इसराइली शहर में दो भारतीय कामगारों पर 'नस्लीय हमले' के बाद इसराइल ने क्या कहा, जानें पूरा मामला

इसराइल का एश्केलोन शहर जहां दो भारतीय कामगारों पर हमला हुआ

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इसराइली शहर एश्केलोन में दो भारतीय श्रमिकों पर हमला करने वालों को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

भारत में इसराइल के दूतावास ने कहा है कि हमले को अंजाम देने वालों को पकड़ लिया गया है और जल्द ही उनके ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

इसराइली मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय श्रमिकों को एश्केलोन शहर में पीटा गया.

इस रिपोर्ट में 'भारतीय श्रमिकों पर हमले को जानबूझ कर किया गया नस्लीय हमला बताया गया है.'

इसराइल का दक्षिणी शहर एश्केलोन तेल अवीव से 50 किलोमीटर दूर और ग़ज़ा के नज़दीक है.

इसराइली ब्रॉडकास्टर केएएन ने एक वीडियो जारी कर घटना के बारे में जानकारी दी और इसे 'नफ़रत से भरा नस्लीय हमला' बताया.

वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कम से कम दो लोगों पर हमलावरों के एक समूह ने हमला किया. यह घटना किसी सार्वजनिक पार्क में होती दिखाई दे रही है.

ग़ौरतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह इसराइल जाने की योजना बना रहे हैं.

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि मोदी ''अगले सप्ताह'' इसराइल का दौरा करेंगे और इसराइल भारत में ''बेहद लोकप्रिय'' है.

तुर्की के 'टीआरटी वर्ल्ड' ने लिखा है, ''वीडियो के साथ दिए गए हिब्रू कैप्शन में इस हमले को 'पहले से योजना बनाकर' किया गया हमला बताया है जो "नस्लवाद और दुर्भावना" से प्रेरित था. बताया गया है कि हमलावरों ने व्हाट्सऐप संदेशों के जरिए पहले ही हमले की योजना बनाई और फिर इलाके में भारतीय कामगारों को निशाना बनाया.''

''ब्रॉडकास्टर ने कहा कि समूह ने पहले से साजिश रची और दिनदहाड़े मारपीट को अंजाम दिया.''

अभी ये साफ़ नहीं हो सका कि घटना कब हुई. हालांकि वीडियो रिपोर्ट 16 फरवरी को जारी की गई.

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इस घटना ने भारत में लोगों का ध्यान खींचा है. विपक्षी कांग्रेस ने मोदी सरकार से इस मामले में दख़ल देने को कहा है. उन्होंने पीड़ितों के लिए चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की मांग की है.

एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से घायल लोगों की स्थिति की तुरंत पुष्टि करने और इस मुद्दे को इसराइली अधिकारियों के सामने उठाने का आग्रह किया.

बयान में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या मोदी अपने इसराइल दौरे के दौरान भारतीय नागरिकों पर कथित नस्लीय हमलों का मुद्दा उठाएंगे.

अक्तूबर 2023 में इसराइल ने हजारों फ़लस्तीनी मजदूरों के वर्क परमिट निलंबित कर दिए थे, जिससे वहां श्रमिकों की कमी हो गई. इसके बाद इसराइल में भारतीय कामगारों की संख्या बढ़ी है.

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस सहित भारतीय श्रमिक संगठनों ने पहले इसराइल में भर्ती अभियानों की आलोचना की है. उनका कहना है कि वहां सुरक्षा जोखिम हैं और प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है.

2024 में भारत सरकार ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित कम से कम दो राज्यों में इसराइल के लिए 10,000 कंस्ट्रक्शन मजदूरों की भर्ती का विज्ञापन दिया है.

इसराइल और भारत का रिश्ता

नरेंद्र मोदी और बिन्यामिन नेतन्याहू

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इमेज कैप्शन, मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत और इसराइल और नजदीक आए हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

भारत और इसराइल के संबंधों की कहानी पिछले तीन दशकों में तेज़ी से बदली है.

1992 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक और ख़ुफ़िया सहयोग बढ़ता गया.

हालांकि लंबे समय तक भारत ने इसराइल के साथ रिश्तों को अपेक्षाकृत कम प्रचारित रखा, क्योंकि उसे अरब देशों और फ़लस्तीनी राष्ट्र के मुद्दे पर संतुलन बनाए रखना था.

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2017 में इसराइल की बहुप्रचारित यात्रा की.

पीएम मोदी के कार्यकाल में दोनों देश एक दूसरे के क़रीब आए और इसराइली पीएम नेतन्याहू ने कई बार भारत को इसराइल का अच्छा दोस्त बताया.

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