ान के ही देश पाकिस्तान के खिलाफ़ थी.
इसी सिरीज़ के दौरान सौरव गांगुली लगातार चार वनडे में 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' चुने गए. सौरव गांगुली के अलावा आज तक कोई और प्लेयर लगातार चार वनडे में 'प्लेयर ऑफ़ द मैच' नहीं बन पाया है.
इसी सिरीज़ के तीसरे वनडे मैच में सौरव गांगुली ने गेंद के साथ कमाल करते हुए 10 ओवर में 16 रन देकर पांच विकेट हासिल किए. वनडे में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ये आज भी किसी भारतीय गेंदबाज़ का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.
गांगुली ने अपनी किताब में लिखा है कि इमरान ख़ान के ये शब्द दरअसल एक जादू थे, जिसका शुक्रिया उन्होंने खामोशी से अदा किया था. अनिश्चितता और मुश्किलों का सामना कर रहे एक युवा क्रिकेटर को खेल और यहाँ तक कि ज़िंदगी का एक नया नज़रिया मिल गया था.
सौरव गांगुली की इमरान ख़ान से दूसरी मुलाक़ात साल 2004 में भारतीय टीम के पाकिस्तान दौरे के दौरान हुई थी, जब इमरान ख़ान ने उन्हें बनी गाला स्थित अपने घर पर डिनर पर बुलाया था और गांगुली उनकी मेहमाननवाज़ी से बहुत प्रभावित हुए थे.
हालांकि साल 2005 में सौरव गांगुली को अपने करियर के सबसे बुरे दौर से गुज़रना पड़ा. उन्हें ख़राब फॉर्म की वजह से कप्तानी से हटा दिया गया. टीम से जगह भी चली गई. इसके बाद पाकिस्तानी क्रिकेटर ज़हीर अब्बास ने उनकी वापसी में अहम भूमिका निभाई.
ज़हीर अब्बास ने तकनीक दुरुस्त कराई

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यह साल 2006 की बात है जब सौरव गांगुली नॉर्थम्पटनशर की तरफ़ से काउंटी क्रिकेट खेल रहे थे और उन दिनों उन्हें अपने स्टांस (खड़े होने का तरीका) और ग्रिप की समस्या हो रही थी, जिसकी वजह से उन्हें तेज़ गेंदबाज़ों को खेलने में मुश्किल हो रही थी.
इस मौक़े पर उनकी मुलाक़ात ज़हीर अब्बास से हुई, जिन्हें गांगुली सम्मान से 'ज़ेड भाई' कहकर पुकारते हैं.
गांगुली अपनी किताब में लिखते हैं, "ज़ेड भाई ने मेरी मुश्किल अपने व्यापक अनुभव से हल कर दी. उन्होंने मुझे बताया कि मैं तेज़ गेंदबाज़ों को खेलते समय और अधिक सीधा खड़ा रहूं. साइड-ऑन रहने के बजाय सीना सामने रखते हुए अधिक सीधा रहूँ. मेरी ग्रिप अपने आप बदल गई."
"हालाँकि स्टांस बदलने के तालमेल में मुझे कुछ मुश्किल हुई, लेकिन फिर मैं इसमें ख़ुद को सहज महसूस करने लगा और मुझे तेज़ गेंदबाज़ों को खेलने के लिए काफ़ी समय मिल गया. ज़ेड भाई का शुक्रिया कि इसके बाद मेरे करियर के बेहतरीन दिन साबित हुए."
सलीम मलिक की धमकी

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भारत और पाकिस्तान का मैच हमेशा से चर्चा में रहता आया है. मैदान से बाहर चाहे कितनी ही दोस्ती और खुशनुमा पल हों, मैदान में कोई भी अपने प्रतिद्वंद्वी को हावी होने देना नहीं चाहता और एक-दूसरे पर छींटाकशी (स्लेजिंग) भी ज़ोरों पर रहती है.
सौरव गांगुली को वह घटना अच्छी तरह याद है जब टोरंटो में हुई वनडे सिरीज़ के दौरान मोईन ख़ान विकेट के पीछे से लगातार उन पर स्लेजिंग कर रहे थे, लेकिन सलीम मलिक उनसे भी दो कदम आगे निकल गए.
