अमेरिकी अगुआई वाला 'पैक्स सिलिका' को जानिए, जिसमें शामिल हुआ भारत

पैक्स सिलिका

इमेज स्रोत, @USAmbIndia

इमेज कैप्शन, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की
    • Author, दीपक मंडल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

भारत ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के मौक़े पर 'पैक्स सिलिका' घोषणा पर दस्तख़त किए.

इसके साथ ही भारत औपचारिक तौर पर अमेरिका की अगुआई वाली उस स्ट्रैटिजिक पहल में शामिल हो गया है, जिसका मक़सद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में हिस्सेदार बनना और इसमें चीन के वर्चस्व का मुक़ाबला करना है.

दरअसल, पिछले कुछ समय से चीन अपने क्रिटिकल मिनरल्स की क्षमता पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के मामले में एक बड़ी ताक़त बन कर उभरा है और वो अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती दिख रहा है.

लैटिन में 'पैक्स' का मतलब होता है शांति. सिलिका का मतलब सिलिकन चिप से है, जिसका इस्तेमाल सेमी-कंडक्टर बनाने में होता है. सेमी-कंडक्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अहम तत्व है.

यह गठबंधन क्रिटिकल मिनरल्स के खनन से लेकर उनकी एडवांसिंग मैन्युफ़ैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और एआई टेक्नोलॉजी की पूरी चेन को सुरक्षित करना चाहता है.

इसका मक़सद है, इन मामलों में चीन पर निर्भरता को ख़त्म करना और अपनी आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा को मज़बूत करना.

व्हाइट हाउस के 'पैक्स सिलिका' घोषणापत्र में इसका मक़सद स्पष्ट किया गया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर 2025 में 'पैक्स सिलिका' का एलान किया था लेकिन इसकी पहली लिस्ट में भारत शामिल नहीं था.

लेकिन एक महीने के बाद भारत में नियुक्त हुए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ऐलान किया था कि भारत को भी इस गठबंधन में शामिल किया जाएगा.

दरअसल पैक्स सिलिका में भारत को ऐसे समय में शामिल किया गया है, जब अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर सहमति बनी है.

चीन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, क्रिटिकल मिनरल्स से बने सेमीकंडक्टर आजकल कंप्यूटर चिप्स से लेकर कार और मिसाइल बनाने तक में काम आते हैं

चीन की चुनौती

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग और सप्लाई में चीन की बढ़त से उसके प्रोडक्ट और दूसरे देशों में बने सेमीकंडक्टर या दूसरी चीज़ों की क़ीमतों में अंतर काफ़ी बढ़ गया है.

चीन ने क्रिटिकल्स मिनरल्स की सप्लाई रोककर इस पर निर्भर अमेरिकी उद्योगों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी थी.

क्रिटिकल मिनरल्स से बने सेमीकंडक्टर आजकल कंप्यूटर चिप्स से लेकर कार और मिसाइल बनाने तक में काम आते हैं.

चीन पर निर्भरता अमेरिका समेत कई देशों के लिए सामरिक, आर्थिक और सुरक्षा चिंता की भी वजह बन गई है.

यही वजह है अमेरिका के नेतृत्व में 'पैक्स सिलिका' गठबंधन की योजना तैयार हुई है.

'पैक्स सिलिका' का लक्ष्य अमेरिका के "मित्र और भरोसेमंद" देशों को एक साथ लाना है ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए बुनियादी चीज़ों की रक्षा की जा सके.

साथ ही अमेरिका से सहमति रखने वाले देशों के बीच बड़े बदलाव करने वाली टेक्नोलॉजी विकसित करने और उन्हें लागू करने की पहल की जा सके.

इसके तहत मिलजुलकर रणनीतिक निवेश के फ़ैसले लिए जाएंगे. इससे क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने पर काम किया जाएगा.

इसमें आईटी और आईसीटी सिस्टम, फाइबर-ऑप्टिक केबल, डेटा सेंटर, बुनियादी मॉडल खड़ा करने के साथ उनके इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा.

जैसे, भारत के टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर के इन्फ़्रास्ट्रक्चर में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल एक सुरक्षा चिंता बनी हुई है.

