बांग्लादेश: तारिक़ रहमान के प्रधानमंत्री बनते हुए शुरू हुआ विवाद, भारत से नरमी के संकेत

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बांग्लादेश में तारिक़ रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लिए महज तीन दिन हुए हैं और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में सलाहकार रहे नाहिद इस्लाम ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.
नाहिद इस्लाम नेशनल सिटिजन पार्टी के संयोजक हैं. नेशनल सिटिजन पार्टी उन छात्र नेताओं की है, जिन्होंने जुलाई 2024 में शेख़ हसीना की सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू किया था और मोहम्मद यूनुस को अपना नेता बनाया था.
दरअसल गुरुवार को ख़बर आई कि शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग ने बांग्लादेश के कई ज़िलों में अपने दफ़्तरों को फिर से खोला है. इसे लेकर नाहिद इस्लाम ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और कहा कि बिना तारिक़ रहमान की सरकार की हरी झंडी के ऐसा नहीं हुआ होगा.''
बांग्लादेश की संसद में विपक्ष के मुख्य सचेतक नाहिद इस्लाम को लगता है कि इस चुनाव में भारत, अवामी लीग और बीएनपी के बीच एक प्रकार की मिलीभगत थी.
इस मुद्दे पर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि अवामी लीग की राजनीति को फिर से स्थापित करने की कोशिशों का कड़ा विरोध किया जाएगा.
नाहिद इस्लाम ने ये बातें गुरुवार दोपहर ढाका के बंग्लामोटर स्थित एनसीपी के अस्थायी केंद्रीय कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं. नाहिद इस्लाम ने अवामी लीग के कार्यालयों के खुलने के संबंध में संबंधित प्रशासन से जवाबदेही की मांग की.
उन्होंने कहा, ''अगर वे प्रशासनिक रूप से उन कार्यालयों को तुरंत बंद करने में नाकाम रहते हैं, तो हम राजनीतिक प्रतिरोध का आह्वान करेंगे. इसके लिए हम फासीवादियों को फिर से पैर जमाने के लिए सरकार को भी जवाबदेह ठहराएंगे.''

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भारत से नरमी के संकेत
उधर बांग्लादेश के नए खेल मंत्री अमीनुल हक़ बीसीसीआई और भारत के साथ संबंध सुधारने की इच्छा जताई है. ईएसपीएन की रिपोर्ट के अनुसार, हक़ ने कहा कि वह इस मुद्दे को जल्दी सुलझाना चाहते हैं.
दरअसल मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश के क्रिकेटर मुस्तफ़िज़ुर रहमान को आईपीएल से बाहर किए जाने के ख़िलाफ़ भारत में टी-20 वर्ल्ड कप नहीं खेलने का फ़ैसला किया था.
ईएसपीएन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''मंगलवार को आम चुनावों के बाद बांग्लादेश के नए मंत्रिमंडल के शपथ लेने के बाद अमीनुल ने कहा, 'शपथ लेने के बाद मैंने संसद भवन में भारत के उप उच्चायुक्त से मुलाक़ात की. मैंने उनके साथ टी20 विश्व कप पर चर्चा की. यह एक सौहार्दपूर्ण बातचीत थी. मैंने उनसे कहा कि हम इस मुद्दे को वार्ता के माध्यम से जल्दी सुलझाना चाहते हैं क्योंकि हम अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहते हैं.'
अमीनुल ने कहा, ''खेल से लेकर अन्य सभी क्षेत्रों तक, हम भारत के साथ एक ईमानदार और सौहार्दपूर्ण संबंध बनाना चाहते हैं. आप जानते हैं कि कूटनीतिक जटिलताओं के कारण हम वर्ल्ड कप में नहीं खेल सके. अगर इन मुद्दों पर पहले चर्चा कर समाधान कर लिया गया होता तो हमारी टीम संभवतः भाग ले सकती थी.''

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अवामी लीग के दफ़्तर फिर से कहाँ खुले?
बांग्लादेश की अंग्रेज़ी न्यूज़ वेबसाइट प्रथम आलो ने 19 फ़रवरी की अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ''मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी थी लेकिन बीएनपी की सरकार आने के बाद कई ज़िलों में अवामी लीग के दफ्तर फिर से खुलने की ख़बरें आ रही हैं. कई दफ़्तरों में बैनर लटका दिए गए हैं. सोमवार से बुधवार के बीच की रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 10 ज़िलों में 12 स्थानों पर आवामी लीग के दफ़्तर खोले गए.''
प्रथम आलो ने अपनी एक दूसरी रिपोर्ट में लिखा है, 'खुलना शहर और ज़िला कार्यालयों में पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी देखी गई है. पिछले हफ़्ते रविवार दोपहर अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने नगर में लोअर जेसोर रोड के शंखा मार्केट क्षेत्र में स्थित पार्टी कार्यालय में प्रवेश किया.''
''उस समय उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया, बंगबंधु शेख़ मुजीब-उर रहमान और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की तस्वीरों पर पुष्पांजलि अर्पित की और जय बांग्ला के नारे लगाए.''