गांगुली ने दूसरे मैच में सलीम मलिक को आउट किया था. तीसरे मैच में जब गांगुली बैटिंग के लिए जा रहे थे, तो सलीम मलिक उनके पास आए और धमकी भरे लहजे में कहने लगे, "आज मैं तुझे इतना मारूँगा कि तू बस देखता रह जाएगा."
उस मैच में गांगुली ने सलीम मलिक को एक बार फिर आउट कर दिया.
गांगुली कहते हैं, "उस समय मैं युवा क्रिकेटर था और सलीम मलिक पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज़ थे, इसलिए मुझमें इतना साहस नहीं था कि मैं उनकी इस बात का जवाब देता."
इस सिरीज़ में गांगुली ने कप्तान रमीज़ राजा को भी आउट किया था, जो आज भी मज़ाक में उनसे कहते हैं- "तुम मुझे पाकिस्तान टीम से बाहर करने के ज़िम्मेदार हो."
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की कॉल

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भारतीय टीम ने साल 2004 में जब पाकिस्तान का दौरा किया, तो उस दौरे पर टीम के लिए बहुत सख़्त सुरक्षा रखी गई थी. गांगुली के अनुसार, लाहौर का होटल किसी क़िले जैसा लग रहा था.
क्या कोई सोच सकता है कि भारतीय टीम का कप्तान इस क़िले से आधी रात को निकलकर अपने दोस्तों के साथ एडवेंचर करने चला जाए?
सौरव गांगुली ने ऐसा किया, हालाँकि उन्हें अच्छी तरह पता था कि वह सुरक्षा नियमों (सिक्योरिटी कोड) का उल्लंघन कर रहे हैं, लेकिन वह उस माहौल से कुछ देर दूर रहना चाहते थे.
सौरव गांगुली ने इस घटना का अपनी किताब में विस्तार से ज़िक्र किया है.
वह लिखते हैं, "वनडे सिरीज़ में ऐतिहासिक जीत के बाद मैं बहुत खुश था, हालांकि कैच लेने की कोशिश में मैं चोटिल भी हो गया था और डॉक्टर ने मुझे तीन हफ़्ते आराम की सलाह दी थी. लेकिन मेरा मूड अच्छा था और कोलकाता से आए दोस्तों को देखकर मुझे और खुशी हुई."
"एक रात मैंने इन दोस्तों के साथ बाहर निकलने का फ़ैसला किया. मैंने हमारे सुरक्षा अधिकारी को नहीं बताया कि मैं बाहर जा रहा हूँ, वरना वे मुझे कभी नहीं जाने देते. मैंने सिर्फ़ टीम मैनेजर रत्नाकर शेट्टी को बताया कि मैं बाहर जा रहा हूँ. मैं पिछले दरवाजे़ से चुपचाप बाहर निकल गया और कैप पहनकर अपना चेहरा छिपा लिया ताकि कोई मुझे पहचान न सके."
"हमारी मंजिल ग्वालमंडी की मशहूर 'फूड स्ट्रीट' थी जहाँ कबाब और तंदूरी व्यंजन हमारा इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन चूँकि वह खुली जगह थी इसलिए पहचाने जाने का डर भी था. इसी दौरान एक व्यक्ति मेरे पास आया और उत्साह में कहने लगा, 'अरे, आप सौरव गांगुली हैं?' मेरे मना करने पर उसे बड़ी मायूसी हुई लेकिन वह यह कहे बिना नहीं रह सका, 'लेकिन आप बिल्कुल सौरव गांगुली जैसे दिखते हैं'."
"हम सब अपनी हँसी मुश्किल से रोक पाए. इसी बीच एक और व्यक्ति कहीं से आ गया और बोला, 'सर आप यहाँ? क्या ज़बरदस्त खेला आपकी टीम ने.' मैंने फिर उसे नज़रअंदाज किया. वह भी सिर झटकता हुआ चला गया."

गांगुली कहते हैं, "हम अभी अपना डिनर ख़त्म करने ही वाले थे कि कुछ ग़ज़ की दूरी पर मौजूद पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने मुझे देख लिया, जो भारतीय सूचना मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ वहाँ आए हुए थे. राजदीप ने जैसे ही मुझे देखा, उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया, 'सौरव, सौरव' - मुझे पता था कि अब मैं मुश्किल में हूं. हर किसी को पता चल गया कि भारतीय कप्तान इस फूड स्ट्रीट में है."