विशेषज्ञों के मुताबिक़ जब भारत 'पैक्स सिलिका' के तहत अपना इकोसिस्टम खड़ा करेगा तो उसकी रणनीतिक सुरक्षा मज़बूत होगी.

भारत को दूरसंचार जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में चीन की भागीदारी को लेकर चिंता रही है.

क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में पश्चिमी देशों की चीन पर बहुत ज़्यादा निर्भरता उनके लिए चिंता की बात है.

अमेरिका बढ़ते व्यापार घाटे के कारण चीन से ट्रेड वॉर में उलझा हुआ है और भारत मैन्युफैक्चरिंग चेन में बदलाव में अपनी हिस्सेदारी सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है.

व्हाइट हाउस के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इसराइल, जापान, क़तर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर पहले ही दस्तख़त कर चुके थे.

कनाडा, यूरोपीय यूनियन, नीदरलैंड, ओईसीडी और ताइवान प्रतिभागी थे लेकिन उन्होंने इस पर दस्तख़त नहीं किए थे.

सत्या गुप्ता

'पैक्स सिलिका' में शामिल होना भारत के लिए कितना फ़ायदेमंद

अमेरिका की अगुआई वाले इस गठबंधन में शामिल होकर भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एडवांस कंप्यूटिंग को आधार देने वाली भविष्य की टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

इस साल जनवरी में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव वी एस कृष्णन ने कहा था कि भारत के लिए 'पैक्स सिलिका' जैसे गठबंधन में शामिल होना अहम होगा.

ये क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षा की नीति पर केंद्रित है.

दरअसल इस गठबंधन में शामिल होने का मतलब सेमी-कंडक्टर सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनना और इस पर आत्मनिर्भर होना.

सेमी-कंडक्टर और एआई की भारत की पॉलिसी 'पैक्स सिलिका' के मक़सद से काफ़ी मिलती-जुलती है.

सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की निर्भरता बढ़ाने के लिए काम करने वाले संगठन वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रेजिडेंट और ओपन सिलिकन के फ़ाउंडर सत्या गुप्ता कहते हैं, ''दरअसल भारत सभी के लिए बड़ा बाज़ार है. एआई का यहाँ बड़ा बाज़ार है लेकिन भारत अपना एआई हार्डवेयर बनाने में आत्मनिर्भर नहीं है.''

''रिलायंस ने भारत में डेटासेंटर बनाने के लिए बड़े निवेश का एलान किया है. लेकिन हम डेटा सेंटर हार्डवेयर और स्ट्रक्चर बनाने में आत्मनिर्भर नहीं हैं. ऐसे में पैक्स सिलिका जैसे गठबंधन में शामिल देश हमें मदद कर सकते हैं.और भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी में तरक़्क़ी कर सकता है.''

सत्या गुप्ता ने बीबीसी हिन्दी से बात करते हुए कहा, ''इस गठबंधन में शामिल होने के दो फ़ायदे हैं. एक तो इससे क्रिटिकल्स मिनरल्स पर निर्भर टेक्नोलॉजी के विकास में भारत को सदस्य देशों से सहयोग मिलेगा. साथ ही ये भारत पर किसी टेक्नोलॉजी प्रतिबंध का असर कम करने में सफल होगा.''

सत्या गुप्ता कहते हैं कि ये पहल गठबंधन में शामिल सभी देशों के लिए फ़ायदेमंद है. अमेरिका और जापान भारत को अपने डेटासेंटर उपकरण ख़रीदने के लिए कह सकते हैं. भारत को डेटासेंटर का फ़ायदा ये होगा कि ये और ज़्यादा आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एप्लीकेशन बना सकेगा. इससे भारत आईटी हब की तरह ही एआई एप्लीकेशन हब बन सकेगा.

सत्या गुप्ता कहते हैं, ''भारत को 'पैक्स सिलिका' का काफ़ी फ़ायदा होगा. लेकिन भारत को अपने डेटा सेंटर और इन्फ़्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर फ़ोकस रखना होगा.''

भारत ने 2024 में इंडिया एआई मिशन को मंज़ूरी दी थी और इसके तहत 10,372 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

इसका मक़सद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देना, स्टार्ट-अप्स को सपोर्ट करना और भारतीय भाषाओं के लिए फाउंडेशनल मॉडल विकसित करना है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)