घटना के वीडियो तब से सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हुए हैं. खुलना शहर में बांग्लादेश छात्र लीग के एक पूर्व नेता ने गुमनामी की शर्त पर प्रथम आलो से बात की.
इस बातचीत में उन्होंने कहा, "हम किसी संगठित कार्यक्रम के तहत पार्टी कार्यालय नहीं गए थे. हमने देखा कि यह हमारे केंद्रीय कार्यालय में हुआ था, इसलिए हम खुलना कार्यालय भी गए. हम रविवार को लगभग 4:00 बजे पहुंचे. कार्यालय बंद था. हमने ताला तोड़ा, ऊपर गए और राष्ट्रीय ध्वज फहराया. हमने बंगबंधु शेख़ मुजीब-उर रहमान और शेख़ हसीना की तस्वीरों पर मालाएं चढ़ाईं."
उन्होंने कहा, ''जय बांग्ला का नारा लगाने के बाद हम नीचे आए और कार्यालय पर नया ताला लगा दिया ताकि बाद में जा सकें. किसी ने हमें नहीं रोका."
बांग्लादेश की एक और अंग्रेज़ी न्यूज़ वेबसाइट द बिज़नेस स्टैंडर्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''नोआखाली में अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने ज़िला अवामी लीग कार्यालय में बलपूर्वक प्रवेश किया, बैनर टांगे, और 30 मिनट का विरोध कार्यक्रम आयोजित किया. बर्गुना में अवामी लीग के सदस्यों ने ज़िला कार्यालय फिर से खोला और राष्ट्रीय ध्वज फहराया.''

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संविधान में संशोधन को लेकर मतभेद
नाहिद इस्लाम ने बीएनपी से संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में जल्द शपथ लेने और राष्ट्रीय संसद के साथ संविधान सुधार परिषद के पहले सत्र बुलाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि झूठी व्याख्याओं और बहानों का हवाला देकर संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ न लेना छलपूर्ण है और जनमत संग्रह के सार्वजनिक निर्णय का अनादर दर्शाता है.
उन्होंने संसद को प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय संसद और संविधान सुधार परिषद दोनों के सत्र बुलाने पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि सुधार परिषद के बिना यह राष्ट्रीय संसद निरर्थक है. नाहिद इस्लाम ने कहा कि बीएनपी सरकार के 50 सदस्यीय मंत्रिमंडल में कोई नयापन नहीं है.
उन्होंने कहा, ''हमें कभी महसूस नहीं हुआ कि यह मंत्रिमंडल बदलाव की आकांक्षाओं के अनुरूप है. यह पुराने ढांचे की निरंतरता है. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस मंत्रिमंडल में लगभग 62 प्रतिशत मंत्री और राज्य मंत्री व्यवसायी हैं. व्यवसायी होना अपराध नहीं है लेकिन मंत्रिमंडल में राजनेताओं और विभिन्न पेशों से लोगों का समावेश होना चाहिए था.''
नाहिद इस्लाम ने अंतरिम सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान को बीएनपी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाया.
पिछले सप्ताह बांग्लादेश में हुए संसदीय चुनाव के साथ-साथ मतदाताओं ने महत्वपूर्ण संवैधानिक सुधारों पर एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह के लिए अपने मत डाले थे.

ये सुधार जुलाई 2024 के विद्रोह और पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद प्रस्तावित किए गए थे.
जुलाई नेशनल चार्टर, जिस पर ज़्यादातर राजनीतिक दलों ने पिछले साल हस्ताक्षर किए थे, 60.26 प्रतिशत मतदाताओं ने इस पर मुहर लगाई.
लेकिन इस मतदान ने विजयी तारिक़ रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच खुलकर मतभेद सामने आए हैं.
मंगलवार को नव निर्वाचित बीएनपी सांसदों ने नए संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेने से इनकार कर दिया.
बीएनपी के इस रुख़ से सुधारों का भविष्य अनिश्चित हो गया है. जुलाई नेशनल चार्टर 2025 को अंतरिम सरकार ने तैयार किया था, जिसमें संवैधानिक संशोधनों, क़ानूनी परिवर्तनों और नए क़ानूनों के लिए एक रूप रेखा प्रस्तुत की गई थी. इसमें बांग्लादेश की शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव के लिए 80 से अधिक प्रस्ताव शामिल हैं.
इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्ट्रोरल असिस्टेंस के अनुसार, प्रमुख सुधारों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना, प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करना, राष्ट्रपति की शक्तियों को सुदृढ़ करना, मौलिक अधिकारों का विस्तार और न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा शामिल हैं.
चार्टर में 350 सदस्यीय जातीय संसद के अलावा 100 सदस्यीय उच्च सदन के गठन की भी सिफ़ारिश की गई है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