"लोग हर तरफ़ से मेरे पास जमा होने लगे. मैं स्वादिष्ट कबाब का आख़िरी निवाला खा रहा था और मुझे अंदाज़ा नहीं था कि स्थिति इतनी तेज़ी से नियंत्रण से बाहर हो जाएगी. मैंने बिल चुकाकर वहाँ से भागने की कोशिश की, लेकिन दुकानदार ने पैसे लेने से इनकार कर दिया."
गांगुली आगे बताते हैं, "इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी ने हमें अपनी कार तक पहुँचाया, लेकिन जब हम अपने होटल वापस आ रहे थे, तो एक तेज़ रफ़्तार बाइक हमारा पीछा करने लगी. बाइक सवार ने मुझसे शीशा नीचे करने को कहा. मेरे साथी ने मना किया, लेकिन मैंने शीशा नीचे कर लिया. उसने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए मुझसे कहा- 'मैं फूड स्ट्रीट का दुकानदार हूँ, मैं आपका बहुत बड़ा फ़ैन हूँ'."
गांगुली ने अगली सुबह टीम मैनेजर के सामने रात वाली घटना स्वीकार की, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने उन्हें चौंका दिया.
गांगुली कहते हैं, "जब मैं अपने कमरे में वापस आया तो फ़ोन की घंटी बजी. यह कॉल राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ऑफिस से थी. मुझे बताया गया कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ आपसे बात करना चाहते हैं. मैं सन्न रह गया और सोचने लगा कि ऐसा क्या हुआ कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति भारतीय कप्तान से बात करना चाहते हैं?"
"राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का लहजा शालीन लेकिन स्पष्ट था. वह बोले, 'अगली बार आप बाहर जाना चाहें तो प्लीज़ सुरक्षा को बता दें. हम संबंधित लोगों को आपके साथ कर देंगे, लेकिन प्लीज़ एडवेंचर्स में शामिल न हों.' मैं शर्मिंदा हो गया था. मेरे लिए वसीम अकरम की घातक इन-कटर गेंदों का सामना करना मुशर्रफ़ की उस कॉल से कम डरावना था."
15 साल बाद सौरव गांगुली की कप्तानी में पाकिस्तान गई भारतीय टीम ने वनडे और टेस्ट दोनों में कमाल का प्रदर्शन किया. भारतीय टीम ने वनडे सिरीज़ 3-2 से और टेस्ट सिरीज़ में 2-1 से जीत हासिल की.
सौरव गांगुली ने कुछ साल पहले आजतक के एक शो में साल 2004 के दौरे से जुड़ी हुई अच्छी यादों और पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंज़माम उल हक़ के साथ दोस्ती के बारे में बताया था.
सौरव गांगुली ने कहा था, "मैं बतौर क्रिकेटर तो इंज़माम उल हक़ का फ़ैन हूं ही, लेकिन उससे ज़्यादा पसंद मुझे उनकी पर्सनालिटी है."
इसके जवाब में इंज़माम उल हक़ ने सौरव गांगुली के साथ दोस्ती के बारे में बताया था, "2005 में भारत दौरे से पहले एक विज्ञापन के सिलसिले में मैं कोलकाता आया था. जितने दिन भी मैं कोलकाता में रहा, तो मैं रहा तो होटल में, लेकिन खाना मेरा सौरव के घर से ही आता था. सौरव गांगुली की वो मेहमाननवाज़ी मैं कभी नहीं भूल पाया."
मैदान के भीतर भी पाकिस्तान की टीम सौरव गांगुली के लिए हमेशा अच्छी यादें ही लेकर आईं.
साल 2007 में जब सौरव गांगुली अपने करियर के आख़िरी पड़ाव पर थे तो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में उनके बल्ले ने कमाल दिखाया.
सौरव गांगुली ने तीन टेस्ट मैचों में 89 के औसत से 534 रन बनाए. सौरव गांगुली इस सिरीज़ में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ तो बने ही, इसी दौरान उनके बल्ले से 239 रन की पारी निकली.
यह टेस्ट क्रिकेट में सौरव गांगुली का इकलौता दोहरा शतक और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा.
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