बिहार : 'रघुपति राघव राजा राम' भजन गाने पर लोक गायिका को मांगनी पड़ी माफ़ी, जानिए क्या है पूरा मामला?

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता,पटना
बिहार में लोकगायिका देवी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रिय भजन 'रघुपति राघव राजा राम' गाने पर माफ़ी मांगनी पड़ी.
ये घटना 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में घटी.
शिक्षाविद् मदन मोहन मालवीय की जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्मशताब्दी वर्ष पर अटल विचार परिषद और दिनकर न्यास समिति ने पटना के बापू सभागार में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया था.
अटल विचार परिषद के संरक्षक पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे हैं.
इस कार्यक्रम के आयोजनकर्ता अर्जित शाश्वत चौबे ने बीबीसी को बताया, "इस कार्यक्रम में पहले दिन गांधी मैदान में अटल दौड़ का आयोजन था और दूसरे दिन देशभर से आए लोगों को अटल सम्मान दिया जाना था."

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क्या है मामला?

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अर्जित शाश्वत चौबे बिहार की भागलपुर विधानसभा से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं.
अर्जित बताते है, "चूंकि लोकगायिका देवी की फ्लाइट थी इसलिए उनको अटल सम्मान देने के बाद उनसे एक गीत सुनकर उन्हें विदा करना था. उन्होंने गांधी और अटलजी दोनों का प्रिय भजन गाया, जिस पर पीछे बैठे पांच-छह लोग शोर करने लगे."
क्या ये लोग उनके (अर्जित के) परिचित थे, इस सवाल पर अर्जित कहते हैं, " बापू सभागार में हजारों लोग जुटे थे और ये एक खुला कार्यक्रम था. मैं उन लोगों को नहीं पहचानता जिन्होंने ये किया."
अर्जित कहते हें कि ये पूरी घटना सिर्फ़ दो मिनट तक हुई. अर्जित के मुताबिक़ इस कार्यक्रम के दौरान सांसद रविशंकर प्रसाद, संजय पासवान, सीपी ठाकुर भी मंच पर मौजूद थे.
लोकगायिका देवी को मांगनी पड़ी माफ़ी

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इस घटना के वायरल वीडियो में दिख रहा है कि रघुपति राघव राजा राम गाने के बाद देवी सबसे माफ़ी मांगते हुए कहती हैं, ''अगर आप हर्ट (आहत) हुए हैं तो मैं उसके लिए सबको सॉरी कहती हूं"
देवी के ये कहने के बाद वो पोडियम के पास से हटती हैं और बीजेपी नेता अश्विनी चौबे 'जय श्री राम' का नारा लगवाते हैं.
हालांकि, अर्जित शाश्वत चौबे का दावा है कि पांच से छह लोगों ने ही हंगामा किया, लेकिन दैनिक अखबार 'प्रभात खबर' की रिपोर्ट के मुताबिक़ 60-70 युवा कार्यकर्ताओं ने वहां हंगामा किया.
अखबार लिखता है, "60-70 युवा कार्यकर्ता नाराज होकर अपने स्थान पर खड़े होकर नारा लगाने लगे. जिस पर देवी ने कहा कि भगवान एक है और उनका उद्देश्य केवल राम को याद करना था. हालांकि इसका असर नहीं हुआ तो आयोजकों ने बीच में हस्तक्षेप किया."
इस घटना के तुरंत बाद लोकगायिका देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा, "लोगों की अलग-अलग भावनाएं होती हैं. मैंने रघुपति राघव गाना गाया जिसको भारत में सभी लोग गाते हैं. हमारा हिंदू धर्म बहुत बड़ा है, जो सबको अपने में समाहित करता है. मेरा मानना है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है. लेकिन यहां बहुत सारे जो लोग आए थे उनको शायद अल्लाह के नाम से दुख पहुंचा है. ऐसे में उन लोगों से मैं माफ़ी मांगती हूं. लेकिन मेरा मानना है कि सबको मानवता का धर्म अपनाना चाहिए."
राजनीति गर्माई

इस मामले पर राजनीति गर्माती नजर आ रही है.
जेडीयू के प्रवक्ता नवल शर्मा कहते हैं, "बिहार महात्मा गांधी की कर्मस्थली रही है. बिहार सरकार के किसी भी दफ्तर में गांधी जी के सिद्धांत लिखे मिल जाएंगे. गांधीवादी मूल्यों में हमारे नेता और हमारी कट्टर आस्था रही है. गठबंधन की सरकार में साझा कार्यक्रम होते हैं जिन पर सरकारें चलती हैं. बाकी किसी दूसरी विचारधारा पर टिप्पणी करना ठीक नहीं."
प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी कहते हैं, "ये बीजेपी का कार्यक्रम नहीं था. कोई कार्यक्रम था जिसका आयोजन किया गया. बीजेपी के नेताओं को बुलाया गया, तो वो गए. बीजेपी गांधी जी का पूरा सम्मान करती है."
वहीं, गांधी संग्रहालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी आसिफ वसी बीबीसी से कहते हैं, " जिस आइडियोलॉजी के लोगों का कार्यक्रम हुआ उन्हें रघुपति राघव से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन ईश्वर अल्लाह में 'अल्लाह' शब्द से दिक्कत है. नीतीश जी की एप्रोच गलत नहीं है, लेकिन जिनके साथ वो सरकार में है, वो तो 'अल्लाह' को पसंद नहीं करते."
लालू यादव और प्रियंका गांधी ने की आलोचना

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कांग्रेस ने इस प्रकरण पर बीजेपी को घेरा. केरल की वायनाड सीट से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''बापू का प्रिय भजन गाने पर भाजपा नेताओं ने लोकगायिका देवी जी को माफी मांगने पर मजबूर किया. "रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम" उनसे नहीं सुना गया.''
उन्होंने लिखा, ''दुनिया को दिखाने के लिए बापू को फूल चढ़ाते हैं, लेकिन असल में उनके प्रति कोई आदर नहीं है. दिखावे के लिए बाबासाहेब अंबेडकर का नाम लेते हैं, लेकिन असल में उनका अपमान करते हैं. भाजपा को हमारी सहिष्णु और समावेशी संस्कृति-परंपरा से इतनी नफ़रत है कि वे हमारे महापुरुषों को बार-बार अपमानित करते हैं.''
वहीं राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,'' संघियों और भाजपाइयों को "जय सियाराम, जय सीताराम" के नाम एवं नारे से शुरू ही नफ़रत है क्योंकि उसमें माता सीता का जयकारा है. ये लोग शुरू से ही महिला विरोधी हैं तथा "जय श्री राम' के नारे के साथ आधी आबादी महिलाओं का भी अपमान करते हैं.''
उन्होंने लिखा, '' गायिका देवी ने कल कार्यक्रम में बापू के नाम पर निर्मित सभागार में बापू का भजन गाकर "सीताराम" बोल दिया तो भाजपाइयों ने माइक पर उससे माफ़ी मंगवाई तथा माता सीता के जय सीताराम की बजाय जय श्रीराम के नारे लगवाए. ये संघी "सीता माता" सहित महिलाओं का अपमान क्यों करते हैं?''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित















